Complementary Feeding

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To raise awareness on complementary feeding for prevention of stunted growth in children

09/12/2022

बच्चे को क्या न खिलाएं
डिब्बाबंद भोजन, पैक या भंडारित किया गया भोजन, प्रिजरवेटिव या रसायन युक्त कृत्रिम रूप से पकाया गया भोजन, फलों का रस और पेय, बार-बार तला हुआ ट्रांस-फैटी एसिड युक्त भोजन किसी भी हालत में 2 साल से कम के बच्चे को न दें। इनसे आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज, दिल की बीमारी, तांत्रिक तंत्र की समस्याएं हो सकती हैं। बिस्कुट, ब्रेड, पेस्ट्री, चॉकलेट, चीज, आइसक्रीम, डोनट, केक आदि कभी-कभी खिलाए जा सकते हैं लेकिन इन्हें मुख्य पूरक आहार नहीं होना चाहिए।

09/12/2022

बच्चे को क्या खिलाएं
स्थानीय चीजें जैसे कि घी या तेल के साथ खिचड़ी, दाल-चावल, इडली, दोसा, ढोकला, रागी, रोटी, पराठा, थोड़ी सी चीनी बच्चे का मुख्य आहार होना चाहिए। मसला हुआ आलू, शकरकंद, केला, दूसरे गूदेदार फल जैसे कि आम, पपीता, आदि भी उत्तम आहार हैं। दूध आधारित अनाज से बनी चीजें जैसे कि दलिया, खीर समय-समय पर खिलाई जा सकती हैं। अंकुरित अनाज, दालें, मूंगफली, बादाम, काजू, किशमिश को भी खाने में शामिल किया जा सकता है। इन्हें ठीक से पीस कर खाने में मिला दिया जाना चाहिए क्योंकि इनके टुकड़े छोटे बच्चों का दम घोंट सकते हैं।

09/12/2022

जब चावल और या गेहूं आधारित भोजन में दालें/मेवे और सब्जियां डाले जाते हैं और उसे तेल या घी में पकाया जाता है तो यह संतुलित आहार बन जाता है, जैसे कि उपमा, पुलाव, पोहा और बिरयानी। दूध में अनाज, मेवे/किशमिश आदि डालकर भी संतुलित आहार बन सकता है, जैसे कि दलिया, खीर, आदि। फल, अंडे, मछली और मांस का प्रयोग भी भोजन को संतुलित बनाने के लिए किया जा सकता है।

09/12/2022

बच्चे का सिर्फ पेट भरा होना ही पर्याप्त नहीं है। उदाहरण के लिए बच्चे का पेट चावल की माँड़ से भी भर सकता है। लेकिन माँड़ से उसे पोषण नहीं मिलेगा और इससे बहुत सारी समस्याएं जैसे कि ठिंगनापन, कम वजन, कमजोरी, खून की कमी हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि बच्चे के आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रट, मिनरल, वसा, विटामिन, फाइबर, आदि, मौजूद रहें ताकि वह संपूर्ण आहार हो सके। इसके बावजूद ये आहार संतुलित हों जरूरी नहीं है। जब भोजन में ये चीजें उचित अनुपात में होती हैं तो इस आहार को संतुलित आहार कहा जाता है। इसलिए बच्चे के आहार को संपूर्ण और संतुलित बनाने के लिए तरह-तरह के भोजन को बच्चे के आहार में शामिल करना चाहिए।

09/12/2022

तमाम आर्थिक प्रगति के बावजूद भारत में कुपोषण एक वास्तविकता है। शिशु के छः महीने की आयु के बाद केवल स्तनपान उसके संपूर्ण वृद्धि और विकास के लिए पर्याप्त नहीं होता है। इसलिए जरूरी होता है कि शिशु को पूरक आहार दिया जाए। पूरक आहार में सही उम्र पर अर्ध ठोस भोजन दिया जाना चाहिए। यह बच्चे के जीवन के शुरुआती दो सालों के लिए बहुत जरूरी है। इसमें बच्चे को उचित स्तनपान कराया जाना चाहिए और छः महीने के बाद उचित भोजन दिया जाना चाहिए।

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