23/06/2021
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक गुरु गोलवलकर से परामर्श लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपनी अध्यक्षता में 21 अक्टूबर 1951 को राष्ट्रीय जनसंघ की स्थापना की। जिसका बाद में जनता पार्टी में विलय हो गया और फिर पार्टी के बिखराव के बाद ( 1980) में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ!
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी अनुच्छेद 370 के मुखर विरोधी थे, और वह चाहते थे कि कश्मीर पूरी तरह से भारत का हिस्सा बने उनका कहना था कि एक देश में दो निशान, दो विधान, और दो प्रधान, नहीं चलेंगे उन्होंने नेहरू पर तुष्टीकरण का आरोप लगाया था 1953 में 8 मई को बिना अनुमति के दिल्ली से कश्मीर के लिए निकल पड़े थे 11 मई को श्रीनगर जाते वक्त उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था 20 जून को उनकी तबीयत खराब हो गई थी , दुर्भाग्यवश मां भारती के महान सपूत डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का रहस्यमय परिस्थितियों में 23 जून को मौत हो गई ! भारतीय जनता पार्टी इस दिन को "बलिदान दिवस" के रूप में मनाती है! आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें शत् शत् नमन करती हूं!🙏💐 और बहुत ही भाग्यशाली हूं, कि भारत के सिरमोर कश्मीर से 370 की अंत्येष्टि होते देख पाई 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 जय हिंद, जय भारत माता के सपूत।
19/06/2021
हमारी आस्था: गंगा- दशहरा
गंगा दशहरा जेष्ठ शुक्ल दशमी की तिथि को मनाए जाने वाला एक महा पुण्यदाई प'र्व है, हमारे मनीषियों ने तो गंगा को भारत की सुषुम्मा नाडी़ की संज्ञा दी। यह जीवन की ऊर्जा का स्त्रोत है। मोक्षदायिनी गंगा सदियों से राष्ट्र की जीवनधारा बन हमारा पोषण कर रही है।इसलिए तो, हम हिंद वासियों के जनमानस के मन प्राण में बसी हुई आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है।
मान्यता है कि गंगा (स्वर्ग की नदी) देवाधिदेव शिव की जटाओं से होती हुई धराधाम पर उतरी है किंतु, इसे स्वर्ग लोक से पृथ्वी लोक में लाने का श्रेय पुरुषोत्तम राम के वंशज राजा भगीरथ जैसे महापुरुषों के प्रयास से संभव हो पाया था।
जब कपिल मुनि के श्राप से सगर के साठ हजार पुत्रों को तारने के लिए भागीरथ ने गंगा को धराधाम पर अवतरित करने के लिए कठोर तपस्या किया। तब जाकर स्वर्ग की नदी गंगा देवाधिदेव शिव की जटाओं से होती हुई ब्रह्मा द्वारा निर्मित (विदुंसर सरोवर) से अवतरित सात धाराओं में विभक्त होकर पृथ्वी लोक में प्रवाहित हुई, और कपिल मुनि के आश्रम में पहुंचकर महाराज सगर के साठ हजार पुत्रों को श्राप मुक्त किया।
इस (बिंदुसर सरोवर) की आकृति गाय के समान दिखने के कारण इस स्थान को (गोमुख) कहा गया! इसलिए कहा जाता है कि, भागीरथ के प्रयास से गंगा स्वर्ग लोक से भूलोक में पधारी, गोमुख से निकलकर गंगासागर तक गंगा सिर्फ एक जलधारा नहीं बल्कि, यह एक अमृतधारा बन जाती है गंगाजल में अनेक औषधीय गुण होते हैं विश्व के किसी भी जलधारा में औषधीय गुण नहीं है, जो गंगा में है, इसके जल को बरसों डब्बे में रखने के बावजूद किसी भी प्रकार का विकार उत्पन्न नहीं होता है। विश्व में अनेकों नदियां है किंतु, गंगा नदी जैसी महिमा किसी की भी नहीं है देशवासी और विदेशियों ने भी इसके कीटाणु रहित जल के वैज्ञानिक महत्व को पहचाना है, गंगा हमारा जीवन दर्शन है, गंगा भारतीयता का प्रतीक है, गंगा को भारत से अलग कर देंगे तो, भारत को भारत कहना कठिन हो जाएगा। इसके प्रभाव में हमारा लोक विश्वास, हमारी आस्था, और हमारी सांस्कृतिक परंपरा जीवित है।
काशी का गंगा घाट हो या चित्रकूट का गंगा घाट अनगिनत साधु संतों ने शास्त्रार्थ किया। जो कि गंगा घाटों की सीढ़ियों पर संपन्न हुई। गंगा को गीत कारों ने गीतों में, कवियों ने कविता में, महत्वपूर्ण स्थान दिया ,मुंडन से लेकर विवाह तक के संस्कार में गंगा की सार्थकता महसूस होती है गंगा के किनारे हमारे अनेक उत्सव संपन्न होते हैं, जन्म से लेकर मृत्यु तक गंगा मां अपनी उपस्थिति की अनुभूति से हमें अनुग्रहित करती है।
गंगा एक वात्सल्यी मां है, वह बिना किसी भेदभाव के हमारी संस्कृति की श्रेष्ठता प्रदर्शित करती है। यहां चाहे अधिकारी हो या कर्मचारी, व्यापारी हो या किसान, अमीर हो या गरीब, स्त्री-पुरुष हिंदू- मुस्लिम सिख - ईसाई सभी जाति धर्म सबके साथ समान भाव रखती है, तब हमारी आस्था और धनी हो जाती है।
गंगा निरंतर प्रवहमान रहती है, और हमें प्रेरणा देती है कि जीवन में गतिशीलता बहुत जरूरी है उसकी राह में पत्थर, झड़ने, जलाशय, अवरोध डाले खड़े रहते हैं किंतु, वह किसी भी बाधा को नकारते हुए खुद को समेटते हुए निरंतर आगे बढ़ती रहती है और अपना लक्ष्य समुद्र से जाकर मिलन पूरा करती है। गंगा तट पर विकसित धार्मिक स्थल और तीर्थ भारतीय सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था का विशेष अंग है!
जिस प्रकार हमारे शरीर का रक्त, कोशिकाओं में बेहतर रक्त जीवन का भरोसा देता है। उसी तरह मोक्षदायिनी गंगा शताब्दियों से राष्ट्र की जीवनधारा बन हमारा पोषण कर रही है। करीब 42 करोड़ आबादी की आजीविका गंगा पर निर्भर करती है, सभी भारतीयों की अंतिम इच्छा होती है कि मृत्यु के समय (गंगाजल) और मृत्यु के उपरांत (गंगातट) प्राप्त हो। मुंडन से लेकर विवाह तक के संस्कार में गंगा की सार्थकता महसूस होती है किंतु, कितनी विडंबना?? है कि (जगत कल्याणी) मां गंगा एक (कथा) नहीं एक (व्यथा )के रूप में आज हमारे सामने है, आज गंगा विश्व की छठी सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में से शुमार है। तकरीबन (ग्यारह सौ )1100 करोड़ लीटर अपशिष्ट रोजाना गंगा में गिरते हैं। कानपुर का चमड़ा उद्योग और बूचड़खाने के कारण गंगा नदी इतनी दूषित हो चुकी थी कि कानपुर में गंगा जल और नाले के जल में अंतर करना अत्यंत कठिन हो गया था। नगरों के विकास का दुष्परिणाम यह हुआ कि शहर-शहर गांव- गांव सरकारी सीवर लाइन बन गए और स्वयं के मकान में सेप्टिक टैंक समाप्त हो गए और इन मल मूत्र वाले सीवर लाइनों को गंगा जैसी पवित्र नदियों तक जोड़ दिया गया! गंगा किनारे बसे किसी भी बड़े शहर में गंदे नाले के पानी के उपचार का कोई प्लांट नहीं है। नमामि गंगे परियोजना की घोषणा हुई नए एक्शन प्लान में 2020 तक गंगा किनारे बसे सभी गांव को खुले में शौच से मुक्त मुक्त किए जाने का संकल्प भी लिया गया है।
किंतु यह तभी संभव होगा जब हम सभी हिंदू वासी भागीरथ प्रयास करेंगे!नहीं तो आने वाली पीढ़ी गंगा के वर्तमान स्वरूप को नहीं देख पाएगी | जब तक हम सनातन धर्म के पांच (ग) गंगा गीता, गायत्री, गोविंद और गौ माता को अपने जीवन दर्शन में आत्मसात नहीं करेंगे तब तक हमारी आस्था और संस्कृति जीवित नहीं रह पाएगी! हमें याद रखना होगा कि हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है और तब वैसे देशद्रोहियों को करारा जवाब मिलेगा जो फिल्म निर्माण करते समय (राम तेरी गंगा मैली) जैसे शीर्षक का चुनाव करते है (राम) और (गंगा) की संस्कृति को नष्ट करने के कुचक्र से बचाने के लिए संपूर्ण हिंद वासियों का कर्तव्य बनता है क्योंकि, गंगा हमारी पुरातन आर्य संस्कृति की परम पावन धरोहर ही नहीं बल्कि, देव लोक का महाप्रसाद या चरणामृत है। गंगा किनारे लगने वाला कुंभ मेला असंख्य श्रद्धालुओं और जनों का महामिलन पर्व (महाकुंभ) का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। जिस स्नान से मिलने वाला पुण्य इन समूची धरती की (100000) एक लाख दक्षिणाओ से बढ़कर है, (1000 )एक हजार अश्वमेध यज्ञों और (100)एक सौ बाजपेई यज्ञों के पुण्य से बढ़कर के कई गुना महत्व रखता है। (व्यक्ति से विराट) के महा मिलन का यह महापर्व कहीं स्मृतियों में शेष ना रह जाए , इसलिए सरकार और समुदायों से लेकर आम लोगों की भी अपनी सार्थक भूमिका निभानी चाहिए ।ताकि हम गंगा को स्वच्छ रख सकें तभी मां गंगा की आराधना पूरी होगी और गंगा मैया को पियरी चढ़ाने की आस्था अटूट बनी रहेगी
लेखिका
प्रियम्वदा कुमारी केसरी (महामंत्री)भारतीय जनता पार्टी (महिला मोर्चा)
(बिहार प्रदेश)
11/02/2021
भारत माता के सच्चे देशभक्त सपूत, जनसंघ के संस्थापक सदस्य, राष्ट्र के प्रत्येक गरीब, किसान, मजदूर, शोषित, वंचित के लिए "एकात्म मानववाद" विचारधारा देनेवाले #पंडित_दीनदयाल_उपाध्याय जी को उनकी पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि और अनंत नमन!🌺🙏
जय हिन्द! वन्दे मातरम!🇮🇳🚩
#समर्पण_दिवस
17/09/2020
आदरणीय मोदी जी के 🙏🌹जन्मदिन🌹🙏 पर उनको समर्पित मेरी कविता
हे , "महान मानव"
हे ,महान मानव तेरा
"सतत प्रयास"
मर्यादित तेरा "महावाक्य"
जनमानस तेरे' साथ- साथ!
हे महान दृष्टा, "अद्भुत शौर्य"
एक सूत्र में दिया " पीरोए"
भारत के "उज्जवल भविष्य"
जनमानस गाते एक ही "गीत"
नमो- नमो से लग गई "प्रीत"
तेरा "पराक्रम" तेरा "पुरुषार्थ"
किंचित भी न, निहित "स्वार्थ"
संवाद शैली है "बेमिसाल"
"जनमानस" का रखा जो ख्याल
"गमछा मास्क" का किया प्रचार
रामायण_ महाभारत
का पुनः प्रसार
"नतमस्तक" हूं लाख-बार!
हे, शंकराचार्य के" पराअवतार"
सफल है तेरा "सतत प्रयास"🙏
स्वरचित-
प्रियमबदा कुमारी केसरी
(महामंत्री )महिला मोर्चा बिहार प्रदेश
पटना (महानगर प्रमुख) वनवासी कल्याण आश्रम
26/08/2020
. आज 26 अगस्त 2020 को पूर्णिया जिला के रुपौली विधानसभा मे महिला मोर्चा की वर्चुअल रैली का समापन बहुत अच्छे ढंग से संपन्न हुआl
22/08/2020
बेतिया जिला के "नरकटियागंज" विधानसभा में महिला मोर्चा की वर्चुअल रैली
19/08/2020
बेतिया विधानसभा के अंतर्गत "चनपटिया"विधानसभा महिला मोर्चा की कुछ तस्वीरें!
17/08/2020
कटिहार के बरारी विधानसभा की महिला मोर्चा की वर्चुअल रैली की रैली की कुछ तस्वीरें
16/08/2020
भारतीय जनता पार्टी बिहार प्रदेश महिला मोर्चा की वर्चुअल रैली कटिहार के मनिहारी विधानसभा में संपन्न हुई!