27/08/2026
विधाता का अन्याय..! 🥹🕯️🙏
बचपन में मां को खोया, कुछ ही वर्षों बाद पिता के साथ बड़ी दुर्घटना हुई, बाद में किडनी डैमेज की बीमारी से ग्रसित हुए, फिर अस्पतालों के चक्कर काटे, फिर डायलिसिस का दर्द सहते सहते आर्थिक कमजोरी का सामना करना पड़ा..! और अंततः 26 अगस्त, 2026 को खुद दुनिया को अलविदा कह गए।
ये मार्मिक कहानी सुमेश जी कुमावत की है। एक सहज, सरल एवं बेहद ही शानदार शख्सियत, जिन्होंने अपने व्यवहार और सरलता से सबका दिल जीता। कभी किसी की निंदा नहीं की। ना ही कभी किसी को ओछे शब्द बोले। जिंदगी में परेशानियां बहुत झेली, लेकिन यदि कोई उन्हें हालचाल पूछता तो प्यारी सी मुस्कान और जिंदादिली के साथ एक ही जवाब देते "सब बढ़िया है।"
सुमेश भैया की ईश्वर में गहरी आस्था थी, मन्दिर दर्शन उन्हें बेहद पसंद था। परिवार से वो बहुत लगाव रखते थे। साथ ही, गांव में उनकी हमउम्र के कुछ दोस्त थे, जिनके साथ कभी कभार घूमना और समय बिताना भी उनको अच्छा लगता था। बस इन कुछ सुखद अनुभवों के अलावा उनकी जिंदगी में कष्ट ज्यादा थे। बचपन में मां को खोना, कुछ ही वर्षों बाद पिता के साथ बड़ी दुर्घटना हुई। बाद में किडनी डैमेज की बीमारी से ग्रसित हुए, अस्पतालों के चक्कर काटे, फिर डायलिसिस का दर्द सहते सहते आर्थिक कमजोरी का सामना करना पड़ा..! पत्नी भी अक्सर बीमार रहने लगी। इतना कुछ झेलने के बाद भी वे हालातों से नहीं हारे थे।
लेकिन विधाता को शायद कुछ और ही मंजूर था। 25 अगस्त को डायलिसिस के लिए सीकर जाते समय रास्ते में उनका एक्सीडेंट हुआ, और रात को इलाज के दौरान सुमेश भैया दुनिया को अलविदा कह गए। और पीछे छोड़ गए एक छोटा सा बेबस परिवार... जिसमें बीमार पत्नी, वृद्ध पिता, एक मासूम बिटिया और दो बेसहारा छोटे बेटे हैं। अब उस परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। ना ही कोई विशेष सहारा है। थोड़े टाइम पहले आस-पास से कुछ दान मिला था, वो बीमारी में लग गया। परिवार भयंकर सदमे में है। इसे भगवान की मर्जी कहे या फिर "विधाता का अन्याय..!" लेकिन जो भी हुआ, बहुत दुखद हुआ। अब इस परिवार को महानुभावों की दया, भामाशाहों के सहारे और आप सबके आशीर्वाद की उम्मीद है।
ईश्वर सुमेश जी की दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। वे देहरुप में भले ही हमारे बीच विद्यमान ना हो, लेकिन हमारे दिलों में सदैव जिंदा रहेंगे।
ॐ शान्ति ! 🥹🙏