03/06/2026
heart touching shayari, romantic lines hindi, os ki boonde shayari, emotional poetry hindi, sahitya ki mehfil, aware news 24, shubhendu prakash, love poetry hindi, hindi quotes
:
“Ek bahar aayi thi,
barsaat na hui… 🌿
Os ki boonde
dil ko gudguda si gayi…” ✨❤️
📖 Platform: Aware News 24
✍️ Khyal: Shubhendu Prakash
📚 Column: Sahitya Ki Mehfil
02/06/2026
खान सर के कोचिंग पर फिर हमला! क्या पटना का कोचिंग हब वर्चस्व की जंग का मैदान बनता जा रहा है?
Analysis Report
Shubhendu Prakash
Founding Editor, Aware News 24
मंगलवार 2 जून 2026 की रात पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में स्थित खान सर के कोचिंग संस्थान के बाहर हुई फायरिंग ने एक बार फिर बिहार की शिक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार 5 से 10 राउंड गोलियां चलने की बात सामने आई है। पुलिस जांच कर रही है और कोचिंग संस्थानों के बीच वर्चस्व की लड़ाई के एंगल से भी मामले को देख रही है।
लेकिन इस घटना को अगर सिर्फ एक दिन की घटना मान लिया जाए तो शायद हम बड़ी तस्वीर को नजरअंदाज कर देंगे।
क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब खान सर या उनके संस्थान का नाम किसी हमले या हिंसक घटना से जुड़ा हो।
साल 2019 में पटना के मुसल्लहपुर हाट स्थित खान जीएस रिसर्च सेंटर पर अज्ञात बदमाशों ने बमबारी की थी। उस समय भी इलाके में दहशत फैल गई थी। कोचिंग परिसर में तोड़फोड़ हुई, बम फेंके गए और छात्रों के बीच अफरा-तफरी मच गई थी। पुलिस जांच में उस समय छात्रों और स्थानीय विवाद का एंगल भी सामने आया था।
बाद के वर्षों में भी विभिन्न मंचों और इंटरव्यू में खान सर स्वयं यह दावा करते रहे हैं कि उनके संस्थान को निशाना बनाया गया था और कोचिंग जगत में बढ़ती लोकप्रियता के कारण उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा।
अब 2026 में फिर से फायरिंग।
सवाल यह है कि आखिर ऐसा बार-बार क्यों हो रहा है?
पटना का मुसल्लहपुर हाट, भिखना पहाड़ी और आसपास का इलाका केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं है। यह बिहार की सबसे बड़ी कोचिंग अर्थव्यवस्था का केंद्र भी है। यहां हर वर्ष लाखों छात्र आते हैं। हॉस्टल, मेस, किताबें, टेस्ट सीरीज, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कोचिंग संस्थानों का पूरा कारोबार करोड़ों रुपये का है।
ऐसे में जो संस्थान सबसे ज्यादा छात्रों को आकर्षित करता है, वह केवल शैक्षणिक नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक शक्ति भी बन जाता है।
खान सर का मॉडल पारंपरिक कोचिंग व्यवस्था से अलग रहा है। कम फीस, सोशल मीडिया की जबरदस्त पहुंच, यूट्यूब के माध्यम से व्यापक लोकप्रियता और छात्रों के बीच सीधा संवाद — इन सबने उन्हें शिक्षक से कहीं बढ़कर एक सार्वजनिक व्यक्तित्व बना दिया है।
यही कारण है कि जब उनके संस्थान के बाहर गोली चलती है तो यह सिर्फ एक व्यक्ति या एक कोचिंग पर हमला नहीं माना जाता, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़ा करता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बिहार का युवा पहले से ही प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, भर्ती विवादों और बेरोजगारी की मार झेल रहा है। ऐसे माहौल में अगर शिक्षा के केंद्र भी असुरक्षित दिखने लगें तो युवाओं के मन में व्यवस्था के प्रति भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
पुलिस जांच कर रही है और उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द सच्चाई सामने आएगी। लेकिन एक बात तय है — 2019 की बमबारी और 2026 की फायरिंग को साथ रखकर देखें तो यह सवाल अब पहले से ज्यादा बड़ा हो गया है कि आखिर पटना के कोचिंग हब में बार-बार हिंसा की घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं?
अगर शिक्षा के मंदिरों के बाहर गोलियां और बम चर्चा का विषय बनने लगें, तो यह सिर्फ अपराध की खबर नहीं रहती, बल्कि समाज के भविष्य को लेकर चिंता का विषय बन जाती है।
02/06/2026
“मुहब्बत जिस तरह से हाथ छोड़ना गुनाह है,
ठीक उसी तरह से followback करके या देकर unfollow करना भी गुनाह है।
कोई बात पसंद नहीं है
तो संवाद कीजिए, विवाद कीजिए…
चुपके से हाथ झटक कर
दगाबाज़ी न कीजिए।” ❤️
— विचार: Shubhendu Prakash
Platform: Aware News 24
Column: साहित्य की महफिल
02/06/2026
किसी की कुंठा का कोई इलाज मेरे पास नहीं है,
लेकिन आक्षेप और सवाल का तार्किक जबाब है,
किसी को हम judge करके कानाफूसी करे ऐसे दोस्त भी हमारे पास नहीं है,
हम अपनी बात सुनाते हैं और सबको अच्छा ही बोलते हैं,
जब सब में हैं भगवान फिर कोई बुरा और अच्छा कैसे?
जब सवालों के जवाब नहीं कोई देता है समझ लो वो चोर है चोर प्रशांत किशोर ने अभी तक मेरे सवालों को address तक नहीं किया लेकिन शब्दों से समझ मे आ गया कि साहब को कुंठा हुई है
पटना का बांके पुर सीट जो नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई है पीके चाहे तो पूरी पार्टी लगा दे वो सीट नहीं जीत पायेंगे इस उछल कूद मे कोई और सीट निकाल लेगा राधे राधे
विचार: shubhendu prakash
Platform: aware news 24
Category : Social & Politics
01/06/2026
“मैं खुद भी सीख रहा हूँ…
बस इतना चाहता हूँ कि लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़ना सीखें।” ❤️
मै समाज को ये बताने आया हूँ कि भाई —
हाथ पकड़ो, टांग मत खींचो।
किसी के आगे बढ़ने का जश्न मनाओ,
उसकी तरक्की पर शोक मत मनाओ।
कोई रो रहा हो,
तो उसे मुस्कान देकर तुम भी मुस्कुराओ ना।
नियम-कानून ज़रूरी हैं,
लेकिन “जियो और जीने दो” भी उतना ही ज़रूरी है।
किसी की खुशी में हिस्सा बनो,
उसमें खोट मत निकालो।
अगर कमी दिखे,
तो पहले कान में समझाओ,
बार-बार वही गलती हो तब समाज के सामने बताओ।
हम ना शादी व्यवस्था के खिलाफ हैं,
ना किसी संस्कृति के।
हम बस इतना कहते हैं कि
दो लोगों को एक-दूसरे को समझने का समय मिलना चाहिए।
Arrange marriage भी ज़रूरी हो सकती है,
लेकिन रिश्ता सिर्फ दो परिवारों का नहीं,
दो स्वभावों का भी मिलन होता है।
कोई दबाव में शादी न करे,
और अगर करे तो फिर धोखा न दे।
महिलाएँ घर को बेहतर संभालती हैं —
ये प्रकृति का संतुलन है।
पुरुष बाहर की लड़ाइयों के लिए बना है,
और स्त्री भीतर के संसार को जीवित रखने के लिए।
हम व्यवस्था तोड़ने नहीं,
उसे समय के अनुसार बेहतर बनाने की बात करते हैं।
हम विखंडित हो रहे समाज को जोड़ने की बात करते हैं।
सद्भावना की बात करते हैं।
सन्मार्ग की बात करते हैं।
लोग आज नहीं समझ रहे,
कोई बात नहीं…
प्रयास जारी रहेगा।
“मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
ये आग जलनी चाहिए…” 🔥
— विचारक शुभेन्दु प्रकाश
Platform: Aware News 24
Column: साहित्य की महफिल
31/05/2026
Agar ishq hua hai,
toh ishq par bharosa kijiye… ❤️
Bharosa nahi hai,
toh ishq na kijiye।
Kyunki bharosa hi ishq hai। ✨
Khuda par agar bharosa hai,
phir ishq par bhi kijiye।
Mohabbat bandhan nahi,
ehsaas hota hai।
Aur jahan bharosa toot jaaye,
wahan ishq sirf darr ban kar reh jaata hai।
Radhe Radhe 🙏
Platform: Aware News 24
Column: Sahitya Ki Mehfil
Vicharak: Shubhendu Prakash
All Social Handle:
Web: https://www.awarenews24.com
Agar ishq hua hai,
toh ishq par bharosa kijiye… ❤️
Bharosa nahi hai,
toh ishq na kijiye।
Kyunki bharosa hi ishq hai। ✨
Khuda par agar bharosa hai,
phir ishq par bhi kijiye। 🌿
Platform: Aware News 24
Column: Sahitya Ki Mehfil
Vicharak: Shubhendu Prakash
All Social Handle:
🌐 www.awarenews24.com
28/05/2026
जब बच्चा सफल होता है तो कहा जाता है — ‘ये हमारे संस्कार हैं।’ लेकिन जब वही बच्चा गलत रास्ते पर चला जाए, तो अचानक कहा जाता है — ‘बच्चा बिगड़ गया।’ आख़िर जिम्मेदारी selective कैसे हो सकती है? अगर अच्छे का श्रेय माँ-बाप लेते हैं, तो बुरे में पूरा दोष सिर्फ बच्चे का कैसे? सच ये है कि परवरिश सिर्फ खाना खिलाने का नाम नहीं, विचार, व्यवहार, वातावरण और कर्म भी बच्चे सीखते हैं। आज कई माँ-बाप औलाद पर रोते मिलते हैं, लेकिन अपने बोए हुए बीजों को नहीं देखते। जो बोया जाएगा, वही किसी दिन लौटकर आएगा। अच्छा अगर आपका है, तो बुरा भी आपका ही है। राधे राधे 🙏” विचारक शुभेन्दु प्रकाश column:- साहित्य की महफिल platform:- aware news 24
When a child succeeds, society says —
“These are our संस्कार.”
But when the same child fails or goes astray,
suddenly all responsibility shifts only onto the child.
How can responsibility be selective?
Children don’t only learn from words,
they learn from behavior, environment, and actions too.
If parents take credit for the good,
then the bad must also be questioned honestly.
🌿 Parenting is not ownership,
it is responsibility.
Thinker: Shubhendu Prakash
Column: Sahitya Ki Mehfil
Platform: Aware News 24