27/09/2026
प्रेस विज्ञप्ति
लोकतंत्र और संविधान पर हमला बंद करो, चुनाव आयोग का राजनीतिक दुरुपयोग बंद हो — माकपा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर माकपा का प्रतिरोध मार्चएवं पुतला दहन
मेहसी, 26 सितंबर 2026।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की चकिया–मेहसी–तेतरिया लोकल कमिटी के तत्वावधान में आज लोकतंत्र और संविधान की रक्षा, चुनाव आयोग की निष्पक्षता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रतिरोध मार्च निकाला गया।
प्रतिरोध मार्च हॉस्पिटल रोड से शुरू होकर स्टेशन रोड एवं बैंक चौक होते हुए बस स्टैंड तक पहुंचा। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा तथा निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था की मांग को लेकर जोरदार नारे लगाए।
माकपा राज्य कमिटी सदस्य एवं महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी कॉमरेड राजमंगल प्रसाद ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान कराने की प्रक्रिया नहीं है। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, पारदर्शी मतदाता सूची, सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्तें हैं।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर देशभर में गंभीर सवाल उठे हैं। इन सवालों का संतोषजनक और पारदर्शी जवाब देना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है।
प्रतिरोध मार्च में शामिल डीवाईएफआई के राज्य कमिटी सदस्य इम्तेयाज अहमद ने कहा कि विशेष रूप से SIR और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने के आधार, तकनीकी व्यवस्था तथा शिकायतों के निवारण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। निर्वाचन आयोग के भीतर विभिन्न निर्णयों को लेकर सामने आई आपत्तियों और मतभेदों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी इन मामलों में जवाबदेही तय करने तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग करती है।
माकपा ने चुनाव आयोग से पूछे सात सवाल
1. यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो उसे पूर्व सूचना, नाम हटाने का स्पष्ट कारण और प्रभावी अपील का अवसर किस प्रकार दिया जाएगा?
2. मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में अंतिम निर्णय किस स्तर पर लिया जा रहा है तथा उसकी पूरी जवाबदेही किसकी है?
3. यदि कोई स्थानीय निर्वाचन पदाधिकारी दस्तावेजों की जांच के बाद किसी नागरिक को पात्र मानता है, लेकिन केंद्रीय सॉफ्टवेयर अथवा तकनीकी व्यवस्था के कारण उसका निर्णय दर्ज नहीं हो पाता, तो ऐसी व्यवस्था को पारदर्शी और लोकतांत्रिक कैसे माना जा सकता है?
4. नए मतदाताओं के पंजीकरण में अतिरिक्त जानकारियां मांगने संबंधी नियमों में बदलाव किस कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया?
5. राजनीतिक दलों और आम नागरिकों द्वारा उठाई गई आपत्तियों का सार्वजनिक एवं बिंदुवार जवाब देने की व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए?
6. चुनाव आयोग स्पष्ट करे कि मतदाता सूची तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल सिस्टम तथा उसके निर्णयों की स्वतंत्र जांच और ऑडिट की क्या व्यवस्था है?
7. जब निर्वाचन आयोग के भीतर ही मतदाता सूची और तकनीकी व्यवस्था से जुड़े निर्णयों को लेकर मतभेद सामने आते हैं, तो जनता के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्य रखना आयोग की जिम्मेदारी क्यों नहीं होनी चाहिए?
माकपा ने मांग की कि मतदाता सूची में किसी भी पात्र नागरिक का नाम केवल तकनीकी अथवा प्रशासनिक त्रुटि के कारण न छूटे और किसी नागरिक को अपने मताधिकार की रक्षा के लिए अनावश्यक प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
प्रतिरोध मार्च में जहीर आलम, अखिलेश कुमार, शफीकुर रहमान, राजेश राम, धर्मनाथ यादव, रवि कुमार, अभिषेक कुमार सिंह, हरिहर ठाकुर, राजेंद्र राम, मोहम्मद सहीम सहित दर्जनों पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित थे।
निवेदक
राजमंगल प्रसाद
राज्य कमिटी सदस्य
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M)