22/08/2023
वक्त कितना बदल गया!
जमानें क्या-क्या गुजर गए!!
#औलखअभिव्यक्ति
"नर सेवा ही नारायण सेवा है"
यदि आप समर्थ है तो खुद से असमर्थ लोगों की मदद कीजिए ।
22/08/2023
वक्त कितना बदल गया!
जमानें क्या-क्या गुजर गए!!
#औलखअभिव्यक्ति
11/07/2023
दुपहिया तिपहिया चौपहिया वाहनों में कुछ सोच समझकर ही कंपनी वालो ने मडगार्ड लगाए होंगे लेकिन ये डिजिटल पैदाइशो को समझदारी वाली बातें समझ में कब आती हैं।।।
#फोटो_साभार_गूगल_देव
24/05/2023
तस्वीर देखकर बताइये ,,,क्या क्या नहीं है शरीर में …!!!
या कहिए कि क्या क्या शेष है …!!!
किंतु अब नाम के आगे प्रथम प्रयास में ही UPSC पास करना जरुर जुड़ जायेगा।
जिस अंग की कमी है,वो तो शायद कभी पूरी न हो पाये लेकिन अपने जैसे हज़ारों लाखों दिव्यांग लोगों और हिम्मत तोड़ बैठे लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत जरुर बन जाएँगे ।
पिता जी की दर्जी की दुकान है।जीवन जीने के इस जज्बे और संघर्ष को कोटि कोटि साधुवाद ।
05/03/2023
17/02/2023
आज का बदलता समाज पहले कोर्ट मैरिज, फिर बच्चा और अब शादी का फंक्शन। बचपन में हम लोग पापा मम्मी से लड़ते थे कि आप दोनों की शादी में हमारी फोटो क्यों नहीं। इस बच्चे को यह शिकायत बिलकुल नहीं होगी
28/01/2023
मुरादाबाद ज़िलाधिकारी महोदय आदरणीय श्री शैलेंद्र सिंह व बिलारी उपजिलाधिकारी श्री राजबहादुर जी ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर काव्य पाठ के लिये सम्मानित किया ॥
07/12/2022
खुद MBBS डिग्रीधारी रोहिणी के तीन छोटे बच्चे हैं, उनके पति समरेश सिंह सिंगापुर में ही एवरकोर पार्टनर्स नाम की कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। ऐसी परिस्थिति में कोई अपनी किडनी अपने जर्जर हो चुके 75 साल के बूढ़े पिता को दे तो यह साहस बेटियां ही कर सकती है।
यह घटना उन लोगों के लिए भी एक सबक है जो कि बेटियों को पराया मानकर उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करते हैं।
बधाई Rohini acharya अपने पिता (लालू प्रसाद यादव जी) को दूसरा जन्म देने के लिए, विश्व की सारी बेटियां आप पर गर्व कर रहीं होंगी। आप नई पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेणास्रोत रहेंगी🙏🙏🙏🙏
27/11/2022
~!!! एक अदृश्य स्टिकर !!!~
मेरे आगे वाली कार कछुए की तरह चल रही थी और मेरे बार-बार हॉर्न देने पर भी रास्ता नहीं दे रही थी। मैं अपना आपा खो कर चिल्लाने ही वाला था कि मैंने कार के पीछे लगा एक छोटा सा स्टिकर देखा जिस पर लिखा था _"शारीरिक विकलांग; कृपया धैर्य रखें"!_ और यह पढ़ते ही जैसे सब-कुछ बदल गया!!
मैं तुरंत ही शांत हो गया और कार को धीमा कर लिया। यहाँ तक की मैं उस कार और उसके ड्राईवर का विशेष खयाल रखते हुए चलने लगा कि कहीं उसे कोई तक़लीफ न हो। मैं ऑफिस कुछ मिनट देर से ज़रुर पहुँचा मगर मन में एक संतोष था।
इस घटना ने दिमाग को हिला दिया। क्या मुझे हर बार शांत करने और धैर्य रखने के लिए किसी स्टिकर की ही ज़रुरत पड़ेगी? हमें लोगों के साथ धैर्यपूर्वक व्यवहार करने के लिए हर बार किसी स्टिकर की ज़रुरत क्यों पड़ती है?
क्या हम लोगों से धैर्यपूर्वक अच्छा व्यवहार सिर्फ तब ही करेंगे जब वे अपने माथे पर कुछ ऐसे स्टिकर्स चिपकाए घूम रहे होंगे कि "मेरी नौकरी छूट गई है", "मैं कैंसर से संघर्ष कर रहा हूँ", "मेरी शादी टूट गई है", "मैं भावनात्मक रुप से टूट गया हूँ", "मुझे प्यार में धोखा मिला है", "मेरे प्यारे दोस्त की अचानक ही मौत हो गई", "लगता है इस दुनिया को मेरी ज़रुरत ही नहीं", "मुझे व्यापार में बहुत घाटा हो गया है"......आदि!
दोस्तों, हर इंसान अपनी ज़िंदगी में कोई न कोई ऐसी जंग लड़ रहा है जिसके बारे में हम कुछ नहीं जानते। बस हम यही कर सकते हैं कि लोगों से धैर्य और प्रेम से बात करें।
*संभव हो तो इन अदृश्य स्टिकर्स को सम्मान दें!*
🙏🙏
22/11/2022
💰 किस के लिए कमा रहे हो ? 💰
क्या हम बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स, केटरर्स और डेकोरेटर्स के लिए कमा रहे हैं ???
हम बड़े बड़े क़ीमती मकानों और बेहद खर्चीली शादियों से किसे इम्प्रेस करना चाहते हैं ???
क्या आपको याद है कि, दो दिन पहले किसी की शादी पर आपने क्या खाया था ???
जीवन के प्रारंभिक वर्षों में क्यों हम पशुओं की तरह काम में जुते रहते हैं ???
कितनी पीढ़ियों के खान पान और लालन पालन की व्यवस्था करनी है हमें ???
हम में से अधिकाँश लोगों के दो बच्चे हैं। बहुतों का तो सिर्फ एक ही बच्चा है।
हमारी जरूरत कितनी हैं और हम पाना कितना चाहते हैं ???
इस बारे में सोचिए।
क्या हमारी अगली पीढ़ी कमाने में सक्षम नहीं है जो, हम उनके लिए ज्यादा से ज्यादा सेविंग कर देना चाहते हैं !?!
क्या हम सप्ताह में डेढ़ दिन अपने मित्रों, अपने परिवार और अपने लिए स्पेयर नहीं कर सकते ???
क्या आप अपनी मासिक आय का 5% अपने आनंद के लिए, अपनी ख़ुशी के लिए खर्च करते हैं ???
सामान्यतः जवाब नहीं में ही होता है।
हम कमाने के साथ साथ आनंद भी क्यों नहीं प्राप्त कर सकते ???
इससे पहले कि आप स्लिप डिस्क्स का शिकार हो जाएँ, इससे पहले कि, कोलोस्ट्रोल आपके हार्ट को ब्लॉक कर दे, आनंद प्राप्ति के लिए समय निकालिए !!!
हम किसी प्रॉपर्टी के मालिक नहीं होते, सिर्फ कुछ कागजातों, कुछ दस्तावेजों पर अस्थाई रूप से हमारा नाम लिखा होता है।
ईश्वर भी व्यंग्यात्मक रूप से हँसेगा जब कोई उसे कहेगा कि, "मैं जमीन के इस टुकड़े का मालिक हूँ" !!
किसी के बारे में, उसके शानदार कपड़े और बढ़िया कार देखकर, राय कायम मत कीजिए।
हमारे महान गणित और विज्ञान के शिक्षक स्कूटर पर ही आया जाया करते थे !!
धनवान होना गलत नहीं है बल्कि सिर्फ धनवान होना गलत है।
आइए जिंदगी को पकड़ें, इससे पहले कि, जिंदगी हमें पकड़ ले...
एक दिन हम सब जुदा हो जाएँगे, तब अपनी बातें, अपने सपने हम बहुत मिस करेंगे।
दिन, महीने, साल गुजर जाएँगे, शायद कभी कोई संपर्क भी नहीं रहेगा। एक रोज हमारी बहुत पुरानी तस्वीर देख कर हमारे बच्चे हम से पूछेंगे कि, "तस्वीर में ये दूसरे लोग कौन हैं ??"
तब हम मुस्कुराकर अपने अदृश्य आँसुओं के साथ बड़े फख्र से कहेंगे--- "ये वो लोग हैं, जिनके साथ मैंने अपने जीवन के बेहतरीन दिन गुजारे हैं |"
🙏🙏 🙏🙏
07/11/2022
“कला जगत से जुड़े लोगों को सीरियस नहीं लेना चाहिए।
फालतू ही लोग हीरो बनाते हैं”।
'बिन शादी माँ बनो, मुझे दिक्कत नहीं: जया बच्चन ने दी नातिन को सलाह, शारीरिक संबंध को कहा जरूरी’
ये जया अपनी नातिन को ही स्वच्छंदी जिंदगी जीने की
सलाह दे रही है।
पुराने जमाने में ये प्रायः घुमक्कड़ होते थे, इन्हें गांव से बाहर रखा जाता था वहीं डेरा होता था।
ड्योढ़ी लांघने भी नहीं देते थे। अपनी कला दिखाओ, इनाम लो और चलते
बनो।
समाज की रीति नीति में न ये सलाह देते थे न ही इनकी औकात होती थी।
इनके पारस्परिक सम्बन्ध काफी कम्प्लिकेटेड होते थे जिसे वे अपनी कला पर हावी नहीं होने देते थे।
जितना बड़ा कलाकार उतना ही नशेड़ी गंजेड़ी व्यभिचारी।
अपनी मजबूरी वे समझते थे और समाज भी इनकी इस पर्सनल लाइफ में हस्तक्षेप नहीं करता था।
गायक, नर्तक, करतबबाज, नट नटनियाँ वगैरह सभ्य समाज में घुलमिल नहीं पाती थी।
उनकी कला उन्हें ऐसा विवश कर देती है कि यह सब करना ही पड़ता है।
फ़िल्म कलाकार महमूद जितनी बढ़िया हँसाने की एक्टिंग करता था, बाद में घर जाकर उतना ही रोता था। डिप्रेशन से बचने के लिए यह जरूरी होता है। बाद में वह मारिजुआना का एडिक्ट हुआ और अमरीका में दर्दनाक मौत हुई।
ये लोग मनोरंजन करते हैं पेट पालने के लिए। विकृतियां स्वाभाविक है। कोई ज्ञानी ध्यानी या योगी तपस्वी नहीं है कि प्रसिद्धि पचा लें।
जो ऐसा करते हैं वे मुख्यधारा के समाज को समझते भी हैं जैसे कि दक्षिण भारत के कलाकार।
अन्यथा नशा, वासना, अवैध संबंध, गाली गलौज और उटपटांग हरकतें इनकी फितरत है।
अतः इनका डेरा नगर बस्ती से साइड में रखते थे, रात को दारू पीकर गाली गलौज करते, औरतों को पीटते सुबह जैसे थे वैसे!
अतः इन्हें मान सम्मान या अधिक धन नहीं देना चाहिए अन्यथा वे समाज के महाजन बन जाते हैं और कुसंस्कारों से पीढ़ी को बर्बाद कर देते हैं।
राजस्थान के प्रायः हर गांव में लोकल कलाकार हैं और वे बहुत उच्च श्रेणी के हैं, लेकिन आपको सारे के सारे दारूढ़िये या अफीमची मिलेंगे। इनके छोटे छोटे बच्चे भी वे सभी नशे करते हैं जो दुनिया में है।
हमारे पूर्वजों ने बहुत सोच समझ कर ये निर्णय लिए थे कि एक मानव होने के नाते उनका भरपूर सम्मान करेंगे, उनकी आजीविका का भी प्रबंध करेंगे उनकी कला को पूरा प्रोत्साहन देंगे लेकिन घर परिवार के, सांस्कृतिक निर्णयों में उनकी कोई राय नहीं ली जाएगी। पूछा भी नहीं जाएगा।
तो इनमें और बॉलीवुड के कलाकारों में केवल धन के आगमन के अलावा कोई भिन्नता नहीं है।
ये दारू की थैली चूसकर कचरे के ढेर पर गिर जाते हैं और वे हशीश के सुड़के चेंप अपने फ्लैट या कार में गिरे रहते हैं।
कोई बात नहीं, आप खाओ, पियो, व्यभिचार करो, तुम्हारी मजबूरी है, अच्छी कला के लिए यह सब चलेगा लेकिन प्लीज सलाह मत दो!!
इधर, मीडिया और अधपढ लौंडे लौंडिया ने उन्हें हीरो-हीरो कहकर इतना चढ़ा दिया है कि उनका माथा खराब हो गया है।
वे भी अभिनेता से नेता और नीति निर्माता बनने चले हैं।
कुछ नहीं,..... वो जया बच्चन अपनी नातिन को सलाह दे रही है न, उससे याद आया। सोचा बता दूं।
21/10/2022
विश्व कप विजेता 2011🏆
टी20 विश्व कप विजेता 2007🏆
आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ ईयर 2010 🏅
टेस्ट ट्रिपल सौ स्कोर करने वाला पहला भारतीय✅
वनडे डबल शतक बनाने वाला दूसरा बल्लेबाज ✅
टेस्ट में भारत के लिए सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर (319)✅
वनडे में एक कप्तान द्वारा सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर (219)✅
टेस्ट में दो तिहरे शतक के साथ केवल भारतीय✅
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के सलामी बल्लेबाज द्वारा सर्वाधिक रन (15,758)✅
टेस्ट पारी में दूसरा सबसे ज्यादा चौके (47) ✅
Happy Birthday to one of the most destructive openers to have played the Cricket game 🥳
16/10/2022
मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं,
तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।
जब एक टेलीफोन साक्षात्कार में भारतीय
अरबपति #रतनजी_टाटा से #रेडियो प्रस्तोता ने पूछा:
"सर आपको क्या याद है कि आपको जीवन में सबसे अधिक खुशी कब मिली"?
रतनजी टाटा ने कहा:
"मैं जीवन में खुशी के चार चरणों से गुजरा हूं, और आखिरकार मुझे सच्चे सुख का अर्थ समझ में आया।"
पहला चरण धन और साधन संचय करना था।
लेकिन इस स्तर पर मुझे वह सुख नहीं मिला जो मैं चाहता था।
फिर क़ीमती सामान और वस्तुओं को इकट्ठा करने का दूसरा चरण आया।
लेकिन मैंने महसूस किया कि इस चीज का असर भी अस्थायी होता है और कीमती चीजों की चमक ज्यादा देर तक नहीं रहती।
फिर आया बड़ा प्रोजेक्ट मिलने का तीसरा चरण। वह तब था जब भारत और अफ्रीका में डीजल की आपूर्ति का 95% मेरे पास था। मैं भारत और एशिया में सबसे बड़ा इस्पात कारखाने मालिक भी था। लेकिन यहां भी मुझे वो खुशी नहीं मिली जिसकी मैंने कल्पना की थी.
चौथा चरण वह समय था जब मेरे एक मित्र ने मुझे कुछ विकलांग बच्चों के लिए व्हील चेयर खरीदने के लिए कहा। लगभग 200 बच्चे थे। दोस्त के कहने पर मैंने तुरन्त व्हील चेयर खरीद लीं।
लेकिन दोस्त ने जिद की कि मैं उसके साथ जाऊं और बच्चों को व्हील चेयर भेंट करूँ। मैं तैयार होकर उनके साथ चल दिया।
वहाँ मैंने सारे पात्र बच्चों को अपने हाथों से व्हील चेयर दीं। मैंने इन बच्चों के चेहरों पर खुशी की अजीब सी चमक देखी। मैंने उन सभी को व्हील चेयर पर बैठे, घूमते और मस्ती करते देखा।
यह ऐसा था जैसे वे किसी पिकनिक स्पॉट पर पहुंच गए हों, जहां वे बड़ा उपहार जीतकर शेयर कर रहे हों।
मुझे उस दिन अपने अन्दर असली खुशी महसूस हुई। जब मैं वहाँ से वापस जाने को हुआ तो उन बच्चों में से एक ने मेरी टांग पकड़ ली।
मैंने धीरे से अपने पैर को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन बच्चे ने मुझे नहीं छोड़ा और उसने मेरे चेहरे को देखा और मेरे पैरों को और कसकर पकड़ लिया।
मैं झुक गया और बच्चे से पूछा: क्या तुम्हें कुछ और चाहिए?
तब उस बच्चे ने मुझे जो जवाब दिया, उसने न केवल मुझे झकझोर दिया बल्कि जीवन के प्रति मेरे दृष्टिकोण को भी पूरी तरह से बदल दिया।
उस बच्चे ने कहा था-
"मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं,
तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।"
उपरोक्त शानदार कहानी का मर्म यह है कि हम सभी को अपने अंतर्मन में झांकना चाहिए और यह मनन अवश्य करना चाहिए कि, इस जीवन और संसार और सारी सांसारिक गतिविधियों
को छोड़ने के बाद आपको किसलिए याद किया जाएगा?
क्या कोई आपका चेहरा फिर से देखना चाहेगा, यह बहुत मायने रखता है ?
रतन टाटा 25 वर्ष रतन टाटा 84 वर्ष