ये सब ब्राह्मण लोग कितना भी नीच काम कर ले अपने आप को श्रेष्ठ मानते है........
Baat obc/sc/st ki
awaj obc/sc/st ki
25/06/2025
ये सरासर झूठ है ये मुद्दा से भटकाने के लिए कर रहा है। ये लोग ब्राह्मण नीचता की सारे हदें पार कर दी......
एक एंगल निकाला कि कथावाचक ने जाति छुपाई थी मगर डिफेंड नहीं कर पाए।
एक एंगल निकाला कि कथावाचक ने अपना सरनेम तिवारी लिखा मगर डिफेंड नहीं कर पाए।
एक एंगल निकाला कि कथावाचक ने आधार कार्ड पर अग्निहोत्री नाम लिखा था मगर डिफेंड नहीं कर पाए।
एक एंगल निकाला कि कथावाचक ने होर्डिंग में ख़ुद को पंडित लिखवाया मगर डिफेंड नहीं कर पाए।
और अब नया एंगल निकालकर ला रहे हैं कि
कथावाचक ने महिला के साथ छेड़खानी और अभद्रता करी है, यह एंगल अबतक नहीं था मगर अब आ गया है।
यदुवंशी कृष्ण की कथा यानी भागवत कथा सुनाने का अधिकार हर हिंदू को है। उनमें भी अगर आपको बँटवारा करने की ज़िद है तो मैं कहूँगा कि भागवत कथा सुनाने के पहले अधिकारी यादव हैं।
इसका विरोध करने वाले हिंदू धर्म के आंतरिक शत्रु हैं।
जब भारत में हिंदुओं की आबादी संरचना का संकट है तब ये भेदभाव कौन बढ़ा रहा है? हिंदू इस भ्रम में न रहें कि ये सब करके भी उनका जलवा इस तरह क़ायम रह पाएगा।
देखते देखते पारसी ईरान मुसलमान बहुल बन गया। सीरिया और मिस्र के साथ ये हुआ। पाकिस्तान और बांग्लादेश का इलाक़ा भी कभी हिंदू बहुल था। आज नहीं है। लेबनान तीस साल में ही ईसाई बहुल से मुसलमान बहुल बन गया। पश्चिम बंगाल बहुत समय तक हिंदू बहुल नहीं रह पाएगा।
जातिभेद का विनाश कीजिए।
अन्यथा समूल विनाश के लिए प्रस्तुत रहिए।
अगर किसी यदुवंशी कथावाचक को उपनाम बदलकर कथा सुनानी पड़ रही है तो ये हिंदू समाज के लिए और भी शर्म की बात है। वह यादव बनकर क्यों सफल कथावाचक नहीं बन सकता? उसे बुलाने में क्या समस्या है। कोई समस्या तो है। तभी तो वह उपनाम बदलकर आ रहा है।
मेरा सभी हिंदू धर्माचार्यों व संतों से निवेदन है कि- वे सामूहिक रूप से यदुवंशी कथावाचक से भागवत कथा सुनकर इस विवाद को हमेशा के लिए खत्म करें।
स्वामी विवेकानंद जब शिकागो सम्मेलन से लौटे तो कुछ बाबाओं ने प्रश्न उठाया कि क्या कायस्थ जाति का व्यक्ति संन्यासी हो सकता है और धर्म चर्चा कर सकता है। उन्होंने विरोध किया था।
विवेकानंद का चेन्नई में दिया भाषण पढ़ना चाहिए। उस दौर के सबसे बड़े भक्तिमार्गी रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें संन्यासी बनाया था। संन्यास दीक्षा दी थी। उन्होंने साबित किया कि ऐसी कोई बाधा धर्म में तो नहीं है। जो बाधा उत्पन्न करते हैं, वे अज्ञानी हैं।
अब वेदांती विवेकानंद से बड़ा संन्यासी कौन हुआ है आधुनिक युग में? जब उन्होंने बोल दिया है तो इसे सैटल माना जाए।
तोड़िए मत। जोड़िए।
21/12/2024
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29/07/2021