आवामी एकता मंच हरियाणा

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Photos from आवामी एकता मंच हरियाणा 's post 07/12/2025

साथियों ज्यादा से ज्यादा संख्या में भागेदारी कर इस कार्यक्रम को सफल बनाएं।
और नीचे दिए गए स्कैनर पर कार्यक्रम के लिए आर्थिक सहायता करें।

04/12/2025

दोस्तों,
9 अगस्त को काकोरी दिवस के 100 साल पूरे हुए हैं। 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के पास काकोरी स्टेशन पर भारत की आजादी के लिए संघर्षरत हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सरकार के खजाने को लूटा था। इसका उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के लिए हथियार और अन्य संसाधन खरीदने के लिए धन जुटाना था। इस घटना के बाद कई क्रांतिकारियों की गिरफ्तारी हुई और उन पर मुकदमा चला, जिसके परिणामस्वरूप रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहड़ी और रोशन सिंह को 19 दिसंबर, 1927 को फांसी दी गई।
जिस उद्देश्य यानि भारत से साम्राज्यवादी ताकतों को भगाने और देश से मानव द्वारा मानव की लूट को खत्म करने के लिए इन शहीदों ने और बाद में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन पार्टी के कमांडर चंद्रशेखर आजाद व भगत सिंह और उनके साथियों ने अपनी कुर्बानियां दी; वो उद्देश्य आज भी अधूरे है और गोरे अंग्रेजों की जगह काले अंग्रेज सत्ता पर काबिज हैं। साम्राज्यवादी लूट और आम जनता का शोषण खत्म होने की बजाय और ज्यादा बढ़ चुका है। इसलिए आज उन शहीदों और उनके विचारों को याद करना और उनके सपनों के लिए संघर्ष करना और भी जरूरी हो जाता है।
ब्रिटिश साम्राज्यवादी बेशक 1947 में देश से चले गए हों। लेकिन अपनी फूट डालो राज करो और दमन की नीति को अपने भारतीय सहयोगियों को सौंप गए। आज भारत की सत्ता पर ब्राह्मणीय हिंदुत्ववादी फासिस्ट सत्ता विद्यमान है जिसने तंत्र के हर अंग पर अपना कब्जा कर लिया है और उसी पुरानी मनुस्मृति को लागू करना चाहती है जिसमें दलितों, पिछड़ों, महिलाओं, मजदूरों, किसानों को कोई अधिकार हासिल नहीं थे। आज देश में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी, शोषण, भ्रष्टाचार और निराशा चरम पर है। लेकिन शासक तंत्र आम जनता को कोई राहत देने की बजाए अपनी लूट और दमन को और तेज कर रहा है। शोषक और शासक तंत्र के खिलाफ जनता के विरोध और गुस्से की धार को कुंद करने के लिए उन्हें आपस में लड़ाया जा रहा है। जिस कारण हम देखते हैं कि आज समाज में आम तबकों के बीच छद्म नफरत को बढ़ाया जा रहा है। आज दिन रात अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों पर हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। बल्कि इन हमलावरों को अब सत्ता का सरंक्षण भी प्राप्त है और वर्दीधारी बल ही अब इनके प्रति अत्याचार और हिंसा में प्रत्यक्ष शामिल हो रहे हैं। जगह जगह पूरे देश में जहां मुस्लिम अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को खुदाई के नाम पर तोड़ा जा रहा है, मुस्लिमों को उकसाने और दंगे भड़काने के लिए मस्जिदों के आगे तेज आवाज में डीजे और भड़काऊ गतिविधियों की संख्या में बाढ़ आ गई है।
भाजपा, आरएसएस द्वारा इंसानियत विरोधी मनुविधान थोपने की कोशिशों के चलते हरियाणा समेत देश भर में दलितों के प्रति नफरत और हिंसा की घटनाओं में तीव्र बढ़ोतरी हुई है। इस लुटेरी फासिस्ट सरकार के राज में एक दलित युवती से बलात्कार के बाद रात में ही उसकी लाश जला दी गई, जो कृत्य अंग्रेजों ने भगत सिंह और उनके साथियों के मृत शरीरों के साथ किया था।
जैसे - जैसे देश में देशी विदेशी पूंजीपतियों की लूट और मुनाफे की हवस बढ़ती जा रही है वैसे ही मजदूर, किसान और आदिवासियों के अपने जल, जंगल,जमीन बचाने के संघर्ष भी तेज होते जा रहे हैं। लेकिन अपनी फासिस्ट मशीनरी का इस्तेमाल कर यह सरकार इन संघर्षों को बड़ी बेरहमी से कुचल रही है और हजारों की संख्या में नक्सल उन्मूलन के नाम पर आदिवासियों का कत्लेआम कर रही है। ऑपरेशन कगार के नाम पर मध्यभारत के जंगलों में सरकार ने आदिवासी जनता के खिलाफ गृहयुद्ध छेड़ रखा है। इन नृशंस हिंसक कार्रवाइयों के खिलाफ कोई बोलने न पाए, इसलिए हर जगह दमनचक्र चलाया जा रहा है और जहां छात्रों, कलाकारों, लेखकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों को अर्बन नक्सल के नाम पर जेलों में डाला जा रहा है वहीं अपनी जनता, जंगलों और कुदरती संसाधनों को बचाने के लिए लड़ रहे लोगों को माओवादियों के नाम पर झूठी मुठभेड़ों में मारा जा रहा है। स्टेन स्वामी की जेल में ही संस्थागत हत्या कर दी गई, जबकि जी एन साईं बाबा को तब तक जमानत नहीं दी गई जब तक कि वो मृतप्राय नहीं हो गए और जेल के बाहर वे ज्यादा दिन हमारे बीच नहीं टिक पाए। उमर खालिद, ग़ुल्फ़िशा, शारजील इमाम, एडवोकेट अजय, पत्रकार रूपेश जैसे हजारों लोग जो जनता के लिए आवाज उठाने के अपराध में जेल में डाल दिए गए उन्हें सालों बीत जाने के बाद अभी तक जमानत नहीं दी गई है। इसी तरह भीमकोरगांव केस के अभियुक्त अभी तक जेल में हैं।
भारत में अंग्रेजों ने साम्राज्यवाद विरोधी लड़ाई को कुचलने के लिए हिंदू मुस्लिम में फूट डालने की शुरुआत की जिसे आज उनका आनुषंगिक संगठन आरएसएस तेजी से आगे बढ़ा रहा है और देश में अपने फासीवादी हमलों को तेज कर रहा है। आज देश भर में अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों पर भयंकर जुल्म और राजकीय दमन ढाया जा रहा है।
इसलिए हम आवामी एकता मंच की तरफ से इस दिन को सांप्रदायिकता और फासीवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाते हुए 14 दिसंबर 2025 रविवार को नरवाना में "अल्पसंख्यकों, दलितों और आदिवासियों पर बढ़ते दमन और हमारे कार्यभार" विषय पर सेमिनार कर रहे हैं। आप सभी से अपील है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग लेकर इसे सफल बनाने में अपनी भागेदारी सुनिश्चित करें।
दिनांक: 14 दिसंबर
समय: सुबह 11 बजे
स्थान: पब्लिक धर्मशाला, नजदीक रेलवे स्टेशन, नरवाना
मुख्य वक्ता: एडवोकेट राजेश कापड़ो
संपर्क: 9671771841 एडवोकेट संजय कुमार
9896565771 राजकुमार

Photos from आवामी एकता मंच हरियाणा 's post 24/03/2025

देश को समाजवादी क्रांति की जरूरत

आरटीआइ एक्टिविस्ट पी पी कपूर ने प्रेस के नाम जारी बयान में बताया कि देसराज कॉलोनी, पानीपत के देवी मंदिर स्कूल में शहीदों की याद में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम और सभा का आयोजन किया गया।
मुख्य वक्ता कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट से प्रोफेसर अशोक चौहान ने बताया कि आज देश के हालत जैसे बन गए है इसे में ये जरूरी है कि देश के युवाओं को शहीद भगत सिंह की विचारधारा के साथ जोड़ा जाएं और उन्हें शहीदों के असली संघर्षों से अवगत करवाया जाए। 23 मार्च 1931 को हर साल शहीद ए आजम भगत सिंह का शहादत दिवस मनाया जाता है। 23 मार्च के दिन ही साम्राज्यवादी ब्रितानी सरकार ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी चढ़ा दिया था क्योंकि भगत सिंह के विचार उनकी लूट की राह में सबसे बड़ी रुकावट थे। इसलिए उन्होंने उनके विचारों को दबाने के लिए उन्हें उनके साथियों समेत फांसी पर चढ़ा दिया और उन्हें आतंकवादी करार दे दिया।
आरटीआई एक्टिविस्ट कॉमरेड पी पी कपूर ने भी बताया कि अगर हमें अपने देश को सही मायने में धर्म निरपेक्ष व लोकतांत्रिक बनाना है तो देश को समाजवाद के रस्ते पर ले जाने की जरूरत हैं। आज भी मजदूर किसानों की हालत में कोई सुधार आने की बजाए उनके हालत और बदतर हो गई हैं। उन्होंने मजदूर और किसान के राज का सपना देखा था लेकिन आज मौजूदा सरकारें जाति धर्म के नाम पर लोगों को आपस में लड़ा कर बड़े बड़े धन्नासेठों की तिजोरियां भरने में लगी है। उन्होंने लोगों से एकजुट होकर साम्राज्यवाद से लड़ने का आह्वान किया था लेकिन आज नफरती ताकतें समाज को आपस में बांटकर लड़ाने का काम कर रही हैं। कभी हिन्दू मुस्लिम कभी जाट गैर जाट के नाम पर लोगों को आपस में लड़ाया जा रहा है। मेरठ में नमाज पढ़ रहे छात्रों पर मुकदमे दर्ज कर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसी घृणित और नफरती साजिश को अंजाम दिया है। सरकार के ऐसे ही प्रयासों से नागपुर में दंगे भड़के। इसलिए लोगों को दोबारा से भगत सिंह और उनके साथियों के विचारों को जानकर उनपर अमल करने की जरूरत है।
आवामी एकता मंच हरियाणा के संयोजक एडवोकेट संजय कुमार ने कहा कि बड़ी शर्म की बात है कि आज की सरकारें भी उनकी राह पर चलने वाले लोगों को आतंकवादी करार देकर जेलों में डाल रही है और झूठी मुठभेड़ों में मार रही है। अगर कोई मजदूर किसानों के हकों की बात करता है तो उस पर देशद्रोह के मुकदमे लाद दिए जाते हैं। धोखे से जबरदस्ती किसानों के धरने को पुलिसिया दमन से उठाकर किसानों को गिरफ्तार करना सरकारों की इसी घटिया सोच का परिचायक है।आज आदिवादियों से उनके जल जंगल जमीन से बेदखल करके बड़े उद्योगपतियों को देने के लिए मौजूदा सरकार द्वारा आदिवासियों का नरसंहार किया जा रहा है, जिसके खिलाफ जनता को उठने की जरूरत है।
इसके अलावा कार्यक्रम को जिला बार एसोशिएसन के पूर्व सचिव एडवोकेट सुनील शर्मा, एडवोकेट राम मोहन राय, हिंद मजदूर सभा उपाध्यक्ष पुष्पेन्द्र शर्मा, एडवोकेट अजय कुमार, एडवोकेट जयगोपाल वधवा, दलित अधिकार मंच से सतपाल सिंह, प्रिंसिपल विनोद सिंगला, बाल विकास स्कूल, अर्जुन नगर के डायरेक्टर सतीश शर्मा ने भी संबोधित किया।
मुख्य अतिथि डॉ ओमबीर पंवार ने धन्यवाद करते हुए कहा कि आज के समय में ऐसे आयोजन की बहुत जरूरत है और लोगों को शहीदों की बताई राह पर चलना चाहिए।
इस कार्यक्रम में थिएटर आर्ट ग्रुप के कलाकारों द्वारा शहीद ए आजम भगत सिंह की जीवनी व उनकी विचारधारा पर एक कोरियोग्राफी पेश की गई व अन्य क्रांतिकारी गीत और प्रस्तुतियां दी गई। कुरुक्षेत्र के इस्माईलाबाद से सांस्कृतिक जागृति मंच से सुभाष ने क्रांतिकारी रागिनी से समा बांध दिया।

Photos from आवामी एकता मंच हरियाणा 's post 16/02/2025

राजनैतिक बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर आज दिनांक 16 फरवरी रविवार को सोनीपत में आवामी एकता मंच के बैनर तले एक सेमिनार आयोजित किया गया जिसमें शहर के सैंकड़ों लोगों ने भागीदारी की। सेमिनार को प्रयागराज से लेखक, अनुवादक और सामाजिक कार्यकर्ता मनीष आजाद और समालखा से मशहूर आरटीआई एक्टिविस्ट पी पी कपूर, अध्यापिका और कार्यकर्ता अमिता शीरीन ने संबोधित किया।
आरटीआई एक्टिविस्ट पी पी कपूर ने कहा कि जहां एक तरफ देश में पूंजीवादी साम्राज्यवादी लूट बढ़ती जा रही है। देश के संसाधनों को कौड़ियों के भाव अम्बानी अडानी जैसे धन्नासेठों को नीलाम किया जा रहा है। अभी तक किसानों की फसलें ही आढ़ती और सूदखोर औने पौने दामों में लूट ले जाते थे लेकिन किसानों की जमीनें ही अंबानी अदानी जैसों को छीन कर देने की साजिशें चल रही है। किसानों के लंबे संघर्ष और 700 से ज्यादा शहादतों के बाद हालांकि मोदी सरकार को अपनी तपस्या में कमी बताकर मजबूरी तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े हों लेकिन MSP, कर्ज माफी, लागत में कमी करने जैसी मांगों को लेकर अभी भी किसानों को धरने प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं और सरकार सड़कों पर बैरियर लगाकर, ड्रोन से हमले करके उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाने तक से रोक रही है। पूंजीपतियों के हक में श्रम कानूनों को खत्म किया जा रहा है और सभी अधिकार खत्म कर काम के घंटे 12 -14 घंटे किए जा रहे हैं।
मनीष आजाद ने कहा कि सरकार प्रतिरोध की हर आवाज को दबा देना चाहती है जबकि आदिवासी सरकार को उसके वायदे याद दिला रहे हैं जो उन्होंने देश की जनता से किए थे।आदिवासियों को सरकारी सैन्य बलों और गुंडा वाहिनियों की बंदूकों के दम पर उन्हें बेदखल कर उनके जल जंगल जमीन से को टाटा एस्सार वेदांता जिंदल जैसे पूंजीपतियों को दिया जा रहा है। आदिवासी देश के पर्यावरण और जंगलों को बचाने की हिंलदाई लड़ रहे हैं। दलितों महिलाओं पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
एक तरफ यह हालात है कि समाज का हर तबका शोषण उत्पीड़न झेल रहा है दूसरी तरफ इन सबका विरोध और इसके खिलाफ लोगों का गुस्सा लाजिमी है। जब पूरे विपक्ष को ही पंगु बना दिया गया हो तब जनता खुद मोदी सरकार का विपक्ष बन रही है। लोगों को एकजुट होने से रोकने के लिए ब्राह्मणी हिंदुत्वादी फासीवादी मोदी सरकार हर तरह के हथकंडे अपना रही है। इसलिए जनता के गुस्से और आक्रोश को रोकने के लिए हर तरह का दमन ढाया जा रहा है। हरियाणा पंजाब के बॉर्डर पर किसान पिछले काफी दिनों से बैठे हुए हैं और किसान नेता ढल्लेवाल आमरण अनशन पर मरने की कगार पर हैं, इसके बावजूद सरकार के कानों पर जू तक नहीं रेंग रही है। किसान जब शांतिपूर्ण ढंग से दिल्ली के लिए कुछ करने की कोशिश करते हैं तो उन पर लाठियों, रबर बुलेट्स, मिर्ची बम, आंसू गैस के गोलों आदि की बौछार की जाती है। जनता के इन आंदोलनों को गोलबंद करने से रोकने के लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं, वकीलों, छात्रों, मजदूर नेताओं के खिलाफ सरकारी एजेंसियों को खुली छूट दे दी गई है। अलसुबह NIA और ATS जैसी कुख्यात एजेंसियां लोगों के घरों पर छापेमारी करती हैं और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए सक्रिय कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया जाता है या उन्हें पूछताछ के नाम पर डराया धमकाया जाता है। आसपास के लोगों में दहशत फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश झारखंड और समेत देश के अनेक राज्यों में यह फासीवादी दमन जारी है।
अमिता शीरीन ने कहा कि आज ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवादी सत्ता का सबसे बड़ा निशाना महिलाएं बन रही हैं। अभी कुंभ की वजह से दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में मरने वालों में 18 में से 14 महिलाएं थी। हम महिलाओं को इस डर से बाहर आना होगा।
आवामी एकता मंच संयोजक एडवोकेट संजय कुमार ने कहा कि आज हमें मिलकर इस सत्ता प्रायोजित फासीवादी दमन के खिलाफ खुलकर बोलना होगा उर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। आज के सत्र में कुंभ के नाम पर फैली अव्यवस्था और सरकारी लापरवाही के चलते प्रयागराज और दिल्ली स्टेशन पर मारे गए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की गई। किसानों और आंदोलनरत मजदूरों के समर्थन में, आदिवासी जनता, फिलिस्तीनी जनता के समर्थन में प्रस्ताव पास किए गए। साथ ही NIA, ATS और UAPA को रद्द करने की मांग का प्रस्ताव पास किया गया। मंच संचालन जसमिंदर ने किया। नागरिक अधिकार मंच संयोजक एडवोकेट कपिल ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि हमें यह आवाज हर गली मुहल्ले तक लेकर जानी है तभी आज का कार्यक्रम सार्थक हो पाएगा।
आवामी एकता मंच हरियाणा
संपर्क सूत्र: एडवोकेट संजय कुमार 9671771841
जसमिंदर 8059138729

13/02/2025

आवामी एकता मंच पुलिस द्वारा जेएनयू में भगतसिंह छात्र एकता मंच और जामिया मिल्लिया के छात्रों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ पर्चे दर्ज करने का कड़ा विरोध करता है। गौरतलब है कि सत्तासीन भाजपा के राज में ब्राह्मणी हिंदुत्व फासीवादी दमन अपने चरम पर है।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के लगभग 20 छात्रों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कई छात्र-छात्राओं को सस्पेंड करते हुए उनके कैंपस प्रवेश को बैन कर दिया है। ये छात्र दो पीएचडी स्कॉलर के ख़िलाफ़ यूनिवर्सिटी की अनुशासनात्मक कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। इसके साथ ही अपनी अन्य मांगों को लेकर 10 फ़रवरी से कैंपस में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उनसे कोई बात करने की ज़रूरत नहीं समझी और सीधे पुलिस और ससपेंशन की कार्रवाई कर दी। दिल्ली पुलिस ने छात्रों को हिरासत में लेने की कार्रवाई आज गुरुवार, 13 फ़रवरी को तड़के 4–5 बजे के आसपास की। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ही इन छात्रों को दिल्ली पुलिस को सौंपा। अभी तक यह नहीं पता चला है कि पुलिस ने हिरासत में लिए गए छात्रों को कहां रखा है। इनमें कई महिला छात्र भी हैं।
दरअसल जामिया के छात्र अपनी छह मांगों को लेकर 10 फ़रवरी से कैंपस में ही दिन-रात के धरने पर थे।

छात्रों की मांगे कुछ इस तरह थीं–

पीएचडी छात्र सौरभ और ज्योति के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक समिति की बैठक के निर्णय को रद्द किया जाए।
छात्रों की आवाज़ उठाने पर जारी किए गए सभी कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएं।
29 अगस्त 2022 और 29 नवंबर 2024 को जारी किए गए कार्यालय ज्ञापनों को रद्द किया जाए।
छात्रों की आवाज़ उठाने के लिए उनके ख़िलाफ़ की जा रही सभी तरह की दमनात्मक कार्रवाइयों को रोका जाए।
जामिया की दीवारों पर पोस्टर लगाने और ग्रैफिटी बनाने को दंडित करने वाले नोटिस को रद्द किया जाए।
छात्रों को उनके मौलिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा और संगठन बनाने के अधिकार के तहत इकट्ठा होने और विरोध प्रदर्शन करने पर कोई और शो-कॉज़ नोटिस न भेजा जाए।
छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन से लगातार डायलॉग की कोशिश की गई, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। मजबूर होकर उन्हें कैंपस में धरना शुरू करना पड़ा। यह धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण था।

धरने का नेतृत्व ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), दयार-ए-शौक़ स्टूडेंड काडर (डिस्क) कर रहे हैं।

स्टूडेंड फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (एआईआरएसओ) सहित कई लेफ्ट व अन्य छात्र संगठन कर रहे थे।
इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के भगत सिंह एकता मंच के छात्रों को जेएनयू कैंपस में दिवारी लेखन करते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पकड़कर पुलिस से गिरफ्तार कराया, जहां पुलिस ने उनके साथ बदसुलूकी की और उन्हें मारा पीटा गया और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
इससे पहले उत्तरप्रदेश पुलिस द्वारा भी मनुस्मृति दहन करने पर भी छात्रों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे।
आवामी एकता मंच का साफ मानना है कि छात्रों को अपनी बात कहने और विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। युनिवर्सिटी और कॉलेज कैंपस में पुलिस का प्रवेश बंद होना चाहिए।
जहां एक तरफ छात्रों के आक्रोश ने बांग्लादेश में तख्ता पलट कर दिया और दुनिया भर के लोकतांत्रिक और साम्राज्यवाद विरोधी स्वतंत्रता आंदोलनों में छात्रों की अग्रणी भूमिका रही है वहीं आजाद भारत में छात्र छात्राओं की आवाज को इस तरह दबाया जा रहा है। इसलिए आवामी एकता मंच हरियाणा जनता से अपील करता है कि मौजूदा ब्राह्मणी हिंदुत्वादी फासीवादी सत्ता के दमन के खिलाफ खड़े हो।
एडवोकेट संजय कुमार
9671771841

06/01/2025

देश में ब्राह्मणी हिंदुत्वादी फासीवादी ने अपने हमले बढ़ा दिए हैं। हिटलर के जर्मनी गेस्टापो वाला दौर अब अमृतमयी भारत में प्रवेश कर गया है। किसी का भी दरवाजा अलसुबह पीटा जाता है और पूरे मुहल्ले को आतंकित कर पढ़ने लिखने वाले लेखकों, छात्रों, वकीलों, मजदूर किसानों के लिए आवाज उठाने वाले उनके आंदोलनों को नेतृत्व करने वालों उन्हें समर्थन देने वालों को उनके मोबाइल, लैपटॉप, किताबों सहित गिरफ्तार कर लिया जा रहा है। मनुस्मृति के खिलाफ चर्चा भर कर लेने से छात्र छात्राओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।
दूसरी तरफ परीक्षा में धांधली के खिलाफ, रोजगार। की मांग करने भर पर छात्र छात्राओं को लाठी डंडों से पीटा जा रहा है। अपनी जमीन बचाने, अपनी फसलों की वाजिब कीमत मांगने पर किसानों पर हमले जारी हैं, उन्हें दिल्ली अनशन करने से यूं रोका जा रहा है गोया वे कोई दुश्मन देश के सैनिक हों। ट्रेन की इंतजार में सोए लोगों पर ठंडे पानी की बौछार की जा रही है। भ्रष्टाचार की स्टोरी कवर करने पर पत्रकारों को मारकर सेप्टिक टैंक में चिनवा दिया जा रहा है। अपने जल जंगल जमीन को बचाने की खातिर आवाज मात्र उठाने पर आदिवासी जनता पर हवाई हमले किए जा रहे हैं।
एक तरफ फासीवादी दमन अपने क्रूर रूप में चरम पर है वहीं जनता भी मजबूती से लड़ रही है। जितने लोगों को गिरफ्तार कर जेल में भेजा जाता है, उतने ही लोग इस दमन का विरोध करने सड़कों पर उतर आते हैं। ब्राह्मणी हिंदुत्व फासीवादी निजाम समझ ही नहीं पा रहा कि इस जनसैलाब को कैसे रोका जाए।
आवामी एकता मंच पिछले चन्द दिनों में मजदूर संघर्ष समिति के नेता बच्चा सिंह, लखनऊ में मनुस्मृति का दहन करने पर गिरफ्तार छात्र छात्राओं, लखनऊ में लेखक व अनुवादक, एक्टिविस्ट मनीष आजाद की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करता है और लोगों से अपील करता है कि इस सरकारी दमन का पुरजोर विरोध करें।

22/10/2024

भारत के सामंती औपनिवेशिक दलाल शासकों द्वारा जनता के जुझारू यौद्घा जी एन साईबाबा की सांस्थानिक हत्या के खिलाफ उनकी याद में की जा रही उनकी विचार सभा में शामिल हों

20/09/2024

चंडीगढ़ में एनआइए ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन 26 सितम्बर 12 बजे

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