21/09/2021
मायड़ ऐहड़ा पूत जण, जेहड़ा रण प्रताप...
अकबर सूतो ओझ के, जाण सिराणे साँप..!!
RAJPUTANA
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21/09/2021
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जय महाराणा प्रताप
राजपूत एकता
16/02/2021
#बसंत_पंचमी
#जयंती :
#राजा_सुहेलदेव_बैस: 🚩⚔️🚩
#ब्रिटिश_गजटियर के अनुसार राष्ट्र रक्षक सुहेलदेव बैस राजपूत राजा थे, जिन्होंने 21 राजाओं का संघ बनाकर मुस्लिम लुटेरों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी.
ग़ज़नी के महमूद और उसके बर्बर तुर्क गिरोहों के लगातार हमलों ने भारत के उत्तरी इलाकों को कमज़ोर कर दिया था। हमलावरों ने उपमहाद्वीप के बहुत बड़े इलाके को बर्बाद करने के लिए छीना-झपटी, हत्या, बलात्कार और लूटपाट का सहारा लिया। कई पुराने भारतीय साम्राज्य, जो अब तक थक चुके थे और बंटे हुए थे, उन हमलावरों के सामने टिक नहीं सके। जिन्होंने युद्ध के पुराने नियमों के साथ लड़ाई की, वे जीत के लिए हर बार नियमों को तोड़ने वाली बर्बर तुर्क सेना को रोकने में नाकाम रहे। इसके बाद तुर्क देश के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक—सोमनाथ में भगवान शिव के भव्य मंदिर—पर हमला करते हैं और उसे बर्बाद कर देते हैं।
भारी निराशा से भरे इस काल में एक योद्धा राष्ट्र की रक्षा के लिए सामने आता है।
#महाराजा_सुहेलदेव
राजा सुहेलदेव बैस 11वीं सदी में वर्तमान उत्तर प्रदेश में भारत नेपाल सीमा पर स्थित श्रावस्ती के राजा थे जिसे सहेत महेत भी कहा जाता है।
सुहेलदेव महाराजा त्रिलोकचंद बैस के द्वित्य पुत्र विडारदेव के वंशज थे,इनके वंशज भाला चलाने में बहुत निपुण थे जिस कारण बाद में ये #भाले_सुल्तान के नाम से प्रसिद्ध हुए। सुल्तानपुर की स्थापना इसी वंश ने की थी।
सुहेलदेव राजा मोरध्वज के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका राज्य पश्चिम में सीतापुर से लेकर पूर्व में गोरखपुर तक फैला हुआ था। उन्हें सुहेलदेव के अलावा सुखदेव, सकरदेव, सुधीरध्वज, सुहरिददेव, सहरदेव आदि अनेको नामो से जाना जाता है। माना जाता है की वो एक प्रतापी और प्रजावत्सल राजा थे। उनकी जनता खुशहाल थी और वो जनता के बीच लोकप्रिय थे। उन्होंने बहराइच के सूर्य मन्दिर और देवी पाटन मन्दिर का भी पुनरोद्धार करवाया। साथ ही राजा सुहेलदेव बहुत बड़े गौभक्त भी थे।
लेकिन विडंबना यह है की जो सैयद सालार मसूद हिन्दुओ का हत्यारा था और जो हिन्दुओ को मुसलमान बनाने के इरादे से निकला था, आज बहराइच क्षेत्र में उस की मजार को ग़ाज़ी का नाम देकर पूजा जाता है और उसे पूजने वाले अधिकतर हिन्दू है। बहराइच में एक पुराना सूर्य मन्दिर था जहाँ एक विशाल सरोवर था जिसके पास मसूद दफन हुआ था। तुग़लक़ सुल्तान ने 14वीं सदी में इस मन्दिर को तुड़वाकर और सरोवर को पटवाकर वहॉ मसूद की मजार बनवा दी। हर साल उस मजार पर मेला लगता है जिसमेँ कई लाख हिन्दू शामिल होते है।
राजा सुहेलदेव बैस जिन्होंने हिंदुओं को इतनी बड़ी विपदा से बचाया, वो इतनी सदियोँ तक उपेक्षित ही रहे। शायद वीर क्षत्रियो के बलिदान के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का हिंदुस्तान में ये ही तरीका है। कुछ दशक पहले पयागपुर के राजा साहब ने 500 बीघा जमीन दान में दी जिसपर राजा सुहेलदेव बैस का स्मारक बनाया गया और अब वहॉ हर साल मेला लगता है।
सनातन धर्म , संस्कृति और राष्ट्ररक्षक ,प्रजापालक ,सूर्यवंशी कुल दीपक , की जयंती पर उनके चरणो में कोटि कोटि नमन 🙏
29/01/2021
जय मेवाड़ जय श्री एकलिंगजी की जय बाण माता
19/01/2021