Dr. Vijay Ranjan

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Dr. Vijay Ranjan A Social Activist & Director Sanskar Bharti Global School

गलतियों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, बशर्ते उन्हें मानने से इंकार न करें 📌   #थैंक्स          ..... Such a wonderful Med...
05/10/2026

गलतियों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, बशर्ते उन्हें मानने से इंकार न करें 📌

#थैंक्स
..... Such a wonderful Media Coverage !!
#अखबारों के पन्ने से
Dr Vijay Ranjan
Sanskar Bharti Global School

▪️▪️▪️  #शिक्षा_दीक्षा📌 “सर, कैसे भी करके बच्चे को बोर्ड पास करा दो…”“सर, कैसे भी करके बच्चे को बोर्ड पास करा दो… अब तो ...
04/10/2026

▪️▪️▪️ #शिक्षा_दीक्षा📌
“सर, कैसे भी करके बच्चे को बोर्ड पास करा दो…”
“सर, कैसे भी करके बच्चे को बोर्ड पास करा दो… अब तो सिर्फ चार महीने रह गए हैं।” अक्सर जब ऐसे माता-पिता मेरे पास आते हैं और बच्चे के बारे में बात शुरू होती है, तो पता चलता है कि 11वीं में बच्चे का एडमिशन किसी बड़ी कोचिंग में कराया गया था। माता-पिता इस बात पर गर्व कर रहे थे कि बच्चा फलाँ बड़ी कोचिंग में पढ़ रहा है, रोज़ 6-6 घंटे क्लास कर रहा है। स्कूल भी लगभग बायपास कर दिया गया—11वीं के हाफ-ईयरली नहीं दिए, एनुअल एग्जाम भी किसी तरह मैनेज हो गए। “सब ऐसे ही करते हैं”, बच्चे ने आपको ज्ञान दिया और आपने भी उस ज्ञान को स्वीकार कर लिया। लेकिन किसी ने यह नहीं देखा कि बच्चा वास्तव में सीख क्या रहा है?
सबसे बड़ी समस्या यह रही कि कोचिंग से कभी फोन नहीं आया कि बच्चे के नोट्स पूरे नहीं हैं, होमवर्क नहीं किया, टेस्ट में नंबर बहुत कम आए या बच्चा लगातार टेस्ट मिस कर रहा है। फोन आया तो फीस के लिए आया। बच्चा छह घंटे कोचिंग में बैठा, घर आकर वीडियो लेक्चर देखता रहा, लेकिन नोट्स नहीं बनाए, होमवर्क नहीं किया—और माता-पिता को पता ही नहीं चला। ऊपर से घर पर एक्स्ट्रा टीचर भी लगा दिया गया। अब बच्चा 12वीं में आ गया है और कभी-कभार कोचिंग के टेस्ट भी छोड़ देता है। अचानक माता-पिता को एहसास होता है—“अरे, इसकी तैयारी तो बोर्ड पास करने लायक भी नहीं है!”
लेकिन यहाँ सिर्फ बच्चे को दोष देना बहुत आसान है। बच्चे की जितनी गलती है, उससे कहीं बड़ी गलती हमारी पैरेंटिंग की है। हमने बड़ी कोचिंग में एडमिशन करा दिया, महंगा लैपटॉप दे दिया, ऑनलाइन क्लास की सुविधा दे दी और मान लिया कि हमारी जिम्मेदारी पूरी हो गई। बच्चा लैपटॉप पर बैठा है, इसका मतलब यह नहीं कि वह पढ़ रहा है। बच्चा छह घंटे ऑफलाइन क्लास जा रहा है, तो फिर यह भी देखना पड़ेगा कि वह वहाँ से क्या लेकर आ रहा है—नोट्स? होमवर्क? टेस्ट की तैयारी? समझ? या सिर्फ attendance?
पैरेंटिंग का मतलब बच्चे को सुविधा देना भर नहीं है, उसके learning process में participate करना भी है। बच्चा कोचिंग जा रहा है तो उसके नोट्स देखिए। होमवर्क क्यों नहीं हुआ, पूछिए। टेस्ट में नंबर क्यों कम आए, समझिए। कितने टेस्ट दिए और कितने छोड़े, इसकी जानकारी रखिए। स्कूल और कोचिंग दोनों की पढ़ाई को लेकर जिम्मेदार बनिए। “हमने तो अच्छी कोचिंग में एडमिशन करा दिया” जिम्मेदारी पूरी होना नहीं है—कई बार यह जिम्मेदारी से हाथ साफ कर लेना होता है। अभी चार महीने हैं, घबराने के बजाय बच्चे की वास्तविक स्थिति जानिए और आज से उसके learning process में खुद शामिल हो जाइए।
Courtsey: Nilesh Gupta
📸PC:Dr Vijay Ranjan

23/09/2026

दिखेगा क्या….📌


Vijay Ranjan

08/09/2026


📌


Dr Vijay Ranjan
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             Sanskar Bharti Global School       Dr Vijay Ranjan
06/09/2026


Sanskar Bharti Global School


Dr Vijay Ranjan

Attention Plz📌 Dr Vijay Ranjan
01/09/2026

Attention Plz📌


Dr Vijay Ranjan

31/08/2026

#संरक्षण
#संवर्धन📌
Dr Vijay Ranjan

Sanskar Bharti Global School की ओर से विश्व भर के तमाम  #भारत_वंशियों को  #रक्षा_बंधन की ढ़ेरों शुभकामनाएं!!            #...
29/08/2026

Sanskar Bharti Global School की ओर से विश्व भर के तमाम #भारत_वंशियों को #रक्षा_बंधन की ढ़ेरों शुभकामनाएं!!
#बंधन सूत्र @ #संस्कारशाला !!
@
Dr Vijay Ranjan

 #हैप्पीनेस  इंडेक्स में पिछड़ चुके भारत (116 वीं रैंक)के टीनएजर्स और भी परेशान हैं। जिस स्क्रीन पर वे घंटों बिताते हैं,...
21/08/2026

#हैप्पीनेस इंडेक्स में पिछड़ चुके भारत (116 वीं रैंक)के टीनएजर्स और भी परेशान हैं। जिस स्क्रीन पर वे घंटों बिताते हैं, वह उनकी मुस्कान छीन रही है। वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 के तीसरे अध्याय में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन्टरनेट मीडिया का अंधाधुंध इस्तेमाल किशोरों को बड़े स्तर पर नुक़सान पंहुचा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जो किशोर दिन में 5 घंटे या उससे ज्यादा समय इन्टरनेट मीडिया पर बिताते हैं, उनमे डिप्रेशन और एन्ग्जायटी के लक्षण उन लोगों की तुलना में दोगुने पाए गए जो इसका कम इस्तेमाल करते हैं। बॉडी इमेज, दूसरों से तुलना और लाइक पाने की होड़ उन्हें मानसिक रूप से थका रही है। इनमे Instagram और Snapchat जैसे प्लेटफॉर्म जो शॉर्ट विडिओ और algorithm के जरिए बांधे रखते हैं, मानसिक सेहत के लिए सबसे ज्यादा ख़तरनाक माने गए हैं। ज्यादा स्क्रीन टाइम की वज़ह से किशोरों की नींद कम हो रही है और पढ़ाई पर एकाग्रता भी घट रही है। इन्टरनेट मीडिया का नकारात्मक प्रभाव किशोरियों पर लड़कों के मुक़ाबले ज्यादा पड़ता है। रिपोर्ट के सम्पादक प्रोफेसर जैन ईमेनुएल कहते हैं कि इन्टरनेट मीडिया पूरी तरह बुरा नहीं है, बस इसका इस्तेमाल सही मात्रा और तरीके से होना चाहिए !

#भ्रम_विभ्रम 📌
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