22/08/2017
Home | Jamia Hamdard Residential Coaching Academy
The history of Jamia Hamdard begins with the establishment of a small Unani clinic in the year 1906 by Hakeem Hafiz Abdul Majeed, one of the well-known practitioners of Unani System of Medicine of his time. Hakeem Hafiz Abdul Majeed had a vision of making the practice of Unani Medicine into a scient...
18/07/2017
Imran Pratapgarhi Conversation With Shahab Ashraf Sb on FREE Civil Service Coaching Options in India
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09/04/2017
हिन्दी माध्यम में असफलता का कारण क्या?
जबकि वर्तमान पाठ्यक्रम व प्रश्न 100 प्रतिशत मानवीय विषयों पर आधारित हैं तथा इन विषयों पर हिन्दी माध्यम में आई.ए.एस. के क्षेत्र में विद्वानों की कमी नहीं है।
जिम्मेदार कौन?
परीक्षार्थी स्वयं,कोचिंग संस्थाएं व उनके सर,स्टडी मैटेरियल व क्लास नोट्स
पत्र-पत्रिकाएं व पुस्तकें
सभी जिम्मेदार हैं क्योंकि,
•परीक्षार्थी अपना स्वयं का आकलन किए बगैर परीक्षा की तैयारी में लग जाते हैं।
•कोचिंग संस्थाएं जो फाउण्डेशन कोर्स के नाम पर लाखों रूपये और परीक्षार्थियों का 18 से 24 महीने का समय बरबाद करते हैं । अंततः उन्हें एस.एस.सी. सामान्य अध्ययन स्तर की तैयारी करा कर उनके भाग्य पर छोड़ देते हैं।
•उनके सर, जो वर्तमान संदर्भ में स्वयं को नहीं ढाल पा रहे हैं और आज भी 2011 से पूर्व के पैटर्न पर ही पढ़ा रहे हैं, जबकि सभी सक्षम हैं और परीक्षा की जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं।
•पाठ्य सामग्री, प्रायः सभी कोंचिंग संस्थान स्टडी मैटेरियल, क्लास नोट्स आदि अपने विद्यार्थियों को उपलब्ध कराते हैं, परन्तु इनमें नयापन नहीं है। पूर्व में प्रकाशन संस्थानों द्वारा छापे गए गाइड प्रकार की सामग्रियों का ही नोट्स के रूप में प्रस्तुति है जो 2011 से पहले अपनी उपयोगिता खो चुकी हैं।
•पत्र-पत्रिकाएं और पुस्तकें, जो 2011 के बाद के पाठ्यक्रम, प्रश्नों की प्रकृति आदि में जो परिवर्तन हुए उनके अनुसार इनमें व्यापक परिवर्तन नहीं ला पायें तथा पूर्व की भांति ही खबरों, विषयों को प्रस्तुत करते रहे।
•चुकीं सभी जिम्मेदार है तो सभी को बदलना पड़ेगा। सबको अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
•हमारे आंदोलन करने से या आंदोलन का समर्थन करने से UPSC अपने आप को नहीं बदलेगा, वे अपना स्तर वर्तमान हिन्दी माध्यम के छात्रों के लिए नीचे नहीं करेगा परंतु हमें अपने आप को UPSC के स्तर पर ले जाना होगा।
गलती कहां हुई?
पहली गलती,
•कोचिंग संस्थान के प्रबंधकों से, जो परीक्षार्थी की योग्यता को परखे बगैर उन्हें परीक्षा के लिए प्रोत्साहित कर एडमिशन ले लेते हैं।
दूसरी गलती,
• छात्र, जो इस नाम पर इस परीक्षा की तैयारी करने चले आते हैं कि उनका कोई दोस्त, परिवार के सदस्यों की इच्छा है कि वो आईएएस बने।
तीसरी गलती,
•माननीय सर लोगों की पढ़ाने के तरीके पर, चूंकि वर्तमान में प्रश्न उन क्षेत्रों से आ रहे हैं, जो व्यावहारिक हैं और समाज, अर्थव्यवस्था, मानवीय जीवन, भारत की संप्रभुता व उसकी अंतरराष्ट्रीय भूमिका, योगदान पर परंपरागत समझ के साथ समकालीन संदर्भ में होते हैं। इन प्रश्नों के उत्तर में छात्रों से विषय की व्यापक समझ के साथ विश्लेषण करने की क्षमताओं का आंकलन किया जाता है।
•इसलिए सभी पक्षों को अपने पढ़ने-पढ़ाने के तरीके में व्यापक परिवर्तन लाना होगा। जो पांच सौ या एक हजार की संख्या वाले क्लास में संभव नहीं है। अतः परंपरागत तरीके यानि नोट्स लिखवाने से माक्र्स नहीं आएंगे या ज्यादा से ज्यादा प्रारंभिक परीक्षा पास किया जा सकता है। सफलता नहीं मिलेगीं।
चौथी गलती,
• हर उस व्यक्ति को जो शिक्षा को व्यवसाय मान बैठा है और छात्रों को एक प्रोडक्ट, वह यह भूल गया है, कि शिक्षा एक सेवा है ना कि व्यवसाय।
पांचवीं गलती
•छात्रों की, जो सिर्फ साक्षात्कार, विज्ञापन और संस्थानों के बहकावे में आकर बिना जांच-पड़ताल के किसी भी संस्थान में जाकर एडमिशन ले लेते हैं।
सुधार की जरूरत कहां?
•स्वयं की क्षमताओं का आकलन एवं परीक्षा की तैयारी के सही समय का चयन ।
•पाठ्य पुस्तकों व पाठ्य सामग्री का चयन व कोचिंग संस्थान के चयन में सावधानी ।
•सेल्फ स्टडी के माध्यम से तैयारी की रूपरेखा, अनावश्यक के सुझावों से दूरी बनाना ।
•क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है, इसका आकलन ।
•परीक्षा केन्द्रित होकर तैयारी की रणनीति यानि आई.ए.एस. या पी.सी.एस. की जरूरतों के अनुसार ।
•अपने अंदर विषयों को तार्किक रूप से समझने की क्षमता का विकास ।
•सहपाठियों व मार्गदर्शक का सोच-समझ कर चयन ।
•ऑनलाइन साइट, सामग्री व सोशल मीडिया के इस्तेमाल और जरूरतों को समझना।
•टेस्ट सीरीज, उत्तर लेखन शैली, निबध्ं लेखन कला आदि की तैयारी और समय का निधार्रण अनावश्यक के दबाव से बचना।
•10 + 2, स्नातक स्तर , नौकरी करते हुए, पार्ट टाइम, डिस्टेंस स्तर से तैयारी की रणनीति।
•इंजीनियरिंग व अन्य प्रोफेशनल की तुलना में तैयारी की रणनीति।
•अच्छे कॉलेज, संस्थान या सामान्य कॉलेज, संस्थान से पढ़े होने पर तैयारी की रणनीति ।
•स्थान यानि शहर के चयन की रणनीति ।
•अपनी कमियों की पहचान कर लक्ष्य को निर्धारित कर टाइम टेबल तैयार करना तथा समय की कीमत को समझना और उसके अनुसार क्लास, स्टडी मैटेरियल आदि को पढ़ने में तालमेल बैठाना।
•परीक्षा से पूर्व व बेसिक तैयारी की समाप्ति के बाद की रणनीति।
•न्यूज पेपर, पत्रिका, करेंट अफेयर्स आदि का चयन, उनके पढ़ने के तरीके व स्वयं के नोट्स बनाने की रणनीति ।
30/03/2017
कभी कभी तमाम बद्दुआओं पर किसी की एक दुआ बडी भारी सी लगने लगती है !
शुक्रिया सर
12/05/2016
ANSAR AHMAD SHEIKH - IAS : Rank-361
SUCCESS STORY:-
'मैं शेख हूं, शुभम नहीं, अब सबको बता सकता हूं'
UPSC rank holder speaks his mind: ‘I am Shaikh,
not Shubham, can tell everyone now’ - अंसार अहमद शेख
UPSC का एग्जाम पास करने पर उसे दोहरी खुशी
है. एक, अब वह अफसर हो जाएगा. दूसरी, वह
सबको अपना असली नाम बता सकता है.
21 साल के अंसार अहमद शेख के पिता ऑटो चलाते हैं. घर महाराष्ट्र के जालना जिले के शेडगांव में है. उसने पहली ही कोशिश में UPSC का एग्जाम पास कर लिया. ऑल इंडिया रैंक, 361.
ग्रेजुएशन और उसके बाद UPSC की तैयारी के लिए अंसार अहमद पुणे चला आया. फर्ग्युसन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की, फिर
सिविल सर्विसेस की तैयारी में जुट गया.
लेकिन अपने मुस्लिम नाम की वजह से उसे
मनचाही जगह पर किराए का घर नहीं मिला.
तब उसने अपना नाम बदला. शुभम. ताकि बिना
भेदभाव के इस शहर में रहकर पढ़ाई कर सके. वह खुश है
कि अब सबको अपना नाम बता सकता है.
‘मुझे याद है जब मैं पीजी खोजने निकला था. मेरे
हिंदू दोस्तों को आसानी से कमरे मिल गए, पर
मुझे मना कर दिया गया. इसलिए अगली बार मैंने
अपना नाम शुभम बताया, जो दरअसल मेरे दोस्त
का नाम था. लेकिन अब मुझे अपना नाम छिपाने
की जरूरत नहीं है.’
अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से अपने संघर्ष
पर बात करते हुए अंसार शेख की आंखें भर आईं.
BACKGROUND:-
उसने बताया, ‘मेरे वालिद साहब की तीन बीवियां
थीं. मेरी मां उनकी दूसरी बीवी हैं. हमारी
फैमिली में पढ़ाई-लिखाई की अहमियत नहीं
थी. छोटे भाई ने स्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ दी
थी. दो बहनों की जल्दी शादी कर दी गई थी.
जब मैंने घर पर फोन करके बताया कि मैंने UPSC का एग्जाम निकाल लिया है और अब IAS अफसर
बन सकता हूं, तो वे हैरान रह गए.’
शेख ने अभी अपने दोस्तों के साथ एक छोटा जश्न
मनाया है. बड़े जश्न के लिए वह घर पहुंच रहा है.
अपनी तैयारी के बारे में बताते हुए उसने कहा कि कामयाबी का कोई शॉर्ट कट नहीं है. दसवीं क्लास को छोड़कर वह स्कूल में टॉपर रहा. UPSC
के लिए ग्रेजुएशन के दिनों से ही तैयारी की.
तीन साल तक रोजाना 10-12 घंटे पढ़ाई.
‘मैं स्टूडेंट्स से कहूंगा कि वह खुद से पूछें कि सिस्टम में क्यों आना चाहते हैं. इसका जवाब मिलने के बाद रास्ता आसान है.’
सारी जिंदगी धार्मिक भेदभाव झेल चुके शेख
कहते हैं कि वह हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने के लिए काम करेंगे.
12/05/2016
FARHA HUSSAIN - IAS : RANK - 267
SUCCESS STORY:-
सिविल सर्विसेस को क्लियर करने वाले
लगभग सभी लोग कहते हैं कि उन्होंने किताबों से
8 से 10 घंटे की पढ़ाई की, टाइम मैनेजमेंट का
खास ख्याल रखा… और न जानें क्या क्या
किया। लेकिन, दौसा की फरहा हुसैन ने बिना
किसी कोचिंग के सहारे गूगल और इंटरनेट की हेल्प
से पहले ही प्रयास में 267 वीं रैंक हासिल की है।
पढ़ें फरहा की सक्सेस स्टोरी…
– फरहा ने बताया कि वह गूगल पर नियमित 10 से
15 घंटे पढ़ाई करती थी।
-फरहा ने कोचिंग भी ली, लेकिन एक माह बाद
लगा कि वहां समय खराब करना है।
-तैयारी का आधार गूगल और इंटरनेट रहा,
क्योंकि हरेक लेटेस्ट जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध
है।
-फरहा ने बताया इंटरनेट के जरिये आप ई-पेपर को
पढ़ सकते हैं और वही फराह ने किया।
-फरहा ने सभी बड़े अखबारों व मैगजीन के ई-पेपर
को ही पढ़ा।
-फरहा का कहना है कि गूगल एक बहुत अच्छा
माध्यम है, ज्ञान बटोरने का बस इसका सही
इस्तेमाल करना आना चाहिए।
SUPPORT BY/OF:-
फैमिली का रहा फुल सपोर्ट
– फरहा ने बताया कि तैयारी में परिवार का
भी बहुत सपोर्ट रहा।
BACKGROUND:-
– फरहा में पिता कलेक्टर हैं, अन्य भी कई
रिश्तेदार बड़े ओहदे पर हैं।
EDU. ENVIRONMENT:-
-ऐसे में पारिवारिक माहौल बहुत अच्छा
मिला।