Harish Mishra Politician

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" एक ही संकल्प रामनगर का कायाकल्प "
हरीश मिश्र

20/03/2022

#दुर्योधन_की_जंघा

दुर्योधन!

महाभारत का ही नहीं विश्व के सबसे बड़े खलनायकों का आदिगुरू।

आपको शायद यह शब्द अजीब लग रहा होगा लेकिन सत्य यही है। संसार में एक से एक हिंसक और खूँख्वार पात्र हुये लेकिन दुर्योधन संसार का पहला अनूठा खलनायक था।

क्या वह रावण से ज्यादा खतरनाक योद्धा था?
क्या वह अलैग्जेंड्रिया की लाइब्रेरी जलाने वाले खलीफा उमर से बड़ा बर्बर था?
क्या वह तैमूर गजनवी और औरंगजेब जैसे मुस्लिम बादशाहों जैसा हत्यारा था?

नहीं, वह इन पैशाचिक गुणों में इनके आसपास भी नहीं था लेकिन उसमें एक ऐसी कला थी जिसने न केवल उस युग के जनसामान्य ही नहीं बल्कि राजनीति के माहिर ऋषियों व राजाओं को भी भ्रमित कर दिया।

वह घोर अन्यायी और परपीड़क होने के बावजूद स्वयं को विक्टिम प्रदर्शित करने में माहिर था।

वह झूठा नैरेटिव गढ़ने में माहिर था।

उसकी इस कला ने उसके बर्बर कार्यों और पापों को ही नहीं ढंक लिया बल्कि उल्टे पांडवों को ही लगभग अधर्मी सिद्ध कर दिया।

-भरतवंश में योग्यतम राजकुमार को राज्य देने की परंपरा थी और उसने जनसामान्य के सामने सिद्ध कर दिया कि उसे केवल उसके पिता की नेत्रहीनता की सजा मिल रही है।

-उसने धूर्ततापूर्वक मायामहल में हुई घटना को पूर्णतः झूठ बोलकर द्रोपदी द्वारा 'अंधे का बेटा' कहने से जोड़कर प्रस्तुत किया जबकि महाभारत के अनुसार द्रौपदी ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं था।

-उसने पांडवों को धृतराष्ट्र के माध्यम से द्यूत खेलने की आज्ञा दी और 'द्यूत मर्यादा' के अंतर्गत जबरदस्ती पांडवों और द्रौपदी को दाँव पर लगाने के लिये मजबूर किया और दुनियाँ के सामने युधिष्ठिर को 'जुआरी' साबित कर दिया।

-उसकी फेक नैरेटिव गढ़ने की क्षमता का अंदाजा इसीसे लगा लीजिये कि उसने कृष्ण पर युद्ध के नियमों को तोड़ने वाला छलिया साबित कर दिया जबकि राजकुमार श्वेत से लेकर अभिमन्यु की निरीह हत्या से लेकर अर्जुन और भीम की हत्या के लिये इन एकल योद्धाओं पर क्रमशः सुशर्मा की पूरी संशप्तक सेनाओं और कलिंगराज की हाथियों की सेनाओं का आक्रमण तक करवाया।

संसार में अन्यायी और पापी होने के बाद भी स्वयं को विक्टिम प्रदर्शित करने वाला व्यक्ति और जनसमूह अत्यंत कुटिल और भयानक रूप से खतरनाक होता है और इस दृष्टि से दुर्योधन ऊपर वर्णित खलनायकों से दस गुना ज्यादा खतरनाक था।

क्या पांडव युद्ध जीत पाते?

सवाल ही नहीं था, अगर कृष्ण न होते।

और अगर आज बीस करोड़ ऐसे लोग जो क्रूरता में गजनवी और औरंगजेब हों और विक्टिम होने का नाटक करने में दुर्योधन के समान कुटिल, जो एक मस्तिष्क, एक आवाज, एक इकाई, एक सेना के रूप में आपके सामने आपका वजूद मिटाने को खड़े हों तो???

जरा देखिये अपने चारों ओर, वे आपके चारों ओर मौजूद हैं।

-उन्होंने आठ सौ साल तक मंदिर तोड़े, पुस्तकालय जलाये, औरतों को बलात्कार के बाद नग्न कर खुले बाजारों में बेचा लेकिन उन्होंने सफलतापूर्वक नैरेटिव स्थापित कर दिया कि वे तो अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ अमनो मुहब्बत से रह रहे थे।

-उन्होंने 1946 में लगभग शत प्रतिशत रूप से पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया व पाकिस्तान का निर्माण कराने के बाद सफलतापूर्वक हिंदुओं पर नैरेटिव थोप दिया कि संविधान के कारण उन्होंने भारत में ही रुकने का फैसला किया जबकि संविधान विभाजन के तीन वर्ष बाद लागू हुआ था।

-उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी धार्मिक मान्यता के कारण तुर्की के खलीफा के पक्ष में सिर्फ खिलाफत आंदोलन में भाग लिया पर नैरेटिव इस तरह गढ़ा की भारत की स्वतंत्रता में उन्होंने बराबर भाग लिया।

-सर सैयद अहमद शाह से लेकर जिन्ना तक वे अंग्रेजों की गोदी में खेलकर राष्ट्र के साथ गद्दारी करते रहे लेकिन माफीनामे की पर्ची सफलतापूर्वक सावरकर के माथे पर लगा दी।

-उन्होंने जिंदगी में गांधीजी की तमाम चापलूसियों के बावजूद उनकी एक बात नहीं सुनी और जिन्ना को अपना नेता माना लेकिन गोडसे को लेकर सवाल सबसे पहले करते हैं।

-संसार में 99% प्रतिशत आतंकवादी घटनाओं के बावजूद सफलता पूर्वक स्थापित कर देते हैं कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं लेकिन निर्दोष साबित हुए साध्वी प्रज्ञा व कर्नल पुरोहित के माध्यम से हिंदू आतंकवाद का नैरेटिव गढ़ देते हैं।

-बछडाचोर अखलाक व चोर तबरेज की पिटाई में हुई दुर्घटनावश मृत्यु को मोबलिंचिंग का नैरेटिव गढ़ देते हैं लेकिन चंदन गुप्ता और निरीह भरत यादव की दर्दनाक मृत्यु को सामान्य घटना साबित कर देते हैं।

-महाकाल एक्सप्रेस के नामकरण व उसके शुभागमन प्रतीक के रूप में एक बर्थ के रिजर्वेशन पर धर्मनिरपेक्षता को खतरे का नैरेटिव सैट करते हैं और प्लेटफॉर्म पर दरगाह, सड़कों पर नमाज और रेलवे स्टेशन पर मस्जिद खड़ी करने से रोकने पर धार्मिक रूप से विक्टिम शो करते हैं।

-कश्मीरी हिंदुओं पर अकथनीय अत्याचार करते हैं और अपने खून सने हाथ जगमोहन व भाजपा कर दामन से पोंछते हैं।
आप कैसे लड़ोगे इन संगठित दुर्योधनों से?
लेकिन अंततः ्मीर_फाइल्स हमारे लिये कृष्ण का इशारा बनकर आई है।
पहली बार इ स्लामिक दुर्योधनों का नैरेटिव ध्वस्त हुआ है।
दुर्योधन की जंघा पर से वस्त्र हटा दिया है।
भीमसेन बनना अब आपकी जिम्मेदारी है।।
इनकी जंघाओं पर गदा का प्रहार करो।
#इनका_आर्थिक_बहिष्कार_करो।
इनकी आजीविकाओं का बहिष्कार करो।
इनकी जंघायें तोड़ दो।

18/03/2022

पान की गिलौरी से,
भांग की फुलौरी से।
पापड़ों की चटर-पटर,
साथ में हो नीबू मटर।
कांजी-बड़े का पानी हो,
मजा आए गर बिरयानी हो।
अबीर और गुलाल हो,
गुलाबी रंग की बहार हो।
पोत लो और पुतवा लो,
आओ होली मना लो।
ढोल हो मंजीरा हो,
ठंडाई का सकोरा हो।
नाच लो झूम लो गा लो,
अब आओ होली मना लो।।

17/03/2022

सूर्य संवेदना पुष्पे
दीप्ति कारुण्यगंधने !!
लब्ध्वा शुभं होलिकापर्वेऽस्मिन
कुर्यात्सर्वस्य मंगलम्‌ !!

जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है,संवेदना करुणा को जन्म देती है,पुष्प सदैव महकता है,उसी तरह यह होलिका पर्व आपके लिए हर दिन हर पल मंगलमय हो!
शुभेच्छु

हरीश मिश्र

11/03/2022

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव-2022 में भाजपा को अपार समर्थन देने के लिए प्रदेश की देवतुल्य जनता का हार्दिक आभार एवं सभी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन।

05/02/2022

या कुन्देन्दु-तुषारहार-धवला या शुभ्र-वस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युत शंकर-प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

आप सभी को बसंत पंचमी की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई !

03/02/2022

" हिन्दू कुलभूषण योगी आदित्यनाथ "
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आंखे जिस पल को तरसी थीं,
वह दृश्य दिखाया योगी ने ।
उस सदन बीच खुलकर हिन्दू
उत्कर्ष दिखाया योगी ने ।।

निज धर्म, कर्म पर गौरव है,
ये सिखा दिया है योगी ने ।
जो मोदी नहीं दिखा पाये,
वो दिखा दिया है योगी ने ।।

बेशर्म जनेऊ धारी थे,
जो इफ़्तारो में जाते थे ।
हाथों से तिलक मिटा करके जो,
टोपी गोल लगाते थे ।।

वोटों की भूख जिन्हें मस्ज़िद
दरगाहों तक ले जाती थी ।
खुद को हिन्दू कहने में जिनकी,
रूह तलक शर्माती थी ।।

उन ढोंगी धर्म कपूतों की,
छाती पर चढ़कर बोल दिया ।
क्यों ईद मनाऊं? हिन्दू हूं,
ऐलान अकड़कर बोल दिया ।।

जड़ दिया तमाचा, और लिखी
इक नयी कहानी योगी ने ।
लो डूब मरो, बंटवा डाला,
चुल्लू भर पानी योगी ने ।।

संकेत दिखा है साफ़ साफ़
अब इस महन्त की बातों में ।
अब होना दर्द ज़रूरी है,
आज़म खानों की आंतो में ।।

पूरे प्रदेश में शान्ति अमन,
गर होना बहुत जरुरी है ।
तो फिर गुण्डों में योगी का,
डर होना बहुत ज़रूरी है ।।

चौबिस कैरट का बांका बीर,
दिलेर मिला है यू पी को ।
लगता है जैसे पहला बब्बर,
शेर मिला है यू पी को ।।

हिन्दू गौरव पर ग्रहण लगा जो,
जल्दी हटने वाला है ।
जेहादी कुनबा सदमे में अब,
शीश पटकने वाला है ।।

वह राजनीति के नवयुग में,
बजरंगी का अवतारी है ।
थोड़ा सा बाल ठाकरे है,
थोड़ा सा अटल बिहारी है ।।

दिवाली फिर से चमकी है,
होली फिर से मुस्काई है ।
शिवरात्रि लगी महकी महकी,
हर उत्सव में तरुणाई है ।।

हर हिन्दू को यह ध्यान रहे,
यह स्वाभिमान की बेला है ।
हर हिन्दू मिलकर साथ खड़ा,
योगी अब नहीं अकेला है ।।

आरम्भ हुआ है लो प्रचण्ड,
हम दिव्य चमकते बिन्दु हैं ।
खुलकर के आज सभी बोलो,
हम हिन्दू हैं, हम हिन्दू हैं ।।

🌹जयतु जै हिंदु राष्ट्रम🌹

17/01/2022

एक साल से लगातार भागमभाग , राजनीतिक गुणा गणित के चक्कर में अपने बहुतेरे मित्रों से बैठक चकल्लस नही हो पा रही थी,,,अनुज शिवम शुक्ला के यहां पारिवारिक समारोह में सबसे आत्मीय मुलाकात हुई।

धन्यवाद शिवम

10/01/2022

मोदी जी के A to Z कामों की सूची इस छात्र से सुनिए,,,
हमें गर्व है कि देश सुरक्षित हाथों में है।

01/01/2022

नववर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनायें।
नववर्ष की पावन बेला में एक नए संकल्प, नयी चेतना के साथ आगे कदम बढ़ायें और हर गाँव-हर शहर फिर से कमल खिलाएं।

25/12/2021

मैं अटलजी को उनकी जयंती पर नमन करता हूं। वे एक महान राष्ट्रवादी थे जिन्होंने एक प्रख्यात वक्ता, अद्भुत कवि, सक्षम प्रशासक और एक उल्लेखनीय सुधारवादी के रूप में अपनी पहचान बनाई।
भारत के सार्वजनिक जीवन में अटल जी के जबर्दस्त योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
अटलजी को सदर नमन!

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