Chakradhar Jha " चक्रधर झा "

Chakradhar Jha " चक्रधर झा "

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कार्यकारिणी सदस्य : भारतीय जनता पार्टी मुंबई

15/05/2025
02/11/2024

दादर-नगर-हवेली कैसे आजाद हुआ ?
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1779 में मराठो को दादर-नगर-हवेली को पुर्तगालियों को सौपने पर बाध्य होना पड़ा ! दादर-नगर-हवेली मे लगभग 78 गाँव थे ! जनसंख्या अधिकांश आदिवासियों की थी ! पुर्तगालियों ने जमींदार नियुक्त कर रखे थे..जो वहाँ के किसानो से ..जम कर कर वसूलते थे !
पुर्तगालियों अंग्रेजो से अधिक क्रूरता से व्यवहार करते थे !
(अंग्रेजो की क्रूरता की कहानियाँ इसलिए अधिक प्रसिद्ध हो गयी..कि वो थोड़ा सेकुलर प्रवृत्ति के थे..जबकि पुर्तगालियों पर पादरियो की कृपा थी ! )

दादर-नगर-हवेली ..और शेष भारत की स्थिति में अंतर था । शेष भारत.. ब्रिटेन का औपनिवेश ( कालोनी ) माना जाता था !
जबकि दादर-नगर-हवेली पुर्तगाल का ही भाग !
1947 मे तो शेष भारत स्वतंत्र हो गया ! परंतु पुर्तगालियों का शासन गोवा और दादर-नगर-हवेली पर बना रहा !
कुछ लोगों ने ..ये बात उठाई कि.." जैसे हैदराबाद को सेना के जोर पर भारत में विलय कर लिया गया.. वैसे गोवा और दादर-नगर-हवेली का विलय कर लिया जाये !

परंतु चाचा नेहरू के नेतृत्व में केंद्रीय सरकार के सामने एक समस्या ये थी कि...पुर्तगाल NATO ( नाटो ) का सदस्य देश था ..और गोवा व दादर-नगर-हवेली पुर्तगाल राज्य का ही भाग था ! तो ऐसे में गोवा और दादर-नगर-हवेली पर सैन्य आक्रमण पुर्तगाल राज्य पर आक्रमण माना जाता.. और फिर NATO के चार्टर के अनुसार..अमेरिका के नेतृत्व वाले NATO के द्वारा कार्यवाही की आशंका थॊ ?
शायद इसी कारण चाचा नेहरू ने संसद में कह दिया कि .." गोवा और दादर-नगर-हवेली " उस राज्य के निवासी आजाद कराये ..भारत सरकार से क्या लेना देना !
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यद्यपि गोवा में ..गोवा कांग्रेस की स्थापना हो चुकी थी। परंतु गोवा में.. गांधी जी का चरखा व धरना काम नहीं कर रहा था ! पुर्तगाली शासन धरना प्रदर्शन करने वालो से बहुत सख्ती से निपटती थॊ ! उदाहरण के लिये राम मनोहर लोहिया.. की प्रेरणा पर एक बार अहिंसक प्रदर्शन हुआ.. परंतु गोवा की पुलिस 12 या 14 साल के बच्चो को भी बड़ी बेहरमी से पीटा था !
ऐसे में प्राभाकर सिनारी नामक का 14 वर्षीय बालक अपनी आंखो से पुर्तगालियों का क्रूर दमन देखा था !
थोड़ा बड़ा होने पर ..प्रभाकर सिनारी ने ..एक क्रांतिकारी संगठन आजाद गोवा दल बनाया !

इधर पूना में.. जब चाचा नेहरू की मजबूरी सुन कर कुछ शाखा जाने वाले खाकी चढ्ढीधारियो ने ( RSS) ..पुर्तगालियों के विरुद्ध लड़ने की योजना बनाई !
परंतु हथियार कहा से आये ? हथियार के लिये पैसा कहां से आये ? भारत सरकार मदद नहीं कर सकती थॊ !

पूना के RSS के कुछ कार्यकर्ताओ के मन मे धन जुटाने का एक उपाय सूझा ! वो लता मंगेशकर से मिले.. सहायता करने की प्रार्थना की ! कार्यकर्ताओं का प्रयोजन सुन कर सहायता के लिये तैयार हो गयी.. और उन्होंने कहा मोहम्मद रफी को भी आमंत्रित कर ले ! #लता मंगेशकर के सहायता के लिए तैयार होने का कारण ये था कि..श्री मंगेश मंदिर पुर्तगालियों के कब्जे में था ..जहाँ से लता मंगेशकर का नाता था !
मोहम्मद रफी.. कार्यकर्ताओं से टिकट के पैसे तक नहीं लिये ! लता और रफी ने पूना में बिना कुछ लिये एक स्टेज प्रोग्राम किया ..और प्रोग्राम के टिकट से जो पैसे एकत्रित हुए.. उसे लेकर कार्यकर्ता हथियार खरीदने की योजना बनाई !

#हथियार कहा से खरीदे ??
हैदराबाद के रजाकरो ने..भारतीय सेना से लड़ने के लिये हथियार मंगाये थे..परंतु भारतीय सेना से डर कर भाग गये । उन्ही में से कुछ रजाकरो ने हथियार छिपा कर रखे थे ! उन्ही हथियारों में से पांच सात ..राईफल और कुछ पिस्तौल बक्से में रख कर दो कार्यकर्ता ..ट्रेन से पूना स्टेशन पर पहुँच गये ! पूना स्टेशन पर ..पुलिस का एक सिपाही.. बक्से की जांच करने की जिद करने लगा ! उदे बक्से में अफीम होने का शक था ! एक कार्यकर्ता ने ..पुलिस को 400 रुपये घूस देने का लालच देकर..दूसरी ओर ले गया ...तो दूसरा बक्सा लेकर दूसरी ओर भाग निकला !
एक सेना के रिटायर्ड मेजर ने ..कार्यकर्ताओ को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी !
ट्रेनिंग के दौरान गोली की आवाज से लोगो को शक होने लगा..तो कार्यकर्ताओ ने बोल दिया कि..खेत से जानवर भगाने के लिए.. पटाखे फोड़ते हैं ! इसी दौरान एक कार्यकर्ता टिन के कनस्तर में डाल कर पटाखा फोड़ा ..तो उसका धमाक गोली चलने जैसा लगा ! ये आविष्कार बाद मे बहुत काम आने वाली थी !
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22 खाकी चढ्ढीधारी कार्यकर्ता.. दादर-नगर-हवेली को स्वतंत्र कराने के लिए दादर-नगर-हवेली को निकले ! पाच के पास राईफल थी ..कुछ के पास पिस्तौल! और कुछ तो बर्छी ही लेकर निकले ! सब 22 से 30 साल के बीच में थे ! संघियो का नेतृत्व राजा वाकणकर और नाना काजरेकर कर रहे थे ! इनके साथ ..आजाद गोवा दल के ..प्रभाकर सिनारी हो लिये ! प्रभाकर सिनारी बहुत बहादुर इंसान थे !
इन क्रांतिकारियों की योजना थी कि..पहले छोटी छोटी चौकियो पर आक्रमण किया जाये ..उन चौकियो मे रखे हथियारों को भी लूट कर उनका प्रयोग किया जाये !
उन दिनो दादर-नगर-हवेली में.. तीन पुर्तगाली अधिकारी थे..जो लालची भारतीयो की सहायता से वहाँ का प्रशासन चलाते थे ! एक एडमिनिस्ट्रेटर , एक जज व एक कैप्टन !

कार्यकर्ता व प्रभाकर के आदमियों ने कुछ चौकियो पर कब्जा कर लिया ! लक्ष्य सिलवासा की चौकी को बनाया !
अब तक पुर्तगालियों का पुलिस कैप्टन फदाल्गो 150 जवानों के साथ.. खतरनाक हथियारों के साथ सिलवासा मे था !
इधर .कुल .20-30 ही थे ! अचानक एक कार्यकर्ता पूना आया ..और वहाँ से शाखा व विद्यालय के 100 छात्रों को लेकर सिलवासा के बाहर पहुँच गया ! छात्रों की 25 -25 की चार टोली बनी ! हर टोली के साथ ट्रेंड एक एक कार्यकर्ता पिस्तौल के साथ था ! बाकी हथियार बंद कार्यकर्ता.. सामने से आगे बढ़ाने लगे ! रात में.. छात्रों की टोलो सिलवासा चौकी के चारो ओर पहुँच गयी ...और वो लोग टीन के कनस्तर में पटाखे फोड़ते ..! इधर कैप्टन फिदाल्गो ..व उसके सिपाहियों ने समझा कि चारो ओर से बड़ी सेना ने हमला कर दिया हैं ! फिदाल्गो..चौकी छोड़कर नदी पार कर गया ! कार्यकर्ताओ ने चौकी पर कब्जा कर लिया !
कैप्टन फिदाल्गो.. नदी के दूसरी ओर खड़ा देख रहा था ..और सोंच रहा था कि..इन कार्यकर्ताओ को मार कर भगा देंगे ! कार्यकर्ताओ की किस्मत अच्छी थी कि..नदी मे बाढ़ आ गयी ..और फिदाल्गो नदी के इस पार नहीं आ सका ! कैप्टन फिदाल्गो.. अपने सिपाही लेकर एक ऊंचाई पर बसे गाँव..खानवेल की ओर चला गया और ऊंचाई पर..मोर्चा जमा लिया !
कार्यकर्ताओ ( विद्रोहियों ) ने कुछ और गाँव को स्वतंत्र घोषित कर दिया.. परंतु योजना तो ..पुर्तगालियों व इनके सिपाहियों को भगाना था !
लेकिन संघियो व AGD ( आजाद गोवा दल ) के आदमियों की संख्या 20 -30 के बीच ही थी ! कनस्तर में पटाखे फोड़ने वाले छात्रों को वापस भेज दिया गया था !
संघियो ने " फिदाल्गो को खानवेल मे घर लिया ..। लेकिन समस्या ये थी कि..इनके हथियारों को गोलिया ऊंचाई पर कारगर नहीं थी ! और फिदाल्गो के सिपाहियों की संख्या भी 150 थॊ !
संघियो ने स्थानीय जनजाति वर्लियो की सहायता लेने का निश्चय किया ! वहाँ एक आदिवासी महिला बहुत प्रभावशाली थी ! उस महिला की सहायता से 150 से 200 उत्साही वर्लियो को..एकत्रित कर लिया ! कुछ वर्लियो के पास पिस्तौल.थी तो कुछ के पास. देशी कट्टा .तो कुछ तीर कामन ..व कुछ भाला लेकर ही आ गये थे।.
वर्लियो ने ऊचे पेड़ से ..निशाना लगाया !
अब फिदाल्गो घिर गया था ...!
अब एक बिचौलिये की मदद से ..कार्यकर्ता फिदाल्गो को सुरक्षित निकल जाने देने के लिये राजी हो गये !
अब ..दादर-नगर-हवेली स्वतंत्र हो गया !
तारीख थी 15 अगस्त 1954

पुर्तगालियों ने गोवा में सेना तैयार करके.. दादर-नगर-हवेली पर पुनः कब्जा करने की योजना बनाई ! परंतु भारत सरकार ने ..अपनी भूमि से पुर्तगाली सेना को ..जाने की अनुमति नहीं दिया ।
पुर्तगालियों ने ...अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में केस दायर कर दिया ! भारत सरकार की ओर से ..सीतलवाढ़ ने केस लड़ा ! कार्यकर्ताओ /विद्रोहियों की ओर से ..अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में... मराठो का एक दस्तावेज दाखिल किया गया.. और बताया गया कि ..मराठो के दस्तावेज पर तो पुर्तगालियों के हस्ताक्षर ही नहीं है। इस तरह से दादर-नगर-हवेली का मराठो द्वारा हस्तांतरण ही नहीं हुआ था ! 1961 मे पुर्तगालियों का दावा खारिज हो गया ! 15 अगस्त 1954 से लेकर 61 तक दादर-नगर-हवेली एक स्वतंत्र देश के रूप में रहा ।
#एक दिन का प्रधानमंत्री ..
1961 मे एक ICS अधिकारी त्यागपत्र दिया.. । दादर-नगर-हवेली के 78 गाँवो के सरपंचो ने उसे वहाँ का प्रधानमंत्री नियुक्त किया ! प्रधानमंत्री के बन कर उन्होंने दादर-नगर-हवेली का भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किया !!
#सच मे बताना कि...दादर-नगर-हवेली की आजादी के इतिहास के बारे में आप में से कौन कौन जानता था ??😊
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Photos from Chakradhar Jha " चक्रधर झा "'s post 18/05/2024

क्यों पड़े हो चक्कर में, कोई नहीं है टक्कर में।
देश के विकास के लिए, मजबूत प्रधानमंत्री चुने मजबूर प्रधानमंत्री नहीं,,,,,,,,,,.
फिर एक बार मोदी सरकार, अबकी बार ४०० पार,,,,,,,,,

16/05/2024

हमें तो देश में बम विस्फोट करने वाले की मंदमोहन सिंग की तरह कड़ी निंदा करने और यूएन में जाकर रोने वाला कठपुतली प्रधानमंत्री नहीं चाहिए
बल्कि दुश्मन के घर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करने वाला मोदीजी जैसा प्रधानमंत्री चाहिए। दुश्मन देश की संसद में जिसका खौफ हो ऐसा मोदीजी जैसा प्रधानमंत्री चाहिए। और मिहिर भाई कोटेचा जैसा लोगों के लिए 24x7 काम करने वाला सांसद चाहिए।

Photos from Chakradhar Jha " चक्रधर झा "'s post 02/05/2023

जनमानस विकास फाउंडेशन द्वारा आयोजित बिहार राज्य स्थापना दिवस , आचार्य चाणक्य व सम्राट अशोक जयंती के अवसर पर बिहार भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी जी, सांसद गोपाल शेट्टी जी, सांसद गोपाल जी ठाकुर, महाराष्ट्र भाजपा उपाध्यक्ष कृपाशंकर सिंह, मुंबई भाजपा महामंत्री संजय उपाध्याय जी, मुंबई भाजपा उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्रा जी, आयोजक मनोज झा जी एवम अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ। Devendra Fadnavis Chakradhar Jha " चक्रधर झा " BJP INDIA BJP Bihar BJP4MAHARASHTRA

16/03/2023

Delhi Fateh Diwas-11th March 1783

दिल्ली फ्तेह दिवस -11 मार्च 1783

बाबा बघेल सिंह धालीवाल की दिल्ली पर विजय और गंगा-जमुना दोआब पर इन योद्धाओं का वर्चस्व था।

आज 1783 में सम्राट शाह आलम द्वितीय और मुगल साम्राज्य पर अनगिनत शहीदों (शहीदों) / वधा घल्लूघरा के दौरान अपना खून बहाने के बाद योद्धाओं की जीत का प्रतीक है।

जाट सिख मिसल्स नवाब जस्सा सिंह अहलूवालिया के अधीन थे और मिसल्स ने अहमद शाह अब्दाली और उनकी अफगान सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी। बघेल सिंह और उनके करोरसिंहिया मिस्ल ने मुगलों, अफगानों, रोहिलों, महराटों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और ब्रिटिश-कराधान सीमाओं को अवध जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी के रक्षक राज्यों में धकेल दिया गया।

मार्च 1783 में, 30,000 से अधिक सैनिकों के साथ खालसा ने दिल्ली पर विजय प्राप्त की। जस्सा सिंह आहलूवालिया दीवान-ए-आम में सिंहासन पर बैठे और उन्हें पातशाह (नवाब कपूर सिंह विर्क द्वारा भविष्यवाणी के रूप में) घोषित किया गया, लेकिन फिर वापस ले लिया गया।

बघेल सिंह ने मुगल दरबार के साथ संबंध बनाए रखे और यह सुनिश्चित किया कि दिल्ली में सात गुरुद्वारों का निर्माण किया जाए। जस्सा सिंह रामघरिया मुगल सिंहासन की लूट को अमृतसर वापस ले आए। अंग्रेज इस नई बिरादरी से सहमत थे जिसे खालसा कहा जाता था।

रतन सिंह भंगू कहते हैं, "इतने बड़े ऐतिहासिक लैंडमार्क को एस। बघेल सिंह धालीवाल ने स्थापित किया, कि उनका नाम अनंत काल तक इतिहास में चमकता रहेगा। इतनी बड़ी सेवा उन्होंने गुरु को प्रदान की, कि निश्चित रूप से वह दिव्य न्यायालय में सम्मानित होंगे।"

1. Image of Baba Baghel Singh created by Harjinder Singh as featured on book: The British and the Sikhs

2. Image of Baghel Singh on display at Gurdwara Bangla Sahib Delhi.

3. Smadh of Baba Baghel Singh, Hariana (Horshiarpur)

4. Inside the Dewan-e-am (The Red Fort or Lal Kila, Delhi).

Credit :- S. Gurinder Singh Mann sir.
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#जाटणी #चौधरी

16/03/2023

वीर योद्धा रामलाल खोखर ने आज के दिन (15 मार्च 1206 ) मोहम्मद गौरी का सिर काट लिया था
#मानवेन्द्र सिंह
खोखर जाट बड़े वीर थे वीरता जाट जाति का जन्मजात गुण है जिस ग़ज़नवी के नाम से बड़े बड़े राजा महाराजा भय खाते थे जाटों ने उस ग़ज़नवी को लुट कर उसके दिल में भय पैदा कर दिया यह ऐतिहासिक प्रमाण है की इन खोखर जाटों के दिल्ली के तोमर जाट राजाओ से वैवाहिक सम्बन्ध रहे थे इन खोखर जाटों ने झेलम के आसपास अपना राज्य कायम किया जब गौरी ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया राजा पृथ्वीराज की हत्या कर दी (बिजोलिया शिलालेख अनुसार ) तो जाट खापों ने गौरी के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा दिया गौरी ने हिन्द की जनता पर अत्याचारो की बाढ़ ला दी
1205 -06 में खोखर जाटों ने लाहौर पर अधिकार कर लिया तथा पंजाब के शासक बनने की घोषणा कर दी। सन् 1206 ई० में खोखरों को दबाने के लिए गौरी फिर भारत आया। जब वह लाहौर से 15 मार्च 1206 ई० को गजनी वापिस जा रहा था तब धम्यक (Dhamyak) के स्थान पर मुलतान के 25,000 खोखर जाटों ने गौरी की सेना पर धावा बोलकर मुहम्मद गौरी का सिर काट लिया। उसके मरते ही गौरी का विशाल साम्राज्य ऐसा अस्त हो गया कि मानो वह जादू का चमत्कार था
#जाटणी #चौधरी #सरदार

05/12/2022

मन एक ऐसी भूमि है
जहां आप जैसी मानसिकता का बीज बोएँगें,
आपको वैसा ही फल प्राप्त होगा।

Photos from Chakradhar Jha " चक्रधर झा "'s post 28/09/2022

पिछले दिनों महाराष्ट्र प्रदेश कार्यालय में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव श्री विनोद तावड़े जी को बिहार का प्रभारी बनाये जाने के उपलक्ष में अभिनन्दन समारोह का आयोजन भाजपा बिहार प्रकोष्ठ मुंबई द्वारा किया गया, इस अवसर पर बिहार प्रकोष्ठ के सैकड़ो कार्यकर्ताओं के द्वारा बड़े उत्साह से श्री विनोद तावड़े जी का स्वागत किया गया।

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