भाग्योदय फाउंडेशन
भारत भाग्योदय, वैश्विक अभ्युदय, प्रकृति एवं मानवता को समर्पित एक आध्यात्मिक एवं सामाजिक संगठन।
05/06/2026
*ननावीर्या ओषधीर्या बिभर्ति पृथिवी नः प्रथतां राध्यतां नः*।।(अथर्ववेद)
अर्थ: विभिन्न औषधियों और गुणों से युक्त यह पृथ्वी हमारा पालन-पोषण करती है। यह फले-फूले और हमारा कल्याण करे।
*माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः*।
(अर्थ: यह पृथ्वी मेरी माता है और मैं इसका पुत्र)। ध्यान रहे, पुत्र में पुत्री भी सम्मिलित है।
*पुन्येन अध्युष्ट पुन्या पृथ्वी पुन्येन संतु नः*।
(हमारे अच्छे कर्मों से पृथ्वी की रक्षा हो और हमारे अच्छे कर्मों की रक्षा जल एवं वायु से हो।)
आज विश्व पर्यावरण दिवस पर हम सब प्रकृति और पर्यावरण के प्रति इन वैदिक प्रार्थनाओं के भाव से प्रकृति रक्षा के प्रति संकल्पित और समर्पित हों।
आप सभी को सार्थक विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
*विवाह कामवासना की तृप्ति मात्र नहीं है* विषय पर, आज आप ऋषिवर्य पूज्यश्रेष्ठ आचार्य श्रीराम शर्मा की पुस्तक *गृहलक्ष्मी की प्रतिष्ठा* में पृष्ठ-3 पर प्रकाशित, भाग्योदय फाउंडेशन की 1983वीं प्रस्तुति कृपया सुनना चाहेंगे।
*हमारा लक्ष्य:-*
भारत भाग्योदय।
वैश्विक अभ्युदय।।
05/06/2026
https://youtu.be/MZZEbi_ZvnQ?si=GrEcxZq6x1djYTMe
*नमस्तेस्तु। 05 जून 2026
*।। आज शुक्रवार का भाग्योदय विचार।।*
उद्धृत पुस्तक:-
*गृहलक्ष्मी की प्रतिष्ठा*
लेखक: पं.श्रीराम शर्मा आचार्य।
लोकहित में 1983वीं कड़ी।
तीन मिनट का सन्देश सुनें।
इसे शेयर कर ज्ञानयज्ञ करें।
प्रस्तुति : भाग्योदय परिवार।
प्रस्तोता : राम महेश मिश्र।
*Please Like, Share and Subscribe it in the interest of our Country & World Society.*
*विवाह कामवासना की तृप्ति मात्र नहीं है*विषय पर युगऋषि विचार श्रृंखला की 1983वीं भाग्योदय प्रस्त Enjoy the videos and music you love, upload original content, and share it all with friends, family, and the world on YouTube.
भाग्योदय फाउंडेशन की 'चरैवेति चरैवेति श्रृंखला' की 1252वीं कड़ी में आज 05.06.2026 की विनम्र टिप्पणी:-
*दिल्ली अग्निकाण्ड में कई लोगों की जान बचाने वाले भाई रियाजुद्दीन मंसूरी की भाग्योदय फाउंडेशन सराहना करता है।*
*हमारा लक्ष्य:-*
भारत भाग्योदय।
वैश्विक अभ्युदय।।
*माध्यमिक शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी रहे श्री राजीव कुमार मिश्र का भाग्योदय कार्यालय में शुभागमन सुखद। भाग्योदय परिवार के हाथ मजबूत हो रहे हैं।*
*हम 5 भाई हैं, कहने की सदा से आदत रही। अब 3 रह गए। प्रभु का सब पर संरक्षण बना रहे।*
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*अनुज राम नरेश मिश्र को गए आज एक बरस हो गया। हम पांच भाइयों में चौथे नम्बर के भाई थे वह। आज मन बहुत भारी रहा। प्रिय राम नरेश! हम बड़े स्नेहसिक्त भाव और दु:खी मन से तुम्हें याद करते हैं। बड़ी पीड़ा है कि तुम्हारी पारिवारिक जिम्मेदारियां तुम्हारे पीछे छूटी रहीं। प्रभु परिवार को शक्ति दें और समुचित समझ भी।*
भाई! जून 2025 में तुम्हारे जाने के बाद तन और मन इतना व्यथित था, जिसे हम शब्द नहीं दे पा रहे थे। मन तब हल्का हो पाया, जब मेरे मानस पटल पर बीती सदी के सन 1973 में पूज्य पिताजी पर आए जानलेवा संकट के समय का, तुम्हारे बचपन का, पहला चित्र उभरा और उसे आधार बनाकर लैपटॉप पर मेरी उंगलियां चलीं और तब से लेकर अब तक की सारी स्मृतियां 15 पृष्ठ में लिख गईं। उन यादों और जीवन यात्रा को हमने अपने माता-पिता से उत्पन्न सभी पुत्र-पुत्रियों और उनके अंशजों को भेजा।
*आज भाई की प्रथम पुण्यतिथि पर हम उन्हें सप्रेम याद कर रहे हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनकी जीवात्मा को शांति और सद्गति प्रदान करें तथा उनके पुत्र और पुत्री व मेरी अनुजवधू का जीवन पथ कंटकविहीन बने। प्रियवर! तुम्हें स्नेहपूर्ण भावांजलि। स्वजनों-मित्रों से हमारी प्रार्थना, भाई के लिए आप भी अपनी शुभकामना आत्मार्पित करें, राम नरेश जी नीचे के चित्र में सबसे बाएं दिख रहे हैं। द्वितीय नम्बर के भाई, मेरे अग्रज, श्री छोटेलाल मिश्र जी 2024 में हम सबको छोड़कर चले गए थे, वह इस चित्र में दाएं से दूसरे क्रम पर दृष्टिगोचर हो रहे हैं। हम 5 भाई और 2 बहिनें हैं, यह बताने की सदा से आदत रही, अब 3 भाई कहते हुए प्रायः जुबान लड़खड़ा जाती है। प्रार्थना! प्रभु सभी को सुखी और स्वस्थ रखें।*
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