10/09/2026
🌟 इंसानियत की मिसाल: डॉ. रूथ फाऊ की कहानी, जिसने लाखों जिंदगियां बदल दीं
करीब 65 साल पहले की बात है। जर्मनी में एक युवा डॉक्टर थीं—डॉ. रूथ फाऊ। एक दिन लंदन में उन्होंने पाकिस्तान के कुष्ठ रोगियों की दयनीय स्थिति पर आधारित एक फिल्म देखी। उस दौर में कुष्ठ रोग को लेकर समाज में डर और गलत धारणाएं बहुत ज्यादा थीं।
फिल्म ने रूथ फाऊ के मन को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी सुरक्षित और आरामदायक जिंदगी छोड़कर जरूरतमंद मरीजों की सेवा करने का फैसला कर लिया।
🇵🇰 1960 में पहुंचीं पाकिस्तान
साल 1960 में डॉ. रूथ फाऊ कराची पहुंचीं। वहां उन्होंने देखा कि कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों को समाज से अलग-थलग कर दिया जाता था।
उन्होंने किसी बड़े अस्पताल या सुविधाओं का इंतजार नहीं किया। छोटी-सी जगह से मरीजों की सेवा शुरू की और धीरे-धीरे अपना पूरा जीवन उनके इलाज और पुनर्वास के लिए समर्पित कर दिया।
उनका सबसे बड़ा प्रयास सिर्फ इलाज करना नहीं था, बल्कि लोगों को यह समझाना भी था कि कुष्ठ रोग कोई श्राप नहीं, बल्कि एक बीमारी है और इसका इलाज संभव है।
🏥 1965 में शुरू हुआ बड़ा अभियान
डॉ. रूथ फाऊ ने जर्मनी में लोगों से सहयोग जुटाया और 1965 में Marie Adelaide Leprosy Centre (MALC), Karachi के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके बाद उनका अभियान पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा। उन्होंने दशकों तक मरीजों के इलाज, जागरूकता और पुनर्वास के लिए काम किया।
❤️ 57 साल की सेवा
डॉ. रूथ फाऊ ने लगभग 57 वर्षों तक पाकिस्तान में रहकर कुष्ठ रोग के खिलाफ काम किया। उनके अथक प्रयासों में पाकिस्तान की राष्ट्रीय कुष्ठ नियंत्रण व्यवस्था और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयास भी जुड़े रहे।
1996 में पाकिस्तान को कुष्ठ रोग के नियंत्रण में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई और उसे WHO के मानकों के अनुसार “leprosy-free” घोषित किया गया।
🕊️ सादगी भरी जिंदगी
इतना बड़ा योगदान देने के बावजूद डॉ. रूथ फाऊ ने बेहद सादा जीवन जिया। उन्होंने अपना जीवन सेवा को समर्पित कर दिया और पाकिस्तान को ही अपना घर मान लिया।
2017 में उनके निधन पर पाकिस्तान में उन्हें पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
🌍 सबसे बड़ी सीख
डॉ. रूथ फाऊ की कहानी हमें याद दिलाती है कि इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती।
न देश की सीमा,
न भाषा की दीवार,
न धर्म का भेद—
जरूरतमंद इंसान की मदद सबसे बड़ी इंसानियत है।
एक डॉक्टर ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा उन लोगों के लिए समर्पित कर दिया, जिनसे समाज दूरी बनाता था। यही वजह है कि आज भी डॉ. रूथ फाऊ को सेवा, करुणा और मानवता की मिसाल के रूप में याद किया जाता है।
💬 डॉ. रूथ फाऊ की कहानी से आपको क्या सीख मिलती है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।
📍 अपना लार | लार, देवरिया
#अपनालार #लार #देवरिया