जिन्दगी पल-पल ढलती है,
जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है...
शिकवे कितने भी हों हर पल,
फिर भी हँसते रहना...क्योंकि
यह जिन्दगी जैसी भी है,
बस एक ही बार मिलती है।
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Hindi kavita - Hindi Poetry
मेरी पसंदीदा कविताओं का संग्रह (Collection Of My Favourite Poems) Please send me more poems at [email protected]
मैथिलीशरण गुप्त की सुन्दर रचना
तप्त हृदय को , सरस स्नेह से,
जो सहला दे , मित्र वही है।
रूखे मन को , सराबोर कर,
जो नहला दे , मित्र वही है।
प्रिय वियोग ,संतप्त चित्त को ,
जो बहला दे , मित्र वही है।
अश्रु बूँद की , एक झलक से ,
जो दहला दे , मित्र वही है।
सभी मित्रों को मित्रता दिवस की हार्दिक बधाई।
23/10/2021
28/09/2021
Hindi Kavita
31/08/2021
Jai sri krishna janmashtami
31/08/2021
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