आज आपको जो भी समाचार प्राप्त हो रहा है, वो सत्य है या प्रायोजित है पता नहीं लग सकता है।कौनसा पत्रकार किस के लिए फील्डिंग बिछा रहा है या कौन बोलिंग कर रहा है या कोई बहुत बड़ा सेक्युलर बन कर अपना नैरेटिव हमारे दिमाग में भर रहा है पहचानना बहुत मुश्किल है। जयपुर डायलॉग में आए अतिथि की बात सुनिए।
एकल विचार प्रवाह
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भाई मंच से सिर्फ नाम रहेगा अल्लाह का नारा लग सकता है पर चावल पर राम नाम लिखने वाला इंसान प्रदर्शन स्थल पर बैठना सांप्रदायिक हो जाएगा। ये एक तथाकथित सेकुलर मूल्यों वाला आंदोलन है।अभी तो मात्र मौखिक रूप से मना किया जा रहा है मान लीजिए हिंसक भीड़ आ गई तो ये बेचारे क्या करेंगे।
साभार आप इण्डिया
18/07/2026
कुणाल कामरा के समर्थक पूछ रहे है कि राम जी को सीता का पति कहना कहां से गलत हो गया। राम जी को हमेशा सीता का पति कहा गया है।जय श्री राम तो रामानंद सागर और बीजेपी का नारा है। इनके गुरु जी राहुल गांधी भी एक बार कह चुके है की जय श्री राम में सीता जी कहां है ? यधपि उन्होंने माता सीता के साथ जी नहीं लगाया था। जय श्री राम तो महिला विरोधी नारा है उन्हे यह नहीं पता की श्री ही सीता जी है। फिर आगे भद्दे ढंग से अपनी पोस्ट में पूछ रहे है की क्या राम सीता के पति नहीं थे जो तुम लोगो को इतनी आपत्ति है । निश्चित रूप से हम लोग हमेशा सियावर राम चंद्र की जय का उद्घोष करते रहे है पर हर बात कहने का एक ढंग होता है। समय रैना ने भी जो बाते अपने माता पिता के संबंधों के विषय में कही थी, वो भी सत्य थी फिर भी सभ्य समाज ने उसे स्वीकार नहीं किया । किसी से ये पूछो तुम्हारे बाप का नाम क्या है? तुम्हारे पिता जी का क्या नाम है ? क्या अंतर ही नहीं है? किसी से भोजन करने के लिए कहना और खाना ठूसने के लिए कहने में अंतर ही नहीं है। हद है मूर्खता की पर अन्य विधर्मियों या विचारधाराओं के लिए इन लोगो को ऐसे मजाक नहीं सूझते। फिर कहेंगे भगवान हनुमान जी को पतंग बनाने से तुम्हारी भावनाएं नही आहत होती भगवान हनुमान जी को गाड़ी के आगे घुमाने से तुम्हारी भावनाएं नहीं आहत होती। हिंदू धर्म में भगवान का प्रतिरूप बनाया जाता है, राम लीला रखी जाती है। कई ऐसे कार्यक्रम रखे जाते है जहां भगवान का प्रतिरूप रहता है। तो हम उसका उसी रूप में सम्मान करते है ।यदि हनुमान जी की कृति पतंग रूप में है या भगवान गाड़ी के आगे चल रहे है तो किसी ने सोचा होगा हमसे आगे भगवान चले। विधि में एक कहावत है mens Rea आपराधिक कानून के अनुसार, किसी व्यक्ति को तब तक दोषी नही ठहराया जा सकता जब तक उसके बुरे,अपराधिक इरादे न हो तो कुणाल कामरा जैसे लोग एक बार नही हमेशा हिंदू देवी देवताओं का खास तौर पर भगवान राम का उपहास उड़ा चुके है और स्वीकार भी करते है की हम किसी और पंथ का मजाक नहीं उड़ा सकते। तो सीधी सी बात है किसी अन्य का मजाक बनाने में सर तन से जुदा हो जाएगा यहां हिंदू ही कुणाल कामरा का बचाव करने निकल पड़ेंगे।
पहले काकरोच यह तय कर ले कि उनका विरोध किस से है? भारत की शिक्षा व्यवस्था से, नीट एग्जाम के लीक होने से, भारत सरकार से, आरएसएस से, भाजपा से, हिंदुओ से, भारतीय संस्कृति से। फिर अपने आंदोलन में सबका साथ मांगे। अब इन देवी जी को देखिए इन्हे भारत माता से ही समस्या है?
भारत में अगर आपको सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी इतिहास विषय के साथ बनना है तो रोमिला थापर, राम चंद्र गुहा इरफान हबीब जैसे वामपंथी गांधी दरबार के इतिहासकारों को आपको पढ़ना ही होगा। यह अलग बात है की रोमिला थापर जैसे इतिहासकारों ने वर्तमान समय में अपनी इतिहास की जानकारी की स्वयं ही पोल खोल दी। अब गांधी दरबार के एक इतिहासकार राहुल गांधी को अयोग्य बता रहे है। ये कैसे हो गया?
हिंदुओ को अपने देश में ही अपने धर्म के लिए संघर्ष करना पड़ता है, कोई कैसे भी अपने मजहब पंथ विचारधारा का प्रचार कर सकता है, पर हिंदू नहीं। अन्य सभी के लिए हिंदुस्तान सेकुलर हो जाता है किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े ही है। पर हिंदू अगर अपने धर्म का प्रचार करने लगे तो सांप्रदायिक है उसे पुलिस सरकार का भय दिखाया जाएगा। हिंदुस्तान का बटवारा हो गया जिन्हे जाना था वो पाकिस्तान बांग्लादेश चले गए जो मुस्लिम यहां रह गए वो अहसान के साथ रहे देखो हमने तुम्हे चुना। पर बेचारा हिंदू क्या करे उसके पास तो कोई विकल्प ही नहीं है उसका सब कुछ यही है। जीना यहां मरना यहां इसके सिवा जाना कहां।
भैया एक काकरोच है, जब से 18 साल के हुए तब से पीसीएस की तैयारी कर रहे है। प्रयागराज में रह रहे है पर उपराष्ट्रपति का नाम नहीं जानते तो क्या हुआ? तैयारी तो कर रहे है न। बनना भी प्रशासनिक अधिकारी चाहते है, बात तो सही है यह सरकार की नाकामी है जो तैयारी करने वाले प्रत्येक छात्र को जो प्रयागराज आता है उसे प्रशासनिक अधिकारी नही बनाती 😂😂
काकरोच पार्टी का आंदोलन तथाकथित सेकुलर लिबरल मापदंडों को नित्यप्रति पूरा कर रहा है।राम का नाम लेना गुनाह है पर कुणाल कामरा के अनुसार सीता जी के पति कह कर उन्हे संबोधित किया जा सकता है । प्रकाश राज जय श्री राम कैसे कह सकते है दिन रात चर्च में हाजरी लगाते है पर अल्लाह का नाम लेना तो ऐसे आंदोलनों की प्रथम शर्त होती है तो सबसे पहले पूरी कर ली गई है।
बताओ जरा पढ़े लिखे लोग डिंपल यादव और डिंपल कपाड़िया में अंतर नहीं कर पाए । बेचारे पूरा दिन फ्री रहते है दिन भर रील ,फिल्मे ott आदि देखते है तो हर समय सिने तारिकाएं ही दिमाग में रहती है।
कुणाल कामरा हमेशा हिंदू विरोधी रहा है, क्योंकि वो तथाकथित सेकुलर है। सेकुलर होने की पहली पहचान ही हिंदू विरोधी होना है। जिस तरह इसने भगवान राम को एक परिहास का विषय बनाया क्या किसी अन्य पंथ महजब के दूत का भी बना सकता था। इन लोगो को सिर्फ अपना एजेंडा सेट करना है जो पिछले 12 साल से नहीं कर पा रहे है। केजरीवाल, ममता अखिलेश राहुल सब भगवान राम से लड़ कर देख लिए अब राम नाम की माला जप रहे है। चलो तुम्हारा भी नंबर आयेगा।
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