ईद उल अज़हा मुबारक
वसीम अमरोहवी साहब के बेहतरीन पैग़ामे ईदे कुरबां के साथ इस ईद का मक़सद क्या है सुनें अल्लाह हमें अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाए।
Sadaate Baahera Muzaffarnagar India
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई भाई।
आज 9 ज़िलहिजजा रोज़े अरफा शबे क़द्र के बाद सबसे अफज़ल दिन दुआए अरफा पढने का दिन या रब हमें तौफ़ीक़ दे।
अरफा के दिन मक्का में ईरानी हाजियों ने इज़राइल और अमेरिका के खिलाफ और रहबर खामेनेई (र) के समर्थन में नारे लगाए।
ईरानी हाजियों को ही इजाज़त है जिसे सऊदी अरब हज के दौरान राजनीतिक नारे लगाने की अनुमति देता है।
Cpd
26/05/2026
आज जो लोग कुछ तथाकथित कवियों या तथाकथित ज़ाकिरीन तबरे और कुछ सुधारवादी कवियों और विद्वानों को निशाना बना रहे हैं, वही लोग कल सुप्रीम लीडर को भी कविताओं और वाक्यों में निशाना बना रहे थे। जबकि लीडर और विद्वानों का रुख तबरे के खिलाफ नहीं था, बल्कि तबरे की आड़ में मतभेद पैदा करना और गाली-गलौज को नापसंद करना था।
खैर! गधों के कभी सींग नहीं होते, उन्हें कभी अक्ल नहीं आती। वे नासमझों को बेवकूफ बना सकते हैं, लेकिन समझदार लोग उनकी चालें समझ गए हैं।
जब वे आज के ज़ुल्म के खिलाफ नहीं बोल सकते, तो तबरे के बारे में क्या कहेंगे? बुलडोजर देखकर पार्टी बदलने वाले तबरे के बारे में क्या कहेंगे? मीटिंग की सही तारीख से पहले लिफाफे का वज़न बढ़ाने की मांग करने वाले तबरे के बारे में क्या कहेंगे? गानों के अंदाज़ में विलाप करने वाले और दूसरों की कविताएँ चुराने वाले तबरे के बारे में क्या कहेंगे? ये अधार्मिक, नामर्द और अपनी पत्नियों पर ज़ुल्म करने वाले तबरे के बारे में क्या कहेंगे? वादे तोड़ने वाले तबरे के बारे में क्या कहेंगे?
मियां! तबारी के इस दौर में ईरानियों से सीखो! नमाज़ पढ़ने वालों से सीखो, लड़ने वालों से सीखो, सच्चे लोगों से सीखो, दुख मनाने वालों से सीखो, तबारी आगा सिस्तानी और खामेनेई से सीखो, जिन्होंने मिट्टी के घर की ईंटों को तबारी की आवाज़ देकर दुनिया के साम्राज्य को ठुकरा दिया, और नजफ़ और तेहरान की ज़मीन से गाज़ा और फ़िलिस्तीन का साथ दिया। तबारी का असली मकसद दूरियां पैदा करना नहीं बल्कि लोगों को करीब लाना है।
तबरा = तबर्रा
तबराई =तबर्राई
جو آج بعض نام نہاد شعرا یا نام نہاد ذاکرین تبرے کو لے کر بعض اصلاح پسند شعرا اور علما کو نشانہ بنا رہے ہیں یہی لوگ کل رہبر معظم کو بھی اشعار اور جملے کے پیرائے میں نشانہ بناتے تھے۔ جبکہ رہبر اور علما کا موقف تبرے کے خلاف نہیں تھا بلکہ تبرے کی آڑ میں اختلافات قائم کرنا اور گالی گلوچ سے بیزاری تھی۔
خیر! گدھوں کو کبھی سینگ نہیں آتی انہیں کبھی عقل نہیں آئے گی۔ یہ جاہلوں کو بیوقوف بنا سکتے ہیں مگر باشعور افراد ان کی چالوں کو سمجھ چکے ہیں۔
جب یہ آج کے ظلم کے خلاف نہ بول سکے وہ کیا بتائیں گے تبری کیا ہے؟ بلڈوزر کو دیکھ کر اپنی پارٹی بدل لینے والے لوگ کیا بتائیں گے تبری کیا ہے؟ عین مجلس کی تاریخ سے پہلے لفافہ کا وزن بڑھانے کی ڈیمانڈ کرنے والے کیا بتائیں گے تبری کیا ہے؟ گانے کی طرز پہ نوحہ خوانی کرنے والے اور دوسروں کے اشعار چوری کرنے والے کیا بتائیں گے تبری کیا ہے؟یہ بے دین ، چرسی اور بیوی پہ ظلم کرنے والے نامرد کیا بتائیں گے تبری کیا ہے؟ وعدہ خلافی کرنے والے کیا بتائیں گے؟
میاں! تبری اس دور میں ایرانیوں سے سیکھو! نمازیوں سے سیکھو ، مجاہدوں سے سیکھو، مخلصوں سے سیکھو ، عزاداروں سے سیکھو ، تبری آغا سیستانی و خامنہ ای سے سیکھو جس نے ایک کچے مکان کی اینٹوں کو تبرے کی آواز دے کر دنیا کے سلطنت کو ٹھکرا کر، نجف و تہران کی دھرتی سے غزہ و فلسطین کی حمایت کرکے بتایا تبری کا اصل مقصد دوری پیدا کرنا نہیں بلکہ قریب کرنا ہے۔
नौगांवा सादात के दो नौजवान की अचानक दुखदायी मौत पर इज़हारे अफसोस नौजवानों ज़िंदगी बड़ी क़िमती है अहतियात हमेशा बरतें।
सलाम या इमाम मौहम्मद बाक़र अ.स. आपका इल्म आजतक दुनिया के काम आ रहा है आलमे इस्लाम की पहली युनिवर्सिटी की स्थापना आपने की।
8 ज़िलहिजजा 60 हिजरी
अल्लाह के लिए अल्लाह वालों ने अल्लाह का घर छोड़ा हज को उमरे से बदला सलाम या हुसैन अ.स.।
22/05/2026
आप और मेरे जैसे लोग, जो हमेशा। ''या अली" कहते हैं और दुनिया में "अली के चाहने वालों" के तौर पर जाने जाते हैं, उन्हें अमीर अल-मो'मिनिन (अ.स.) से सीखना चाहिए।
सिर्फ़ अली से प्यार करना या उनकी अच्छाइयों को पहचानना काफ़ी नहीं है। बहुत से लोग ऐसे थे जिन्होंने अली की अच्छाइयों को दिल से माना। उनमें से कुछ तो अली को एक पवित्र और मासूम इंसान भी मानते थे, लेकिन उनके और अली के किरदार में फ़र्क था क्योंकि वे अली की खासियत को नहीं पहचान पाए, यानी वह अपने ही जाल में फँसे हुए थे, जबकि अमीर अल-मो'मिनिन अली (अ.स.) की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह अपने ही जाल में फँसे नहीं थे।
आपके लिए "मैं" शब्द का कोई मतलब नहीं था। आपके लिए जो मायने रखता था वह था ज़िम्मेदारियाँ, लक्ष्य, अल्लाह की राह में जिहाद और अल्लाह तआला के प्रति सम्पूर्ण समर्पण।
लेखक शहीद सैय्यद अली ख़ामेनेई
किताब 250 साला इंसान
میں اور آپ جیسے لوگ، جو ہمیشہ "یا علؑی" کہتے رہتے ہیں اور دنیا میں "علؑی" کے چاہنے والوں کے نام سے معروف ہیں، ہمیں چاہیے کہ ہم امیر المؤمنین علیہ السلام سے درس حاصل کریں۔
صرف علؑی کی محبت یا علؑی کے فضائل کی شناخت کافی نہیں ہے۔ ایسے لوگ بہت تھے، جو دل سے علؑی کے فضائل کا اعتراف کرتے تھے۔ ان میں سے بعض لوگ تو علؑی کو ایک پاکیزہ اور معصوم انسان بھی مانتے تھے لیکن ان کے کردار اور علؑی کے کردار میں فرق تھا کیونکہ وہ علؑی کی خصوصیت کو نہیں پہچان سکے تھے یعنی وہ اپنی ذات کے حصار میں پھنسے ہوئے تھے ، جبکہ امیر المؤمنین علی علیہ السلام کی سب سے بڑی خصوصیت یہ تھی کہ وہ اپنی ذات کے حصار میں گرفتار نہیں تھے۔
لفظ "میں" کی آپ کے نزدیک کوئی اہمیت نہیں تھی۔ آپ کے ہاں جس چیز کی اہمیت تھی، وہ ذمہ داریاں، اہداف، جہاد فی سبیل اللہ اور اللہ تعالیٰ کی ذات تھی۔
شہید سید علی خامنہ ای
۲۵۰ سالہ انسان
19/05/2026
*जहन्नम में ज़्यादातर लोग कौन होंगें ?:- आयतुल्लाह फातेमी (अल्लाह उन पर रहम करे)*
हमारे समाज में कुछ लोग, जब सुबह उठते हैं, तो अपना दिन ऐसे शुरू करते हैं: "ओह! इस आदमी ने यह कहा, इस आदमी ने वह किया" और इसी तरह वे बाकी दिन भी बुराई फैलाते रहते हैं।
यह सब छोड़ो!
एक रिवायत है कि जहन्नम में जाने वाले ज़्यादातर लोग अपनी ज़बान की वजह से जाते हैं। यह मत सोचो कि सिर्फ़ शराब पीने वाले और लोगों के घर लूटने वाले ही जहन्नम में जाएँगे, बल्कि कुछ मोमिन भी होंगे जो जहन्नम में जाएँगे।"
*[आयतुल्लाह फातेमी निया (अल्लाह उन पर रहम करे)]*
ऐ अल्लाह, मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार पर रहम फरमा और उनकी वापसी जल्दी कर।
*جہنم میں اکثریت کن لوگوں کی؟:- آیة اللہ فاطمی رح*
ہمارے معاشرے میں کچھ لوگ جب صبح اٹھتے ہیں تو وہ اپنے دن کا آغاز ایسے کرتے ہیں: "اوہ! اس شخص نے یہ کہا، فلاں شخص نے ایسا کیا" اور اسی طرح باقی سارا دن بھی وہ غیبت جاری کرتے رہتے ہیں۔
چھوڑ دیں یہ سب!
ایک روایت میں ہے کہ جہنم میں داخل ہونے والوں کی اکثریت ان کی زبان کی وجہ سے ہے۔ یہ مت سمجھو کہ صرف شراب پینے والے اور لوگوں کے گھروں کو لوٹنے والے جہنم میں لائے جائیں گے بلکہ کچھ مؤمنین بھی ہوں گے جو جہنم میں داخل ہوں گے۔"
*[آیة اللہ فاطمی نیا رح]*
اللھم صلی علی محمد و آل محمد و عجل فرجھم
16/05/2026
*एक गुनाहगार नौजवान की कहानी :- अयातुल्ला दस्तगेब*
कहा जाता है कि एक बार, मशहूर किताब "गुनाहाने कबीरा" के लेखक, शहीद अयातुल्ला हुसैन दस्तगेब एक मजलिस के बाद खूब रो रहे थे। उनके करीबी शिष्य ने हैरानी से उनसे पूछा: "आग़ा ! क्या हुआ? आप इतना क्यों रो रहे हैं?"
शहीद दस्तगेब (अल्लाह उन पर रहम करे) ने कहा: "आज एक नौजवान मेरे पास आया। मैंने उसकी आँखों में शैतान को नाचते देखा।"
मैंने उसे कुरान की आयतें सुनाईं, जहन्नुम की आग, कब्र की तकलीफ और अल्लाह के गुस्से के बारे में बात की, लेकिन उसके चेहरे पर कोई कांपना या कोई असर नहीं हुआ। आखिर में मैंने कहा: बेटा! अगर तुम अभी मर गए तो?
वह लापरवाही से हँसा और बोला: "आग़ा! अल्लाह सबको माफ कर देगा, हम अभी जवानी में हैं।"
अयातुल्ला दस्तगेब ने कहा: "मैंने उसके माथे पर यह लिखा देखा: 'अल्लाह की रहमत से महरूम'। इस सीन ने मुझे हिलाकर रख दिया, क्योंकि मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में पहली बार किसी नौजवान के लिए अल्लाह की रहमत के दरवाज़े बंद होते देखे हैं।"
उसी रात, वही नौजवान एक गैर-महरम लड़की के साथ मोटरसाइकिल चला रहा था, और तेज़ रफ़्तार और लापरवाही की वजह से एक्सीडेंट में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
जब उसे दफ़नाने का समय आया, तो कब्र ने लाश को स्वीकार नहीं किया। लोगों ने कई बार लाश को दफ़नाने की कोशिश की, लेकिन हर बार धरती ने उसे बाहर निकाल दिया। लोग हैरानी में थे।
आखिर में, अयातुल्ला दस्तगेब आए। उन्होंने कहा: "यह लाश गुनाह से काली पड़ गई है, इसकी माँ को तौबा करनी चाहिए और सभी लोगों से माफ़ी माँगनी चाहिए, शायद धरती इसे फिर से स्वीकार कर ले।"
माँ चीखी, रोई, सबके पैरों में गिरी, तौबा करती रही, और जब उसके दिल से तौबा निकली, तो धरती ने लाश को स्वीकार कर लिया।
*[बड़े पाप, शहीद सैयद दस्तगेब शिराज़ी (अल्लाह उन पर रहम करे)]*
*ایک گناہ گار جوان کا عبرتناک واقعہ:- آیة اللہ دستغیب*
منقول ہے کہ ایک مرتبہ شہید آیة اللہ حسین دستغیب جو مشہور کتاب "گناہان کبیرہ" کے مصنف ہیں، ایک مجلس کے بعد بے تحاشا گریہ کر رہے تھے، ان کے قریبی شاگرد نے حیرت سے پوچھا: آقا! کیا ہوا ہے آپ اتنا کیوں رو رہے ہیں؟
شہید دستغیب رح نے فرمایا: "آج ایک نوجوان میرے پاس آیا، میں نے اس کی آنکھوں میں شیطان کو ناچتے ہوئے دیکھا ہے۔"
میں نے اسے قرآن کی آیات سنائیں، دوزخ کی آگ، قبر کے عذاب اور اللہ کے قہر کی بات کی مگر اس کے چہرے پر کوئی لرزش، کوئی اثر نہیں آیا۔ میں نے آخر میں کہا: بیٹا! اگر آپ ابھی اسی وقت مر گئے تو؟
وہ بے فکری سے ہنسا اور بولا: آقا! سب کو اللہ معاف کر دے گا، ابھی تو ہماری عمر پڑی ہے۔
آیة اللہ دستغیب نے فرمایا: "میں نے اس کے ماتھے پر یہ لکھا ہوا دیکھا 'محروم من رحمۃ اللہ' یعنی اللہ کی رحمت سے محروم۔ اس منظر نے میرے وجود کو ہلا دیا، کیونکہ اپنی پوری زندگی میں پہلی بار میں نے کسی نوجوان پر اللہ کی رحمت کے دروازے بند دیکھے ہیں۔"
اسی رات وہی نوجوان ایک نامحرم لڑکی کے ساتھ موٹر سائیکل پر جا رہا تھا، تیز رفتاری اور غفلت کی وجہ سے دونوں کا حادثے میں موقع پر ہی انتقال ہو گیا۔
جب اس کی تدفین کا وقت آیا تو قبر نے بدن قبول نہ کیا۔ لوگوں نے کئی بار لاش کو دفنانے کی کوشش کی، مگر ہر بار مٹی نے اسے باہر اچھال دیا۔ لوگوں میں تعجب کی کیفیت تھی۔
بالآخر آیت اللہ دستغیب تشریف لائے۔ انہوں نے فرمایا: "یہ بدن گناہ سے سیاہ ہو چکا ہے، اس کی ماں توبہ کرے اور سب لوگوں سے معافی مانگے شاید زمین پھر اسے قبول کرے۔"
ماں چیختی، روتی، سب کے قدموں میں گری، توبہ کرتی رہی اور جب دل سے توبہ نکلی تو زمین نے لاش کو قبول کر لیا۔
*[گناہان کبیرہ ، شہید سید دستغیب شیرازی رح]*
15/05/2026
नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, हमारे पास अमेरिकियों पर भरोसा करने की कोई वजह नहीं है. ईरानी लोग केवल सम्मान की भाषा समझते हैं. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में किसी भी प्रकार की बाधा के लिए ईरान ज़िम्मेदार नहीं है. हम उन सभी देशों की सराहना करते हैं, जिन्होंने इस हमले की निंदा की. हम भारत सरकार और भारत की जनता की सराहना करते हैं, जिन्होंने ईरानी लोगों के प्रति एकजुटता और सहानुभूति व्यक्त की.
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