20/09/2026
आंखों में आंसू थे… हाथों में अपनों के फूल थे, जन सेवा दल ने ‘लावारिस’ कहे गए अपनों को परिवार तक पहुंचाया
पानीपत। किसी मां-बाप का बेटा घर से निकले और फिर कभी वापस न आए… किसी परिवार का अपना इंसान शहर में दम तोड़ दे और घरवालों को उसकी मौत की खबर तक न मिले—इससे बड़ा दुख शायद कोई नहीं। लेकिन ऐसे समय में भी जन सेवा दल पानीपत उन लोगों को ‘लावारिस’ नहीं मानता, बल्कि उन्हें अपना परिवार समझकर पूरे सम्मान और विधि-विधान से अंतिम संस्कार करता है।
हाल ही में तीन परिवार अपने बिछड़े हुए अपनों के फूल लेने जन सेवा दल पहुंचे। प्रयागराज के निकट पल्टीपुर गांव निवासी 28 वर्षीय अमन पिछले करीब आठ वर्षों से पानीपत में काम कर रहा था। मृत्यु के बाद परिवार को पता नहीं चला। फोन पर संपर्क न होने पर परिजन उसे तलाशते रहे। आखिरकार जन सेवा दल के रिकॉर्ड से परिवार तक उसकी पहचान पहुंची और वे उसकी अंतिम निशानी अपने साथ ले गए।
इसी तरह डाडोला गांव निवासी राजवीर, जो मजदूरी करता था, करीब आठ दिन पहले सड़क पार करते समय हादसे का शिकार हो गया। परिवार को उसकी मृत्यु की जानकारी नहीं थी। जन सेवा दल ने उसका अंतिम संस्कार किया और बाद में तलाश करते हुए पहुंचे परिवार को उसके फूल सौंपे।
वहीं हरदोई यूपी के टेटीपुरा निवासी अक्षय कुमार की करीब 25 दिन पहले मृत्यु हो गई थी। परिवार उसे पानीपत के थानों और विभिन्न स्थानों पर ढूंढता रहा। जब जन सेवा दल में उसकी तस्वीर दिखाई गई तो परिवार ने अपने अक्षय को पहचान लिया और उसकी अंतिम निशानी लेकर लौट गया।
श्री कृष्ण मनचंदा, चमन गुलाटी, कमल गुलाटी तथा विशेष सहयोगी श्री सतीश चुघ, वासु आनंद, यंग बच्चा और बंटी योगी संस्कार के समय भगवान का सिमरन करते हुए अंतिम संस्कार करवाते हैं। संस्था मृतक के कपड़े, पहचान के निशान और अन्य विवरण रजिस्टर में सुरक्षित रखती है तथा फूलों को अलग-अलग नंबर �