28/11/2025
की होड़ में यूपी में डिटेंशन सेंटर का नया "गिफ्ट" तैयार हो गया है l
सभी DM को ऑर्डर दे दिया गया है कि हर जिले में एक-एक डिटेंशन सेंटर खोलो, जल्दी!"
अब सवाल ये कि इसमें किसे डाला जाएगा? जिनका वीजा एक्सपायर हो गया, या जिनके कागज गायब हैं, या जिनका नाम "खान" है और आधार में फोटो थोड़ा धुंधला है? वैसे जानकार लोग कह रहे हैं कि ये NRC का खेल है l
अभी तो सिर्फ गाजियाबाद में 100 बेड का 5-स्टार डिटेंशन सेंटर खुला है, अपने अपने कागज मजबूत रखो, SIR फॉर्म भर लो, वरना अचानक पता चले कि आपका अपना घर ही 'अवैध निर्माण' घोषित हो गया!"
नागरिकता का खेल शुरू हो चुका है...
Abdul Azeem Alig bhai 👍
28/11/2025
डॉक्टर आलोक का कहना है
कि कैंसर एक ऐसी बीमारी है
जिसने करोड़ो घर तबाह किए हैं…
सिर्फ मरीज ही नहीं
बल्कि मरीज के परिवारों को भी तबाह कर देता है…
दवाइयों का खर्च वहन करते करते
लोग टूट जाते हैं…
और टूटेंगे कैसे नहीं…
जब 600 रुपये की दवाई पर
सरकार ने छूट दे रखी है 12000 रुपये तक MRP रखने की…
जी हाँ…
दवाई है "Paclitaxel"
रिटेलर दवा दुकानदार खरीदते हैं ₹600 में
और MRP है ₹12000 तक है…
एक मरीज को कई बार
20-30 की ज़रूरत पड़ती है…
और ये कोई एक दवाई की बात नहीं
कीमोथेरेपी की ज़्यादातर दवाइयों का यही हाल है…
इस दवाई पर 200% मार्जिन भी नहीं
1900% मार्जिन?
वो भी कैंसर जैसी बीमारी में
प्रयोग होने वाले दवाई पर
जिसका इलाज वैसे भी काफ़ी लंबा चलता है?
ऐसे जीवनरक्षक दवाओं को तो
सरकार द्वारा फ्री करने जरूरत होती है…
लेकिन सरकार द्वारा फ्री देना तो छोड़िए
सरकार तो दवा कंपनियों को
1900% मार्जिन के साथ MRP रखने की छूट दे रखी है!
ग़रीब तो मर ही जाएगा ना?
ये तो ठीक नहीं हैं ना साहब?
Ministry of Health and Family Welfare, Government of India
PMO India
02/10/2025
धीरे धीरे हम बस अखबारों मे ही सिमट के रह जायेंगे खैर ये पढ़िये 👇
Authorities in Madhya Pradesh’s Chhindwara district have issued an advisory restricting the prescription, sale, and use of at least two cough syrups after six children, aged one to seven, reportedly died between September 4 and 26 from kidney-related complications and anuria.
02/10/2025
ख़िदमत के सिपाही अलविदा
इससे ज़्यादा और तकलीफ़ क्या होगी कि उत्तराखंड के भगवानपुर क़स्बा के रहने वाले शमशाद का कल इंतक़ाल हो गया।
शमशाद बाढ़ की तबाही से जूझ रहे पंजाब के भाइयों की मदद के लिए राहत सामग्री लेकर पहुंचे थे लेकिन वापसी में वह दुर्घटना का शिकार हो गए जिसमें उनका एक हाथ भी कट गया था।
कल सुबह इलाज के दौरान हार्ट अटैक से उनका इंतक़ाल हो गया।
अल्लाह मग़फ़िरत फ़रमाए 🤲
29/09/2025
चाये 🍵 पीने के तो बहुत नुकसान हैं आइये ब्लैक कॉफी ☕ के फायदे देखते हैं 👇
Google it please🙏 😊
29/09/2025
अलग ही स्वैग है 👇
अभी दो टिकट बुक किए तो
टिकट थे - 398 के दो
GST - 71 रुपये 72 पैसे
सुविधा शुल्क - 60 रुपये
सुविधा शुल्क पर GST - 10 रुपये 80 पैसे
मतलब 398 के दो टिकट आम आदमी को 540 रुपये के मिल रहे हैं...
200 रुपये का टिकट लग्जरी आइटम में आता है क्या जो इस पर 18 परसेंट जीएसटी लगाई जा रही है❓
और थियेटर वाले सुविधा शुल्क ले रहे हैं ग्राहक से और उस पर भी GST ली जा रही है ग्राहक से...मतलब कस्टमर से हर तरफ से पैसे खींच लो कि वो मनोरंजन के जरिए रिलैक्स होने जाए और टेंशन के साथ वापिस आए...
18/08/2025
मार्च 2023....
सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र के इतिहास में एक अहम नोट लिखा। आदेश था;
“चुनाव आयोग के अधिकारियों की नियुक्तियाँ सिर्फ़ सरकार की मर्जी पर नहीं होंगी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी चयन समिति में शामिल किया जाए।”
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यह आदेश किसी फॉर्मेलिटी का हिस्सा नहीं था। यह लोकतंत्र की नींव को मज़बूत रखने का कदम था, ताकि चुनाव आयोग के निर्णय निष्पक्ष और पारदर्शी बने रहें।
लेकिन लोकतंत्र का खेल हमेशा सीधा नहीं चलता।
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दिसंबर 2023 ...
संसद ने एक कानून पास कर दिया “Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023”।
इस नए कानून ने CJI को चयन समिति से पूरी तरह बाहर कर दिया। जिससे मार्च का आदेश मिट्टी में मिल गया। लोकतंत्र की चाशनी में अचानक कड़वाहट घुल गई।
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फिर नागरिक समाज और विपक्षी दल खड़े हो गए। ADR, लोक प्रहरी, PUCL और महुआ मोइत्रा ने तत्काल सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर कीं। आरोप साफ़ था, नए कानून ने लोकतंत्र की स्वतंत्रता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को कमजोर किया।
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यहां पर एंट्री होती है न्यायमूर्ति सूर्यकांत की। वही सूर्यकांत जिन्हें राहुल गांधी के प्रेस कांफ्रेंस की कोई जानकारी ही नहीं मिली। जिन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी का नमक खाया है।
तो विपक्षी दलों द्वारा दायर किए गए याचिका की सुनवाई का समय आया, लेकिन सूर्यकांत ने इसे बार-बार टालते रखा। हर बार तर्क यही था:
“मामला महत्वपूर्ण है, इसे प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा।” लेकिन कब देखा जाएगा अब तक नहीं बताया। लोकतंत्र और निष्पक्षता की चर्चा होती रही, लेकिन निर्णय स्थगित रहा।
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यानी, वही इंसान जो लोकतंत्र की नींव मजबूत करने का आदेश सुनने वाला था, अब स्थगन और विलंब की मशाल थामे खड़ा था।
लोकतंत्र सिर्फ़ कागज़ों में नहीं, इंसान के व्यक्तिगत समीकरण, सामाजिक संपर्क और राजनीतिक दबाव में भी झलकता है। यह लंबी, तिकड़म भरी दास्तान बताती है कि कानून और संविधान महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनका पालन करने वाले व्यक्तियों का चरित्र भी उतना ही अहम है।
लोकतंत्र का व्यंजन तब तक मीठा लगता है जब तक उसमें ईमानदारी और निष्पक्षता की पर्याप्त मात्रा हो।
और अगर उसमें ‘नमक’ की मात्रा ज्यादा बढ़ जाए, तो उसकी कड़वाहट सबको चुभती है।
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मार्च 2023 का आदेश, दिसंबर 2023 का कानून, और सूर्यकांत की स्थगित होती सुनवाई, ये सारे मामलात मिलकर लोकतंत्र और न्यायपालिका की दिलचस्प और मजेदार कहानी बुनते हैं जो एक फिल्म की तरह नजर आता है।
वैसे आप चाहें तो उस फिल्म के हीरो का नाम टिप्पणी में सजेस्ट कर सकते है। फिलहाल तस्वीर सूर्यकांत की लगी है।
(हर्षितेश्वर मणि तिवारी)
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