21/03/2026
तमाम उम्मत-ए-नबी को ईद-उल-फ़ित्र की दिली मुबारकबाद।
आत्मनिभार।
21/03/2026
तमाम उम्मत-ए-नबी को ईद-उल-फ़ित्र की दिली मुबारकबाद।
28/10/2025
2 दिन तक कुछ न खाने के बाद ठंडे पानी में काफी देर तक खड़े रहते हुए, सूर्य के प्रति कृतज्ञता दिखाना यही है छठ पूजा।
यह पर्व सिर्फ इबादत नहीं, बल्कि आत्मसंयम, श्रद्धा और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। व्रती बिना अन्न और जल के रहकर अपने मन, शरीर और आत्मा को पवित्र करते हैं। बताया जाता है यह तपस्या दिखावे से नहीं, बल्कि सच्ची आस्था से भरी होती है, जो केवल वही निभा सकता है जिसके भीतर गहरी श्रद्धा और दृढ़ संकल्प हो।
छठ व्रत चार दिनों तक चलता है
पहला दिन: नहाय- खाय,
जिसमें व्रती (व्रत करने वाला) घर की शुद्धि करता है और शुद्ध भोजन ग्रहण करता है।
दूसरा दिन: खरना,
इस दिन निर्जला उपवास के बाद सूरज के डूबने के समय गुड़ और चावल की खीर व रोटी बनती है।
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य,
व्रती सूरज निकलने के समय नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं यानी उसकी तरफ कुछ अर्पित करते है।
चौथा दिन: उगते सूर्य को अर्घ्य
सुबह-सुबह व्रती उगते सूर्य को जल अर्पित कर पूजा पूर्ण करते हैं।
जल अर्पित मतलब सांकेतिक रूप से पानी ऊपर से डालते है , वह सूरज तक नहीं जाता, वापस नदी ही में गिरता लेकिन यह उनका एक तरीका है।
छठ पूजा की सबसे सुंदर बात यह है कि इसमें कोई आडंबर नहीं होता न शोर, न दिखावा। बस मिट्टी के घाट, नदी का जल, बाँस की टोकरी, फल, ठेकुआ और अपार श्रद्धा, इस पर्व में मार्केट की इन्वॉल्वमेंट बहुत कम रहती है।
यह पर्व सिखाता है कि सच्ची भक्ति सादगी में बसती है, और प्रकृति के प्रति आभार ही जीवन की सबसे बड़ी पूजा है।
बहुत सालों पहले, बिहार और उसके आसपास के लोगों ने यह महसूस किया होगा कि इस दुनिया का शक्ति कुंज सूरज है, उसी के होने से दुनिया में जीवन का चक्र चल रहा है इसलिए वह इस पर्व के माध्यम से साल में एक बार सूरज के प्रति अपनी कृतज्ञता दिखाते है।
13/09/2025
गिरिराज सिंह का यह बयान कि “मुसलमान नमक हराम होते हैं” न सिर्फ गंदी राजनीति का सबूत है बल्कि उनकी जहरीली मानसिकता को भी उजागर करता है।
Giriraj बाबू,
मुसलमान इस देश के उतने ही वफ़ादार नागरिक हैं जितने आप और आपकी पार्टी के समर्थक।
योजनाएँ किसी सरकार की दया नहीं, बल्कि संविधान के तहत हर नागरिक का हक़ होती हैं।
वोट मुसलमानों का अधिकार है, और अगर वो आपको वोट नहीं देते तो इसका मतलब है कि जनता आपके नफ़रत भरे एजेंडे को ठुकरा चुकी है।
हकीकत ये है कि भाजपा के पास जनता को दिखाने के लिए विकास का कोई ठोस काम नहीं है, इसलिए आपके जैसे नेता गाली-गलौज और धर्म के नाम पर ज़हर उगलकर ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं।
याद रखिए — भारत किसी की जागीर नहीं है।
न मुसलमान किसी के एहसान पर ज़िंदा हैं, न किसी की गालियाँ सुनने के लिए।
गिरिराज सिंह जैसे नेता सिर्फ नफ़रत की राजनीति कर सकते हैं, और यही वजह है कि आज जनता आप पर थूक रही है, वोट नहीं दे रही है और पूरे देश में वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा लागा राही!
9 साल तक जीएसटी बढ़ाने के फ़ायदे गिनाए गए, अब उसी जीएसटी को कम करने के फ़ायदे समझाए जा रहे हैं! क्या बात है, नीति नहीं, जादू है ये!🤷♂️😄
अली व फ़ातिमा ज़हरा के चैन ज़िंदा हैं
अभी दिलों में शहे मशरिकैन ज़िंदा हैं
फजा में गूँजती हक़ की सदाएं कहती हैं
याजी़द मारा गया था हुसैन ज़िंदा हैं
लब्बैक या हुसैन
पा पा ने वॉर रुकवा दी
इस पूरे प्रकरण को समराइज़ करूँ तो :
1. इंडिया और पाकिस्तान दोनों का चुटिया कट गया है।
अरबों रुपये स्वाहा, लोग मरे, प्रॉपर्टी का नाश हुआ, मिला कुछ नहीं।
2. चीन समझदार निकला के अपने ड्रोन मैदान में नहीं आने दिए, ना ही खुद किसी भी तरह इन्वॉल्व हुआ, फिर भी इंडिया की डिफेंस एस्टाब्लिशमेंट की पूरी रेकी कर गया।
इंडिया ने ब्रह्मोस को रोककर समझदारी की उसपर सबकी नज़र थी।
3. तुर्की ने फालतू में हिंदुस्तान से रिलेशन खराब किये जबकि चीन की तरह शांत रह सकता था।
4. रूस फिर साबित हुआ के हमारा दुनिया में अगर कोई सच्चा हितैषी है तो वो है, उसकी टेक्नोलॉजी हमेशा साथ देती है।
ईरान फिर हमारा ट्रम्प कार्ड रहा पाकिस्तान की गर्दन पकड़ने में, बलोचिस्तान के सारे मूवमेंट उनके थ्रू ही होते हैं अपने। और बलोचों ने जो अटैक किया वो पाकिस्तानी आर्मी ने भी कोट किया।
5. भारतीय विपक्ष ने बहुत बढ़िया रोल प्ले किया टोटल सपोर्ट देकर, ओवैसी जबरदस्त एक्टिव रहा पाकिस्तान को धार्मिक एज ना लेने देने के लिए।
भारतीय मुसलामानों ने देसी आतंकियों के प्रोपेगंडा को खारिज किया, कर्नल सोफ़िया कुरैशी हीरो बनकर उभरी।
6. आर्मी और एयरफार्स के रोल पर कुछ नहीं लिखेंगे जबतक वो लोग खुद ना बोले के क्या हुआ था। युद्ध एस्केल्ट क्यों हुआ ये विषय फिर कभी।
7. ट्रम्प की कूटनीतिक जीत हुई है, पाकिस्तान और बांग्लादेश तो जेब में था ही उसकी, अब इंडिया को भी कह के मनवा लिया है।
8. भारतीय मीडिया ने किरकिरी करवाई देश की।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में पर्यटकों के मारे जाने और कई लोगों के घायल होने की ख़बर बेहद अफ़सोसनाक और दिल दहलाने वाली है।
मैं पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की दुआ करता हूं।
My Clear and Just Perspective on the Waqf Bill
Every law passed in Parliament should aim to ensure justice for all sections of society and protect their religious freedom. The Waqf Board is a religious institution directly linked to the faith and religious practices of Muslims. Any provision that interferes with their religious beliefs or traditions is a matter of concern.
I firmly believe that every religious community should have the full right to manage its religious sites and properties according to its faith. Any external interference in religious matters will only create confusion and dissatisfaction, which is not in the interest of any society.
The foundation of our politics should be inclusivity and justice, but that does not mean weakening the religious autonomy of any community. I will make every possible effort to ensure that every citizen's religious beliefs and rights are protected.
My fight is not just for one community but for every individual who seeks to safeguard their rights. Until justice is served, I will continue to raise my voice. Our struggle is for fairness, self-respect, and the protection of constitutional rights, and there can be no compromise on that.
31/03/2025
welcome the Hindu New Year, may your life be filled with new light, fresh energy, and endless joy.
Let this Gudi Padwa bring prosperity, happiness, and auspicious beginnings to you and your family! 🌸
31/03/2025
Eid Mubarak! 🌙
May Allah bless you and your families with his Mercy and Acceptance 🤲🏻
2017 के चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में हिंदुस्तान-पाकिस्तान से हार जाता है। पूरा देश अफ़सोस कर रहा होता है।
इस उदासी के बीच एक ख़बर आती है कि मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में पाकिस्तान की जीत पर पटाखें फोड़े गए और जीत के समर्थन में नारे लगे। पूरा देश इस घटना पर टूट पड़ता है।
पुलिस कार्यवाही करते हुए 19 लोगों पर FIR दर्ज करती है और उन पर देशद्रोह की धारा लगती है। तब भी रमज़ान चल रहा था। उनके रमज़ान और ईद जेल में कटते है।
पूरे गांव में पुलिस दो माह तक तांडव करती है। गांव को देशद्रोहियों का गांव घोषित कर दिया जाता है।
पुलिस उन लोगों को नारेबाजी करने और पटाखा फोड़ने पर आरोपी बनाती है जिनके पास आज भी ना खाने के पैसे है, ना घर में TV. एक मुस्लिम तो देशद्रोही कहे जाने पर सुसाइड तक कर लेता है।
मीडिया पूरे मुस्लिम समाज को दोषी ठहरा देती है, TV पर मुस्लिम एंकरो को बैठा कर डिबेट की जाती है।
छह साल बाद सितंबर 2023 में कोर्ट का फ़ैसला आया। शिकायतकर्ता और 12 गवाहों ने उन्हें निर्दोष बताते हुए पुलिस (SHO) पर झूठा मामला बनाने और गांववालों को फसाने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया। पर तब तक काफ़ी नुकसान हो चुका था।
पर देश की मीडिया और मध्य प्रदेश की मीडिया ने इस घटना से कोई सबक नहीं लिया।
जुलाई 2023 में उज्जैन में महाकाल सवारी पर थूक फेंकने का आरोप लगा। एक ब्लर वीडियो के आधार पर तीन मुस्लिम बच्चों, दो नाबालिग, पर FIR हुई, उन्हें गिरफ़्तार किया गया और उसके दो दिन बाद उनका तीन तल्ला मकान ढोल नगाड़े के बीच आधे घंटे के अल्टीमेटम पर तोड़ दिया गया।
फ़िर से मीडिया ने वही ख़बर चलाई। "महाकाल यात्रा पर थूक फेंकने के आरोपियों का घर तोड़ा"
छह माह बाद शिकायतकर्ता और गवाह ने कोर्ट में बयान दिया कि वह इस घटना के बारे में नहीं जानते, ना वह उन लड़कों को पहचाने है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के दबाव में यह FIR दर्ज हुई और पुलिस ने उन्हें जहा सिग्नेचर करने को कहा उन्होंने कर दिया।
मध्य प्रदेश की मीडिया ने फ़िर भी सबक नहीं लिया।
अगस्त 2021 में उज्जैन में मोहर्रम के जुलूस के दौरान "काज़ी साहब जिंदाबाद" को "पाकिस्तान जिंदाबाद" कहा गया और दर्जनों लोगों पर NSA सहित कई धाराओं में कार्यवाही की गई।
पुलिस के आला अधिकारी यह कहते रहे कि उनके पास ओरिजनल वीडियो है जिसमें पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे पर घटना के 4 साल बाद भी पुलिस ना कोर्ट में और ना मीडिया को वह वीडियो दिखा पाई।
उज्जैन कोर्ट ने इस केस पर कहा, अगर नारा लगा भी तो यह देशद्रोह नहीं है।
मध्य प्रदेश की मीडिया ने फ़िर भी सबक नहीं लिया।
"...धार्मिक जूलूस पर पथराव, जूलूस पर पथराव, ...लगे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे, ... देश विरोधी नारे, आदि..."
हर त्यौहार या अनुष्ठान के आस पास इस तरह की खबरें वॉट्सएप ग्रुपों और सोशल मीडिया पर चलाई जाती है। चाहे घटना कुछ भी हो, नैरेटिव यही होता है। पुलिस उस पर "कठोर" कार्यवाही करते हुए NSA सहित मकान तक तोड़ दिए जाते है।
अगस्त 2021 में ही इंदौर में तस्लीम चूड़ी वाले को उसके धर्म की वजह कर पीटा गया। जब मारपीट का विभत्स वीडियो सामने आया और पुलिस ने FIR नहीं लिखी, तो लोग सड़कों पर उतर आए। थाने के बाहर प्रोटेस्ट हुआ तब FIR हुई।
FIR की मांग करने वालों पर भी FIR हुई और 9 लोगों को ज़िलाबदर का नोटिस भी दिया गया।
मीडिया ने तस्लीम और मुस्लिमों को घुसपैठियों, जिहादी साबित कर दिया था।
तब के गृह मंत्री के भोपाल दरबार में तस्लीम को लेकर गैरजिम्मेदार बयान दिए गए। उसके आधार, उसके नाम और उसकी पहचान छुपाने का आरोप लगा। और लड़की को छेड़ने और लव जिहाद को बढ़ाने का आरोप लगाया गया।
तीन साल बाद, इंदौर कोर्ट ने तस्लीम को सारे आरोपों से बरी कर दिया।
मध्य प्रदेश की मीडिया ने फ़िर भी सबक नहीं लिया।
चाहे दिसंबर 2020 को उज्जैन, देपालपुर और मंदसौर में राम मंदिर के चंदे के लिए निकली गई यात्रा के दौरान हुए दंगे हो, या फिर इंदौर के महू में इंडिया की जीत के बाद हुए क्लेश।
सारी घटनाओं में एक पैटर्न है। और इन सारी घटनाओं में पुलिस की कार्यवाही संदिग्ध है। ज़ाहिर है, कुछ तो राजनैतिक दबाव होता है और कुछ इस घटना का इस्तेमाल कर अपनी निजी कुंठा निकलते है। जैसा हमने बुरहानपुर और उज्जैन में देखा।
मीडियाकर्मी इन सब चीज़ों को सबसे नज़दीक से देखते हैं, समझते है, फ़िर भी बार बार वही ग़लतीया करते है। बार बार ग़लत साबित होते है, और फ़िर से वहीं ग़लती दोहराते है।
एक संपादक ने मुझे कहा था
"जो घटना बार बार हो, और उसका पैटर्न हो, समझ लेना उसके पीछे पॉलिटिकल हैंड है। इसलिए घटना के साथ-साथ उसके राजनैतिक इंपैक्ट पर जरूर ध्यान देना।"
साभार- Kashif Kakvi
08/06/2024
झुकना तो पड़ेगा ही...
सत्ता में कोई भी हो, जरूरी है कि जनता की आवाज़ संसद तक पहुंचती रहे। मुख्यधारा की मीडिया ने तो यह काम छोड़ दिया है। हां Youtube पर कुछ लोग हैं जो मजबूती से डटे हैं सत्ता से सवाल करते हैं, आम जनता की बात करते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी था कि विपक्ष भी मजबूत रहे। और इस बार है। संसद में जहां एक ओर 293 बैठेंगे वहीं विपक्ष में 234 रहेंगे। ये मजबूत उपस्थिति होगी। यही असली लोकतंत्र है।
चार सौ पार का दम्भ भरना तानाशाही का प्रतीक है। आप असीम शक्तियां रखना चाहते हैं ताकि मनमानी कर सकें। पर जनता ने आपको नकार दिया। ये भी सुखद है कि गठबंधन की सरकार है। आप अकेले खुद निर्णय नहीं ले सकते। लोकतंत्र में कोई व्यक्ति या चेहरा प्रधान नहीं होता। जनता प्रधान होती है। यह आपको समझना होगा हमेशा। और संविधान के सामने ऐसे ही नतमस्तक होना है।