मोहब्बत जिंदाबाद,
PDA एकता जिंदाबाद।
PDA Army
This organization is struggling to solve the problems of PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) and against unemployment, corruption, inflation & Discrimination.
This organization is working on the path of democratic, secular and socialism.
PDA छात्रों का समता संवर्धन मार्च 🔥
यूजीसी रेगुलेशन लागू करो!!
ागू_करो
PDA समाज बच्चों के विश्वविद्यालयों में प्रवेश, अधिकार और सम्मान के लिए बहुजन छात्रों संघर्ष जारी रहेगा।
ागू_करो
देश हमारा कहाँ जा रहा,
कहो नरेंदर मजा आ रहा!
इस देश का PDA इसलिए चुप होता चला गया क्योंकि संस्थानों पर बीजेपी-आरएसएस का वर्चस्व बढ़ता गया। लोगों को डर लगने लगा कि आवाज़ उठाने पर एडमिशन, नौकरी, फेलोशिप और प्रमोशन रोके जा सकते हैं।
लेकिन एक यूजीसी रेगुलेशन ने फिर से साफ़ कर दिया कि चुप्पी की कीमत बहुत भारी होती है- मीडिया, विश्वविद्यालय, न्यायालय, आईआईटी, एम्स और नौकरियों को कुछ लोग अपनी बपौती समझने लगे हैं।
जबकि आबादी के अनुपात में इन संस्थानों में ओबीसी/एससी/एसटी और अल्पसंख्यकों का वर्चस्व होना चाहिए।
हकीकत यह है कि शीर्ष पदों, निर्णयकारी संस्थानों और प्रतिष्ठित संस्थाओं में PDA समाज आज भी आबादी के अनुसार अत्यंत कम प्रतिनिधित्व में है।
ागू_करो
हम रोहित, पायल, मुत्थु,दर्शन की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहते हैं।
शोषितों की संयुक्त लड़ाई जिंदाबाद ✊🏿💙
Priyanka Bharti
चीन के सवाल पर Rahul Gandhi जी के समर्थन में दहाड़े Akhilesh Yadav जी 🔥🔥🔥
दलित जानकार रूम नहीं देते हैँ जातिवादी लोग 😡😡😡
28/01/2026
शीर्षक — मैं अभागा सवर्ण हूँ
विश्वविद्यालयों के ऊँचे शिखरों पर,
कुलपति बनकर मेरा ही कुनबा बैठा है,
ज्ञान के हर दरवाजे पर मेरी ही ठाठ है
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
अदालतों के कमरों के 'कोलेजियम' में,
मेरे ही खानदान के लोग बैठे हैं,
फिर भी न्याय न मिलने पर संविधान
को गरियता हूँ
मैं अभागा सवर्ण हूँ।
सचिवालय की अस्सी फीसदी कुर्सियों
पर मेरी जाति के सवर्ण हैं
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
मीडिया के कैमरों से लेकर अख़बारों तक,
मेरी ही आवाज़ को 'जनता' कहा जाता है,
बहस का हर मुद्दा मेरी ही मर्ज़ी से तय है,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
व्यापार के बड़े बाज़ारों और शेयर मार्केट में,
मेरी ही पूँजी का निर्विरोध साम्राज्य है,
आर्थिक लाभ की हर पहली पंक्ति में मैं हूँ,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
देश के प्रमुख संस्थानों और थिंक-टैंकों में,
विशेषज्ञ बनकर मेरा ही सरनेम बोलता है,
बौद्धिक विमर्श पर मेरा ही एकाधिकार है,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
साहित्यिक मंचों और कला के गलियारों में,
पुरस्कारों की रेवड़ियाँ अपनों में बँटती हैं,
तारीफ़ की हर ताली मेरे ही नाम की है,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
संसद की समितियों और नीति बनाने वालों में,
मेरा ही वर्ग बहुमत में हाथ उठाता है,
हर नियम मेरे ही हितों को देखकर बनता है,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
देश के बड़े अस्पतालों और डॉक्टरी के पेशों में,
निजी प्रैक्टिस से लेकर सरकारी पदों तक मेरा कब्ज़ा है,
सेहत के व्यापार का मैं ही असली मालिक हूँ,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
धार्मिक ट्रस्टों और मंदिरों के गुप्त खज़ानों पर,
पुश्तैनी अधिकार लेकर मेरा ही वंश काबिज़ है,
आस्था के हर धंधे का मैं ही एकमात्र ट्रस्टी हूँ,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
प्राइवेट सेक्टर के बोर्डरूम और CEO की कुर्सियों पर,
नेटवर्किंग के दम पर मेरा ही भाई-भतीजावाद है,
मेरिट के नाम पर मैंने अपना ही घेरा बनाया है,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
विदेशी छात्रवृत्तियों और ग्लोबल एक्सपोजर में,
मेरे ही बच्चों का रास्ता साफ किया जाता है,
दुनिया को देखने वाली आँखें भी मेरी ही हैं,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
फिल्मों के परदों से लेकर ओटीटी की कहानियों तक,
मेरे ही नायकत्व और मेरी ही पीड़ा का बखान है,
ग्लैमर की हर चमक मेरी ही चौखट से निकलती है,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
तमाम जांच एजेंसियों और सुरक्षा के ओहदों पर,
मेरे ही निर्देश और मेरी ही वफ़ादारी चलती है,
डर का माहौल हो या सुरक्षा, चाभी मेरे पास है,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
हज़ारों साल की विरासत और संचित विशेषाधिकार,
आज भी मेरी ढाल बनकर समाज में खड़े हैं,
मैं व्यवस्था का विधाता और सत्ता का केंद्र हूँ,
लेकिन मैं अभागा सवर्ण हूँ।
PDA के खिलाफ कितनी नफ़रत है समांतियों के अंदर...एक्ट को पढ़ा नहीं लेकिन विरोध करेंगे,
करणी सेना के सदस्य हैं इसलिए विरोध करने आए हैं...😂
सामंतवादियों का भी गजब हाल है 😂😂😂
27/01/2026
प्रभुत्ववादी समाज अभी UGC के नियमों पर ही रोने लगा है, जबकि आगे बहुत कुछ होना बाकी है—निजी क्षेत्र में आरक्षण, जाति जनगणना, विश्वविद्यालयों में प्रोफ़ेसरों और कुलपतियों की नियुक्ति, ज़मीन और संपत्ति का न्यायपूर्ण बँटवारा।
विश्वविद्यालयों में बहुजन वर्ग के वाइस-चांसलर होंगे, कॉलेजियम व्यवस्था बदलेगी, इंटरव्यू जैसी भेदभावपूर्ण प्रक्रियाएँ खत्म होंगी।
देश के लोकतांत्रिक पुनर्निर्माण के लिए ये ज़रूरी कदम हैं।
बहुजन समाज के हक़ और अधिकारों का विरोध करने के बजाय, बराबरी और सामाजिक न्याय की इस प्रक्रिया को स्वीकार करना ही समय की मांग है।
जिसको घुटन हो रही है और अभागा महसूस कर रहा है वो पाकिस्तान जा सकता है.
श्रद्धेय नेताजी अमर रहें 🙏
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