Manjeet Yadav

Manjeet Yadav

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Social Worker | Youth Leader | Entrepreneur | Public Voice
President - Mahila Chetna Samiti
Director- MDN INDIA PRIVATE LIMITED
Director - MYGT Services Pvt Ltd
Director - Manjeet Jan Kalyan Foundation

03/06/2026

पप्पू यादव के बयान पर मैडम जी को बहुत आपत्ति हुई, और किसी भी महिला को ऐसी बातों पर आपत्ति होनी भी चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि जब किसी नेता पर अश्लीलता या महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले विवादों के आरोप लगते हैं, तब उन्हीं नेताओं के साथ मंच साझा करते हुए सहजता और आत्मीयता क्यों दिखाई जाती है?

यदि वास्तव में महिला सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो फिर सिद्धांत और व्यवहार में भी वही प्रतिबद्धता दिखनी चाहिए। महिला सम्मान केवल भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे लोगों से दूरी बनाकर भी दिखना चाहिए जिनके आचरण पर गंभीर सवाल उठते रहे हों।

महिलाओं के सम्मान की लड़ाई किसी एक वर्ग, पार्टी या परिवार की महिलाओं तक सीमित नहीं हो सकती। सम्मान हर महिला का अधिकार है और उस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। कथनी और करनी में अंतर रखने वाले नेताओं और राजनीतिक चेहरों से सवाल पूछना लोकतंत्र में जनता का अधिकार है।

महिला सम्मान यदि वास्तव में एक मूल्य है, तो वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए, चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।

#महिला_सम्मान
#दोहरे_मापदंड
#राजनीति_और_नैतिकता
#नारी_गरिमा
#जनता_पूछ_रही_है
#कथनी_करनी
#सवाल_तो_बनता_है
#समान_मापदंड


02/06/2026
02/06/2026

बबराला स्थित YARA फर्टिलाइज़र प्रबंधन और संबंधित प्रशासन से कुछ महत्वपूर्ण सवाल:

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उद्योग विकास के नाम पर स्थापित इस प्लांट से स्थानीय जनता को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जबकि पर्यावरण और जल संसाधनों पर इसका प्रभाव सीधे आसपास के गांवों को झेलना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ सवालों के जवाब सार्वजनिक होने चाहिए—

1. जल दोहन पर जवाब दें YARA फर्टिलाइज़र द्वारा प्रतिदिन कितना भूजल (Ground Water) निकाला जा रहा है? इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक की जाए।

2. जल संरक्षण का हिसाब दें हर वर्ष कंपनी कुल कितना भूजल उपयोग करती है और उसके मुकाबले रेनवॉटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से कितना पानी वापस जमीन में रिचार्ज किया जाता है? साथ ही, परिसर में कितने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर कार्यरत हैं?

3. भूजल की गुणवत्ता पर क्या अध्ययन हुआ? इलाके में लगातार भूजल स्तर गिरने और फ्लोराइड की अधिकता की शिकायतें सामने आती रही हैं। क्या कंपनी या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा आसपास के गांवों के पानी की गुणवत्ता की जांच कराई गई है? यदि हां, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?

4. स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव की जिम्मेदारी कौन लेगा? यदि फ्लोराइड प्रदूषण और जल गुणवत्ता में गिरावट के कारण बच्चों और ग्रामीणों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, तो क्या कंपनी ने इसके अध्ययन, उपचार या रोकथाम के लिए कोई विशेष पहल की है?

5. अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति क्या है? YARA फर्टिलाइज़र से निकलने वाले औद्योगिक अपशिष्ट (Effluent) का निस्तारण कैसे किया जाता है? क्या प्लांट में आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) पूरी क्षमता से संचालित हैं? उनके परीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

6. जल स्रोतों के संरक्षण में योगदान कितना है? स्थानीय तालाबों, जलाशयों, प्राकृतिक जलधाराओं और अन्य जल स्रोतों के पुनर्जीवन एवं संरक्षण के लिए कंपनी और प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं? क्या कोई ठोस योजना जमीन पर दिखाई देती है?

क्षेत्र की जनता जानना चाहती है कि उद्योग से होने वाले लाभ और पर्यावरणीय लागत के बीच संतुलन कैसे बनाया जा रहा है। विकास तभी सार्थक है जब वह स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, जल और पर्यावरण की कीमत पर न हो।

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01/06/2026

योगी आदित्यनाथ सरकार का डर देखिए!

पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर राज्यसभा सांसद संजय सिंह प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों के साथ एक बंद कमरे में बैठक कर रहे थे, लेकिन वहां भी पुलिस पहुंचा दी गई।

सवाल यह है कि आखिर सत्ता इतनी असहज क्यों है?

क्या छात्रों की आवाज़ सुनना अपराध है?
क्या पेपर लीक पर सवाल उठाना गुनाह है?
क्या बेरोजगार युवाओं के भविष्य की बात करना व्यवस्था के लिए खतरा बन गया है?

लगता है सरकार को भ्रष्टाचार से नहीं, भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली आवाज़ों से डर लगने लगा है।

उन्हें लगता है कि हर सवाल का जवाब पुलिस है, हर विरोध का जवाब एफआईआर है और हर असहमति का जवाब गिरफ्तारी है।

लेकिन इतिहास गवाह है कि सत्ता की ताकत पुलिस, लाठी और मुकदमों से नहीं, जनता के विश्वास से चलती है।

शायद उन्हें यह भ्रम है कि जिस तरह वे विरोध की आवाज़ों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, उसी तरह अपने राजनीतिक पतन की नियति का भी किसी दिन स्पेशल फोर्स लगाकर एनकाउंटर करा देंगे।

संजय सिंह को साधुवाद कि वे प्रतियोगी छात्रों के साथ खड़े हैं और उनकी आवाज़ बनने का प्रयास कर रहे हैं।

ऐसे डरे हुए तंत्र के लिए जनकवि गोरख पाण्डेय की पंक्तियाँ आज भी प्रासंगिक हैं—

"वे डरते हैं
किस चीज़ से डरते हैं वे
तमाम धन-दौलत,
गोला-बारूद, पुलिस-फ़ौज के बावजूद?
वे डरते हैं कि एक दिन
निहत्थे और ग़रीब लोग
उनसे डरना बंद कर देंगे।"

जब जनता सवाल पूछना शुरू कर देती है, तब सबसे बड़ी ताकतवर सरकारें भी असहज हो जाती हैं।










01/06/2026

भारत में बड़ी संख्या में लोग मुस्लिम कैसे बने?

यह विषय ऐतिहासिक, सामाजिक और धार्मिक रूप से काफी जटिल है। इसे एक ही कारण—"डर" या "तलवार"—से समझना सही नहीं होगा। भारत में इस्लाम का प्रसार कई अलग-अलग कारणों से हुआ:

1. सूफी संतों का प्रभाव

भारत में इस्लाम केवल आक्रमणकारियों के माध्यम से नहीं आया।

अनेक क्षेत्रों में सूफी संतों ने प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश दिया, जिससे लोगों ने स्वेच्छा से इस्लाम अपनाया।

2. जाति व्यवस्था और सामाजिक भेदभाव

इतिहासकारों का मानना है कि समाज के कुछ वंचित और निम्न समझे जाने वाले वर्गों को सामाजिक सम्मान नहीं मिलता था।

ऐसे लोगों में से कुछ ने ऐसी व्यवस्था की तलाश की जहां उन्हें अपेक्षाकृत अधिक समानता महसूस हो।

3. राजनीतिक और आर्थिक कारण

कुछ कालखंडों में मुस्लिम शासकों के अधीन प्रशासनिक, सैन्य या आर्थिक अवसरों के कारण भी लोगों ने धर्म परिवर्तन किया।

हालांकि यह पूरे भारत में समान रूप से नहीं हुआ।

4. विवाह और सामाजिक मेलजोल

कई क्षेत्रों में विवाह और स्थानीय सामाजिक संपर्कों के माध्यम से भी मुस्लिम समुदाय का विस्तार हुआ।

5. कुछ स्थानों पर दबाव और बल प्रयोग

इतिहास में ऐसे उदाहरण भी मिलते हैं जहां कुछ शासकों ने धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला या प्रोत्साहन दिया।

लेकिन अधिकांश इतिहासकार मानते हैं कि केवल बलपूर्वक धर्म परिवर्तन से आज की विशाल मुस्लिम आबादी को पूरी तरह नहीं समझाया जा सकता।

सरनेम क्यों नहीं बदले?

भारत में बहुत से मुस्लिम परिवार आज भी अपने पूर्वजों के जातीय या क्षेत्रीय उपनाम रखते हैं।

उदाहरण:

अंसारी

कुरैशी

मनिहार

सैफी

चौहान

तोमर

राठौर

मलिक

गुर्जर

त्यागी

इनमें से कई उपनाम इस बात का संकेत देते हैं कि उनके पूर्वज स्थानीय भारतीय समुदायों से थे जिन्होंने किसी समय इस्लाम स्वीकार किया था। धर्म बदला, लेकिन पारिवारिक या सामाजिक पहचान पूरी तरह नहीं बदली।

समाज की क्या कमियां रहीं?

कुछ इतिहासकार और समाजशास्त्री मानते हैं कि:

जातिगत भेदभाव

छुआछूत

सामाजिक असमानता

शिक्षा का सीमित प्रसार

कुछ वर्गों का सामाजिक बहिष्कार

ऐसे कारक थे जिन्होंने कुछ लोगों को वैकल्पिक धार्मिक पहचान अपनाने के लिए प्रेरित किया।

निष्कर्ष

भारत में मुस्लिम आबादी का बढ़ना केवल "तलवार" या केवल "स्वेच्छा" की कहानी नहीं है। वास्तविकता कई कारणों का मिश्रण है—सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक। इतिहास को समझने के लिए एक पक्षीय दृष्टिकोण के बजाय सभी कारणों को साथ देखकर समझना अधिक उचित होता है।

01/06/2026

आपसी सहमति...से प्रेमी के साथ घर से भागी प्रेमिका ने बदला बयान अब 376,अपहरण में प्रेमी पर आरोप आफत में जान
सोनभद्र के रहने वाले कल्लू का अपने ही गांव की रहने वाली बिपाशा से पिछले 8 साल से प्रेम प्रसंग था,, बिपाशा की इस साल दिसंबर में शादी थी. लड़की ने कल्लू से कहा जानू मैं उस लड़के से शादी नहीं करूंगी अगर तुम मुझसे सच्चा प्यार करते हो तो मुझे भगा ले चलो
बेचारा अभागा प्रेमी, मरता क्या ना करता, लड़की को भगा ले गया और मंदिर से शादी भी कर ली
लड़की के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने अब दोनों को खोज निकाला,, लड़की ने अपने पिता की खूंखार शक्ल देखी और तुरंत ही अपना बयान बदल दिया
लड़की ने बयान में बताया कि कल्लू उसको जबरन ब्लैकमेल करके ले गया था, फिर ब्लैकमेल करके ही शादी की और जबरन उसके साथ संबंध भी बनाएं
अब कल्लू 376 में जेल जा रहे हैं। ❤️❤️❤️❤️🤣🤣🤣🤣🤣🤣 इसको और बेहतर लिखो

> 8 साल का प्रेम प्रसंग, साथ भागकर शादी, और फिर पुलिस के सामने बदला बयान!

सोनभद्र के कल्लू और बिपाशा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती।

बताया जा रहा है कि दोनों कई वर्षों से रिश्ते में थे। शादी कहीं और तय होने के बाद दोनों घर से चले गए और मंदिर में विवाह कर लिया। लेकिन जब पुलिस ने दोनों को बरामद किया और परिवार सामने आया, तो लड़की का बयान बदल गया।

अब वही प्रेम कहानी अपहरण, जबरन शादी और दुष्कर्म के आरोपों तक पहुंच गई है।

इस मामले की सच्चाई क्या है, यह अदालत और जांच एजेंसियां तय करेंगी। लेकिन इतना जरूर है कि ऐसे मामलों में एक बयान किसी को प्रेमी से आरोपी और दूसरे को प्रेमिका से पीड़िता बना देता है।

प्यार की कहानी कब कानूनी लड़ाई में बदल जाए, आज के दौर में इसका अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है।

सबक: भावनाओं में बहकर लिया गया फैसला कभी-कभी जिंदगी का सबसे महंगा फैसला साबित हो सकता है।

ध्यान रखें कि किसी चल रहे मामले में यह मान लेना कि आरोप झूठे हैं या सच हैं, उचित नहीं होता। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करता है।

31/05/2026

पागल नहीं हैं हम

31/05/2026

🚨 जब तेल महंगा होता है, तब जनता याद आती है...
और जब तेल सस्ता होता है, तब जनता को भूल क्यों जाते हैं? 🤔

क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दामों में राहत का इंतजार जारी है।

जनता का सीधा सवाल है—

⛽ जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो कीमतें बढ़ जाती हैं,
⛽ लेकिन जब तेल सस्ता होता है तो राहत क्यों नहीं मिलती?

आम आदमी हर दिन महंगाई की मार झेल रहा है।
दूध, सब्जी, गैस, परिवहन—हर चीज़ की लागत ईंधन से जुड़ी है।

अगर महंगाई का बोझ जनता उठाती है, तो सस्ते तेल का फायदा भी जनता को मिलना चाहिए।

📢 सवाल पूछना लोकतंत्र में नागरिक का अधिकार है।

आपकी क्या राय है?
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने चाहिए?



















#भारत_की_जनता
#महंगाई
#पेट्रोल_डीजल
#जनता_का_सवाल

#ट्रेंडिंग
#वायरल_पोस्ट

31/05/2026

"मुद्दा केवल एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि उस कट्टर और हिंसक सोच का है जो समाज में नफरत, डर और असुरक्षा पैदा करती है। ऐसी मानसिकता चाहे किसी भी धर्म, जाति या विचारधारा के व्यक्ति में हो, उसका कानून के दायरे में सख्ती से इलाज होना चाहिए।

यही वजह है कि बहुत से लोग सरकार की कई कमियों के बावजूद उसका समर्थन करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और कट्टरपंथ के खिलाफ सख्त कार्रवाई अन्य सरकारों में उतनी प्रभावी नहीं हो पाती।

गाजियाबाद जैसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि किसी भी प्रकार की चरमपंथी या हिंसक सोच को समय रहते रोकना जरूरी है। लोकतंत्र में मतभेद स्वीकार्य हैं, लेकिन हिंसा, कट्टरता और कानून हाथ में लेने की मानसिकता कभी स्वीकार्य नहीं हो सकती।

देश को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि कानून सब पर समान रूप से लागू हो और अपराधी की पहचान उसके धर्म, जाति या राजनीति से नहीं, बल्कि उसके अपराध से की जाए।"

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