09/04/2024
आज से #चैत्र_माह के #नवरात्रि आरम्भ हो रहे हैं और इनके साथ ही #भारतीय_कैलेन्डर के अनुसार िक्रम_संवत्_२०८१का भी आरम्भ हो रहा है। जैसा कि सर्वविदित है कि वासन्तिक नवरात्रि पर्व के इन नौ दिनों के दौरान आदिशक्ति सृष्टि रचयिता #माता_जगदम्बा के नौ विभिन्न रूपों की आराधना की जाती है। मुझे उन सभी लोगों का धन्यवाद करना है,जिन्होंने इस साल मुझे मुस्कराने की वजह दी है, आप सभी उन्हीं में हैं ,इसलिए आपका हार्दिक आभार....🙏
#चैत्र_शुक्ल_प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व --
*1.* इसी दिन के सूर्योदय से ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।
*2.* सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।
*3.* प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक का दिन यही है।
*4.* शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात् नवरात्र का पहला दिन यही है।
*5.* स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं कृणवंतो विश्वमआर्यम का संदेश दिया |
*7.* सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार भगवान झूलेलाल इसी दिन प्रगट हुए।
*8.* विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन विक्रम संवत चुना ।
*9.* युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।
*10- *महर्षि गौतम जयंती
*भारतीय नववर्ष का प्राकृतिक महत्व --
*1.* वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।
*2.* फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।
*3.* नक्षत्र शुभ स्थिति में होते हैं अर्थात् किसी भी कार्य को प्रारंभ करने के लिये यह शुभ मुहूर्त होता है।
आप सभी से विनम्र निवेदन है कि #भारतीय_नववर्ष" हर्षोउल्लास के साथ मनाने के लिए "समाज को अवश्य प्रेरित" करें।
🚩🚩🚩🚩 भारतमाता की जय🚩🚩🚩🚩
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22/03/2023
आज से #चैत्र_माह के #नवरात्रि आरम्भ हो रहे हैं और इनके साथ ही #भारतीय_कैलेन्डर के अनुसार िक्रम_संवत्_२०८०का भी आरम्भ हो रहा है। जैसा कि सर्वविदित है कि वासन्तिक नवरात्रि पर्व के इन नौ दिनों के दौरान आदिशक्ति सृष्टि रचियता #माता_जगदम्बा के नौ विभिन्न रूपों की आराधना की जाती है।
नवरात्रि पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है – हिन्दू वर्ष के आरम्भ में अर्थात चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम दिवस वासन्तिक नवरात्रि (Vaasantik Navratri) आते हैं जबकि शीत ऋतु बीत चुकी होती है और ग्रीष्म ऋतु आरम्भ होने वाली होती है। प्रचलित अंग्रेजी कैलेन्डर के अनुसार ये समय साधारणतः मार्च-अप्रैल के महीनों के दौरान आता है।
दूसरे नवरात्रि जिन्हें शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) के नाम से भी जाना जाता है, वर्षा ऋतु बीत जाने के बाद तथा शीत ऋतु के आगमन से पहले अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन से मनाए जाते हैं। अंग्रेजी कैलेन्डर के अनुसार सितम्बर-अक्तूबर के दौरान शारदीय नावरात्रि का पर्व मनाया जाता है।
ये नौ दिन वर्ष के सर्वाधिक शुद्ध एवं पवित्र दिवस (The Most Auspicious Days of the Year) माने गए हैं। वर्ष के इन नौ और नौ अर्थात् 18 दिनों का भारतीय धर्म एवं दर्शन (Indian Religion and Philosophy) में विशेष ऐतिहासिक महत्व है और इन्हीं दिनों में बहुत सी दिव्य घटनाओं के घटने की जानकारी हिन्दू पौराणिक ग्रन्थों (Hindu Mythology) में मिलती है।
वासन्तिक नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माता दुर्गा (Durga Mata) के उन नौ रूपों का भी पूजन किया जाता है जिन्होंने सृष्टि के आरम्भ से लेकर अभी तक इस पृथ्वी लोक पर विभिन्न लीलाएँ की थीं। माता के इन नौ रूपों को नवदुर्गा (Navdurga) के नाम से भी जाना जाता है। वासन्तिक नवरात्रि के इन्हीं नौ दिनों पर मां दुर्गा के जिन नौ रूपों का पूजन किया जाता है वे क्रमशः इस प्रकार हैं – पहला शैलपुत्री (Shailputri), दूसरा ब्रह्माचारिणी (Brahmacharini), तीसरा चन्द्रघन्टा (Chandraghanta), चौथा कूष्माण्डा (Kushmanda), पाँचवा स्कन्द माता (Skand Mata), छठा, कात्यायिनी (Katyayani), सातवाँ कालरात्रि (Kalratri), आठवाँ महागौरी (Mahagauri), नौवां सिद्धिदात्री (Siddhidatri)।