24/10/2026
आज 24 अक्टूबर किसान गरिबो मजदुर के मसिहा मदारी पासी जी की 133 वी जयंती है उन्हे जयंती दिन पर शत् -शत् नमन प्रणाम...
9 मार्च 1922 में छपी बॉम्बे क्रॉनिकल के अनुसार मदारी पासी ने अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन चलाया हरदोई में अंग्रेजो को हरदोई को छावनी बनाना पड़ा 2000 हजार लट्ठधारी पासी धनुष तीरों से लैस होकर हरदोई में पुलिस टुकड़ियों को घेर लिया मकसद सिर्फ़ डराना था , क्योंकि यह आंदोलन अहिंसा वादी था वह हिंसा नहीं करते थे बस धमकाते थे और धमक ऐसी की जमींदार और अंग्रेज पुलिस बल पैंट में सुसु कर देते थे ...
बेलगाम जमींदारों को घरों में महीने भर एक कमरे में कैद रखना ,उसी कमरे में खाओ उसी हग्गो, उसी में पियो,तब तुम्हें कहीं गरीब असहाय जनता की तकलीफ समझ आएगी ये मकसद था एका आंदोलन की, और मकसद था जमींदारों और ताल्लुकदारों को आम गरीब दलित किसान वर्ग की तकलीफों का एहसास दिलाना ।
तुर्रामखां जमींदारों को उनका ही जूता सुंघाना , क्या क्या नहीं जतन किया एका आंदोलन वालो ने उनका घमंड तोड़ने के लिए .... क्योंकि वहीं जमींदार तालुकदार गरीब किसान वर्ग के लगान न देने परिवार के बहन बेटियों की इज्ज़त उछालना लुटने और आदमियों को कोड़ों की सजा देना बेहद क्रूर से क्रूर अत्याचार क्या क्या नहीं हुए उस दौर 1922 जमींदारी प्रथा में एका आंदोलन से आसपास के सभी जमींदार अपने औकात पर आ गए ये धमक थी एका मूवमेंट चलाने वाले बूढ़े काका मदारी पासी की जो दलित समाज के थे । लेकिन
उन्होंने इस एका आंदोलन में सभी जाति वर्ग धर्म के लोग शामिल किया था।
उस समय के मुख्य अखबारों से पता चलता है जिन्होंने पुलिस टुकड़ियों पर हमला किया था जो अखबार में किसानों का दलितों का पासी आंदोलन अमर इतिहास बन गया।
अभिवादक -चंद्रशेखर कांबळे,
प्रभारी-इंचार्ज बसपा नागपूर लोकसभा व कामठी विधानसभा