24/04/2022
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24/04/2022
#त्यागी--
जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय रहने वाले ब्राह्मण थे , जिनका उदय भगवन परशुराम के क्षत्रियो के युद्ध के समय हुआ था। भगवन परशुराम सबसे पहले त्यागी थे , जिन्होंने ब्राह्मणों में सबसे पहले शस्त्र उठाये थे व क्षत्रियो से युद्ध के लिये भार्गवों की सेना बनाई जिसमे वे सभी ब्राह्मण विजयी हुए व कालान्तर में त्यागी , आदि नामो से जाने गये व युद्ध में जीती हुई जमीन पर खेती करनी शुरू कर अपने जीवन का व्यापन करने लगे। यह जाति सबस प्राचीन जमींदार जातियों में से एक है।
वर्तमान में यह खेती करने वाली जमींदार जाति है। " त्यागी" नाम पंडिताई का त्याग करने के कारण मिला था व् ये अयाचक श्रेणी वाले ब्राह्मण होते थे जिन्होंने भिक्षा का त्याग किया था।
शास्त्री जब शस्त्र उठता है तब वह त्यागी कहलाता है।।
त्यागी , ब्राह्मणों के लिए उसी प्रकार है , जिस तरह हिन्दुओ के लिए सिख समुदाय था ।।
मोहयालो के इतिहास से ये बात स्पस्ट होती है कि इन त्यागी मोहयाल आदि ब्राह्मणों के पूर्वज सप्तऋषि थे जिनका अयाचक और क्षत्रिय प्रवति वाला स्वाभाविक उदय भगवान परशुराम जी के समय धर्म की रक्षा हेतु 7600 विक्रमसंवत पूर्व हुआ था । समस्त सप्तऋषि इस प्रकार है--
1)अगस्त्य
2)अत्रि
3)भरद्वाज
4)गौतम
5)जमदग्नि(परशुराम जी के पिता)
6)वशिष्ट
7) विश्वमित्रा
कुछ लोगों की धारणानुसार महाभारत के अंत में आर्यावर्त के राजा अर्जुन के पौत्र राजा जनमजेय के समय ही एक बड़ा समूह कुरु राज्य में 2500 गाँव रहने और खेती करने के लिए बसे।इसी कारण त्यागी दिल्ली के चारो तरफ त्यागी-जनसंख्या की बहुलता है।
त्यागियों के उदय का प्रमाण श्रृंगी ऋषि की योगिक प्रवचन माला पुस्तक में मिलता है जिसके लेेेखक ब्रह्मचारि कृष्ण दत्त जी महाराज है।अधिक जानकारी ब्रह्मऋषि वंश विस्तार पुस्तक से भी प्राप्त कर सकते हैं
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