विकास एक संघर्ष की राह
जय हिंद
24/04/2026
नन्ही सी जान, बड़ी प्यास! 🐦 इस बढ़ती गर्मी में अपनी छत या बालकनी पर पक्षियों के लिए पानी का एक बर्तन जरूर रखें। आपकी एक छोटी सी कोशिश किसी की जान बचा सकती है। ❤️🙏"
24/04/2026
एक भड़वा और एक पढ़ी लिखी सवर्ण की बेटी
बस इसलिए ....
07/04/2026
गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस के सुंदरकांड
की एक चौपाई बड़ी प्रसिद्ध है, और हर कोई इसके
शब्दों को तोड़ मरोड़ कर अपनी सहूलियत के हिसाब से
अर्थ का अनर्थ करते रहते हैं, ताज्जुब तो तब हुआ जब महादेवी वर्मा के नाम से कैप्शन बनाकर इसे वायरल
किया जा रहा है कि क्यों महिलाओं ने इसका कभी
विरोध नहीं किया!
जबकि मैं हैरान हूँ कि महादेवी वर्मा जैसी विदुषी
महिला इसका अर्थ न जानती हो ये सम्भव ही नहीं..!!
वो चौपाई हैं
"प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं।
मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥
ढोल गवाँर सूद्र पशु नारी।
सकल ताड़ना के अधिकारी॥"
अब आधे से अधिक लोग तो इसको मनुस्मृति का हिस्सा मान बैठे हैं और जो रामचरितमानस से जोड़ते हैं वो तुलसीदास को घोर स्त्रीविरोधी मानते हैं, फेमिनिज़्म के समर्थक भी गाहे बगाहे विरोध के झंडे उठाते दिखेंगे...
अर्थ जानने के पहले ये विचार करें कि किसी शब्द के आगे एक अक्षर लग जाने से कैसे उसका अर्थ एकदम उलट हो जाता है जैसे
पॉसिबल का इम्पॉसिबल,
तर्क का कुतर्क,
और ताड़ना का प्रताड़ना,
तो यहां सकल ताड़ना के अधिकारी को लोगों ने अपने आप सकल प्रताड़ना के अधिकारी बना लिया है जबकि ताड़ना शब्द में कहीं भी प्रताड़ित करने का उद्देश्य नहीं छुपा हुआ है।
ताड़ना का अर्थ है- देखभाल, नज़र रखना, ध्यान रखना या फिर संरक्षण देना।
अब चौपाई में ढोल, गंवार, शुद्र, पशु और नारी का ही ज़िक्र क्यों किया गया तो मध्य काल मे मुस्लिम साम्राज्य के साथ सामंती व्यवस्था चरम पर थी और गोस्वामी तुलसीदास जी धर्म के माध्यम से उन सभी को देखभाल, संरक्षण का भागी बनाया है जो अब तक वंचित रहे हैं पर समाज का अहम हिस्सा है।
ढोल यानी वाद्य जिसका चमड़ा या रस्सी थोड़ी भी ढीली पड़ जाने पर उसके सुर बिगड़ जाते हैं इसलिए वादक को चाहिए कि समय समय पर उसका परीक्षण करते रहे, तो वो शब्द ढोल है ढोर नहीं...
गंवार/अज्ञानी को मर्यादा का भान नहीं होता इसलिए हमेशा ही उसे दिशा निर्देशित किया जाना चाहिए ताकि समाज को अज्ञानियों के कहर से बचाया जा सके,
शुद्र जिन्हें विद्या से वंचित रखा गया उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाया जा सके क्योंकि योग्यता वर्ण देखकर नहीं आती इसलिए सबको शिक्षा का अधिकार मिले यही इन्होंने भी कहा,
पशु क्योंकि इस समय पशु एक अनिवार्य सम्पत्ति हुआ करते थे और न सिर्फ मध्यकाल बल्कि पशु ऋग्वैदिक काल से ही अनिवार्य सम्पत्ति है जिनके लिए बड़े बड़े युद्ध तक हुए हैं,
और स्त्री जो समाज मे संरक्षण, अधिकार, सम्मान और शिक्षा की हकदार है इसलिए समाज का कर्तव्य है कि वो इन सभी की देखभाल करें और संरक्षण दे।
अब किसी ने ताड़ना को प्रताड़ना में बदलकर बकवास
की तो अगली कड़ाही उसी के नाम की चढ़ेगी।
20/03/2026
ऐसी रन्दी को तुरंत गैंड पे गोली मार देनी चाहिए
हरामजादी नारी स्त्री नाम पर कलंक😡😡😠😠😭😭
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