लोकतंत्र

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जनता का राज , जनता के साथ

Photos from लोकतंत्र's post 20/01/2021

श्रद्धांजलि अर्पित शेर Ronojeet John भाई को
आंखो नम श्रद्धांजलि अर्पित करता हु 😭😭😭🙏 और जो भी हत्यरा है उसे फांसी की सजा हो

Photos from लोकतंत्र's post 09/11/2020

26/07/2020

मध्य प्रदेश की सतना सीट से लोकसभा सांसद गणेश सिंह ओबीसी मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष हैं। क्रीमी लेयर को लेकर वे अपनी ही सरकार के सामाजिक न्याय मंत्रालय से भिड़े हुए हैं । मध्य प्रदेश में इन्हें उमा भारती ने आगे बढ़ाया। गणेश सिंह के जज्बे को सलाम। .... लेकिन तथाकथित दलित, सेकुलर, समाजवादी, बहुजनवादी और ओबीसी चिंतकों के लिये गणेश सिंह जी प्रशंसा के पात्र नहीं हैं , क्योंकि ये भाजपा में हैं।

खुद को समाजवादी, बहुजनवादी बोलने वाले नेताओं ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कितना सरकार को घेरा है वो भी देखिए !

04/07/2020



#ज्योति_पासवान_1
जी हां यही वो नाम है जो आज से करीब दो महीने पहले अमेरिका की प्रिंसेज के ट्विटर हैंडल पर चमका था।
यहां-वहां जहां-तहां दरभंगा का जिक्र होते ही ज्योति पासवान का नाम पहले आ जाता था, हर बिहारी के ट्विटर, फेसबुक हैंडल पर बस ज्योति और उसके पिता की वो साइकिल वाली तस्वीरें लग गई थी, इक पूरा मीडिया शेल उसके पीछे लगी, सांसद, विधायकों का तो मानो पूरा मजमा लगे गया था उस बच्ची के पीछे ,हर कोई उसे अपने पार्टी के झंडे के नीचे लाना चाहते थे, और उसका कारनामा भी क्या गज़ब था, सरकार की सब से बड़ी विफलता में उसने अपनी जीवन बड़ी सफलता हासिल कर ली थी। स्पोर्ट्स साइकिल से लेकर राजनतिक पार्टियों के चेक तक उसके आगे पीछे घूमता रहा.... वक़्त का पहिया थोड़ा आगे फिसला! इस बीच वर्चुअल रैलियां, चौपर यात्रा, और साइकिल रैलियां हुई!! और

आज 3 महीने बाद फिर से दरभंगा चर्चा में नाम भी वही #ज्योति_पासवान_2.

आज किसी #अर्जुन_मिश्रा के हवस शिकार हुई 15 बरस की #ज्योति_पासवान... और क्यों?? क्योंकि ज्योति उस अर्जुन मिश्रा के बगीचे में आम चुनने के लिए गई थी और ये बात एक सामंतवादी दिमाग़ को इतना ठेस पहुंचा गया कि उस अर्जुन मिश्रा ने अपने पत्नी के सामने ही पहले उस 15 बरस की बच्ची के साथ दुराचार किया और फिर हसिए से गले को रेत दिया!!

और ये एक अख़बार के छोटे से कोने की खबर बनकर रह गई! ना तो सोशल मीडिया पर वाले हैशटैग का सैलाब आया, और ना ही हमारे ऑपिंडिया वाले सस्ते जॉनी डेप का धार्मिक उन्माद फैलाने वाली कोई सनसनीखेज रिपोर्ट!
कोई हरिजन ठिकेदार अपनी जूती में धूल लगा वहां आने से इंकार कर दिया , और सबसे बड़े वाले 2 तो किसी और सामंतवादी के जूती चमकाने में लगा हुआ है! और एक गरीब गुरबों के चांदी का चम्मच लेकर पैदा होने वाले युवराज आर्थिक न्याय यात्रा पर निकले हैं और अपने बाप- मां के किए के लिए माफ़ी मांग रहे हैं ये यात्रा चुनाव तक चलेंगे तो अभी इस पट्टी से कोई उम्मीद रखना भी बिहार में बाढ़ ना आने की उम्मीद रखने के बराबर होगा!!!...... इतना सब कुछ होना अपने सुशासन बाबू की शाषण की तस्वीर भी साफ करती है! अभी तो उनको बस हथिया नक्षत्र की चिंता है कि कब बिहार डूबे और निकले फिर से चौपर यात्रा पर!! तो इनपर थू: के अलावा और क्या दें??

और हमारे देश की महान मीडिया तो अब कुछ बस लेह और लद्दाख के ट्रिप पर ही रहेंगी!!

तो अब मेरी तो नज़रे बस दरभंगा वालों को देख रही हैं!
🙏🙏🙏🙏🙏

Photos from लोकतंत्र's post 21/06/2020

*बाल संरक्षण गृह में 57 लड़कियां कोरोना पॉजिटिव, दो निकलीं प्रेग्‍नेंट, एक को एड्स*

*कानपुर नगर:-* उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर मे सनसनी खेज मामला सामने आया है एक सरकारी बालिका संरक्षण गृह में रहने वाली लड़कियों की कोरोना रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कानपुर के एक राजकीय बालिक संरक्षण गृह में रहने वाली लड़कियों में कोरोना के लक्षण दिख रहे थे।

इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी। स्वास्थ्य विभाग की टीम जब इन लड़कियों की जांच करानी शुरू की तो पता चला कि बाल संरक्षण गृह में रहने वाली दो लड़कियां गर्भवती हैं। एक को एचआईवी है तो एक लड़की हेपेटाइटिस सी से ग्रस्त है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कानपुर स्थित इस राजकीय बाल संरक्षण गृह की 57 लड़कियों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसके बाद इन लड़कियों को कोरोना के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया। इस दौरान डॉक्टरों ने जांच में पाया कि दो 17 साल की लड़कियां गर्भवती हैं। प्रेग्नेंट होने के साथ ही एक लड़की एचआईवी और एक हेपेटाइटिस सी के संक्रमण से ग्रसित है।

प्रशासन ने अब इस बालिका गृह को सील कर दिया है। साथ ही यहां के स्टाफ को क्वारंटाइन कर दिया गया है। डॉक्टरों ने गर्भवती लड़कियों के बारे में जब पुराने रिकॉर्ड के लिए संपर्क किया तो अधिकारियों के पास कुछ था ही नहीं। अधिकारियों का कहना है कि ये कब बालिक गृह आईं इसकी जानकारी नहीं,
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04/06/2020

भारत का इलीट वर्ग दूसरे देशों के अल्पसंख्यक के रंगभेद,नस्लभेद पर या जानवरों की मौत पर तो दुख का डोंग दिखा सकता हैं
लेकिन खुद के देश के गरीब,वंचित, दलित,आदिवासी,मुस्लिम की मोब्लिंचिग, जातीय,हिंसा,आदिवासियों की जमीन हड़प कर उनके बेघर करने पर भारत का इलीट वर्ग एक शब्द भी नहीं बोल सकता है

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा के मुताबिक़ साल 2014 से 2016 के बीच देशभर में दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा या उत्पीड़न के कुल 1,19,872 मामले दर्ज किए गए. इनमें से सिर्फ़ 24.3 प्रतिशत मामलों में ही अभियुक्तों को सज़ा दी जा सकी.

अगर बात भारतीय महिलाओं के साथ अपराधों की तो उसमे भी इलीट वर्ग खास वर्ण की जातियों के हिंसा, मौत पर भी बहुत नग्न संख्या में आवाज उठाते हैं,
एनसीआरबी रिपोर्ट 2017 की रिपोर्ट के अनुसार : देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बड़ रहें हैं,
महिलाओं के खिलाफ अपराध के दर्ज मामलों में हत्या, बलात्कार, दहेज हत्या, परिवारिक उत्पीड़न, आत्महत्या के लिए उकसाना, एसिड हमले, महिलाओं के खिलाफ क्रूरता और अपहरण आदि शामिल हैं,

भारत में बढ़ते बलात्कार के मामलों के खिलाफ विरोध करती महिलाएं |
नई दिल्ली : राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक देश भर में वर्ष 2017 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,59,849 मामले दर्ज किए गए. महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार हर साल वृद्धि हुई है. एनसीआरबी के आंकड़े सोमवार को जारी किए गए.

2015 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,29,243 मामले दर्ज किए गए थे और 2016 में 3,38,954 मामले दर्ज किए गए थे.

महिलाओं के खिलाफ अपराध के दर्ज मामलों में हत्या, बलात्कार, दहेज हत्या, आत्महत्या के लिए उकसाना, एसिड हमले, महिलाओं के खिलाफ क्रूरता और अपहरण आदि शामिल हैं.

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, अधिकतम मामले उत्तर प्रदेश (56,011) में दर्ज किए गए. उसके बाद महाराष्ट्र में 31,979 मामले दर्ज किए गए.

आंकड़े के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 30,992, मध्य प्रदेश में 29,778, राजस्थान में 25,993 और असम में 23,082 मामले दर्ज किए गए.

भारत लैंगिक भेदभाव में कमी आ रही हैं, लोग अब समझ रहे हैं,

अगर भारत की अधिकतम जनसंख्या के अनुसार भारत में छोटी छोटी हिंसा,लड़ाई,झगड़ा आदि में 20 मामलों में से एक की एफआईआर दर्ज की जाती हैं, जबकि 19 का समझोता वहीं कर दिया जाता हैं,
जिस कारण ये छोटे,छोटे पारिवारिक झगड़े,उत्पीड़न एक दिन बड़े रूप ले लेते हैं,
भारत की 98% महिला शादी के बाद अपना जीवन लॉकडाउन के जीवन की तरह जीवन यापन करती हैं, उनकी 90% आजादी छीन ली जाती हैं,

और भारत देश की विडम्बना तो देखिए भारत देश में स्त्री को देवी समान दर्जा भी दिया गया है, भारत देश महिलाओं को देवी (god) के रूप में पूजा भी जाता हैं, भारत की महिलाओं की शैक्षिक स्तर की बात करे तो लगभग 60% के ऊपर लगभग बताया जाता हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ये 40% के करीब ही हैं, कांग्रेस के शासनकाल में ग्रामीण महिलाओं को आठवीं कक्षा तक का सर्टिफिकेट महज एक दो दिन की क्लास कराकर दे दिया गया था, ऐसा शिक्षित स्तर जिससे भारत की महिलाओं की शैक्षिक स्तर विश्व स्तर पर दिखाने के लिए बढ़ाया गया था,
भारत महिलाओं के शैक्षिक स्तर विश्व में लगभग 100 देशों के बाद स्थिति हैं,

भारत में मुस्लिम हिंसा की बात करें, भारत के 90% लोगो में धर्म के प्रति कट्टरता फैलाई जा रही हैं, भारत के लोगो ने धर्म को ही अपना जीवन मान लिया गया हैं, जिस कारण मॉब्लिंचिंग की घटना लगातार बढ़ रही हैं,

मोब्लिचिंग जैसी घटनाओं के लिए जल्द से जल्द रोकने के लिए कोई विधेयक संसद में पेश होकर पारित होना चाहिए, जिससे आरोपियों को मोबलिंचिग दंड दिया जा सके,

Photos from लोकतंत्र's post 03/06/2020

कोरोना महामारी की आड़ में आरक्षण और सामाजिक न्याय के खिलाफ चल रहे षड़यंत्र से बिहार की जनता पूरी तरह वाकिफ और लम्बी लड़ाई के लिए तैयार है। संस्थाओं के वर्चस्ववादी चरित्र एवं शासक वर्ग की नीति और नीयत को कामयाब नहीं होने देंगे। विधायिका में और सड़क पर साझा संघर्ष होगा।

संविधान प्रदत्त आरक्षण के खिलाफ एक माइंड–सेट है जो कई महत्वपूर्ण संस्थाओं पर काबिज़ है। सामाजिक प्रतिनिधित्व के हिमायती देश के सभी प्रगतिशील सरोकार वाले देशवासियों और दलों से एकजुटता की अपील कर वंचितो के अधिकार और सरोकार की साँझा लड़ाई का आह्वान करता है।

केंद्र सरकार के जातिवादी रवैये के कारण विगत तीन वर्षों से पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग को मेडिकल एडमिशन में संविधान प्रदत्त आरक्षण से वंचित किया जा रहा है। विगत तीन वर्षों से पिछड़े वर्गों को 10000 से अधिक सीटों से वंचित कर दिया है। दिनदहाड़े आरक्षण की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है। संविधान और आरक्षण विरोधी एनडीए सरकार सामने से वार नहीं कर दूसरे माध्यम से दलितों-पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है। भाजपा तो आरएसएस के अजेंडा पर अमल कर रही है लेकिन इस अतिमहत्वपूर्ण विषय पर नीतीश कुमार और रामबिलास पासवान की चुप्पी आपराधिक है।

03/06/2020

US में की गोरे पुलिसकर्मी द्वारा #निर्मम हत्या के बाद, अमेरिका के कई हिस्सों में महामारी के बावजूद भी #आगजनी हो गई। दिल दहला देने वाले दृश्य सामने आए, यहां तक कि तक बंद कर देना पड़ा। ऐसा नहीं कि #रंगभेद और #नस्लवाद के खिलाफ आंदोलन में केवल #निगरो ही सड़को पर दिखे वरन #गोरों ने भी पुरी ताकत झोंक दी इस कृत्य के ख़िलाफ़। क्योंकि वो ये जानते हैं कि ये लड़ाई गोरों के खिलाफ नहीं बल्कि #अन्याय के #ख़िलाफ़ है।
यहां हमारे देश में #नस्लभेदी और #जातिभेदी घटनाएं अक्सर देखी जाती हैं कभी जाती कभी धर्म के नाम पर बर्बरता आम हैं और ऐसा नही की ग्रामीण इलाकों में वरन शहरों में और तथाकथित #प्रोग्रेसिव कहे जाने वाले समाज में भी किसी न किसी रूप में ऐसी घिनौनी चीजें व्यवहारिक हैं। ऐसा होते हुए भी कभी भी हर वर्ग इस घ्रणित #सामाजिक बुराई को मिटाने के लिए न तो कभी एकजुट दिखा न ही कभी सड़को पर उतारा। इसी लिए आज भी ये बुराइयां कायम हैं। यहां तक कि बहुत से पहलू ऐसे भी हैं जहां इस अन्याय को स्पष्ट #धार्मिक #संरक्षण भी प्राप्त होता है।
समाज मे ऊँचें पायदान पर विराजमान कभी इस पर अपनी थोथी #सेंसिटिविटी शो करते हुए दु:ख प्रकट करते हैं और कभी यूं ही विधि का विधान या पूर्व जन्मों के कर्म समझकर इग्नोर कर देते हैं। पर ये उनकी #भावनाओं का #खोखलापन ही तो है कि जिसपर इंसान की नसें रौद्र और प्रतिशोध में फूल जानी चाहिए वहाँ इस #नपुंसकता भरे दुःख का भला क्या काम ? ये सब देखकर लगता है क्या हमारी सरकारें, धार्मिक/आध्यात्मिक नेता व तथाकथित #एलिट्स सच में सम्पूर्ण समाज को अपना समझते हैं या #वसुधैव_कुटुम्बकम जैसी बातें मात्र एक छलावा है?

Abhay Kumar 🖋️

03/06/2020

इस आंटी ने अपनी पूरी जिन्दगी निकाल दी, उम्र 60 से 70 के बीच तो होगी ही, लेकिन अभी तक यह ही जान पाई की;

"पुरे विश्व में आरक्षण बैन है"

जबकि भारत के "आरक्षण" को अन्य देशो में;

डायवर्सिटी
Affirmative action

से लेकर कई और नाम से जाना जाता है, जिनके सामने भारत की आरक्षण प्रणाली भी कुछ नही है.

यह महिला, जिनके बारे में एक मित्र बता रहे है कि MBBS/MD के साथ इनका नर्सिंग होम भी है, अगर कोई इनसे मिले तो इन्हें बता देना की भारत की आरक्षण प्रणाली सरकारी नौकरी या शिक्षण संस्थान या राजनैतिक आरक्षण तक ही सीमित है जबकि विश्व में आरक्षण प्रणाली इससे भी काफी आगे तक लागु है, जैसे उदाहरण के लिए;

"दक्षिण अफ्रीका ने अपनी क्रिकेट टीम मे आरक्षण प्रणाली लागू कर रखी है, जिसमे क्रिकेट की 11 खिलाडियो की टीम में 6 खिलाड़ी अश्वेत अथार्त काले लोग होने चाहिए. ऐसा आरक्षण भारत में सम्भव नही है"

आंटी ने जो बैनर लगा रखा है उसमे "Save Merit" लिख रखा है, इन आंटी को अमरीका के डायवर्सिटी पैटर्न, Affirmative action या साउथ अफ्रीका के क्रिकेट टीम के आरक्षण के बारे में पता तक नही है, बस यह पता है कि उनमे "उच्च मेरिट" वाली योग्यता है। गजब बात है न।

वैसे भारत में ऐसी गलतफहमी अपने पास रखने वाले "फर्जी मेरिट वाले लोगो" की संख्या काफी है.

(कृपया इस आंटी की उम्र का लिहाज करके गलत शब्दो का यूज न करे,

1- अमेरिका में काले अश्वेत लोगों को affirmative action reservation के तहत वहां के काले, अश्वेत लोगों को मीडिया हॉलीवुड, पुलिस, आर्मी ,जुडिशरी आदि में रिजर्वेशन है जो वहां के लोगों की तरह सामान्य जीवन धारा में जुड़ सकें,
अमेरिका के बाजारों में लोहे की जंजीरों में जकड़े जानवरों की तरह 100 साल तक जुल्म सहने वाले काले ,अश्वेत ,नीग्रो भी इसी affirmative action रिजर्वेशन की बदौलत वाइट हाउस पर पहुंच गए ,
राष्ट्रपति बराक ओबामा से लेकर अश्वेत, काली रंग की महिला ओफ्रा विनफ्रे भी मीडिया में किंग है , हॉलीवुड में विल स्मिथ अभिनेता जैसे नीग्रो पर कब्जा है, अमेरिका में एफर्मेटिव एक्शन रिजर्वेशन के तहत काले लोगों का 30 परसेंट जुडिशरी 40 परसेंट पुलिस 32 परसेंट आर्मी में प्रतिनिधित्व अमेरिका में है,
भारतीय मूल की अमेरिकी महिला इंदा नुई पेप्सिको कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं व गूगल का सीईओ सुंदर पिचाई भी काले,अश्वेत होने के affirmative action reservation के कारण ही गूगल के सीईओ बने हैं,
2. ब्राजील में रिजर्वेशन को वेस्टीब्युलर नाम से जाना जाता है,
3- कनाडा में समान रोजगार तत्व है जिसके तहत फायदा वहां के असामान्य तथा अल्पसंख्यकों को होता है, भारत के सिख इसका प्रमुख उदाहरण है,
4- चीन में महिला और तात्विक अल्पसंख्यकों के लिए और रिजर्वेशन है,
5- फिनलैंड मैं स्वीडिश लोगों के लिए रिजर्वेशन है,
6- जर्मन में जिम्नेशियम सिस्टम रिजर्वेशन है,
7-मेसेडोनिया में अल्बेनियन के लिए रिजर्वेशन है,
8-मलेशिया में वहां के लोगों के लिए रिजर्वेशन है,
9- न्यूजीलैंड में मारीशस फिजी और पोलिनेशियन लोगों के लिए एफर्मेटिव एक्शन का रिजर्वेशन है,
10-नार्वे के पीसीएल बोर्ड में 40 परसेंट महिला आरक्षण है,
11-रोमानिया में शोषण के शिकार रोमन लोगों के लिए रिजर्वेशन है,
12-दक्षिण अफ्रीका में रोजगार समता अर्थात काले गौरव को सामान रोजगार रिजर्वेशन है वहां की क्रिकेट टीम में भी 4 से अधिक काले खिलाड़ियों को 11 सदस्य टीम में प्रतिनिधित्व है,
13- दक्षिण कोरिया में उत्तरी कोरिया तथा चीनी लोगों के लिए अलग रिजर्वेशन है,
14- सिहली बाहुल्य श्रीलंका में तमिल तथा क्रिश्चियन इन लोगों के लिए अलग नियम के तहत रिजर्वेशन है,
15- स्वीडन general affirmative action के तहत वहां के लोगों को रिजर्वेशन मिलता है,

Photos from लोकतंत्र's post 21/03/2020

मुबंई से मेरी बहन का अभी फोन आया था भैया यहाँ से बड़ी संख्या में मजदूर बिहार लौट रहे हैं उनके जॉच के लिए बिहार में क्या क्या प्रबंध किया गया ।
एयरपोर्ट के अलावा कही कोई व्यवस्था भी करनी है मेरे दिमाग़ में भी नहीं था ।तुरंत सीपीआरओ तक को फोन लगा दिया उनके पास भी काई जवाब नहीं था।
मुंबई से पटना और दरभंगा सीधे ट्रेने आती है ट्रेन का हाल कहने कि जरूरत ही नहीं है, जब कि मुंबई से कोरोना के कई मरीज सामने आ चुंके हैं सबसे ज्यादा प्रभावित भी महाराष्ट्र ही है ।
ऐसे में जो मजदूर भेड़ बकरी कि तरह ट्रेन से वापस बिहार लौट रहा है उसे कैसे सम्भाला जाय ये एक बड़ी चुनौती है क्यों कि गाँव कि 70% अबादी तो बाहर ही है वो अगर गाँव लौटता है तो क्या होगा सोच के रुह कॉप जा रहा है ।।

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