19/09/2021
What is the the character required to become office bearer of Voters Party International, VPI? किस तरह के चरित्र के लोगों को वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल बनाती है अपना पदाधिकारी?
Character of VPI workers with English subtitles | Live training Program in Nagaland
29/04/2021
क्या आप इस याचिका पर अपना हस्ताक्षर करके मेरी मदद करना चाहेंगे?
Can you help me out by signing this petition?
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Democratic funding system to Political parties of all countries
19/03/2021
*देश की सरकार होती है। प्रदेश की सरकारें होती है। लेकिन वोटरों से सरकार?*
वोटरों की सरकार कहाँ है? | Where is Voters' Government? | Progress of Votership | UBI in India |
This is live coverage of speech of Mr. Vishwatma delivered in Kokarajhar district of Assam state.. The mass gathering was organized by the state unit of the ...
12/02/2021
वर्तमान में मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि दर - 1.84% विश्व में सर्वाधिक है। किंतु भविष्य में वैज्ञानिक धर्म मानने वालों की संख्या सर्वाधिक होगी। Population growth of Muslims in world is maximum 1.84%. but In future the population of Scientific Religion will be maximum.
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मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि विश्व में सर्वाधिक है। यह 1.84 प्रतिशत है। दूसरे नंबर पर सिख समाज के लोग आते हैं। जिनकी जनसंख्या वृद्धि दर 1.62% है लेकिन भविष्य में यह आंकड़ा नहीं चल पाएगा..... जानिए क्यों?
(अखंड भारत श्रृंखला, भाग 23)
अगर संपूर्ण विश्व में विभिन्न धर्मावलंबियों की जनसंख्या पर एक नजर डाली जाए, तो सबसे ज्यादा लोग ईसाई धर्म को मानते हैं । ....विश्व की कुल जनसंख्या 689 करोड़ 58 लाख 6200 में ईसाइयों का प्रतिशत 31.5 है जबकि मुसलमानों का प्रतिशत 23.11 है तथा हिंदू धर्मावलंबियों का प्रतिशत 14.98 है। विश्व में कुल 7% बौद्ध धर्म मानने वाले लोग रहते हैं।
जनसंख्या वृद्धि दर के आंकड़ों पर यदि दृष्टिपात करें तो विश्व में इस्लाम को मानने वालों की जनसंख्या वृद्धि सबसे अधिक 1.84% है, और ईसाई धर्म मानने वालों की जनसंख्या वृद्धि दर सबसे कम 1.38% है। दूसरे क्रम पर सिख समुदाय की जनसंख्या 1.62% की दर से बढ़ रही है और जैन समाज की जनसंख्या 1.57% की दर से बढ़ रही है हिंदू धर्मावलंबियों की जनसंख्या विश्व में 1.52 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। यद्यपि मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि विश्व में अन्य धर्मावलंबियों के अनुपात में सबसे अधिक है फिर भी आने वाले 1000 बर्षों में जनसंख्या वृद्धि दर के अनुसार विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या हिंदुओं की होगी और दूसरे क्रम में ईसाई होंगे। मुसलमानों की जनसंख्या तीसरे क्रम में होगी। इसमें अंतर केवल इतना आएगा कि जहां आज विश्व में सबसे ज्यादा ईसाई हैं वहां हजार साल बाद सबसे ज्यादा हिंदू होंगे।
किंतु शिक्षा के और समृद्धि के बढ़ने के साथ-साथ जनसंख्या में धर्मावलंबियों के अनुपात का जो प्रतिशत है, वह कुछ और ही भविष्यवाणी करता है। यानी जिस प्रकार शिक्षा और समृद्धि बढ़ने के कारण ईसाई समाज की जनसंख्या वृद्धि घटने लगी उसी प्रकार शिक्षा और समृद्धि बढ़ने के साथ-साथ हिंदुओं और मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि दर भी भविष्य में घटेगी और किसी भी धर्म को नहीं मानने वालों की जनसंख्या वृद्धि लगातार बढ़ेगी। इस निष्कर्ष के कारण यह संभावना ही सबसे प्रबल है कि भविष्य में सबसे ज्यादा जनसंख्या उन लोगों की होगी जो किसी धर्म में विश्वास नहीं करते होंगे, विज्ञान का ज्ञान ही उनके विश्वास का आधार होगा।
विज्ञान के ज्ञान पर विश्वास करने वालों को अगर वैज्ञानिक धर्मावलंबी कहा जाए तो इस धर्म के सबसे अधिक अनुयाई वर्तमान में चीन,रूस और यूरोप में है। भविष्य में इनकी जनसंख्या बढ़ेगी और विश्व की जनसंख्या में इनका अनुपात भी बढ़ेगा। हिंदू और मुसलमानों का बड़ा प्रतिशत भविष्य में वैज्ञानिक धर्म मानने वाला बन जाएगा। इसलिए अलग-अलग धर्मो के अनुयायियों की जनसंख्या वृद्धि के वर्तमान आंकड़े भविष्य में नहीं चलेंगे।
आगे भाग-24 में जारी....
(श्री विश्वात्मा की पुस्तक- "अखंड भारत" से साभार)
#अखंडभारत #भारतमेंसंप्रदायिकता #भारतमेंधर्मनिरपेक्षता
01/02/2021
https://youtu.be/gDXxznP626g
कृषि कानूनों पर सरकार का पक्ष। Claim of Government behind Farm laws
इस वीडियो में कृषि कानूनों के विषय में सरकार के पक्ष को समझाया गया है। सरकार का दावा कितना सही है इस बात की जांच के ल....
31/01/2021
दक्षिण एशियाई देशों की साझा करेंसी नोट के लाभ..Benifits of common currency of South Asian countries....
https://www.facebook.com/106274664586392/posts/184916123388912/
भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका... की अब बन जाएगी एक करेंसी नोट
(अखंड भारत श्रृंखला, भाग 21)
अखंड भारत की सरकार बनने के बाद व्यापारियों को केवल अखंड भारत की सरकार में ही अपना पंजीकरण कराना होगा। सभी देशों में पंजीकरण के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। दक्षिण एशियाई वतन की सरकार ही इन व्यापारियों को सुरक्षा की गारंटी भी देगी। अगर व्यापारी की पूंजी कहीं फंसती है तो दक्षिण एशियाई वतन के सभी देशों में एक ही पुलिस होगी और एक ही अदालत होगी। यह पुलिस और यह अदालतें किसी भी व्यापारी को "विदेशी" मानकर नहीं चलेंगे। उसको "अपने वतन का व्यापारी" मानकर बर्ताव करेंगे। इसकी वजह से जहां एक तरफ व्यापारियों का व्यापार फैलेगा, वहीं दूसरी तरफ सभी देशों में खरीदारी करने वालों को अपेक्षाकृत बेहतर क्वालिटी का सामान कम कीमतों पर मिल जाएगा।
दक्षिण एशियाई वतन की सरकार में पंजीकृत व्यापारियों को टैक्स भी केवल दक्षिण एशियाई सरकार को देना होगा। इसलिए टैक्स प्रणाली भी सरल होगी और उसमें भ्रष्टाचार की गुंजाइश न के बराबर होगी। एकीकृत टैक्स प्रणाली के कारण व्यापारियों को रिश्वत के दलदल में नहीं फंसना पड़ेगा। व्यापारीगण जो टैक्स दक्षिण एशियाई वतन की सरकार को देंगे उस टैक्स का अधिकांश हिस्सा पड़ोसी गांवों के समूह यानी न्याय पंचायतों को सीधे उनके खाते में जमा किया जाना है। इससे सभी गांवों का विकास होगा। जहां सड़कें नहीं हैं, वहां सड़कें हो जाएंगी। सड़कों के मरम्मत के लिए और उनके रखरखाव के लिए, साफ सफाई के लिए उनके अगल-बगल नालियां बनाने के लिए और उनके नियमित रखरखाव के लिए अखंड भारत की सरकार से नियमित पैसा पंहुंचता रहेगा। इसकी वजह से अखंड भारत के समर्थन में दक्षिण एशिया के सभी देशों के गांव गांव से मसालें जलेंगी।
दक्षिण एशिया की एक करेंसी नोट सोने में सुहागा का काम करेगी। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए डॉलर की जरूरत नहीं पड़ेगी। अपनी ही नोट से काम चल जाएगा। बीच में कमीशन खोरी बंद हो जाएगी। दक्षिण एशिया के किसी भी देश में जाओ एक ही नोट दिखाई पड़ेगी। इससे पर्यटन व्यापार भी बहुत तेजी से फैलेगा। बाजार का आकार कितना बड़ा होता है व्यापारी की आमदनी उतने ही अधिक होती है। दक्षिण एशियाई बाजार बनने के बाद बाजार का आकार बहुत बड़ा हो जाएगा और व्यापारियों की आमदनी भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी। एक नोट होने से लेन देन बहुत सुविधाजनक हो जाएगा। करेंसी जिस हद तक स्वयं शोषण का जरिया है उस हद तक शोषण से प्राप्त धन डॉलर की तलाश में अब अमेरिका नहीं जाएगा। दक्षिण एशियाई वतन की बाजार एक मजबूत बाजार बन जाएगी जैसे-जैसे इस क्षेत्र में शांति और समृद्धि आएगी उसी अनुपात में वतन के करेंसी नोट की ताकत बढ़ती जाएगी। वह समय दूर नहीं होगा जब विश्व में दक्षिण एशिया एक शक्ति का केंद्र बनकर उभरेगा।
आगे भाग-22 में जारी....
(श्री विश्वात्मा की पुस्तक- "अखंड भारत" से साभार)
#अखंडभारत #भारतमेंसंप्रदायिकता #भारतमेंधर्मनिरपेक्षता
22/01/2021
https://youtu.be/1UGdYwdp3r8
Learn farmers laws | Future of farmers protest | कैसे समझें कृषि कानून | किसान आंदोलन का भविष्य
Most detailed Video Lecture Commodities (Amendment) Act, 2020 | APMC Act 2020 | Reasons of farmers protest | far...