04/06/2026
सोमासिला बाँध से आने वाली नहर द्वारा पोषित कंडलेरू जलाशय, आंध्र प्रदेश की कृषि जीवनरेखा के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। विशाल जल भंडारण क्षमता से युक्त यह अप्रतिम जलाशय धान, मूंगफली और कपास जैसी प्रमुख फसलों की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा कर क्षेत्र की कृषि समृद्धि को मजबूती प्रदान करता है। नेल्लोर, चित्तूर और आसपास के क्षेत्रों की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को संबल देने वाला कंडलेरू जलाशय सिंचाई के साथ-साथ बाढ़ प्रबंधन और स्थानीय समुदायों को जल उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी बहुआयामी उपयोगिता के कारण यह जलाशय क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण जल संसाधनों में शुमार है।
#भारत_के_अप्रतिम_जलाशय
04/06/2026
मानव कौशल और प्रकृति के अद्भुत सामंजस्य का उदाहरण प्रस्तुत करने वाली काराम्बोलिम झील मूलतः आसपास के धान के खेतों की सिंचाई के लिए निर्मित एक मीठे पानी की झील है, जो समय के साथ घनी वनस्पतियों और दलदली पारिस्थितिकी तंत्र के कारण अनेक स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय बन गई। केवल वर्षा जल से पोषित इस अज्ञात झील के समृद्ध जैव-विविधता क्षेत्र को तब चुनौती मिली, जब साल्विनिया नामक खरपतवार ने इसकी सतह को ढकना शुरू कर दिया। पक्षी विशेषज्ञों द्वारा इस समस्या की पहचान किए जाने पर वन विभाग ने त्वरित कदम उठाए और इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण हेतु इसे काराम्बोलिम पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित किया।।
#भारत_की_अज्ञात_झीलें
04/06/2026
मुन्नार की हरित वादियों में कल-कल बहता थोम्मनकुथु झरना केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि लोककथाओं और आदिवासी विरासत का जीवंत संगम भी है। इसके आसपास बसे जनजातीय समुदाय पीढ़ियों से प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीते आए हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, आदिवासी नेता थॉम्माचेन कुरुविनाकुनेल ने अपने भाले से चट्टान को भेदकर इस दिलचस्प झरने को जन्म दिया था, ताकि अपने परिवार और समुदाय की प्यास बुझा सकें। वहीं एक अन्य किंवदंती ‘चिलिकोम्बन’ नामक दिव्य पक्षी का उल्लेख करती है, जिसके पंखों की छाप से बने सात झरना-चरण संगीत के सात सुरों का प्रतीक माने जाते हैं।
#भारत_के_दिलचस्प_झरने
03/06/2026
सुचिंद्रम–थेरूर मनकुडी संरक्षण अभयारण्य का प्रमुख हिस्सा माना जाने वाला सुचिंद्रम–थेरूर आर्द्रभूमि परिसर लगभग 94.229 हेक्टेयर में फैला हुआ एक आर्द्रभूमि क्षेत्र है। सुचिंद्रम एरी और थेरूर कुलम जैसे अन्य नामों से विख्यात यह रामसर स्थल कोडैयर नदी की जल निकासी प्रणाली के मध्य स्थित है तथा पेरुंचनिडम, पेचीप्पराई और कोडैयर बाँधों से छोड़े गए जल के प्रवाह को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाता है। भूजल पुनर्भरण के प्रमुख स्रोत के रूप में यह आर्द्रभूमि जल संसाधनों को सुदृढ़ बनाती है। अपनी असाधारण जैव विविधता के कारण इसे बर्ड लाइफ इंटरनेशनल द्वारा अंतरराष्ट्रीय महत्त्व के पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र (IBA) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
#भारत_के_रामसर_स्थल
03/06/2026
नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर से उद्गमित गोदावरी नदी पर निर्मित जयकवाड़ी बाँध महाराष्ट्र की प्रमुख बहुउद्देशीय जल परियोजनाओं में से एक है। लगभग 10 किमी लंबा यह बाँध नदी घाटी क्षेत्र में 490 मीटर लंबे चिनाई (मेसनरी) बाँध तथा दोनों ओर विस्तृत मिट्टी के बाँधों से मिलकर बना है। तकरीबन 2,909 मिलियन घन मीटर (एमसीयूएम) की जल भंडारण क्षमता वाला यह विशाल बाँध सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा देश के विकास में अपनी विशिष्ट पहचान भी स्थापित करता है।
#भारत_के_सुविकसित_बाँध
03/06/2026
Hon’ble Minister of Jal Shakti, Shri C.R. Patil , highlighted the achievements of the Jal Sanchay Jan Bhagidari (JSJB) initiative for onboarding of over 1.5 crore artificial groundwater recharge and storage structures across the country through collective efforts and active public participation.
The initiative focuses on enhancing groundwater recharge through rainwater harvesting, aquifer recharge, borewell recharge, recharge shafts, and other water conservation measures, with support from government agencies, corporate social responsibility (CSR) funds, industrial houses, civic bodies, and local communities.
Read full article here:
1.5 crore artificial groundwater recharge, storage works under JSJB initiative: Minister C R Patil
Every Municipal Corporation has been requested to aim at establishing a minimum of 10,000 recharge structures within its jurisdiction.
03/06/2026
Hon’ble Minister of Jal Shakti, Shri C.R. Patil, highlighted the achievements of the Jal Sanchay Jan Bhagidari (JSJB) initiative for creation of over 1.5 crore artificial groundwater recharge and storage structures across the country through collective efforts and active public participation.
The initiative focuses on enhancing groundwater recharge through rainwater harvesting, aquifer recharge, borewell recharge, recharge shafts, and other water conservation measures, with support from government agencies, corporate social responsibility (CSR) funds, industrial houses, civic bodies, and local communities.
1.5 crore artificial groundwater recharge, storage works under JSJB initiative: Minister C R Patil
Every Municipal Corporation has been requested to aim at establishing a minimum of 10,000 recharge structures within its jurisdiction.
02/06/2026
समुद्र की अथाह लहरों के बीच एक विशाल शिला पर निर्मित विवेकानंद रॉक मेमोरियल स्थापत्य सौंदर्य का प्रतीक है। लक्षद्वीप सागर से घिरे इस अनुपम स्थल पर बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर और अरब सागर का त्रिवेणी मिलन एक ऐसा मनोहारी दृश्य रचता है, जो प्रकृति की अनुपम कलाकृति प्रतीत होता है। यह ऐतिहासिक जल स्मारक वहीँ पावन शिला है, जहाँ स्वामी विवेकानंद ने गहन ध्यान के माध्यम से आत्मबोध प्राप्त किया और मानवता के कल्याण का अपना विराट संकल्प दृढ़ किया। उनकी अमर प्रेरणा और योगदान को नमन करते हुए वर्ष 1970 में इस भव्य जल-स्मारक का निर्माण किया गया।
#भारत_के_ऐतिहासिक_जल_स्मारक