DrMukul Chaturvedi
Vice President-State Council of Higher Education Uttar Pradesh
08/04/2024
फिल्म का सबसे शानदार सीन कौन सा है?
जो आपको अंदर तक हिला देगा
हफ्तों तक आपको याद रहेगा।
ये काला पानी के अमानवीय अत्याचार वाला सीन नहीं है
वो तो आपको पता ही है काला पानी में किस हद तक प्रताड़ित किया जाता था। यह वो सीन भी नहीं है जब वर्षों बाद पका हुआ भोजन देखकर सावरकर भावुक हो जाते हैं। या जब वर्षों बाद वो पहली बार पैन पकड़ते हैं।
जब सावरकर (रणदीप हुड्डा) को काला पानी की सज़ा होती है तो वहां सावरकर को काला पानी से नहाने के लिए कहा जाता है सावरकर काला पानी से नहाने के लिए मना करते हैं
इसपर सिपाही सावरकर के सीने में लात मारते हुए कहता है साला गंगाजल से निलाहएंगे
वो सीन आपको सीन आपको अन्दर तक हिला देगा
एक और सीन जहां सावरकर प्यास से व्याकुल नल से टपक रहे बूंद बूंद पानी की तरफ़ जते हैं इसपर सिपाही सावरकर को प्रताड़ित करते हुए कहता है
मूत पिलाएंगे मूत
ये सीन आपको झकझोर देगा
एक वो सीन है जब सावरकर 14 साल की जेल के बाद रत्नागिरी जेल से पहली बार बाहर निकलते हैं।
एक वो सीन आपको अंदर तक तोड़ देता है जब वो जेल से बाहर निकल रहे होते हैं तब पीछे से भीड़, ढोल और सावरकर जिंदाबाद की नारे सुनाई दे रहे होते हैं ऐसा लगता है कि जेल के उस पार सैकडों लोग इस क्रांतिकारी के छूटने का इंतजार कर रहे होंगे।
लेकिन जब जेल का गेट का खुलता है
बाहर एक आदमी नहीं होता
एक भी नहीं
सिर्फ उनके बड़े बाई उन्हें जेल से लेने के लिए आए होते हैं
और कोई नहीं होता
उस सीन को देखकर महसूस होता है
पानीपत में खड़े सदाशिवराव भाऊ भी अकेले थे
1857 में अंग्रेजों से लड़ते तात्या टोपे भी अकेले थे
और 14 साल की जेल काटकर बाहर निकले सावरकर भी अकेले ही हैं
यह समाज ही ऐसा है
जो अपना सबकुछ इसके लिए दांव पर लगाता है
समाज उसे ही अकेला छोड़ देता है
इसलिए संघ सामूहिकता पर चलता है
जो कराना है पूरे समाज को खड़ा करके सारे समाज से कराना है
ताकि फिर कोई सावरकर परिवार की तरह
सब कुछ लुटाकर भी
अकेले, निसाह न रह जाए।
रणदीप भाई ने सावरकर के किरदार में ख़ासी मेहनत की है फ़िल्म में रणदीप अपने किरदार इस तरह डूबे हुए नज़र आते हैं कि आपको सावरकर ही लगते हैं स्वतन्त्र वीर सावरकर फ़िल्म को डायरेक्ट करना प्रड्यूसर का कार्यभार संभालना और वीर सावरकर का किरदार भी निभाना इन तीनों कार्यों में रणदीप भाई ने बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत मेहनत की है और उनकी मेहनत फिल्म वीर सावरकर में साफ़ झलकती है।
अगर सच कहूं तो फिल्म वीर सावरकर के शो में हाउसफुल से केवल 20 25 दर्शक कम हैं
आप इस फिल्म को 70% ऑडियंस के साथ देख सकते हैं ये फिल्म देखकर आप बिल्कुल भी निराश नहीं होंगे प्लीज़ सभी सिनेमा प्रेमी रणदीप हुड्डा की फिल्म स्वतंत्र वीर सावरकर को सुपरहिट कराने में भागीदार बनें और सिनेमा हॉल जाकर यह फिल्म जरूर देखें।।
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08/04/2024
बॉलीवुड स्टार रणदीप हुड्डा इन दिनों 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' फिल्म के वजह से चर्चाओं में हैं। रणदीप की यह फिल्म 22 मार्च को रिलीज़ हुई हैं। इस फिल्म से रणदीप ने निर्देशक के तौर पर बॉलीवुड डेब्यू भी किया हैं। फिल्म में एक्टिंग और निर्देशन दोनों ही रणदीप ने किया हैं। रणदीप हुड्डा की यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित हैं। फिल्म में वीर सावरकर के किरदार में है रणदीप। जानकर हैरानी होगी कि इस फिल्म के लिए रणदीप हुड्डा ने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन से लेकर मगरमच्छों के बीच शुटिंग भी किया था। रणदीप ने फिल्म को बनाने में बहुत मेहनत की थी। रिपोर्ट के मुताबिक सावरकर के तरह दिखने के लिए रणदीप ने 18 किलों वजन घटाया था। मगरमच्छों के बीच भी शुटिंग करी थी। हाल ही में रणदीप ने एक इंटरव्यू में फिल्म के शुटिंग के दौरान की चुनोतियों को लेकर बात की थी। इस दौरान उन्होंने मगरमच्छों के साथ शुटिंग करने का किस्सा शेयर किया। रणदीप हुड्डा ने खुलासा किया कि "हमने काला पानी अंडमान में शूटिंग की और वह मगरमच्छों से भरा हुआ था। मेरे चारों ओर पांच गोता लगाने वाले थे। उनको बोला गया था कि मुझे तैरना नहीं आता हैं। लेकिन मैं तैर रहा था और वापस आ रहा था।" इसके आगे रणदीप ने कहा कि "मुझे तैरता देखकर गोता लगाने वालों ने कहा अरे तुम्हें तो तैरना आता है, तुमने हमें क्यों बुलाया। तो मैंने उनसे कहा- आप यहां मगरमच्छों के लिए आए थे भाई।"
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06/04/2024