01/03/2026
चंद्र ग्रहण 3-3-2026
सूतक 9:40 सुबह से ग्रहण प्रारम्भ 15:20 से लेकर ग्रहण समाप्ति काल 18:47 तक.
#चंद्रग्रहण2026 #चंद्रग्रहण #एस्ट्रोलॉजी
Mr Ashwani Jain is online prominent Astrologer and expert Gemstone adviser having satisfied clients
01/03/2026
चंद्र ग्रहण 3-3-2026
सूतक 9:40 सुबह से ग्रहण प्रारम्भ 15:20 से लेकर ग्रहण समाप्ति काल 18:47 तक.
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02/05/2022
|| अक्षय तृतीय की सबको हार्दिक शुभकामनायें ||
3-5-2022 दिन मंगलवार को अक्षय तृतीय का त्यौहार मनाया जा रहा है आपको बता दूँ इस अक्षय तृतीया के दिन ज्यादातर ग्रहों का स्वराशि होना एक बहुत अच्छा योग है इस योग मे आप इस दिन व्यापार मे पैसा लगा सकते है या नया व्यपार भी शुरू कर सकते है, प्रॉपर्टी, कपड़ा और सोना-चांदी और बर्तन भी ले सकते है जो की अति शुभ माना जाता है और ऐसा कहते है की इस दिन खरीदारी करने से या नया काम शुरू करने से लम्बे समय तक शुभ परिणाम मिलते है |
ध्यान दें -व्यापार और प्रॉपर्टी जिसके नाम से सही हो कुंडली के मुताबिक वही ही इन्वेस्टमेंट करें |
|| जय श्री कृष्णा ||
#अक्षयतृतीय #3मई2022अक्षयतृतीय
18/12/2021
17/12/2021
त्रिदेवों का एकमात्र स्वरूप - दत्तात्रेय
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18 दिसंबर, 2021 (शनिवार)
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मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान दत्तात्रेय की पूजा की जाती है। जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों के स्वरूप है। इसे दत्त जयंती के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो दत्तात्रेय जयंती पूरे भारत में मनाई जाती है। लेकिन मुख्य रूप से कर्नाटक,महराष्ट्र,आंध्र प्रदेश और गुजरात में मनाई जाती है। इस दिन महाराष्ट्र में भव्य मेला भी लगता है। भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरूओं से शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद ही दत्त स श्री मंदिर के इस पर्व-त्योंहार से संबंधित लेख में हम जानेंगे कि कब है दत्तात्रेय जयंती और शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व के साथ जानेंगे इनकी पौराणिक कहानी।
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शुभ मुहूर्त
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पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – 18 दिसंबर, शनिवार सुबह 07:24 से
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 19 दिसंबर, रविवार सुबह 10:05 तक
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भगवान दत्तात्रेय की पूजा विधि
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♦️दत्तात्रेय जयंती के दिन साधक को सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।
♦️इसके बाद साधक चाहें तो मंदिर में जाकर भगवान दत्तात्रेय की पूजा कर सकता है या फिर अपने घर पर ही भगवान दत्तात्रेय की पूजा कर सकता है।
♦️साधक को दत्तात्रेय की पूजा करने से पहले एक चौकी पर गंगाजल छिड़कर उस पर साफ वस्त्र बिछाना चाहिए और भगवना दत्तात्रेय की तस्वीर स्थापित करनी चाहिए।
♦️इसके बाद भगवान दत्तात्रेय को फूल, माला आदि अर्पित करके उनकी धूप व दीप से विधिवत पूजा करनी चाहिए।
♦️साधक को इस दिन भगवान के प्रवचन वाली अवधूत गीता और जीवनमुक्ता गीता अवश्य पढ़नी चाहिए |
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Best Astrologer in India | Best Vedic Astrologer - Astrologer Ashwani Jain Astrologer Ashwani Jain is one of the best Astrologer in India with 21 years of experience. Get the accurate astrological predictions online from him.
27/10/2021
ज्योतिष में गुरु-पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए सबसे ज्यादा शुभ माना गया है. इस बार दिवाली और धनतेरस से पहले ही खरीदारी का यह शुभ मुहूर्त पड़ रहा है. इस दिन खरीदारी करने और निवेश करने से बहुत लाभ होता है. गुरु-पुष्य नक्षत्र 28 अक्टूबर 2021, गुरुवार को पूरे दिन और रात तक रहेगा.
08/10/2021
व्यवसाय,नौकरी या सरकारी नौकरी
लग्नेश मंगल अगर लग्न भाव,दूसरे,तीसरे,पंचम,सप्तम,नवम,दशम,एकादश भाव में हो और बुध देव छठे या आठवें भाव में हो और पंचमेश नवम भाव में हो तो जातक मेहनत करके पुलिस अफसर,आर्मी या कोई भी सरकारी नौकरी में अच्छा पद प्राप्त कर सकता है।
ध्यान दें मंगल देव अस्त ना हो।
लग्नेश अगर बलि हो और छठे भाव और बारहवे भाव का मालिक छठे आठवे हो और चौथे भाव का स्वामी अस्टम में हो तो जातक या जातिका जन्म स्थान से कहीं दूर या विदेश में पढ़ाई करके सरकारी नौकरी प्राप्त करने में सफलता मिलती है।
अगर लग्नेश मंगल और दसमेश,एकादश शनि छठे भाव में हो तो जातक को नौकरी या सेल्फ प्रोफेसनल करना चाहिए व्यवसाय में इन्वेस्मेंट करने से नुकसान हो सकता है। विदेश में नौकरी करने से तरक्की होती है।
27/09/2021
व्यवसाय और ज्योतिष
ज्योतिष का अर्थ प्रकाशित करना है। ज्यादातर व्यक्ति यह निर्णय लेने में असमर्थ है के वो व्यवसाय करे,नौकरी या दोनों ही तो ज्योतिष द्वारा हमे लग्न कुंडली देखकर यह जान सकते है की हमे व्यवसाय करना चाहिए या नौकरी । जो जातक सभी प्रकार के व्यवसायों-नौकरी को कर चुकने और निरंतर प्रयासरत रहने के बावजूद दुर्भाग्य का सामना करते है ,उनको ज्योतिष का प्रारंम्भिक ज्ञान अवश्य प्राप्त करना चाहिए। यह तो ब्रह्मा के अतिरिक्त कोई नहीं जानता के वास्तव में क्या होगा ,लेकिन अनुभव से यह स्पष्ट हो गया है की ईश्वर भी उसी का सहयोग करता है जो प्रयासरत रहकर निरंतर परिश्रम करता है और ईश्वर की सत्ता को स्वीकार करता है।इस तथ्य को स्वीकार करना ही चाहिए की ज्योतिष के समग्र दोहन से आप व्यवसाय या नौकरी,सेल्फ प्रोफेसनल में सफलता प्राप्त कर सकते है और अपने व्यक्तित्व को बहुआयामी और आकर्षक बना सकते है। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है की खुद की लग्न कुंडली देख कर कठिन उलझन को सुलझाने का सफल प्रयत्न किया जाय ताकि सभी पाठक या ज्योतिष में रूचि रखने वाले व्यक्ति पर्याप्त लाभ उठा सके।इसलिए ज्योतिष अनुसार लग्न सहित यहां कुछ महत्वपुर्ण उदाहरण वर्णन कर रहा हूँ।
लग्न कुंडली देखने से पहले पांच बातों का अवश्य ध्यान रखें।
१.दशा अंतर्दशा २. गोचर ३. साढ़ेसाती या ढैया
४. ग्रहों का बलाबल ५. दशमांशा
लग्नेश मंगल अगर लग्न भाव में हो और दशमेश शनि दशम भाव में हो तो जातक दोनों दशा अंतर् दशा में खुद का व्यवसाय धातु के संबंध व्यवसाय या फ़ैक्ट्री लगाने और प्रॉपर्टी से भी लाभ ले सकता है। लेकिन साढ़ेसाती या ढैया ना चलता हो। ग्रहों का बलाबल अवश्य देखें। दशा या महादशा मारक ग्रह की ना हो।
ASTROLOGER | STONE SPECIALIST|MANGALIK YOGA SPECIALIST| VASTU CONSULTANT
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