08/03/2022
आज पटना के कौशल नगर इलाके में स्त्री मुक्ति लीग, पटना घरेलू कामगार यूनियन, नौजावन भारत सभा व दिशा छात्र संगठन द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया।
इस आयोजन में बात रखते हुए स्त्री मुक्ति लीग की सोमा ने कहा कि आज के दौर मे इस लूट और मुनाफे पर टिके इस समाज मे पूंजीवाद व पितृसत्ता के गठजोड़ से ऐसी कुसंस्कृति पनपी है, जो न केवल स्त्री विरोधी अपराधों बल्कि स्त्रियॉं के उत्पीड़न के अन्य रूपों को भी प्रश्रय दे रही है। विशेषकर विगत एक दशक मे पूरे देश भर मे हुये फासीवादी उभर ने स्त्री विरोधी मानसिकता व स्त्री उत्पीड़न को और बढ़ावा दिया है। आज ऐसे समय मे स्त्री दिवस महज़ कोई एक दिनी रस्म अदाएगी नहीं बल्कि इस उत्पीड़न व अन्याय के खिलाफ संगठित होकर प्रण करने का दिन है।उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास से भी लोगों को अवगत कराया।इसके उपरांत पटना घरेलू कामगार यूनियन के विवेक ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज सबसे ज्यादा उत्पीड़न का सामना महिला कामगारों को करना पड़ रहा है।विशेष कर घरेलू महिला कामगारों के लिए न तो काम के घंटे तय है और ना ही उनके लिए को नियमित वेतन सुनिश्चित है।
इस सभा को आगे नौभास के आकाश ने भी संबोधित किया।इसके उपरांत सफदर हाशमी द्वारा लिखित नुक्कड़ नाटक औरत का मंचन किया गया व औरते उठी नहीं तो जुल्म बढ़ता जायेगा गीत की प्रस्तुति भी दी गई।
29/11/2021
पटना के इंदिरा घाट मंदिर गोसाई टोला में पटना घरेलू कामगार यूनियन द्वारा E श्रम कार्ड बनाया जा रहा है। कल पहला दिन था फॉर्म भरने के पश्चात कार्ड भी निर्गत किया गया।
28/11/2021
योगी के फासिस्ट राज में अपराधियों के कितने हौसले बुलंद हैं। इलाहाबाद के फाफामऊ थाना क्षेत्र के एक गांव में अपराधियों ने एक दलित परिवार के 4 लोगों की धारदार हथियार से हत्या कर दी। पति पत्नी और पुत्र की हत्या के बाद घर के कमरे में सो रही पुत्री के साथ दरिंदों ने पहले सामूहिक दुष्कर्म किया फिर उसकी भी हत्या कर दी। पीड़ित परिवार का मुखिया फूलचंद मज़दूरी करके अपना गुजर-बसर करते थे। इस डरावने कुकृत्य को अंजाम देने वालों पर कार्यवाही के नाम पर वहां के थाना अध्यक्ष को सस्पेंड कर दिया गया। हम भली-भांति जानते हैं ऐसे मामलों के तूल पकड़ने के बाद किसी छोटे ओहदे के अधिकारियों को निलंबित कर दिया जाता है लेकिन मामला ठंडा होते हैं फिर से निलंबन रद्द करके उसकी बहाली हो जाती है। तथाकथित हिंदू राष्ट्र में दलितों, अल्पसंख्यकों, स्त्रियों एवं मज़दूरों का शिकार बेहद आसान है, देश की न्याय प्रणाली इतनी कमजोर है कि इन लोगों के खिलाफ़ हो रही अपराधों की लगातार फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। आज देश के संविधान और न्याय तंत्र से कुछ भी उम्मीद करना बेमानी होगा। “पवित्र संविधान” फासिस्टों का बाल भी बांका नहीं कर पा रहा। ऐसे हृदयविदारक घटनाओं से भी जिसे कोई प्रभाव नहीं पड़ता वे सांस लेने वाले चलते फिरते मुर्दे हैं, मुर्दों से कोई उम्मीद नहीं की जा सकती लेकिन जो लोग ज़िंदा हैं उन्हें इस प्रकार की मज़दूर विरोधी दलित विरोधी और स्त्री विरोधी (दुर्भाग्य से इस जघन्य वारदात में तीनों प्रकार के अपराध को अंजाम दिया गया है।) घटनाओं के खिलाफ सिर्फ़ सांकेतिक विरोध प्रदर्शन से ऊपर उठकर गांव शहर के सड़क गली मोहल्ले में संगठित प्रतिरोध खड़ा करना होगा। हम इस घटना की कड़ी भर्त्सना करते हैं और यह मांग करते हैं कि इस कृत्य में शामिल सभी दोषियों को तत्काल गिरफ्तार करो।
योगी सरकार मुर्दाबाद!
इंकलाब ज़िंदाबाद!
05/09/2021
औरत जब तक तंग रहेगी!
जंग रहेगी जंग रहेगी!!
पितृसत्ता - पूंजीवाद गठबंधन मुर्दाबाद!!
दिल्ली की देश की राजधानी रूप में पहचान तो है, लेकिन आज यही दिल्ली एक बलात्कारी राजधानी होने का नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है। बड़े शर्म की बात है कि सत्ता पक्ष, प्रशासन, मुख्य धारा की मीडिया, संवेदनाशून्य लोग इस घिनौने कृत्य के मूक साक्षी बन रहे हैं। और जहां कहीं ऐसे घिनौने, अमानवीय अपराधों के खिलाफ आवाज उठती है, उसे किसी न किसी तरह दबाया, छिपाया जाता है ।
दिल्ली में साबिया सैफी (राबिया सैफी) के साथ हुई बलात्कार और निर्मम हत्या केवल एक घटना मात्र नहीं है बल्कि यह समस्त महिलाओं की सुरक्षा और जीवन जीने के अधिकार का सवाल है। दिल्ली के संगम विहार की रहने वाली राबिया सिविल डिफेंस में काम करती थी। सिविल डिफेंस में कार्य करते हुए उसे हरियाणा, फरीदाबाद के सूरजकुंड पाली रोड पर ले जाया गया और बलात्कार करने के बाद गला रेत कर निर्मम तरीके से उसकी हत्या कर दी गयी। बताया यह भी जा रहा है कि उसके शरीर पर जगह- जगह लगभग 50 बार चाकू से वार किया गया है। इतनी बर्बरता, इतनी हैवानियत के बाद भी ताज्जुब की बात है कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर डिंग हांकने वाले, पार्लियामेंट और टीवी चैनलों में बड़ी बड़ी तथाकथित बहसें करने वाले चुप्पी साधे हुए हैं और मेन स्ट्रीम मीडिया से तो यह खबर इस कदर नदारद है मानो ऐसा कुछ कहीं हुआ ही न हो ।
सवाल यह है कि महिलाएं चाहें घर में हो, किसी कार्यालय या विभाग में कार्यरत हो, सड़क , बाजार, काॅलेजों - स्कूलों में कहीं भी हो उनकी सुरक्षा का सवाल विशेषकर आज भी जीवंत और ज्वलंत है। बलात्कार, हत्या और शरीर को निर्ममता से जख्मी करना जैसी हैवानियत का जिक्र तक करते हुए जहां सिहरन और आक्रोश पैदा होता है,ऐसे में हर दूसरे दिन महिलाओं की सुरक्षा और उनपर होते तमाम तरह के अत्याचार न सिर्फ़ खौफ और असुरक्षित समाज को दर्शाते है, बल्कि इससे कहीं ज्यादा इस सड़ान्ध मारती पितृसत्तात्मक- पूंजीवादी व्यवस्था की कुरूपता को नंगे रूप में चित्रित करता है । संसद भवनों, विधानसभाओं, प्रेस कॉन्फ्रेंसों, नेताओं के भाषणों ,तथाकथित बुद्धिजीवियों के लेखों और चिंताओं में तो महिलाएं सुरक्षित है सिवाय अपने घर, गली-मोहल्ले, बाजार, स्कूलों-काॅलेजों, कार्यस्थलों, सड़कों में।
पटना घरेलू कामगार यूनियन इस घिनौने, अमानवीय और हैवानियत की हद पार करते हुए घटना की कड़ी निंदा करती है और इस जघन्य अपराध के सभी दोषियों को तत्काल गिरफ़्तार कर स्पीडी ट्रायल चलाकर सख्त से सख्त सज़ा देने की मांग करती है। इस प्रकार के लगातार बढ़ते अपराधों के मूल में यह पितृसत्तात्मक पूंजीवादी महिला विरोधी सोच और संस्कृति है जिसे विभिन्न निम्न कोटि के साहित्य , फिल्मों, अश्लील गानों के माध्यम से प्रचारित- प्रसारित किया जा रहा हैl आज पूंजीवाद ने महिलाओं को भी एक माल के रूप में स्थापित कर दिया है और इसी मानसिकता से ऐसे निम्नतर , घृणित और दिल दहला देने वाली बलात्कार की घटनाएं हमारे ही गांव-शहर, हमारे ही आस-पास लगातार घट रही है। आज इसके खिलाफ हमें एकजुट होकर आवाज़ बुलंद करनी होगी।
11/03/2021
कल पटना के राजापुल के समीप पटना घरेलू कामगार यूनियन द्वारा अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में यूनियन की वारुणी पूर्वा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इतिहास पर बात चीत की। बात चीत में यह भी कहा गया कि इससे अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि लूट व मुनाफे पर टिकी इस व्यवस्था के पोर पोर में समायी पितृसत्तावादी मानसिकता के कारण आज महिलाओं को घर व उसके बाहर भी कई तरह के उत्पीड़नों का सामना करना पड़ता है। अतः सिर्फ अपनी आर्थिक मांगों जैसे लेबर कार्ड व ईएसआई - पीएफ पर लड़ने के अतिरिक्त स्त्री - पुरुष सामानता जैसे जरूरी मुद्दे पर भी पटना घरेलू कामगार यूनियन संघर्षरत है।
आगे, इस परिचर्चा में इस बात पर सहमति बनी कि निकट भविष्य में नियमित अंतराल पर महिला बैठकी की शुरुआत की जाएगी, जहाँ सम - सामायिक मुद्दों पर बात चीत की जाएगी। यह बात भी सामने आई कि चूंकि अधिकांश महिलाओं को अक्षर ज्ञान भी नहीं है, तो इस महिला बैठकी में ऐसी महिला साथियों को लिखना - पढ़ना भी सिखाया जाएगा।
इस परिचर्चा के दौरान एक महिला साथी ने यह बताया कि अपने घर मे संपत्ति विवाद के दौरान, उसके परिवार के पुरुष सदस्य द्वारा उसके साथ मार पीट की गई, उक्त महिला साथी की हालत बिल्कुल अधमरी सी हो गयी थी। अपने साथ हुई हिंसा की रपट लिखाने जब वह महिला थाने पहुंची, तो थानेदार ने उसकी रपट लिखने से इनकार कर दिया। संभवत: थाने की पुलिस ने पैसे लेकर इस मामले पर चुप्पी साध ली। किसी तरह से महिला थाने में, उसकी रपट दर्ज की गई।
इस मसले पर बात रखते हुए वारुणी ने कहा कि ऐसे मामले स्पष्ट करते है कि यह पुलिस प्रशासन व पूरी व्यवस्था सिर्फ पैसेवालों के लिए काम करते हैं। जो ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्ट है। इसलिए महिलाओं को अपने ऐसे संगठन बनाने होंगे, जो ऐसे तमाम घरेलू हिंसा की वारदातों के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष कर सके। साथ ही ये संगठन महिलाओं को ऐसे मंच भी मुहैया कराए, जहां वे अपने तकलीफे अन्य महिलाओं के साथ सांझा कर सके, और उनके साथ किसी भी तरह का उत्पीड़न व अन्याय हो तो ये संगठन उसके साथ खड़ा होकर प्रशासन व पुलिस पर कारवाई करने का दबाव बना सके।
08/03/2021
आज पटना के गोसाईं टोला इलाके में पटना घरेलू कामगार यूनियन द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान 'कहानी एक मेहनतकश औरत की' नाटक का मंचन किया गया व प्रगतिशील गीतों की भी प्रस्तुति दी गयी। बिगुल मज़दूर दस्ता के सनी ने कामगारों को महिला दिवस के इतिहास से अवगत कराया। उसके बाद इस कार्यक्रम में उपस्थित स्त्री कामगारों को पटना घरेलू कामगार यूनियन की वारुणी ने संबोधित कियाl उसने बताया कि मौजूदा दौर में यह पूंजीवादी व्यवस्था ही पितृसत्तात्मक मानसिकता को संश्रय देती है। जो समाज के पोर पोर में समाई हुई है। साथ ही समूची स्त्री आबादी में से भी मेहनतकश स्त्रियों का ही तबका सबसे ज्यादा इस पितृसत्तात्मक उत्पीड़न का शिकार बनता है। इसलिए इसे स्त्री विरोधी पितृसत्तात्मक व्यवस्था के खिलाफ सबसे पहले मेहनतकश स्त्रियों को ही आगे आना होगा। साथ ही यह भी समझना होगा कि न सिर्फ इस पितृसत्तात्मक मानसिकता से आज स्त्रियों को संघर्ष करना होगा, अपितु इस मानसिकता की पोषक इस रुग्ण मानसिकता को संश्रय देनी वाली पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ भी लड़ना होगा।
इस कार्यक्रम में गोसाईं टोला, मैनपुरा व आसपास के इलाकों में रहने वाली घरेलू कामगार महिलाएं शामिल हुई। इस सभा का समापन 'महिला बैठकी' शुरू करने की बात के साथ हुआ।
26/02/2021
आज पटना के राजा पुल इलाके में घरेलू कामगार महिलाओं के साथ मीटिंग की गई, जिसमे गत 31 जनवरी को आयोजित रोजगार अधिकार महाजुटान के बाद के कदम पर बात चीत की गई। इस दौरान कहा गया कि अभी प्रशासन की ओर से पंजीकरण कराने का आश्वासन हमे दिया गया है, हमें सिर्फ इतने भर से संतुष्ट नहीं हो जाना है। हमें अपना संघर्ष तब तक जारी रखना है, जब तक हमारी मांगे; रोजगार गारंटी कानून बनाने व ईएएसआई - ईपीएफ की सुविधा आदि लागू करने पर सरकार मान नहीं जाती है। हम संघर्ष तभी कर सकते है, जब हम संगठित हो, इसलिए यह आवश्यक है कि यूनियन का विस्तार किया जाए व अन्य कामगार महिलाओं को इससे जोड़ा जाए।
25/02/2021
आज पटना के कौशल नगर इलाके में निदान स्कूल के समीप रहने वाली घरेलू कामगार महिलाओं के साथ नुक्कड़ मीटिंग की गई, जिसमे गत 31 जनवरी को आयोजित रोजगार अधिकार महाजुटान के बाद के कदम पर बात चीत की गई। इस दौरान कहा गया कि अभी प्रशासन की ओर से पंजीकरण कराने का आश्वासन हमें दिया गया है। पर सिर्फ इतने ही तक हमें सीमित नहीं रहना है, जब तक हमारी मांगे; रोजगार गारंटी कानून बनाने व ईएएसआई - ईपीएफ की सुविधा आदि लागू करने पर सरकार मान नहीं जाती है, तब तक हमें संघर्ष करते रहना होगा। इसलिए यह आवश्यक है कि यूनियन का विस्तार किया जाए व अन्य कामगार महिलाओं को इससे जोड़ा जाए।
23/02/2021
पूँजीवादी पितृसत्ता का नाश हो!
उन्नाव में हुई बर्बरता के खिलाफ़ आगे आओ!!
साथियो,
हाथरस, उन्नाव, कठुआ जैसी बर्बरता एक बार फिर दोहरायी गयी है। उन्नाव में तीन बच्चियाँ एक बार फिर भूखे भेड़ियों का शिकार बन गयी है। कोई दिन नहीं होता जब किसी-न-किसी के आसपास कोई स्त्री इस हैवानियत का शिकार नहीं होती है। छोटी बच्चियों से लेकर उम्रदराज़ औरतें तक सुरक्षित नहीं हैं छुट्टा घूमते इन जानवरों से! फ़ासिस्ट हुकूमत और प्रशासन में बैठे लोग अन्धे-बहरे ही नहीं बल्कि ऐसे अपराधों में इन दरिन्दों से होड़ लगा चुके हैं।
असोहा थाना क्षेत्र के बबुरहा गाँव में बुधवार को एक खेत में तीन दलित किशोरियाँ बेहोशी की हालत में कपड़े से बँधी मिलीं। तीनों किशोरियाँ मवेशियों के लिए चारा लेने खेत में गयी थीं। उनमें से दो सगी बहने थीं और एक चचेरी बहन थी। अस्पताल में ले जाने के बाद दो बहनों ने दम तोड़ दिया और एक की हालत गम्भीर बनी हुई है। योगी का उत्तर प्रदेश महिलाओं के लिए कालगृह साबित होता जा रहा है। ऐसी घटनाएं आये दिन हो रही है लेकिन समाज में एक आपराधिक सन्नाटा छाया हुआ है। ये स्थिति अपराधियों के मनोबल को बढ़ा रही है। इस घटना पर यह गोदी मीडिया जो सरकार की चाटुकारिता करने मे व्यस्त है, इस मसले पर चुप्पी साधे हुये है। मीडिया के हिस्से ने जब इस बात को उजगार किया तो उनपर उप्र पुलिस द्वारा एफआईआर कर दी गयी है। यह इस सरकार के दमनकारी चरित्र को स्पष्ट करता है। हमें इसके खिलाफ भी आवाज़ उठानी होगी।
ये सरकारे बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओं का नारा देती हैं, परंतु इस सच्चाई से हम सब परिचित हैं कि आज के दौर मे स्त्रियाँ कितनी सुरक्षित हैं। एनसीआरबी के 2019 के आंकड़ों के अनुसार भारत मे हर दिन करीब 87 बलात्कार व यौन हिंसा की वारदाते होती हैं। कई मामलों में पीड़िता की हत्या तक कर दी जाती है।
हमें इन बढ़ती स्त्री – विरोधी अपराधों के पीछे के कारणों को समझना होगा, यह पूंजीवादी व्यवस्था वास्तव में इस रुग्ण स्त्रीविरोधी पितृसत्तावादी सोच को प्रश्रय देती हैं। टीवी मीडिया व इंटरनेट पर स्त्री विरोधी सामग्री पड़ोसी जाती है, स्त्रियॉं को उपभोग की वस्तु के तौर पर पेश किया जाता है। इसलिए जबतक लूट व मुनाफे पर टिकी पूंजीवादी व्यवस्था का नाश नहीं होगा, तब तक यह पितृसत्तावादी मानसिकता भी समाप्त नहीं होगी। साथ यह भी स्पष्ट है कि सिर्फ प्रशासन के ऊपर हम अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी नहीं छोड़ सकते हैं। आज हमें महिलाओं के ऐसे संगठित दस्ते बनाने होंगे, जो गलियों – मोहल्लों मे ऐसे स्त्री – विरोधी तत्वों और शोहदों का प्रतिकार करें।
साथियो, यह एक परिपाटी सी बना दी गई है, जहां यह व्यवस्था ऐसी किसी भी स्त्री विरोधी घटना का सामान्यीकरण कर के पेश करती हैं। हमें अपनी संवेदनाओं को इस तरह मारने नहीं देना है। ऐसी स्त्री विरोधी घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लड़ना होगा। इसके साथ ही ऐसी घृणित – पितृसत्तावादी सोच को प्रश्रय देनी वाली पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ भी लगातर संघर्ष करना होगा।
इंकलाब ज़िंदाबाद,
स्त्री मुक्ति लीग नौजावान भारत सभा पटना घरेलू कामगार यूनियन
संपर्क: 9102346391, 9934608563
पता: शहीद भगत सिंह पुस्तकालय, गोसाईं टोला, पटना
22/02/2021
आज पटना के कौशल नगर इलाके में पटना घरेलू कामगार यूनियन द्वारा गली मीटिंग आयोजित की गई। इस मीटिंग में घरेलू कामगार महिलाओं से बातचीत में कहा गया कि गत 31 जनवरी को आयोजित रोजगार अधिकार महाजुटान के जरिये हमने मज़बूती से अपनी मांगे सरकार के समक्ष रखी हैं। हमें अपने अधिकार के लिए संघर्ष को इसी तरह से जारी रखना होगा। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि हम यूनियन को मज़बूत करें व शहर की अन्य घरेलू कामगार महिलाओं को इससे जोड़ें।