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अबकी बार कांग्रेस का अंतिम ?

03/06/2026

ये ममता बनर्जी की लक्ष्मी भंडार योजना के “मुख्य लाभार्थी” हैं।
योजना का उद्देश्य गरीब महिलाओं को मदद देना था, लेकिन आरोप है कि इसका लाभ TMC के खास वोट-बैंक तक ज़्यादा पहुँचाया गया, कहा जा रहा है कि हर ब्लॉक में कम से कम 400 पुरुषों ने ममता बनर्जी की इस योजना का लाभ लेने की कोशिश की है।

03/06/2026

“मोदी और बीजेपी की जितनी आलोचना/नापसंदगी मैं करता हूँ, उतनी शायद ही कोई करता हो। लेकिन राहुल गांधी, पीएम मोदी जैसी ऊर्जा-संकट की स्थिति या युद्ध जैसी चुनौती संभाल नहीं सकते। प्रधानमंत्री बनने की उनकी कोई योग्यता नहीं दिखती—सिवाय इसके कि उनके पिता, दादी और परदादा प्रधानमंत्री रहे हैं।”

— रामचंद्र गुहा (जिन्हें हार्डकोर लेफ्टिस्ट माना जाता है), राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी.

01/06/2026

प्रतीक शर्मा उर्फ़ नीमो यादव का तर्क सुनिए—RCB की IPL 2026 जीत का श्रेय सिद्धारमैया, राहुल गांधी, डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस पार्टी को जाता है।

जब क्रिकेट मैच की जीत का श्रेय भी राजनीतिक नेताओं को दिया जाने लगे, तो फिर दूसरों को "अंधभक्त" कहने से पहले आईने में एक बार ज़रूर देख लेना चाहिए। 😏

01/06/2026

ऐसी ही धमकियाँ अभिषेक बनर्जी भी देता था।

31/05/2026
30/05/2026

सबसे पहले, किसी भी व्यक्ति पर हिंसा, हमला या प्रतिशोध की राजनीति का समर्थन नहीं किया जा सकता। कानून से ऊपर कोई नहीं है, और किसी भी मतभेद का समाधान लोकतांत्रिक एवं कानूनी तरीकों से ही होना चाहिए।

पश्चिम बंगाल: शिकारी अब शिकार बन रहे हैं

1990 के दशक की बॉलीवुड फिल्मों में एक आम कहानी हुआ करती थी। किसी गाँव का एक अत्याचारी मुखिया और उसका क्रूर भतीजा पूरे इलाके में आतंक मचाए रखते थे। उनके गुंडे लोगों को डराते-धमकाते, महिलाओं पर अत्याचार करते, लूटपाट करते और पूरे गाँव को भय के साए में जीने पर मजबूर कर देते थे। ऐसा लगता था मानो उनके अत्याचारों का कभी अंत नहीं होगा।

फिर कहानी में नायक का प्रवेश होता था। शुरुआत में उसे कुछ असफलताओं और संघर्षों का सामना करना पड़ता था, लेकिन वह हार नहीं मानता। दूसरी ओर खलनायक अपने अपराध और बढ़ा देते थे। अंततः वह क्षण आता था जब नायक अत्याचारियों को परास्त कर देता था।

और जैसे ही आतंक का साम्राज्य ढहता था, वैसे ही वे लोग भी सामने आने लगते थे जो वर्षों से डरकर चुप थे। जिनके साथ अन्याय हुआ था, वे अपना गुस्सा और विरोध खुलकर व्यक्त करते थे। जो कभी भयभीत थे, वही अब अत्याचारियों को उनके कर्मों का जवाब देते दिखाई देते थे।

पश्चिम बंगाल की वर्तमान राजनीति को देखकर कुछ लोगों को वही फिल्मी दृश्य याद आ सकता है। उनका मानना है कि वर्षों से दबे हुए लोगों का आक्रोश अब सतह पर आ रहा है। यह उन लोगों की प्रतिक्रिया है जो स्वयं को लंबे समय तक उपेक्षित, भयभीत या पीड़ित महसूस करते रहे।

आज जो लोग सत्ता, भय और दबदबे के बल पर खुद को अजेय समझते थे, वे जनता के बढ़ते असंतोष का सामना कर रहे हैं। वर्षों से जमा हुआ गुस्सा और नाराज़गी अब खुलकर दिखाई दे रही है।

समय का चक्र बड़ा विचित्र होता है। जब सत्ता अहंकार में बदल जाती है और भय शासन का साधन बन जाता है, तब एक दिन वही भय टूटता भी है। तब इतिहास करवट लेता है और कभी शिकारी रहे लोग स्वयं को शिकार की स्थिति में पाते हैं।

29/05/2026

तुम कुर्मी हो सपा कार्यालय क्या करने आती हो ?
सपा में पिछड़े का मतलब बस एक ही पिछड़ी जाति है।

28/05/2026

यह वही “रैंटिंग गोला” उर्फ़ शमिता यादव हैं—पहचानते हैं?

- शुरुआत: एंटी-मोदी कंटेंट से पॉपुलैरिटी
- 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान: कहा जाता है कि कांग्रेस के लिए कंटेंट बनाया/हायर हुईं
- BJP/RSS/मोदी पर दर्जनों वीडियो—फिर भी न कोई FIR, न कोई बड़ा एक्शन
- SP नेता अबू आज़मी पर वीडियो बनाया—धमकियों के बाद माफ़ी मांगकर बोलीं: “वीडियो स्क्रिप्टेड था”
- भगवंत मान पर वीडियो (उन्हें शराबी कहकर) — 24 घंटे के अंदर इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड

और फिर भी नैरेटिव वही: “मोदी जी तानाशाह हैं!”

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