चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है,
हम को अब तक अशिकी का वो जमाना याद है।
Library aun
Love ,emotion, struggle, success, jivani heart touching kahani
24/07/2025
सफर मे हमसफ़र
आनंद एक दिन ट्रेन से बनारस जा रहा था। पहली बार वो ट्रैन द्वारा सफर कर रहा था खिड़की के पास बैठकर बाहर की घूमती हुई दुनियाँ का आनंद ले रहा था उसे बहुत आश्चर्य हो रहा था कि ट्रेन जितनी ज्यादा तेज चलती है बाहर खड़े पेड़ पौधे भी उतनी ही तेज घूमते हैं कुल मिलाकर उसको सफर में बहुत आनंद आ रहा था। भाटपार स्टेशन पर ट्रेन रुकी कुश ट्रेन से बाहर आया उसने एक बुकसेलर से गाना बजाना नाम की एक किताब खरीदी। उसने किताब में लिखे गाने पढ़ने चाहे तब तक ट्रेन ने सिग्नल दे दिया और धीरे धीरे चलने लगी। बुकसेलर ने कहा जाओ ट्रेन में पढ़ लेना वो देखो तुम्हारी ट्रेन जा रही है।कुश जल्दी से ट्रेन में चढ़ गया।
कुश जब अपनी सीट पर पहुंचा तो उसने अपनी सीट पर एक हमउम्र लड़की के अलावा तीन अन्य यात्रियों को बैठा देखा।
कुश ने कहा:- हेलो मेडम, यह मेरी सीट है,रिज़र्व कराई थी मैंने ।
लड़की ने कहा :- हाँ होगी तुम्हारी सीट। मैंने कब मना किया।
कुश :- फिर बैठने दो ना मुझे! खाली करो मेरी सीट।
लड़की:- थोड़ा खिसकते हुए ये लो बैठ जाओ।
कुश उस थोड़ी सी तंग जगह में बैठ जाता है।
वह गाने की किताब को खोलता है तत्पश्चात किताब में लिखे गाने गुनगुनाने लगता है
ऐसे जुदाई से तिल-तिल ना मर,
ऐ मेरे दिल, उनसे तो मिल ।
उनकी अदाओं पे भंबरा फिदा है,
जरा सम्भलकर, गुल जैसा खिल ।
लड़की बोली:- लगता है तुम गाने के शौकीन हो ! अच्छा लगा गाना।तुम्हारी आवाज भी सरस है।वैसे कहाँ तक जा रहे हो ?
आलोक :- मैं बनारस जा रहा हूँ। अपने उस्ताद मियां के पास जाकर रियाज करूंगा। वैसे मैंने शास्त्रीय संगीत भी सीखा है।लेकिन मुझे सभी संगीत के सभी अंदाज पसंद हैं।इतनी बातें कर ली आप से और आपका नाम नहीं पूछा ।
क्या नाम है आपका ?
लड़की :- मेरा नाम संजना है। मुझे भी शास्त्रीय संगीत अच्छा लगता है। मुझे गाने का भी शौक है ।
कुश :- एक गाना हो जाय फिर !
संजना :- हाँ क्यों नहीं, संजना अपना सुर सही करती हुई गाना गाती है ।
प्यार का सफर है, योंही चलता रहे।
बिछुड़े ना दिलवर मेरा, दिल में रहे।।
लम्हा गुजर जायेगा, यादों में रह जायेगा।
दिल तो है तेरा आशिक, तुझसे लिपट जायेगा। ।
संजना अपना गाना अभी पूरा भी नहीं गा पायी तब तक उसका स्टेशन आ गया। संजना बोली लगता है यही मेरा स्टॉपेज है। अब मुझे जाना होगा अपनी सीट शेयर करने के लिये धन्यवाद।ट्रेन रुकी तो संजना उठकर चलने लगी।संजना को जाते देख कुश भी उसके साथ ट्रेन से बाहर आ गया। दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे। संजना ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा। सफर का पता ही नहीं चला कब गुजर गया रास्ता ।
कुश बोला :- आप अपना व्हाट्सअप नंबर दो जो बातें अधूरी रह गयीं हैं उनको पूरी करेंगे से
संजना ने अपना नंबर दिया और कुश को बाय बाय करते हुए बोली -
कहीं रियाज के चक्कर में,
भूल ना जाना तुम हमको ।
याद बहुत आएगी तेरी,
यह कैसे बताउंगी सबको ?
कुश की आँखों से बिरह के आंसू निकल रहे थे। वो जल्दी से ट्रेन में गया और अपना सामान लेकर वापस आ गया संजना के पास।
संजना:- तुम यहाँ क्यों उतर गये ? अभी तुम्हारी मंजिल नहीं आई है कुश जाओ वापस ट्रेन में ।
कुश :- अब तुम्हारे ही शहर में हम संगीत सीखेंगे ।क्योंकि:-
तुम ही हो संगीत मेरा, तुम ही मेरी मंजिल।
बीच सफर में मिलन हुआ है,
अब प्रणय मिलन को व्याकुल दिल।।
दोनों स्टेशन की भीड़ के बीच में गले मिलते हैं और दोनों एक साथ रहने का वादा करते हुए शहर की गलिओं में अपना आशियाना ढूंढ़ते हैं।
निरंतर.....शेष भाग
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21/02/2025
31/01/2025
सुना हैं हर चीज मिल जाती हैं दुआँ से,
इक रोज तुम्हें मांग के देखेंगे ख़ुदा से..! 🌟💫✨
#अंजाम #
यह लेख एक ऐसे रिश्ते को दर्शाती है जिसका कोई अंजाम नही,
हल ही मे पढ़ाई पूरी करने के बाद घर पर खाली थी समझ नही आ रहा था क्या करू फिर एक नौकरी मिल गई जहा ज्यादा नही जेब खर्च भर का मिल रहा था जाबॅ मिल जाने से जो खालीपन सा लग रहा था वह कफी हद तक कम हो गया
अफिस की तरफ से एक बहर का प्रोजेक्ट करना था जिसमे मेरा नाम कम्पनी ने दे दिया
ना चाहते हुए मैने प्रोजेक्ट के लिए हा कर दी और घर जाकर तैयारी करने लगी दुसरे दिन मे टाइम पर अफिस पहुंच गई और जिनके साथ मुझे य़े प्रोजेक्ट करना था उनका इंतजार करने लगी थोड़ी ही देर बाद सर आ गए उनसे पहली मुलाकात थी तो ज्यादा कुछ बात ना करते हुए हम ऑटो करके निकल लिए काम के लिए 3 दिन का काम था, सर की शादी हो चुकी थी और उनके पूरी फैमिली थी जोकि साथ में रहती थी सफर के दौरान ज्यादा कोई बात नही हुई 3 घंटे का सफर तय कर के हम अपने लोकेशन पर पहुंच गए यह तक सब ठीक था, लोकेशन पर पहुंचने के बाद हमने आपना काम किया और फिर शाम को वापस अपने घर आ गई,
दूसरे दिन फिर मे टाइम से जाकर अफिस पर सर का वेट करने लगी सर का कफी टाइम इंतजार करने के बाद सर अपनी कार से आए आज लेट होने के वजह से सर अपनी गाङी से आ गए ,
मेरे पास आकर गाङी रोक कर माफी मांगी लेट होने का ओर बोले आज लेट हो जाने के वजह से गाङी से चंलेगे मे अकले जाना नही चाहती थी लेकिन जाबॅ का सोच कर मे बैठ गई और रास्ते मे बात हुई बात बात मे वो मेरी पर्सनल लाईफ के बारे मे पूछने लगे, मेने बहुत मना किया और थोड़ा गूसा होकर उनको सुना दिया, फिर वो रास्ते भर चुपचाप रहे शाम को काम खत्म कर के घर लौट आए आते वक्त काफी लेट हो गई तो सर आपनी गाङी से मुझे घर तक छोड़कर गए और बिना कुछ बोले चले गए, रात एक मैसेज आया फोन उठा कर देखा तो सर ने सॉरी का मैसेज भेजा था, मेने कोई जवाब नहीं दिया उधर से थोड़ी देर बाद फिर मैसेज आया और imoge भेजी तो मेने जवाब में ओके लिख कर भेज दिया उधर से फिर बढ़ा सा sorry लिख कर आया अब ये मैसेज देख कर थोड़ा सा मुस्कुराई और ok कोई बात नहीं लिख कर भेज दिया उसके बाद सर ने नॉर्मल बात की अब डेली सुबह शाम हमारी बात होने लगी और अब मुझे भी बात करना ठीक लगा काफी दिन ऐसे ही चलता रहा एक दिन ऑफिस से लेट हो जाने के वजह से ऑटो नहीं मिल रही थी में ऑटो का इंतजार कर रही थी तब तक सर का मैसेज आ गया की घर पहुंच गई की नहीं तो मेने जवाब में नहीं बोला और ऑटो ना मिलने की बात बोली उधर से कोई जवाब नहीं आया में ऑटो का इंतजार कर ही रही थी की जब तक सर की गाड़ी सामने आकार खाड़ी हो गई में हैरान हो गई की सर कहा से आ गये
सर ने गाड़ी का दरवाजा खोला और बोले आ जाओ घर तक छोर दु ऑटो ना मिलने के वजह से में बिना कुछ बोले बैठ गई
आज सर शायद ड्रिंक किए हुए थे मेने बाद में ध्यान दिया लेकिन बात नॉर्मल में कर रहे थे गाड़ी चलते समय उनका गलती से उनका हाथ मेरे हाथ पर पढ़ गया लेकिन लेट होने और ड्रिंक किए होने के वजह से मेने कुछ नहीं बोला की कुछ उल्टा ना हो जाए लेकिन पता नहीं क्यु इस बार बुरा नहीं लगा और मन में कुछ हलचल सी हुई और ना जाने कब मेने उनका हाथ पकड़ लिया फिर क्या होना था सर गाड़ी साइड में खाड़ी कर के मेरा हाथ सहलाने लगे में ना चाहते हुए उनको माना नहीं कर पाई और उन्होंने एक बार में मुझे अपनी तरफ खींचा और किस करने लगे थोड़ी देर में मुझे होश हुआ की ये क्या कर रही हू किसी शादी शुदा के साथ मे तुरंत गाड़ी से उतर कर पैदल ही घर आ गई................
Never end this story
आप सभी से जानना चाहूँगा इस कहानी में क्या जो हो रहा था सही था या गलत
यह कहानी समाज में कुछ चीजे को देखते हुए लिखा गया है अगर इससे किसी भी तरह का किसी से संबंध होता है तो ये एक सहयोग होगा उसका इससे किसी भी तरह का कोई वास्ता नही होगा।
वक्त का ये परिंदा रुका है कहां,
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा।
चार पैसे कमाने मैं आया शहर,
गांव मेरा मुझे याद आता रहा ।।
(( रिसोर्ट मे विवाह एक 👀 नजर में ))
नई सामाजिक बीमारी,
कुछ समय पहले तक शहर के अंदर मैरिज हॉल मैं शादियाँ होने की परंपरा चली परंतु वह दौर भी अब समाप्ति की ओर है!
अब शहर से दूर महंगे रिसोर्ट में शादियाँ होने लगी हैं!
शादी के 2 दिन पूर्व से ही ये रिसोर्ट बुक करा लिया जाते हैं और शादी वाला परिवार वहां शिफ्ट हो जाता है।
आगंतुक और मेहमान सीधे वहीं आते हैं और वहीं से विदा हो जाते हैं।
जिसके पास चार पहिया वाहन है वही जा पाएगा,
दोपहिया वाहन वाले नहीं जा पाएंगे।
बुलाने वाला भी यही स्टेटस चाहता है।
और वह निमंत्रण भी उसी श्रेणी के अनुसार देता है।
दो तीन तरह की श्रेणियां आजकल रखी जाने लगी हैं,
किसको सिर्फ लेडीज संगीत में बुलाना है !
किसको सिर्फ रिसेप्शन में बुलाना है !
किसको कॉकटेल पार्टी में बुलाना है !
और किस वीआईपी परिवार को इन सभी कार्यक्रमों में बुलाना है!!
इस आमंत्रण में अपनापन की भावना खत्म हो चुकी है!
सिर्फ मतलब के व्यक्तियों को या परिवारों को आमंत्रित किया जाता है!!
महिला संगीत में पूरे परिवार को नाच गाना सिखाने के लिए महंगे कोरियोग्राफर 10-15 दिन ट्रेनिंग देते हैं!
मेहंदी लगाने के लिए आर्टिस्ट बुलाए जाने लगे हैं
मेहंदी में सभी को हरी ड्रेस पहनना अनिवार्य है जो नहीं पहनता है उसे हीन भावना से देखा जाता है लोअर केटेगरी का मानते हैं
फिर हल्दी की रस्म आती है
इसमें भी सभी को पीला कुर्ता पाजामा पहनना अति आवश्यक है इसमें भी वही समस्या है जो नहीं पहनता है उसकी इज्जत कम होती है ।
इसके बाद वर निकासी होती है
इसमें अक्सर देखा जाता है जो पंडित को दक्षिणा देने में 1 घंटे डिस्कशन करते हैं
वह बारात प्रोसेशन में 5 से 10 हजार नाच गाने पर उड़ा देते हैं ।
इसके बाद रिसेप्शन स्टार्ट होता है
स्टेज पर वरमाला होती है पहले लड़की और लड़के वाले मिलकर हंसी मजाक करके वरमाला करवाते थे,,,,,, आजकल स्टेज पर धुंए की धूनी छोड़ देते हैं
दूल्हा दुल्हन को अकेले छोड़ दिया जाता है
बाकी सब को दूर भगा दिया जाता है
और फिल्मी स्टाइल में स्लो मोशन में वह एक दूसरे को वरमाला पहनाते हैं
साथ ही नकली आतिशबाजी भी होती है ।
स्टेज के पास एक स्क्रीन लगा रहता है
उसमें प्रीवेडिंग सूट की वीडियो चलती रहती है
जिसमें यह बताया जाता है की शादी से पहले ही लड़की लड़के से मिल चुकी है और कितने अंग प्रदर्शन वाले कपड़े पहन कर
कहीं चट्टान पर
कहीं बगीचे में
कहीं कुएं पर
कहीं बावड़ी में
कहीं श्मशान में कहीं नकली फूलों के बीच अपने परिवार की इज्जत को नीलाम कर के आ गई है ।
प्रत्येक परिवार अलग-अलग कमरे में ठहरते हैं
जिसके कारण दूरदराज से आए बरसों बाद रिश्तेदारों से मिलने की उत्सुकता कहीं खत्म सी हो गई है!!
क्योंकि सब अमीर हो गए हैं पैसे वाले हो गए हैं!
मेल मिलाप और आपसी स्नेह खत्म हो चुका है!
रस्म अदायगी पर मोबाइलों से बुलाये जाने पर कमरों से बाहर निकलते हैं !
सब अपने को एक दूसरे से रईस समझते हैं!
और यही अमीरीयत का दंभ उनके व्यवहार से भी झलकता है !
कहने को तो रिश्तेदार की शादी में आए हुए होते हैं
परंतु अहंकार उनको यहां भी नहीं छोड़ता !
वे अपना अधिकांश समय करीबियों से मिलने के बजाय अपने अपने कमरो में ही गुजार देते हैं!!
हमारी संस्कृति को दूषित करने का बीड़ा ऐसे ही अति संपन्न वर्ग ने अपने कंधों पर उठाए रखा है
मेरा अपने मध्यमवर्गीय समाज बंधुओं से अनुरोध है
आपका पैसा है ,आपने कमाया है,
आपके घर खुशी का अवसर है खुशियां मनाएं,
पर किसी दूसरे की देखा देखी नहीं!
कर्ज लेकर अपने और परिवार के मान सम्मान को खत्म मत करिएगा!
जितनी आप में क्षमता है उसी के अनुसार खर्चा करिएगा
4 - 5 घंटे के रिसेप्शन में लोगों की जीवन भर की पूंजी लग जाती है !
दिखावे की इस सामाजिक बीमारी को अभिजात्य वर्ग तक ही सीमित रहने दीजिए!
अपना दांपत्य जीवन सर उठा के, स्वाभिमान के साथ शुरू करिए और खुद को अपने परिवार और अपने समाज के लिए सार्थक बनाइए !!!!
अच्छा लगा हो या बुरा आप सभी लोग अपने विचार जरूर से व्यक्त कीजियेगा.... धन्यवाद....🙏🙏🙏🙏
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