06/06/2022
एक लाल ईंट का भट्ठा प्रतिदिन औसतन 40 टन उपजाऊ ऊपरी परत की मिट्टी को बर्बाद करता है! बिहार में तक़रीबन 7500 लाल ईंट के भट्ठे चालू हैँ! मतलब प्रति दिन बिहार 300000 ( तीन लाख ) मेट्रिक टन उपजाऊ मिट्टी लाल ईंट के भटठों के कारण खो देता है!
सिर्फ 6 महीने की हीं कार्य अवधि को माना जाये तब भी लगभग 10000 हेक्टेयर जमीन का उत्तखनन!
सीधी भाषा में समझें बिहार जैसे क़ृषि आधारित एवं सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाले राज्य में हम प्रति वर्ष 25000 एकड़ बहुमूल्य जमीन को लाल ईंट बनाने के नाम पर बर्बाद कर देते हैँ! अगर पुरे भारत वर्ष की बात की जाये तो हम प्रति वर्ष मुंबई जितनी बड़ी महानगर के क्षेत्रफल को बंजर बना देते हैँ!
यह तो है धरती माँ के उपजऊ ऊपरी परत को बर्बाद करने का तथ्य!
अब आते हैँ जमीन के उर्वरा शक्ति को खत्म करने की बात पर, एक लाल ईंट का भट्ठा अपने आस पास के लगभग 100 एकड़ के रेडियस जमीन की उर्वरा शक्ति ख़त्म कर देती है, मतलब कुल 400 एकड़ की जमीन को! सम्पूर्ण लाल ईंट के भट्ठे को मिला कर गणना करें तो कुल 3000000 ( तीस लाख ) एकड़ जमीन अनुपजाऊ या बंजर बना दी जाती है! यह डाटा सिर्फ बिहार राज्य का है!
2 टन कोयला प्रति लाल ईंट भट्ठे के हिसाब से बिहार प्रति दिन 15000 टन कोयले का खपत लाल ईंट बनाने में करता है! 9 महीने हीं चिमनी के जागृत अवस्था को मान लें तब भी प्रति वर्ष लगभग 40,50,000 टन कोयले की खपत लाल ईंट का भट्ठा करता है!
जिससे प्रति वर्ष लगभग 1,75,000( एक लाख पचहत्तर हजार ) टन PM 2.5 पार्टिसिल्स, 1,16,000 ( एक लाख सोलह हजार ) टन सल्फर डाई ऑक्साइड, 2,265,000 ( बाइस लाख पैंसठ हजार ) टन कार्बन मोनो ऑक्साइड, 45000 ( पैंतालिस हजार ) टन ब्लैक कार्बन एवं सबसे ख़तरनाक 125000000 ( एक सौ पचीस लाख ) टन कार्बन डाई ऑक्साइड जहरीली गैसों का उत्सर्जन सम्पूर्ण बिहार में होता है!
अगर इन गणनाओं पर ध्यान दिया जाये तो हम किस प्रलयंकर परिस्थिति में जीने को आदी हो गये हैँ! और अपने आने वाले पीढ़ी को किस तरफ धकेल रहे हैँ इसका अंदाजा लगाया जा सकता है!
आज समाज को अचेता अवस्था से बाहर आ कर सचेत होने की जरुरत है! हम बहुमूल्य मिट्टी को बर्बाद करके एक खूबसूरत आशियाना बना कर आत्म संतुष्ट हो सकते हैँ परन्तु भविष्य में इसके भयंकर दुष्परिणामों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जायेगा! हमारी आत्म संतुष्टी पर्यावरण को कोमा में धकेल रही है, इससे बचना होगा!!
08/01/2022
ख़्वाब टूटे हैं, मगर हौसले तो ज़िंदा हैं,
हम वो शक्स है, जहाँ मुश्किलें शर्मिंदा हैं!
10/11/2021
Can you help out by signing this petition?
Sign the Petition
Save Ash Brick Industry..
27/10/2021
एक विचारणीय परिस्थिति आपके समक्ष प्रस्तुत है ......
MOEFCC के नोटिफिकेशन के हिसाब से हमारे उद्योग हेतु आरक्षित 20% से कहीं बहुत अधिक हमनें परसों NTPC के 1 रूपये टन से 131-140 गुना रेट पर आरक्षित करवाई है ।
अब हमें क्या चाहिए ?
मात्रा -20% से ज्यादा आवंटित
रेट -NTPC ने तो एक रूपए टन आफर की थी ।
प्रशासन कहां पकड़ में आयेगा ?
अपने प्लांट की आवश्यकता से कहीं बहुत अधिक ऐश द्वारा आर्थिक लाभ कमाने की प्रतिस्पर्धा में धनबल युक्त Transporter और ट्रेडर्स ने बाटम ऐश पर तो एकाधिकार स्थापित कर लिया है ।
आप सभी को ज्ञात रहे कि MOEFCC के प्रस्तावित नोटिफिकेशन में तय की गई ऐश से कम उठाने पर 1500 प्रति टन की पेनेल्टी लगाई जाने का प्रावधान है ।
मेरा मानना है जिन सज्जनों ने 05-10 हजार से कहीं अनेकों गुना अधिक बाटम ऐश आवंटित कराई है वे ट्रेडर्स हैं । वे सैद्धांतिक रूप से व्यापार में हानि लाभ के अतिरिक्त कदापि संवेदनशील नहीं है । उन्हें हमारे लघु उद्योग की दशा-दिशा व संगठित होकर विकसित होने से कोई सरोकार नहीं ।
जो भी मैन्युफैक्चरर्स आगामी फ्लाई अथवा साईलो ऐश हेतु नीलामी में हिस्सा लेने के इच्छुक हैं वे सतर्क रहें ।
26/09/2021
Fly Ash product industry jolted earlier by MOEFCC Draft notification and now by Fresh directives from Ministry of Power.... regarding distribution and availability of Ash from Each Thermal Power Plant through Auction bidding and transporters only.
No preference for Fly Ash Brick Industry
Advocacy of Complete Traders economy promotion...
26/09/2021
संख्या 9/7/2011-एस। वां। (खंड IV) विद्युत मंत्रालय
भारत सरकार।
'F' Wing, Nirman Bhawan, New Delhi, 22 September, 2021
प्रति,
1. कोयला/लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत संयंत्रों (केंद्रीय राज्य/निजी) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक/ प्रबंध निदेशक 2. सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के प्रधान सचिव (विद्युत/ऊर्जा)
विषय: फ्लाई ऐश को बढ़ाने के लिए विद्युत संयंत्रों द्वारा अंतिम उपयोगकर्ताओं को फ्लाई ऐश की आपूर्ति
राख का उपयोग
यह देखा गया है कि फ्लाई ऐश की मांग साल दर साल बढ़ रही है, जिससे फ्लाई ऐश के उपयोग में वृद्धि हुई है। फ्लाई ऐश एक मूल्यवान वस्तु के रूप में उभर रहा है। चूंकि फ्लाई ऐश के अंतिम उपयोगकर्ता जैसे सीमेंट प्लांट, ईंट भट्टे, सड़क और निर्माण एजेंसियां आदि वाणिज्यिक उद्यम हैं और उनकी सभी इनपुट लागतों का हिसाब रखा जाता हैअतः फ्लाई ऐश की नीलामी सदैव एक पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से की जानी चाहिए।
2. सभी कोयला/लिग्नाइट आधारित बिजली संयंत्रों को एतद्द्वारा सलाह दी जाती है कि वे निम्नलिखित के आधार पर फ्लाई ऐश की आपूर्ति के लिए सभी नई प्रतिबद्धताओं के लिए अंतिम उपयोगकर्ताओं को फ्लाई ऐश प्रदान करें।
दिशानिर्देश:
2.1 बिजली संयंत्र अंतिम उपयोगकर्ताओं को केवल पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से फ्लाई ऐश उपलब्ध कराएंगे|
। 2.2 *यदि बोली/नीलामी के बाद भी फ्लाई ऐश की कुछ मात्रा अनुपयोगी रह जाती है, तो केवल एक विकल्प के रूप में इसे पहले आओ पहले पाओ पर मुफ्त दिया जाना मान्य कहा जा सकता है।*
और सेवा के आधार पर यदि उपयोगकर्ता एजेंसी ही परिवहन लागत वहन करने को तैयार है।
2.3 यदि उपरोक्त पैरा 2.1 और 2.2 में उठाए गए कदमों के बाद भी राख का उपयोग नहीं किया जाता है, तो विद्युत् संयत्र द्वारा पात्र परियोजनाओं के लिए फ्लाई ऐश के परिवहन की लागत निःशुल्क प्रदान की जाएगी।
२.४ अंतिम उपयोगकर्ता फ्लाई ऐश परिवहन की लागत को कम करने के लिए निकटतम टीपीपी से फ्लाई ऐश प्राप्त करने के लिए बाध्य होंगे। यदि निकटतम टीपीपी ऐसा करने से इंकार करती है, तो अंतिम उपयोगकर्ता उचित दिशा-निर्देशों के लिए विद्युत मंत्रालय से संपर्क करेगी।
२.५ परिवहन लागत जहां कहीं भी वहन करने की आवश्यकता है वहां बिजली संयंत्रों द्वारा केवल MOEFCC के नोटिफिकेशन के प्रावधानों के अनुसार प्रतिस्पर्धी बोली पर खोजी जाएगी
! ताप विद्युत संयंत्र प्रति वर्ष परिवहन एजेंसियों का एक पैनल तैयार करेंगे जो की 50 किमी के स्लैब में परिवहन के लिए प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर उपयोग अवधि के लिए होगा । विद्युत् संयत्र समय रहते ही बोलियां मंगाएगा, ताकि पिछले पैनल के समाप्त होते ही एक परिवहन पैनल स्थापित हो जाए। एक पैनल की समाप्ति और नए पैनल को अंतिम रूप देने के बीच कोई अंतर नहीं होना चाहिए।
2.6 फ्लाई ऐश की पेशकश प्रतिस्पर्धी मांग के आधार पर अंतिम उपयोगकर्ताओं को की जाएगी, अर्थात अंतिम उपयोगकर्ता जो फ्लाई ऐश के लिए उच्चतम मूल्य की पेशकश करते हैं और परिवहन लागत के लिए न्यूनतम समर्थन चाहते हैं, उन्हें प्राथमिकता पर समान फ्लाई ऐश की पेशकश की जाएगी। इससे बिजली की दरें कम होंगी और उपभोक्ताओं पर बोझ कम होगा।
2.7 सभी बिजली संयंत्र अपने तकनीकी प्रतिबंधों के अधीन फ्लाई ऐश की पेशकश कर सकते हैं जैसे कि
एहतियात ,डाइक स्थिरता और सुरक्षा आदि के लिए। कम राख का उपयोग वाले बिजली संयंत्र फ्लाई ऐश के उपयोग को बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करेगें ।
3. सभी संबंधितों से अनुरोध है कि इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करें।
4. इसे माननीय विद्युत और गैर परंपरागत ऊर्जा मंत्री जी के अनुमोदन से जारी किया जाता है।
ए उपाध्याय (Anand Upadhyay)
सरकार के उप सचिव। भारत के दूरभाष: २३०६२४३९
में कॉपी:
सचिव (एमओईएफ और सीसी), भारत सरकार सचिव (एमओआरटीएच), भारत सरकार ii.
सचिव (एमओएचयूए), भारत सरकार
सचिव, सीईआरसी
सभी एसईआरसीएस/जेईआरसीएस के सचिव
कॉपी।।।।।।।
एमओपी के पीएस, एमओएसपी के पीएस, सचिव (विद्युत) के सीनियर पीपीएस, सभी संयुक्त सचिव/ईए/सी (थर्मल), निदेशक/डीएस, एमओपी
20/09/2021
सादर वन्दे
व्यक्तिगत स्तर पर विगत दो दशकों से अधिक के फ्लाई ऐश ब्रिक्स उद्योग में प्राप्त हुए अनुभव आज स्वयं ही केंद्रीय पर्यावरण ,वन व जलवायु संरक्षण मंत्रालय में ढाई घंटे तक चली सकारात्मक व नीति निर्धारण को अग्रसर वैचारिक बैठक में गौरवान्वित महसूस करते रहें ।
अमूल्य अनुभव , प्रभावी प्रस्तुतीकरण व सतत् ऊर्जावान कार्यशैली के धनी प्रतिनिधि मंडल के साथ सम्मिलित होने का सुअवसर आज उद्योग की समृद्ध व स्वस्थ दिशा-दशा के राष्ट्रीय नेतृत्व के रूप में प्रतीत हुआ ।
आदरणीय अग्रज दिग्दर्शक भाई इंजीनियर राजेन्द्र जी , परम सुधिजन सुधीर कुमार जी , अतुल्य अतुल पराशर जी , ऊर्जा पुंज विकास सिंह जी , धैर्यवान एडवोकेट अभिषेक जी ,अदभुत प्रतिभावान प्रिय भाई इंजीनियर श्री पंकज मित्तल जी के संग आज MOEFCC की बैठक में सारगर्भित शैली में फ्लाई ऐश उत्पाद उद्योग से जुड़े बिंदुओं पर विस्तार पूर्वक विचार विमर्श में भागीदारी एक अत्यंत सु:खद अनुभव रहा ।
हम सभी सामूहिक रूप से इस प्रखर व वैचारिक स्तर पर उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व के साक्षी व सहयोगी हैं , यह मात्र संयोग ही नहीं अपितु सौभाग्य भी है ।
अनंत शुभकामनाएं
अशेष आभार
राष्ट्र प्रथम
वंदेमातरम
18/09/2021
आलपिन सारे कागज़ को जोड़कर रखती है लेकिन वह *हर कागज़* को चुभती है।
इसी प्रकार जो व्यक्ति सभी को जोड़कर रखना चाहता है।
*वह भी सभी की आँखों में चुभता है ।*
14/08/2021
नीड़ का निर्माण फिर फिर
नेह का आह्वान फिर फिर
वो उठी आंधी की नभ में
छा गया सहसा अँधेरा
धुली धूसरित बादलों ने
भूमि को इस भाँति घेरा
रात सा दिन हो गया फिर
रात आई और काली
लग रहा था अब न होगा
इस निशा का फिर सवेरा...
रात के उत्पात भय से
भीत जन जन
भीत कण कण
किन्तु प्राची से उषा की
मोहिनी मुस्कान फिर फिर
नीड़ का निर्माण फिर फिर
नेह का आह्वान फिर फिर
स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं