26/06/2026
फ्रांस में रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी का कहर: जलवायु परिवर्तन की दस्तक यूरोप इस समय जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहा है, और फ्रांस इसका प्रमुख केंद्र बन गया है। जून 2026 में फ्रांस ने इतिहास का सबसे गर्म महीना और अब तक का उच्चतम राष्ट्रीय तापमान दर्ज किया है। इस अप्रत्याशित गर्मी ने वैज्ञानिकों, प्रशासन और आम जनता को चिंतित कर दिया है। गर्मी के टूटे रिकॉर्ड फ्रांस की राष्ट्रीय मौसम एजेंसी 'मेटीओ-फ्रांस' के अनुसार, राष्ट्रीय तापीय सूचकांक 29.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो 2003 और 2019 के पिछले रिकॉर्ड्स को तोड़ दिया है। देश के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। रात का तापमान भी 22 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जिसे 'ट्रॉपिकल नाइट्स' कहा जा रहा है। जनजीवन और बुनियादी ढांचे पर प्रभाव इस जानलेवा गर्मी के कारण फ्रांस का सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। स्कूल और सार्वजनिक कार्यक्रम बंद कर दिए गए हैं और ऐतिहासिक स्मारकों पर पाबंदी लगाई गई है। रेल सेवाएं भी बाधित हुई हैं और ऊर्जा संकट गहरा गया है। मानवीय क्षति और स्वास्थ्य संकट इस हीटवेव के दौरान दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग बीमार हो गए हैं। गर्मी से राहत पाने के लिए असुरक्षित स्थानों पर जाने से कई लोगों की डूबने से मौत हो गई है। इस भीषण गर्मी का कारण मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर अफ्रीका और सहारा मरुस्थल से आने वाली गर्म हवाएं इसका मुख्य कारण हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन और वैज्ञानिकों का कहना है कि फॉसिल फ्यूल के अत्यधिक उत्सर्जन के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि हुई है, जिसका नतीजा है यूरोप में ऐसी गर्मी।