Official: Dr.Ram Manoher Lohiya Foundation.

Official: Dr.Ram Manoher Lohiya Foundation.

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Vikash Yadav jiladhych lucknow

31/03/2016

Jai lohiya jai smajwad

23/10/2014

dr.ram mnoher lohiya foundation k member avam pdadhikari bnne k liye samprk kre-vikash yadav jiladhych lucknow.dr.ram mnohr lohiya foundation u.p-9415764633

23/10/2014

dr.ram mnoher lohiya foundation k member avam pdadhikari bnne k liye samprk kre-vikash yadav jiladhych lucknow.dr.ram mnohr lohiya foundation u.p

23/10/2014

dr.ram mnoher lohiya foundation ki trf se smast bhartwasiyo ko dipawali ki hardik shubhkamnae avam bdhae.

23/10/2014

dr.lohiya amer rhe.

Photos 22/05/2014

भारतीय राजनीति में आज जब हम भ्रष्ट नेताओं को देखते हैं तो मन में उन नेताओं की छवि उभरती है जिन्होंने इस देश की राजनीति को बिना राजनीति में आए ही सही राह पर चलाने का संकल्प लिया था. सत्ता परिवर्तन और समाजवाद के सबसे बड़े परिचायक राम मनोहर लोहिया ऐसे ही व्यक्तियों में से एक थे.

राम मनोहर लोहिया और उनका समाजवाद
राजनीतिक अधिकारों के पक्षधर रहे डॉ. लोहिया ऐसी समाजवादी व्यवस्था चाहते थे जिसमें सभी की बराबर की हिस्सेदारी रहे. वह कहते थे कि सार्वजनिक धन समेत किसी भी प्रकार की संपत्ति प्रत्येक नागरिक के लिए होनी चाहिए. उन्होंने एक ऐसी टीम खड़ी की जिससे समाजवादी आंदोलन का असर लंबे समय तक महसूस किया जाए. डॉ. लोहिया रिक्शे की सवारी नहीं करते थे. कहते थे एक आदमी एक आदमी को खींचे यह अमानवीय है.
Read: राजनीति के कुंवारे

डॉ. राम मनोहर लोहिया का पूरा जीवन सादगी भरा रहा. गरीबी अमीरी की बढ़ती खाई को पाटने में उनके योगदान अहम है. आज के दौर में उनके विचार और ज्यादा प्रासंगिक होते जा रहे हैं.

राम मनोहर लोहिया और राइट टू रिकॉल
पिछले साल अन्ना के आंदोलन के समय एक शब्द काफी चर्चा में था और वह था “राइट टू रिकॉल”. लेकिन इस सिद्धांत को कभी राम मनोहर लोहिया ने भी देश को अपनाने पर जोर दिया था. डॉ. लोहिया ने एक बार कहा था कि ‘जिंदा कौमें पांच साल तक इंतजार नहीं करतीं.‘ यह सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है और जब तक लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम रहेगी, प्रासंगिक बना रहेगा. उन्होंने जोर दिया था कि यह व्यवस्था (राइट टू रिकाल) संविधान संशोधन कर लागू की जाए.

Ram_Manohar_Lohiaराम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण: रेल की पटरी
राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण शायद इन दोनों शख्सियतों से बड़ा समाजवादी नेता भारत के राजनीतिक इतिहास में कभी नहीं हुआ. दोनों ही नेता गांधी जी के कदमों पर चलने वाले शीर्ष नेता थे जो कभी आजादी से पहले अंग्रेजों से लोहा लेते हुए हजारों बार जेल गए तो वहीं आजादी के बाद भ्रष्ट सरकार को आंख दिखाने के जुर्म में भी जेल गए.

राम मनोहर लोहिया और जय प्रकाश नारायण को अगर एक ही गाड़ी की सवारी कहा जाए तो गलत ना होगा लेकिन सिर्फ कुछेक कारणों की वजह से दोनों ने नाजुक समय में एक-दूसरे का साथ छोड़ा और उसका परिणाम यह हुआ कि जो समाजवादी आंदोलन कभी देश में अपने चरम पर था आज बिलकुल खत्म हो चुका है.
Read: Jay Prakash Narayan and his Movement

भारत की आजादी से पहले राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण गांधी जी के साथ ही कार्य करते थे लेकिन आजादी के बाद जब कश्मीर के बंटवारे की बात आई तो दोनों के विचारों में टकराव हुए और अल्प समय के लिए दोनों अलग हो गए.

दरअसल इसके पीछे जयप्रकाश नारायण का नेहरू प्रेम था. जेपी नेहरूजी की विचारधारा से बेहद प्रभावित थे और अकसर उनका समर्थन करते थे इसके विपरीत राम मनोहर लोहिया को नेहरू जी और कांग्रेस की कई नीतियों से बेहद निराशा थी.

राम मनोहर लोहिया और जय प्रकाश नारायण का व्यक्तित्व भी बेहद विचारणीय है. इतिहासकारों का मानना है कि जय प्रकाश अति सद्भाव से ओत-प्रोत थे और बोलचाल में बेहद नरम थे. यूं तो लोहिया की तरह उनमें भी सत्ता-पिपासा लेश मात्र नहीं थी, मगर उनके विचारों में स्पष्टता की कमी थे. वह अपने आसपास के लोगों से बड़ी जल्दी प्रभावित हो जाते थे. विवादस्पद प्रश्न पर स्पष्ट राय देने तथा उस पर अड़े रहने में जय प्रकाश को हिचक होती थी. इतिहास भी साक्षी है कि किसान मजदूर प्रजा पार्टी के साथ विलीनीकरण की समस्या हो या कांग्रेस के साथ सहयोग का विवाद जय प्रकाश अकसर ढुलमुल नीति अपनाते थे और यही वजह रही कि लोहिया को उनसे नाराजगी थी.

राम मनोहर लोहिया को लगता था कि जयप्रकाश नारायण एक बेहतरीन संचालक और उनके समाजवादी आंदोलन को शिखर तक ले जाने में सहायक होंगे लेकिन जेपी के स्वभाव से वह दुखी थे. अपने रोष को उन्होंने एक बार निम्न कथनों के द्वारा जगजाहिर भी किया: “देश की जनता का तुमसे लगाव है, तुम चाहो तो देश को हिला सकते हो, बशर्ते देश को हिलाने वाला खुद ना हिले.”

जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया के मतभेद का नतीजा
समाजवादी आन्दोलन का यह दुर्भाग्य रहा कि जय प्रकाश नारायण और राम लोहिया के बीच मतभेदों के कारण दोनों का व्यक्तित्व व गुण परस्पर पूरक होते हुये भी आपसी सहयोग का सिलसिला टूट गया. कई लोग मानते थे कि राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण की विचारधारा तो एक थी लेकिन उनके बीच जोड़ने वाली कड़ी गुम थी. आजादी से पहले इस कड़ी का रोल गांधीजी ने अच्छी तरह निभाया लेकिन उनकी मौत के बाद दूसरा कोई ना था.

पर हुआ क्या, जिस काम को राम मनोहर लोहिया जेपी के कंधों पर डालना चाहते थे उसी काम को बाद में खुद जेपी ने ही शुरू किया. अगर राम मनोहर लोहिया के साथ जयप्रकाश नारायण ने सही दिशा में कार्य किया होता तो कांग्रेस की सत्ता 1967 में ही उलट जाती. पर जब जय प्रकाश ने यह काम संभाला तब तक समाजवादी आंदोलन बेहद कमजोर हो चुका था.

30 सितम्बर, 1967 को लोहिया को नई दिल्ली के विलिंग्डन अस्पताल, अब जिसे लोहिया अस्पताल कहा जाता है, में पौरुष ग्रंथि के आपरेशन के लिए भर्ती किया गया जहां 12 अक्टूबर, 1967 को उनका देहांत 57 वर्ष की आयु में हो गया.

कश्मीर समस्या हो, गरीबी, असमानता अथवा आर्थिक मंदी, इन तमाम मुद्दों पर राम मनोहर लोहिया का चिंतन और सोच स्पष्ट थी. कई लोग राम मनोहर लोहिया को राजनीतिज्ञ, धर्मगुरु, दार्शनिक और राजनीतिक कार्यकर्ता मानते हैं. डॉ. लोहिया की विरासत और विचारधारा अत्‍यंत प्रखर और प्रभावशाली होने के बावजूद आज के राजनीतिक दौर में देश के जनजीवन पर अपना अपेक्षित प्रभाव कायम रखने में नाकाम साबित हुई. उनके अनुयायी उनकी तरह विचार और आचरण के अद्वैत को कदापि कायम नहीं रख सके.

20/05/2014

aap smast deshwasiyo ko dr.ram mnoher lohiya foundation ki terf se bde mangal ki hardik shubhkaamnaae...

19/05/2014

Dr.ram manoher lohiya foundation ke prdesh adhych manniye anjani prakash yadav ji ke dwara kanpur ke Anil kumar ji ko utter perdesh ka prdesh sachiv bnaae jaane pe haardik bdhaai..-vikash yadav-jiladhych lucknow-9415764633

18/05/2014

dr.ram mnoher lohiya foundation ki masik baithak prdesh karyalay 9/5b kkc teachers colony pe hui..jisme prdesh adhych manniye anjani perkash ji ka fool maalaao se padadhikariyo avam karykrtao ne swagt kiya.baithak ka mukhy mudda sanghtan ko aur adhik majboot krna avam lohiya vichardhara charecter wale logo ko jorna tha..jai lohiya jai samajwaad..

18/05/2014

अखिलेश संभालेंगे एक ही जिम्मेदारी

लोकसभा चुनाव में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन करने के बाद सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में सरकार और संगठन का घालमेल खत्म करने पर मंथन शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अभी सपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। माना जा रहा है कि वह इनमें से कोई एक पद छोड़ सकते हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक उनके प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ने की संभावना है।

बीते कुछ दिनों से दिल्ली में डेरा डाले पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव शनिवार को लखनऊ लौटे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी लखनऊ में हैं। शीर्ष नेतृत्व नतीजों पर आपस में चर्चा कर रहा है लेकिन हार के कारणों की समीक्षा जैसी कोई कवायद अभी तय नहीं हुई है। प्रदेश कार्यालय में शनिवार को भी सन्नाटे का माहौल रहा।

सूत्रों का कहना है कि पार्टी चुनाव नतीजों पर कार्रवाई में हड़बड़ी दिखाने से बचना चाहती है। ताकि उसका कोई नकारात्मक असर न हो। पार्टी का बड़ा तबका ऐसा है जो तमाम वजहों से भरा बैठा है। संगठन से जुड़े लोगों के अलावा विधायकों की अपनी शिकायते हैं। नेतृत्व का मानना है कि ऐसे में हड़बड़ी में कोई कार्रवाई विपरीत असर भी डाल सकती है। लिहाजा नेतृत्व सरकार और संगठन की जिम्मेदारी अलग-अलग करने की कार्ययोजना पर अमल कर सकता है।

रामशरण दास का निधन होने के बाद पार्टी ने शिवपाल सिंह यादव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। साल 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें हटाकर अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाया गया था। अखिलेश के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए ही सपा ने 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत पाई। अखिलेश मुख्यमंत्री बने लेकिन प्रदेश अध्यक्ष का पद उनके पास ही रहा लेकिन सरकार के काम-काज की व्यस्तताओं के कारण वह अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी को पूरा वक्त ही नहीं दे सके।

सूत्रों के मुताबिक अखिलेश समेत बाकी नेतृत्व को अब अहसास हो रहा है कि दोहरी जिम्मेदारी चल नहीं सकती। यूपी जैसे बड़े प्रदेश में सरकार के मुखिया पद के साथ संगठन के प्रदेश अध्यक्ष का पद भी संभाला नहीं जा सकता। कोई एक पद ही रखना होगा। सरकार और संगठन एक ही व्यक्ति के पास नहीं हो सकता। ऐसे में अखिलेश इनमें से कोई एक पद छोड़ सकते हैं। हालांकि इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है लेकिन सूत्रों के मुताबिक सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव उनसे प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी छोड़ने को कह सकते हैं।-samajwadi prdesh news.

Photos 17/05/2014

dosto samaj se coreption ko htana hai aur utter prdesh ko uttam perdesh bnana hai aur samajwaad ko lana hai..aap hmari is muhim
me jada se jada jude...aur hmse judne k liye aap semperk ker skte hai -vikash yadav jiladhych lucknow u.p-contact-9415764633
jai lohiya ...jai samajwaad..

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