05/09/2026
शिक्षक दिवस पर “संस्कृत के विकास में शिक्षक की भूमिका” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित
संस्कृत से वाणी, मानसिक स्वास्थ्य, सांस्कृतिक संरक्षण एवं व्यक्तित्व विकास के महत्व पर हुआ विमर्श
मुजफ्फरपुर, 5 सितंबर 2026।
शिक्षक दिवस के अवसर पर मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), मुजफ्फरपुर में “संस्कृत के विकास में शिक्षक की भूमिका” विषय पर एक विशेष विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय संस्कृत प्रमुख डॉ. संजीव कुमार मुख्य अतिथि एवं विशेषज्ञ वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता MIT के प्राचार्य डॉ. मिथिलेश कुमार झा ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात संस्कृत की प्राध्यापिका सुस्मिता प्रामाणिक ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, प्राचार्य, शिक्षकगण, अतिथियों एवं विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत की आधुनिक शिक्षा एवं तकनीकी परिवेश में उपयोगिता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. मिथिलेश कुमार झा ने विद्यार्थियों को संबोधित किया तथा मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार का अभिनंदन किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और चिंतन की समृद्ध परंपरा से जुड़ने का माध्यम है। उन्होंने तकनीकी एवं इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में संस्कृत की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि ने संस्कृत की आधुनिक प्रासंगिकता पर दिया व्याख्यान
मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार ने अपने विशेषज्ञ व्याख्यान में संस्कृत की उपयोगिता के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से वाणी एवं उच्चारण, मानसिक स्वास्थ्य, भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा व्यक्तित्व विकास के संदर्भ में संस्कृत के महत्व को समझाया।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि संस्कृत के शुद्ध उच्चारण एवं ध्वनि-विज्ञान का अभ्यास वाणी और उच्चारण क्षमता के विकास में उपयोगी हो सकता है। साथ ही उन्होंने संस्कृत के अध्ययन को एकाग्रता, मानसिक अनुशासन एवं सकारात्मक चिंतन से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि संस्कृत का संरक्षण हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान-परंपरा के संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है। संस्कृत के माध्यम से विद्यार्थी भारतीय साहित्य, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन उनके व्यक्तित्व विकास, तार्किक चिंतन, संप्रेषण क्षमता एवं आत्मविश्वास को विकसित करने में सहायक हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी शिक्षा के साथ भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में संस्थान के डॉ. शादाब रब्बानी, डॉ. आलोक रंजन, प्रो. प्रियंका चोपड़ा, डॉ. श्रवण कुमार सहित अन्य शिक्षकगण एवं अतिथिगण उपस्थित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक सार्थक बनाया।
धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में रजिस्ट्रार डॉ. विजय कुमार महोदय ने धन्यवाद ज्ञापन (Vote of Thanks) प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार, प्राचार्य डॉ. मिथिलेश कुमार झा, उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों, शिक्षकगण, आयोजकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों का धन्यवाद करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के ज्ञानवर्धक एवं अकादमिक कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम संस्कृत, आधुनिक तकनीकी शिक्षा और भारतीय संस्कृति के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन के प्रति प्रेरित करने के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति, ज्ञान-परंपरा और व्यक्तित्व विकास से जोड़ने का संदेश दिया।
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