Akhilesh

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Ak Lko

20/10/2025



*ब्रह्म मुहूर्त में उठने के लाभ!!!!!!!!!*

*उठे लखनु निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान।*
*गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान॥*

भावार्थ:-रात बीतने पर, मुर्गे का शब्द कानों से सुनकर ब्रह्ममुहूर्त में लक्ष्मणजी उठे। जगत के स्वामी सुजान श्री रामचन्द्रजी भी गुरु से पहले ही जाग गए॥

- रात्रि के अन्तिम प्रहर का जो तीसरा भाग है, अर्थात सूर्योदय से 72 मिनट पहले के काल को उसको ब्रह्ममुहूर्त कहते हैं। शास्त्रों में यही समय निद्रा त्याग के लिए उचित बताया गया है।

*- मनुस्मृति में आता हैः… ब्राह्मे मुहूर्ते या निद्रा सा पुण्यक्षयकारिणी।* प्रातःकाल की निद्रा पुण्यों एवं सत्कर्मों का नाश करने वाली है।

*- वर्ण कीर्ति यशः लक्ष्मीः स्वास्थ्यमायुश्च विन्दति।*
*ब्राह्मे मुहूर्ते संजाग्रच्छियं वा पंकजं यथा।। – (भैषज्य सारः 63)*
ब्राह्ममुहूर्त में उठने वाला पुरूष सौन्दर्य, लक्ष्मी, स्वास्थ्य, आयु आदि वस्तुओं को प्राप्त करता है।

उसका शरीर कमल के समान सुन्दर हो जाता है।

*- इस समय किसी भी गृह -नक्षत्र का बुरा असर नहीं होता!!!!!!!*

- जिस तरह गर्मी के दिनों में हमारे शरीर में गर्मी अधिक होगी ; उसी प्रकार बाहरी विश्व की हर घटना का असर शरीर के अन्दर होगा। ब्रम्ह मुहूर्त हर दिन की शुरुवात है। इस समय प्राण और अपान वायु कार्यरत रहती है। इस समय की तुलना गर्भवास और गर्भ से बाहर आने के बीच के समय से की जाती है।

- इसीलिए गर्भ में रहते हमारे शरीर पर जो जो गलत प्रभाव हुए है , शारीरिक या मानसिक ; उसे सुधारने का अवसर हमें रोज़ ब्रम्ह मुहूर्त में प्राप्त होता है। इसीलिए कई जेनेटिक बीमारियाँ या असाध्य रोग ब्रम्ह मुहूर्त में उठ कर स्नान -योग -ध्यान करने से ठीक हो सकती हैं।

- मनुष्य शरीर में रोज ब्रम्ह मुहूर्त में सहस्त्रार चक्र से एक बूंद अमृत तत्व निकलता है इसी लिए ब्रम्हमुहूर्त को योगतांत्रिक साधनाओं में अत्यधिक महत्वपूर्ण समय माना गया है लेकिन यह अमृत तत्व का शरीर में योग्य संचार नहीं हो पाता है। इस समय साधना करने पर व्यक्ति में इस तत्व का संचार होने लगता है. लेकिन इसका पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए साधक का विशुद्ध चक्र जागृत होना आवश्यक है। इस प्रकार वह अमृत तत्व कुदरती रूप से नाभि में एकत्रित होने लगता है या फिर उसका कई प्रकार से संचार साधक के लिए संभव हो जाता है।

- इस समय दैवीय शक्तियां पृथ्वी लोक पर विचरण करती है। उनकी दैवीय शक्तियां और आशीर्वाद पाने के लिए ब्रम्ह मुहूर्त में उठना पड़ता है।

- ब्रम्ह मुहूर्त में किया गया स्नान सर्वश्रेष्ठ फल देता है। स्नान करते समय ब्रम्ह परमात्मा का चिंतन करें तो यह ब्रम्ह स्नान कहलाता है और देव नदियों का स्मरण करें तो देव स्नान कहलाता है। इस समय स्नान करने से तीनों दोष शांत रहते है और मन और बुद्धि बलवान होते है।

- ब्रम्ह मुहूर्त में तामसी शक्तियां सुप्तावस्था में होती है। मन और बुद्धि सकारात्मक होती है. ध्यान जल्दी लगता है। इस समय स्मरण शक्ति तीव्र रहती है।

- आयुर्वेदिक जीवन शैली तभी सही ढंग से अपनाई जा सकती है , जब हम ब्रम्ह मुहूर्त पर उठें।

- इसीलिए ब्रम्ह मुहूर्त पर उठकर ध्यान योग करना बोझ न समझें । ये मनुष्य होने का उपहार समझ अपनाएं और इस अमृत वेला का पूर्ण लाभ उठायें।

20/10/2025



दिवाली के दिन (ओल) सुरन की सब्जी खाना क्यों अनिवार्य है? तो मेरा मानना था की पहले के समय में सब्जियों के विकल्प बहुत सीमित हुआ करते थे,और ऐसे मसाले वाली सब्जियां केवल त्योहारों के दिन या किसी खास दिन ही बनते थे, जैसे आज कल पूड़ी — कचोरी बनना आम बात है, और पनीर वगेरह के विकल्प पहले नही हुआ करते थे। इसलिए हो सकता है की ऐसा बनाया गया होगा।

लेकिन बड़े लोगो से पूछने पे पता चला की पहले के समय में जो चीज़े बनाई गई थी उसके पीछे कारण हुआ करते थे। समस्या बस यह है की हमे चीज़े करने के लिए कहा जाता है लेकिन उसके कारण नही बताए जाते, इसके वजह से हम ऐसी चीजों को अंध श्रद्धा के साथ जोड़ देते है।

तो मित्रों अब जानते हैं दिवाली के दिन सूरन की सब्जी खाने व खिलाने के मुख्य कारण - दरअसल सूरन को अपने देश में कई नामो से जाना जाता है, जैसे सूरन,जिमीकन्द (कहीं कहीं ओल) और कांद भी बोलते हैं, आजकल तो बाजार में हाईब्रीड सूरन आ गया है,, कभी-कभी देशी वाला सूरन भी मिल जाता है , दीपावली के 3-4 दिन पहले से ही बाजार में हर सब्जी वाला (खास कर के उत्तर भारत में) सूरन जरूर रखता है,और मजे की बात है कि इसकी लाइफ भी बहुत होती है।

सब्जियो में सूरन ही एक ऐसी सब्जी है जिसमें फास्फोरस अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है, और अब तो मेडिकल साइंस ने भी मान लिया है कि इस एक दिन यदि हम देशी सूरन की सब्जी खा ले तो स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में महीनों फास्फोरस की कमी नही होगी,,

यह बवासीर से लेकर कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से बचाए रखता है। इसमें फाइबर, विटामिन सी, विटामिन बी6, विटामिन बी1 और फोलिक एसिड होता है,साथ ही इसमें पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम भी पाया जाता है ।

मुझे नही पता कि ये परंपरा कब से चल रही है लेकिन सोचीए तो सही कि हमारे लोक मान्यताओं में भी वैज्ञानिकता छुपी हुई होती थी।

धन्य हों हमारे पूर्वज जिन्होंने विज्ञान को हमारी परम्पराओं, रीतियों और संस्कारों में पिरो दिया

20/10/2025



दीपावली के पावन अवसर पर 5 दिन की विशिष्ट पुजा में हर साल मैं501पीस हत्था जोड़ी सिद्ध करता हुं वैसे तो हत्था जोड़ी के बारे में सभी जन साधारण लोग भी जानते हैं ये अपने आप में चमत्कारी चीज होती है इससे होने वाले कुछ फायदे मैं आप लोगों के साथ जानकारी साझा करना चाहता हुं
(1) जैसे हमारे पूर्वजों की निशानी हम घर में रखते है वैसे ही हत्था जोड़ी को हम घर में भगवान की निशानी मान कर रखते है ।
(2) हत्था जोड़ी को बहुत ज्यादा Money Attraction के रूप में काम करने वाली चीज माना जाता है ।
(3) हत्था जोड़ी जिसके पास होती है उसको मुकदमे में हराना नामुमकिन सा माना जाता है ।
(4) हत्था जोड़ी को एक डिब्बी में सिंदूर में रखा जाता है इस सिंदूर में बहुत ज्यादा आकर्षण शक्ति होती है ।
इसके और भी बहुत फायदे होते हैं तंत्र वस्तु में इससे सस्ता कुछ नहीं होता है जो कम खर्चे में हर तरफ से उपयोगी साबित होती है

15/10/2025



जिला बलिया के महान गणितज्ञ गणेश प्रसाद जी के लिखल 'अ टेक्स्ट बुक ऑफ डिफरेंसियल कैलकुलस' कबो अमेरिका के कैलिफोर्निया युनिवर्सिटी में चलत रहे ।

महान गणितज्ञ " डा. गणेश प्रसाद " द फादर आफ मैथेमेटिक्ल रिसर्चेज इन इंडिया

हमरा मन परत बा लइकाइ प चाचाजी भा गांव के केहू जब गणित में हमरा के नीमन करत देखी त कही कि बड़ हो के गणेशी बनी । हमरा मालूम ना रहे कि के रहले गणेशी । बाकिर जोहत जोहत आज से 9-10 साल पहिले हम जोहनी गणेश प्रसाद यानि , ' डा. गणेश प्रसाद । द फादर आफ मैथेमेटिक्ल रिसर्चेज इन इंडिया ' के ।

जन्म : 15 नवम्बर , 1876 ,

मृत्यु : 9 मार्च 1935 ( आगरा विश्वविद्यालय में एगो मीटींग के दौरान मृत्यु भइल )

शुरुवाती शिक्षा : जीआईसी बलिया , उ. प्र.

इलाहाबाद , कलकत्ता में उच्च शिक्षा मिलला के बाद , भारत सरकार के ओर से गणेश प्रसाद के कैम्ब्रिज, गोट्टिंजेन , आ अमेरिका में पढे खातिर भेजल गइल ।
बनारस , इलाहाबाद , कलकत्ता में अलग अलग समय प गणित के प्रोफेसर के रुप में आपन सेवा देहनी ।

तकरीबन 11 गो किताब आ 50 गो से उपर रिसर्च पेपर लिखले रहनी । इँहा के किताब 'A Treatise on Spherical Harmonics and the Functions of Bessel and Lame’ बहुत मशहूर किताब रहे ।

28/09/2025

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