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Dilshad Choudhary
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hi I'm dilshad choudhary
mera safar shauk he or blog par main
ghumne ke experience shere karta hu jo aoo log bhaut like karte he
or blog ko like or chennal ko flow kro♥️♥️♥️✌🏽✌🏽🇮🇳🇮🇳🙏🏻🙏🏻
आज हमारे गांव संजक में तो बहुत ही दर्द के हादसा हुआ है जिसमें एक जवान लड़के की मौत हो गई है गांव तावली का रहने वाला था
अल्लाह उसकी नफ़रत फरमाए आमीन सुम्मा आमीन🤲🤲🤲😭😭
17/06/2023
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26/02/2023
हार मत मानो, हमेशा अगला मौका ज़रूर आता है।
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Dilshad Choudhary
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15/02/2023
बाबर : एक अजीब किरदार
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14 फरवरी 1483 को मुगलिया सल्तनत के संस्थापक ज़हीरुद्दीन मोहम्मद बाबर का जन्म हुआ , पैदाइश के बाद पिता उमर शेख मिर्जा बच्चे को मशहूर सूफी बुजुर्ग वली मुनीर मरग़यानी की खानकाह में ले गए बुजुर्ग ने बच्चे का नाम ज़हीरुद्दीन मोहम्मद रखा यूं तो बहुत अच्छा नाम था पर मुग़ल व तुर्कों के लिए यह अजीब था वह इस का उच्चारण नहीं कर पाते थे इस लिए बाबर नाम से पुकारने लगे
मुगलों को नाम अजीब लगा और इस का प्रभाव यह हुआ कि बाबर की पूरी जिंदगी अजीब हो गई बाबर की मौत अजीब थी और बाबर का दफ़न किया जाना भी अजीब था
बाबर एक सम्राज्य का संस्थापक , एक अच्छा बादशाह , बेमिसाल योद्धा होने के साथ साथ एक बेहतरीन साहिबे दिवान शायर , इल्मे उरूज़ ( शेर के वज़न का ज्ञान ) का माहिर , अपनी खुद की लिपि ( रस्मुल खत़ ) का आविष्कारक था अपनी खुद की जीवनी " तुज़के बाबरी ' लिखी हन्फी फिकह पर भी उस ने मुबीन नाम से एक किताब लिखी
सिर्फ बारह साल की उम्र में फरगाना का शासक बना , सोचें एक बच्चा जिसे शिक्षा प्राप्त करने और सीखने की उम्र में इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी मिल गई हो उस ने अपने अंदर यह काबिलियत कैसे पैदा की ? है न अजीब बात ?
बारह साल का शासक जिस के अपने चचा उसके दुश्मन थे अपनी हुकूमत संभालनी मुश्किल थी पर वह बहुत महत्वाकांक्षी था फरगाना जैसे छोटे राज्य पर सब्र नहीं कर सकता था आगे बढ़ा और युद्ध करके समरकंद पर विजय प्राप्त कर ली लेकिन इस बीच उसके चचा ने फरगाना पर कब्जा कर लिया है फरगाना बचाने निकला समरकंद हाथ से निकल गया दोनों जगह हाथ से निकल जाने के बाद अपने कुछ वफादार सैनिकों के साथ भागा और अफगानिस्तान के काबुल शहर पर कब्जा कर लिया
ऐसे मौके पर ईरान के सफवी सुल्तान ने पेशकश की कि हमारे साथ मिल जाओ हम तुम्हें समरकंद और फरगाना वापस दिला देंगे लेकिन साथियों ने मशविरा दिया कि ईरान के साथ मिलकर अपना राज्य वापस ले लोगे पर संभाल नहीं पाओगे , लोग तुम्हें चैन से बैठने न देंगे
इन सब मायूसी की हालात में उसे भारत से निमंत्रण मिलता है कि आकर हमें बचाओ जाहिर है एक ऐसे शख्स को जो अपना खोया हुआ राज्य वापस न ले सका हो ऐसा निमंत्रण अजीब है न ?
बाबर का दफ़न किया जाना ऐसे अजीब था कि बाबर की इच्छा थी कि उसे काबुल में दफन किया जाए पर उसका इंतकाल आगरा में हुआ कुछ हालात ऐसे बनें कि लाश को काबुल ले जाना संभव नहीं था इसलिए आगरा में दफन कर दिया गया और जब हालात अच्छे हुए तो बेगम मुबारिका ने लाश को आगरा से काबुल ले जा कर दफन किया है न यह भी अजीब ?
आज इतने वर्षों बाद उसे आक्रांता अत्याचारी और पता नहीं क्या क्या कहा जा रहा है और यह कहने वाले सत्ता में हैं वह एक तरफ नफ़रत भी दिखा रहे हैं और दूसरी ओर उज़्बेकिस्तान सरकार की मदद से आगरा शहर में बाबर की याद स्थापित करना चाहते हैं , यह भी अजीब बात है न ?
मौत कैसे अजीब थी यह बचपन में सब ने पढ़ा होगा उसे मैं नहीं लिख रहा याद कर लिजिए
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