19/10/2026
#सफलता_की_कहानी
पीएम स्वनिधि योजना से प्रशांत जाटव के मोबाइल व्यवसाय को मिली नई रफ्तार
आज ग्राहकों को मिल रही आधुनिक मोबाइल एक्सेसरीज एवं रिपेयरिंग की बेहतर सुविधा
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मेहनत, लगन और सही समय पर मिले आर्थिक सहयोग से छोटे व्यवसाय को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। करेली निवासी श्री प्रशांत जाटव की कहानी इसी आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता की प्रेरणादायी मिसाल है। सीमित पूंजी के साथ मोबाइल एक्सेसरीज एवं मोबाइल रिपेयरिंग का कार्य शुरू करने वाले प्रशांत जाटव ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से मिली ऋण सहायता का सदुपयोग कर अपने व्यवसाय का क्रमशः विस्तार किया।
सीमित संसाधनों से शुरू हुआ व्यवसाय
श्री प्रशांत जाटव एक मेहनती एवं युवा उद्यमी हैं। वे मोबाइल एक्सेसरीज एवं मोबाइल रिपेयरिंग का व्यवसाय संचालित करते हैं। शुरुआत में उनके पास मोबाइल एक्सेसरीज का सीमित स्टॉक था और रिपेयरिंग के लिए आवश्यक उपकरण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थे। व्यवसाय को आगे बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने के लिए उन्हें अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता महसूस हुई।
इसी दौरान नगर पालिका परिषद करेली द्वारा किए गए सर्वे एवं जागरूकता अभियान के माध्यम से उन्हें पीएम स्वनिधि योजना की जानकारी मिली। योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इसका लाभ लेने का निर्णय लिया।
10 हजार रुपये के प्रथम ऋण से बढ़ाया मोबाइल एक्सेसरीज का स्टॉक
पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत श्री प्रशांत जाटव को 10 हजार रुपये का प्रथम ऋण प्राप्त हुआ। उन्होंने इस राशि का उपयोग मोबाइल कवर, चार्जर, ईयरफोन, टेम्पर्ड ग्लास सहित अन्य आवश्यक मोबाइल एक्सेसरीज का स्टॉक बढ़ाने तथा रिपेयरिंग के लिए जरूरी उपकरण खरीदने में किया। दुकान पर सामान की उपलब्धता बढ़ने से ग्राहकों को उनकी आवश्यकता के अधिक विकल्प एक ही स्थान पर मिलने लगे। इससे उनके व्यवसाय को आगे बढ़ने में मदद मिली।
20 हजार रुपये के द्वितीय ऋण से बढ़ी उत्पादों की विविधता
व्यवसाय में आगे बढ़ने के बाद उन्हें योजना के अंतर्गत 20 हजार रुपये का द्वितीय ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि से उन्होंने दुकान में नए और आधुनिक मोबाइल एक्सेसरीज उपलब्ध कराए तथा स्टॉक में वृद्धि की। उत्पादों की विविधता बढ़ने से ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलने लगे और उनके व्यवसाय में भी वृद्धि हुई। प्रशांत जाटव ने ऋण राशि को व्यवसाय की आवश्यकताओं के अनुसार उपयोग कर अपने कारोबार को मजबूत आधार दिया।
50 हजार रुपये के तृतीय ऋण से रिपेयरिंग व्यवसाय को मिला विस्तार
इसके बाद श्री प्रशांत जाटव को 50 हजार रुपये का तृतीय ऋण प्राप्त हुआ। उन्होंने इस राशि से मोबाइल रिपेयरिंग के लिए आवश्यक उन्नत उपकरण खरीदे और दुकान में उपलब्ध सुविधाओं का विस्तार किया। आधुनिक उपकरण उपलब्ध होने से वे मोबाइल रिपेयरिंग का कार्य अधिक प्रभावी ढंग से करने लगे। इससे ग्राहकों को बेहतर सेवा मिलने लगी और उनके व्यवसाय को नई गति मिली। बढ़ते कारोबार के साथ उनकी आय अर्जित करने की क्षमता में भी सकारात्मक बदलाव आया।
योजना ने बढ़ाया आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता
श्री प्रशांत जाटव ने पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत प्राप्त तीनों चरणों के ऋण का उपयोग अपने व्यवसाय को मजबूत करने में किया। 10 हजार रुपये, 20 हजार रुपये और 50 हजार रुपये की ऋण सहायता के माध्यम से उन्होंने अपने कारोबार में लगातार निवेश किया। आज उनकी दुकान पर मोबाइल एक्सेसरीज की अच्छी विविधता उपलब्ध है और मोबाइल रिपेयरिंग के लिए आवश्यक उपकरण भी मौजूद हैं। उनका प्रयास है कि ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता की सामग्री और सुविधाजनक रिपेयरिंग सेवा एक ही स्थान पर उपलब्ध हो।
छोटे व्यवसाय से आत्मनिर्भरता की ओर
प्रशांत जाटव की सफलता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों से शुरू किया गया व्यवसाय भी उचित आर्थिक सहायता, मेहनत और लगन से आगे बढ़ाया जा सकता है। पीएम स्वनिधि योजना से मिली ऋण सहायता ने उन्हें अपने व्यवसाय में निवेश करने, आधुनिक उपकरण जुटाने और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने का अवसर प्रदान किया। उनकी यह यात्रा अन्य छोटे व्यवसायियों के लिए भी प्रेरणादायी है कि अवसर का सही उपयोग और निरंतर मेहनत आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार
पीएम स्वनिधि योजना से मिली आर्थिक सहायता और अपने व्यवसाय को विस्तार देने का अवसर मिलने पर श्री प्रशांत जाटव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। उनका कहना है कि योजना के माध्यम से मिली ऋण सहायता से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने, आधुनिक उपकरण खरीदने और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण सहयोग मिला है।
Jansampark Madhya Pradesh CM Madhya Pradesh Department of Urban Development & Housing MP Narendra Modi Dr Mohan Yadav