Kushwaha Samaj Delhi (Regd.) is a social organisation Established in 1978. The main vision of our organisation is to be unite our community in society and educate the peoples in the field of social work, politics, education, business etc.
कुशवाहा मुख्य रूप से एक बृहद समुदाय का हिस्सा हैं जिसका अतीत स्वर्णिम और इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. अपने गौरवशाली इतिहास को भूल जाने कारण कुशवाहा समाज को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन कुशवाहा समाज अब अपनी पहचान वापस पाने के लिए, विकास की मुख्यधारा में आने के लिए और एक राजनितिक शक्ति बनने के लिए संघर्षरत है और सफल भी हो रहे हैं.
कौन हैं कुशवाहा
1. भारत का हिन्दू समुदाय (धर्म) कई जातियों से से बना हुआ है. कुशवाहा मुख्य रूप से भारतीय हिन्दू समाज की एक वंश/जाति है. कुशवाह समुदाय कुशवाह नाम से भी जाना जाता है.
2. कुशवाहा पारंपरिक रूप से कुशल किसान थे इसलिए इन्हे कृषक जाति माना जाता है. इनका मुख्य काम खेती है. कुशवाहा सब्जियाँ उगाने और बेचने, मधुमक्खी पालने और पशुपालन का कार्य करते हैं.
3. कुशवाह शब्द कम से कम चार उपजातियों (कुशवाह, कछवाहा, कोइरी व मुराओ) के लिए प्रयोग किया जाता हैं. लेकिन काफी लोग ऐसे भी हैं जो कछवाहा, सैनी, शाक्य, मौर्या को भी कुशवाहा के अंतर्गत ही मानते हैं.
कहाँ पाए जाते हैं-
4. कुशवाहा भारत के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग नामों से पाए जाते हैं. मुख्यतः कुशवाहा उत्तर भारत में पाए जाते हैं. इसका निवास क्षेत्र बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड , मध्यप्रदेश और झारखण्ड है.
वर्तमान स्थिति-
5. सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा होने के कारण कुशवाहा समाज को भारत की सकारात्मक भेद भाव की व्यवस्था (आरक्षण/Positive Discrimination) के अंतर्गत अलग -अलग राज्यों में “अन्य पिछड़ा वर्ग” या पिछड़ा वर्ग के रूप में वर्गीकृत किया गया है.
6. बिहार में कुशवाहा समाज को “अन्य पिछड़ा वर्ग” के रूप में वर्गीकृत किया गया है.
7. साल 2013 में हरियाणा सरकार ने कुशवाहा, कोइरी व मौर्य जातियो को “पिछड़ी जतियों” में सम्मिलित किया है.
उत्पत्ति और इतिहास–
8. कुशवाहा या कछवाहा खुद को अयोध्या के सूर्यवंशी राजा भगवान राम के पुत्र कुश का वंशज होने का दावा करते हैं.
9.साथ ही कुशवाहा यह भी मानते हैं की महात्मा बुद्ध, चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक कुशवाहा वंश के ही थे.
10. पारंपरिक रूप से किसान रहे कुशवाहा ने 20वीं शताब्दी में खुद को राजपूत वंश या क्षत्रिय वंश का बताना शुरू किया.
11. कई स्वतंत्र राज्यों व रियासतों जैसे अलवर, आमेर (वर्तमान जयपुर) व मैहर पर कुशवाहा जाति का शासन रहा .
12 . काछी और कोइरी अफीम की खेती में सहयोग के कारण लंबे समय तक से ब्रिटिश शासन के करीबी रहे.
13. वर्तमान समय में कुशवाहा खुद को विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज और सूर्यवंशी होने का दावा करते हैं. लेकिन पूर्वकाल में कुशवाहा जातियाँ- मौर्य, कुशवाह व कोइरी -शिव और शाक्त के उपासक थे और खुद को शिव व शाक्त संप्रदाय से जुड़ा हुआ बताते थे.
13.पारंपरिक रूप से कुशल किसान और खेती करने के कारण कुशवाहा शूद्र वर्ण के माने जाते थे. लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान कुशवाहा समुदाय की जातियों ने ब्रिटिश प्रशासको के समक्ष अपने परंपरागत शूद्र बताये जाने के विरुद्ध चुनौती दी और क्षत्रिय वर्ण में शामिल करने की मांग की.
14 .1910 से काछी और कोइरी जातियों ने एक संगठन बनाकर इन दोनों जातियों को कुशवाहा क्षत्रिय बताने लगे.
15 .1928 में मुराओ जाति ने भी 1928 में क्षत्रिय वर्ण में सम्मिलित करने के लिए लिखित याचिका दायर की थी.
16. 1921 मे कुशवाह क्रांति के समर्थक गंगा प्रसाद गुप्ता ने कोइरी, काछी, मुराओ व कछवाहा जातियों के क्षत्रिय होने के साक्ष्यों पर एक किताब प्रकाशित की. गंगा प्रसाद गुप्ता ने अपने किताब में तर्क दिया कि कुशवाहा कुश के वंशज है और बारहवी शताब्दी में दिल्ली सल्तनत की स्थापना में इन्होने राजा जयचन्द को सैन्य सेवाए दी थी.
17. बाद में विजयी मुस्लिमों के कारण कुशवाह समुदाय तितर बितर होकर अपनी पहचान भूल गया व जनेऊ आदि परंपराए त्याग कर निम्न स्तर के अलग अलग नामो के स्थानीय समुदायो में विभाजित हो गया.
18. कुछ कुशवाह सुधारकों ने यह तर्क दिया कि राजपूत, भूमिहार व ब्राह्मण भी खेतो में काम करते है, इसलिए किसान होने और खेती करने के कारण कुशवाहा समुदाय को शूद्र वर्ण से नहीं जोड़ा जा सकता है.
19. कोईरी ,मुराव और कछवाहा राजपूत जो राजपूत जाति में आते है राम के पुत्र कुश का वंशज मानते हैं जिनके अंदर ब्रिटिश काल में चार उपजातियां कोइरी , मुराव ,कछवाहा को शामिल किया गया था.
20. उसी समय इन चारो उपजातियों ;कुशवाह, कछवाहा, कोइरी व मुराओ; ने एक साझा उपनाम कुशवाहा प्रयोग करने पर बल दिया. लेकिन बाद में इस बात पर विवाद होने लगा. कछवाहा से इनकी दूरी बढ़ गयी क्योकि कछवाहा राजपूत का हिस्सा थे जबकि कुशवाहा एक जाति के रूप में थी.
21. कुशवाहा क्षत्रिय उत्त्पत्ति मीमांसा जैसे ग्रंथो और आर्य समाजी विद्वानों के पाठ के आधार पर
जेम्स कर्नल टाड और गंगा प्रसाद गुप्ता जैसे कई इतिहासकारों तथा आर्य समाजी विद्वानों का मानना है की कोइली गणराज्य का सम्बन्ध चन्द्रगुप्त मौर्य से था. कोइली गणराज्य कोइरियो का था जो कुश्वंशी क्षत्रिय थे. चन्द्रगुप्त मौर्य की माता मुराव अर्थात मोरिय थी जो कुशवाहा समाज की एक उपजाति है.
22 . भागवान बुद्ध की माँ का भी सम्बन्ध कोइली (कोइरी ) गणराज्य से था जिसके कारण कुशवाहा समाज खुद को को बुद्ध, चन्द्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक से सम्बंधित होने का दावा करते हैं.
23 . सम्राट अशोक के कुशवाहा होने के प्रमाण के रूप में हाथीगुंफा शिलालेख का उल्लेख किया जाता है. सम्राट अशोक के कुशवाहा होने संबंधी प्राकृत अभिलेख के शब्द इस प्रकार हैं:
“ कुसवाणम क्षत्रियानां च सहायतातितां प्राप्त प्राप्त मसिक नगरम्|,
कुसावना क्षत्रियना का सह सहायतावतन फाट मस्की नगरा”
—हाथीगुंफा शिलालेख