Amiteshwar Dayal

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Amiteshwar Dayal पूज्य माँ की चरण रज का एक छोटा धूलकण हूं।

“आजादी केवल हमारा अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारा कर्तव्य भी है। आइए, देश की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए मि...
15/08/2026

“आजादी केवल हमारा अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारा कर्तव्य भी है। आइए, देश की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए मिलकर अपना योगदान दें।”

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 🇮🇳

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥   #गुरु_पूर्णिमा
29/07/2026

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥


#गुरु_पूर्णिमा

कॉकरोच नहीं, स्वयंसेवक बनिए।समाज केवल सरकारों, कानूनों या संस्थाओं से नहीं चलता, बल्कि उन लोगों से चलता है जो बिना किसी ...
10/06/2026

कॉकरोच नहीं, स्वयंसेवक बनिए।

समाज केवल सरकारों, कानूनों या संस्थाओं से नहीं चलता, बल्कि उन लोगों से चलता है जो बिना किसी व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा के समाज और राष्ट्र के लिए अपना समय, श्रम और प्रतिभा समर्पित करते हैं। ऐसे लोगों को हम स्वयंसेवक कहते हैं।

कहा जाता है कि कॉकरोच अंधेरे में रहकर केवल अपने अस्तित्व की चिंता करता है। उसे न समाज की चिंता होती है, न किसी और के सुख-दुख की। वहीं स्वयंसेवक प्रकाश का वाहक होता है। वह अपने आसपास की समस्याओं को देखकर उनसे मुंह नहीं मोड़ता, बल्कि समाधान का हिस्सा बनने का प्रयास करता है।

जब कहीं आपदा आती है, जब किसी जरूरतमंद को सहायता चाहिए होती है, जब समाज को संगठन और संस्कार की आवश्यकता होती है, तब स्वयंसेवक सबसे आगे खड़ा दिखाई देता है। उसका उद्देश्य केवल "मैं" नहीं, बल्कि "हम" होता है।

आज समाज को ऐसे लोगों की आवश्यकता है जो केवल दर्शक न बनें, बल्कि सक्रिय भागीदारी निभाएं। जो शिकायत करने के बजाय योगदान दें। जो स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज के हित को प्राथमिकता दें।

अतः अंधेरे में केवल अपने लिए जीने वाले कॉकरोच नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित स्वयंसेवक बनिए।

"स्वयं से ऊपर उठकर समाज के लिए जीना ही स्वयंसेवक का वास्तविक परिचय है।" 🇮🇳

#स्वयंसेवक

|| संघ शिक्षा वर्ग बनाम समर कैंप ||आज के दौर में समर कैंप बच्चों और युवाओं को मनोरंजन, कौशल और आत्मविश्वास प्रदान करते ह...
06/06/2026

|| संघ शिक्षा वर्ग बनाम समर कैंप ||

आज के दौर में समर कैंप बच्चों और युवाओं को मनोरंजन, कौशल और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं, लेकिन संघ शिक्षा वर्ग केवल व्यक्तित्व विकास तक सीमित नहीं रहता — यह व्यक्ति के भीतर राष्ट्रभाव, अनुशासन, सेवा और समर्पण के संस्कारों का निर्माण करता है।

संघ शिक्षा वर्ग हमें "मैं" से "हम" की यात्रा कराता है यहाँ शारीरिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक प्रशिक्षण के माध्यम से ऐसा व्यक्तित्व गढ़ा जाता है जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी जीना सीखता है।

समर कैंप एक सफल व्यक्ति बना सकते हैं, लेकिन संघ शिक्षा वर्ग एक सजग, अनुशासित और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करता है।

साधना, संस्कार और संगठन का यह अनूठा प्रशिक्षण जीवन को नई दिशा देता है।

संघ शिक्षा वर्ग केवल प्रशिक्षण नहीं, राष्ट्र निर्माण की एक सतत साधना है। 🚩

#संघ_शिक्षा_वर्ग #राष्ट्र_निर्माण

एक शाखा में एक बाल स्वयंसेवक प्रतिदिन देर से आता था एक दिन शाखा कार्यवाह ने स्नेहपूर्वक पूछा आप प्रतिदिन विलंब से क्यों ...
30/05/2026

एक शाखा में एक बाल स्वयंसेवक प्रतिदिन देर से आता था एक दिन शाखा कार्यवाह ने स्नेहपूर्वक पूछा आप प्रतिदिन विलंब से क्यों आते हैं?

बाल स्वयंसेवक ने विनम्रता से उत्तर दिया,
“पिताजी अस्वस्थ हैं घर के कई काम मुझे करने पड़ते हैं तथा माँ अकेले सब नहीं संभाल पातीं इसलिए देर हो जाती है, लेकिन शाखा आना नहीं छोड़ना चाहता।”

यह सुनकर शाखा कार्यवाह का हृदय द्रवित हो उठा।

अगले ही दिन कुछ स्वयंसेवक उनके घर पहुँचे किसी ने पानी भरने में सहायता की, किसी ने घर की सफाई कर दी, तो किसी ने आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था कर दी।

धीरे-धीरे परिवार की कठिनाई कम होने लगी और वह बाल स्वयंसेवक समय पर शाखा आने लगा।

तब शाखा कार्यवाह ने सभी स्वयंसेवकों से कहा—

संघ केवल व्यायाम, खेल या दंड चलाना नहीं सिखाता
संघ तो परिवार की तरह एक-दूसरे का सुख-दुख बाँटना और साथ निभाना सिखाता है।

“वसुधैव कुटुम्बकम्” — सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है यही संघ कार्य की मूल भावना है। 🚩

#स्वयंसेवक #संघसंस्कार #वसुधैवकुटुम्बकम्

शाखा की टूटी सीटीएक नगर में एक वृद्ध मुख्य शिक्षक जी थे उनकी जेब में हमेशा एक पुरानी पीतल की सीटी रहती थी। वर्षों से वही...
25/05/2026

शाखा की टूटी सीटी

एक नगर में एक वृद्ध मुख्य शिक्षक जी थे उनकी जेब में हमेशा एक पुरानी पीतल की सीटी रहती थी। वर्षों से वही सीटी शाखा में खेल शुरू करवाती, गण सजवाती और प्रार्थना का संकेत देती थी।

एक दिन शाखा के बाद एक बाल स्वयंसेवक ने पूछा —
“शिक्षक जी, यह सीटी तो अब पुरानी और टूटी हुई है नई क्यों नहीं ले लेते?”

वृद्ध शिक्षक जी मुस्कुराए उन्होंने सीटी हाथ में लेकर कहा
“बेटा, इसकी आवाज़ शायद धीमी हो गई है… लेकिन इसने हजारों स्वयंसेवकों को समय, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की याद दिलाई है।”

कुछ दिनों बाद शिक्षक जी अस्वस्थ हो गए शाखा की जिम्मेदारी युवाओं ने संभाल ली। पहले दिन सब तैयार थे, पर खेल शुरू होने का संकेत देने वाला कोई नहीं था।

तभी वही बाल स्वयंसेवक आगे बढ़ा उसने धीरे से वह पुरानी सीटी बजाई आवाज़ कमजोर थी, लेकिन मैदान में खड़े हर स्वयंसेवक की आँखों में चमक आ गई।

उस दिन सभी ने अनुभव किया —
संघ केवल वस्तुओं से नहीं चलता, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कारों से चलता है।

वर्षों बाद वह बाल स्वयंसेवक स्वयं मुख्य शिक्षक बना उसकी जेब में भी वही पुरानी सीटी रहती थी।

#संघसंस्कार #स्वयंसेवक #राष्ट्रसेवा

22/05/2026

🌿 "कुटुम्ब प्रबोधन" 🌿

'पंच परिवर्तन' के अंतर्गत कुटुंब प्रबोधन केवल एक अभियान नहीं, बल्कि भारतीय जीवन पद्धति का पुनर्जागरण है।

संस्कारयुक्त परिवार ही सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला होते हैं।
परिवार में संवाद, संस्कार, समरसता एवं आत्मीयता को पुनर्जीवित करना ही कुटुंब प्रबोधन का उद्देश्य है।

आइए, भारतीय संस्कृति के मूल्यों को अपने परिवार में पुनः जागृत करें और आदर्श कुटुंब निर्माण में सहभागी बनें। 🇮🇳

#कुटुम्ब_प्रबोधन #पंच_परिवर्तन #भारतीय_संस्कृति #संस्कार #परिवार

🇮🇳 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳आइए 26 जनवरी के इस पावन अवसर परकर्तव्य, अधिकार और राष्ट्रभक्ति के पथ परएकजुट होक...
26/01/2026

🇮🇳 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳
आइए 26 जनवरी के इस पावन अवसर पर
कर्तव्य, अधिकार और राष्ट्रभक्ति के पथ पर
एकजुट होकर आगे बढ़ें।
वंदे मातरम् | जय हिन्द 🇮🇳
#गणतंत्र_दिवस

भास्करस्य यथा तेजो मकरस्थस्य वर्धते।तथैव भवतां तेजो वर्धतामिति कामये।।सूर्य देव के तेज से आपके जीवन में उत्तम सुख, समृद्...
15/01/2026

भास्करस्य यथा तेजो मकरस्थस्य वर्धते।
तथैव भवतां तेजो वर्धतामिति कामये।।

सूर्य देव के तेज से आपके जीवन में उत्तम सुख, समृद्धि की वृद्धि हो आप सभी को ंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।

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