मोदी क्या है इसको भारत का विपक्ष समझ सका या नहीं यह तो नहीं मालूम पर अमेरिका के राष्ट्रपति मोदी को समझ गए है । तभी तो झुकाने हेतु दुगुना से तिगुना लगान लगाकर या डेड इकॉनमी बताकर झुकाने की कोशिश कर रहे है।
पर भारत का बच्चा बच्चा जानता है
मोदी झुकेगा नहीं
#मोदीजी #मोदीसरकार #भारतीय
Manish Kishore
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संकटमोचन हनुमान जी साहब को शीघ्र स्वस्थ करे यही हम सबकी प्रार्थना है
शारदा सिन्हा जी नहीं रही , खबर जब सुना तो लगा एक शख्स का निधन ही तो हुआ है । वैसे शख्स जिसकी कर्मभूमि का क्षेत्र का प्रथम अध्याय छठ से शुरू हुआ और जीवन के आखिरी अध्याय का समापन भी छठ में हुआ।
पर जब अभी घर पहुंचकर सोचते रहा तो लगा ,शारदा सिन्हा का मतलब क्या है
आज छठ महापर्व का पहला दिन है और छठी मैया का ही गीत पटना के सड़क से लेकर मेरे घर तक बज रहा है
फिर सोचने लगा आखिर गाना कौन कौन सा गाया है उन्होंने
"अगे माई हरदी चढ़ा दे " अरे यह गाना तो मेरे शादी के वीडियो में हल्दी वाले दिन में बजा था
फिर सोचा
"कहे तो से सजना , तोहरी सजनिया पग पग " अरे यह तो कई भाभियों को भैया के लिए गाते सुना
"बाबुल जो तूने सिखाया " अरे यह तो मेरे ही नहीं कई लोगों की शादी के विदाई का गाना है
"तार बिजली से पतले हमारे पिया " क्या गाना था
अब उनके बारे में ठीक से पढ़ना शुरू किया ,जानते है
दो चार ही हिंदी गाने गाए पर जो गाया ,क्या खूब गाया,क्या खूब बॉक्स ऑफिस पर चला,और सबसे बड़ी बात जो गाया सब सुपरहिट गाया। बॉलीवुड की चमक से भी फूहड़ता से समझौता नहीं किया ।
यह थी शारदा सिन्हा ।
आप स्वयं सोचिए अगर वे न होती ,उनके गीत न होते तो हमारे जीवन के खास पलो का आनंद क्या होता? जैसे जल बिन मछली।
कौन कहता है कि आप नहीं है, जब तक छठ पूजा है , जब तक शादियां है ,आप खासतौर पर बिहार के हर घर में गीतों के माध्यम से सजीव रहेंगी।
शारदा सिन्हा बनने के लिए शारदा सिन्हा को ही पुनर्जन्म लेना होगा।
आप जहां भी है आपको सादर नमन ।
10/09/2024
आरा से ऑस्ट्रेलिया का सफर , आखिर तय कैसे हुआ , सुनिए खुद RK Sinha की आवाज में
https://www.facebook.com/share/p/vPajNiSY1HBpfCiH/?mibextid=oFDknk
Manish Kishore
RK Sinha Success Story: कभी नौकरी से निकाले गए आज हैं करोड़ों के मालिक, 3 लाख लोगों को दिया रोजगार Success Story Of RK Sinha: इस बार सक्सेस स्टोरी में बिहार के एक ऐसे शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कभी 230 रुपये की सैलरी पर प.....
राजनीतिक चश्मे से नजरिया
रामचंद्र कह गए सिया से
ऐसा दिन आएगा
कायस्थ जाति को राजनीति में नजर अंदाज (जाति जनगणना)
और प्रशासनिक कार्य में सर्वोत्तम पाया जाएगा ।
जय बिहार
Manish Kishore
27/08/2024
प्रोफेशनल जीवन में जब दिल्ली से पटना में तत्कालीन माननीय मंत्री श्याम रजक जी के सहयोगी के रूप में शुरुआत की , उस समय जब कार्य के संबंध में मंत्रियों के संपर्क में रहना होता था उसमे एक नाम माननीय मंत्री श्री नीतीश मिश्रा सर का भी था ।
आज लंबे समय के बाद फिर आज उद्योग मंत्रालय के कार्यालय में अभिवाहक माननीय Rk Sinha सर के सौजन्य से जाना हुआ ।
माननीय Nitish Mishra सर से मिलकर वहीं अनुभूति प्राप्त हुई जो पहले भी मिलती थी।
आप सर एकदम नही बदले ।
Manish Kishore
15/08/2024
अन्नपुर्णा भवन में झंडातोलन श्री अभिषेक सिंह जी के द्वारा किया गया।
आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं
Manish Kishore
आज फिर कुछ लिखने की इच्छा हुई तो लिख रहा हुं पर मुझे नही मालूम की क्या लिखेगा।बस ऑफिस से लौट कर अकेले कमरे में लेटे लेटे दिमाग जिस दिशा में जा रहा है उसी दिशा में जा रहा हु ।लिख इसीलिए रहा हूं कि वक्त कट जाए वरना "खाली दिमाग शैतान का दिमाग" न हो जाए बस इसीलिए लिख रहा हुं और कोई वजह नहीं । कोई शक , एकदम नही।
तो मैं सोच रहा हूं कि, मम्मी पापा अलग कमरे में है , बच्चे पढ़ रहे है और बच्चे की मम्मी उन्हे पढ़ा रही है इसलिए शायद अकेले सोचने का मौका मिल गया ।खैर मैं सोच रहा हु कि आखिर मैंने जन्म क्यों लिया है ? पैदा हुआ था या यू कहिए जब से अपने जीवन के सपनो के पंख में ऊंची उड़ान उड़ी थी उस समय से एक दिशा थी पर अब जब पंख ने टूटना शुरू कर दिया या यू कहिए उड़ान अब ऊंची हो ही नहीं सकती तब फिर अचानक यह सवाल दिमाग ने पूछा आखिर मैंने जन्म क्यों लिया है।
दिमाग के साथ सोच की दिशा के भ्रमण में निकल कर पाया की मैं आखिर कर क्या रहा हूं।सुबह उठने के साथ ही ऑफिस के कार्यों के बारे में सोचना शुरू कर देता हु , ऑफिस जाकर उन कामों को सफलतापूर्वक निभाने की कोशिश करता हु कि काम देनेवाले अधिकारी संतुष्ट हो जाए फिर दफ्तर से घर जाता हु ।यह सब इसलिए करता हु की जो पैसे सैलरी के रूप में मिल रहे है उसमे ज्यादा से ज्यादा वृद्धि हो और यह पैसे प्रतिमाह मिलते रहे ताकि मेरे और मेरे पर निर्भर लोगो को जीवनयापन में कोई असुविधा न मिले। मतलब अपने वंश को बढ़ाने का कार्य कर रहा हु।मेरे बच्चे उस काबिल हो जो वे अपने सपनो की ऊंची उड़ान लेकर उन्हें पा सके। इसका मतलब तो यही हुआ पर यह जवाब मेरे उस सवाल को संतुष्ट नहीं कर सका कि आखिर मैने जन्म क्यों लिया है?
अब संतुष्ट ही नहीं तो दिमाग के साथ फिर चल पड़ा नई वजह जानने को। कोई भी व्यक्ति जिसने जब से होश सभाला होगा तबसे अपने शरीर को कड़ी धूप हो ,बरसात हो ,दिन हो या रात को न समझकर जी तोड़ मेहनत कर इसलिए कमाता है कि उसका शरीर रूपी जीवन को आराम मिल सके और दूसरा उसका शरीर मृत्यु से बच सके। बस मूल रूप से यही एक इंसान का हर दिन लक्ष्य होता है। पर यह दोनो ही प्रयास तो बेकार है क्योंकि न तो आप ताहउम्र शरीर को स्वस्थ रख सकते है और न आप मृत्य से बचा सकते है। यह उन पर भी लागू है जो यह कहते है कि मैं तो अपने परिवार के लिए जी रहा हु क्यूंकि आप यह दोनो काम उनके लिए भी नही कर सकते है इसलिए यह तो सिद्ध हो गया कि मेरा जन्म इसके लिए तो नही ही हुआ है। फिर क्यों
अच्छा पैसा कमा कर एक दूसरे से बड़ा बनने की होड़ तो प्रतिस्पर्धा है सिर्फ इस बात की एकआदमी दूसरे आदमी को यह बताएगा की मेरी सुख सुविधाएं कितनी बड़ी है । जबकि जीवनयापन के लिए बहुत सारी सुविधायो की नही कुछ सुविधा की जरूरत होती है इसलिए यह बात तो हो ही नही सकती । अब वंश नही, पैसे नही फिर क्या ।
अब सोचा यहां तक आ ही गए है तो सार निकालते जाए।
मतलब एक बात तो सिद्ध हो गई कि जन्म के बाद मृत्यु निश्चित है इसलिए आपके पास बचते है सिर्फ वह पल जो आपके जन्म और मृत्य के बीच फासला है सिर्फ यही पल।अब इस पल को कैसे यादगार बनाना है जिससे हमे सदियों याद किया जाएगा । ऐसा कौन सा काम करना है जिसका आकलन हमारे बाद वाली जितनी पीढ़ी जाने उससे हो सके तभी जीवन में जन्म का महत्व समझ में आएगा। लगता है मेरे सवाल का जवाब मिल गया जिसमे मैने पूछा था कि मैंने जन्म क्यों लिया है ? मैने इसलिए जन्म लिया है क्योंकि मुझे अपने जन्म को कई पीढ़ियों तक उनके यादों में जीवित रखना है। अब यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि उसे आप कैसे जीवित रखना चाहेंगे क्योंकि आज भी हम रावण और राम दोनो को जानते है।इतना ही नहीं हम सुपर्णखा को भी याद रखते है हां वह अलग बात है की सुपर्णखा रावण की बहन थी और उसका नाक उस समय पृथ्वी पर जन्मे अतिविशिष्ट लक्ष्मण जी ने काटा था। सफर का एटरटेनमेंट आपको तय करना है क्योंकि इसके यात्री स्वयं और स्वयं आप है।
अब पूरा पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि जो मेरे दिमाग ने सोचना शुरू किया था वह दुनिया का तो नही परंतु भारत के मिडिल क्लास में जीने वाले शत प्रतिशत लोगो के दिमाग में ऐसा ही सोच रहता है ।अब यह बात अलग है कि सिर्फ और सिर्फ एक प्रतिशत से भी कम व्यक्ति ही इसे लिख कर बता पाते है।
आपकी सहमति अनिवार्य है।
#कहानी
जिस शायर ने भी लिखा है क्या खूब लिखा है
नुख्श निकालते है लोग कुछ तरह हममें
जैसे उन्हे खुदा चाहिए था और
हम इंसान निकल गए।
आज फिर कुछ लिखने की सूझी तो लिख रहा हूं
आज रात को मेरी बेटी सो रही थी और मैं उसके बगल में जाकर लेट गया । फिर आदतन उसके पीठ को सहलाने लगा ,सोचते सोचते दिमाग में बात आई कि देखिए मैं अपनी बेटी से ज्यादा बात भी नही कर पाता हूं क्योंकि काम की वजह से जब मैं घर पहुंचता हु तो ये सोई रहती है और सुबह जब वह स्कूल जाती है तो मैं सोए रहता हु और वह मुझे उठाती भी नही क्योंकि उसको मालूम है मुझे देर तक सोए रहने की आदत है और कभी तो बात ही किसी दिन नही हो पाती है फिर भी उसका मैं दुनिया के सौ प्रतिशत बेटी के पिता की तरह हीरो हूं। आखिर क्यों
मेरे दिमाग ने सोचना शुरू किया की देखिए जब एक कन्या का जन्म होता है तो उसे धीरे धीरे पता होने लगता है कि उसके जीवन का दो हिस्से में बटना लिखा हुआ है। एक शादी के पहले जहा उसको अपने परिवार में जाकर अपना परिवार बनाना है , संस्कार सीखना है और दूसरा शादी के बाद जहा एक ऐसा परिवार को एक झटके में छोड़कर जहा उसने जीवन बिताया उसको छोड़कर जाना है जहा उसको अपना परिवार बनाना है। समझ गए न दो पहलू एक शादी के पहले और दूसरा शादी के बाद।
अब शादी के पहले सुरक्षित उसे सिर्फ पिता ही इस लोभी संसार में दिखता है इसलिए वह उसका हीरो है। और पिता इसलिए बेटियो को क्यों ज्यादा प्यार करते है यह आज समझ गया क्योंकि उसे मालूम है कि जिसने उसे जन्म दिया है उसे कल सौप देना है ।बेटे तो यही रह जाएंगे पर बेटी तो शादी के बाद वैसी हकदार नहीं हो पाएगी जैसे शादी के पहले इसलिए हर पिता की नजर में सबसे लाडली होती है बेटिया । सहमत है न।
अब जब शादी के बाद जब ऐसे परिवार में जाती है जहा से उसे अपना परिवार बनाना है ऐसे में उसका हीरो उसका पति हो जाता है। क्योंकि उसके पति का उसके नव निर्माण में स्थापित करने में उसकी सबसी बड़ी भूमिका है इसलिए उसका शादी के बाद कम से कम उसके पूर्ण परिवार निर्माण तक उसका हीरो है। बाद में बेटे बेटियो में बट जाता है।
अब शादी के बाद जो लड़की को चिढ़ाया जाता है कि मैके की बात पर अलग ही व्यवहार करने लग जाती है जानते है क्यों ।
क्योंकि यही बेटियां जब शादी के बाद चली जाती है तो यह समझकर की इस परिवार ने ही मुझे इस काबिल बनाया कि आज मैं इस परिवार मे हूं इसलिए मेरे लिए मैं उस परिवार की जीवनभर ऋणी रहूंगी। इसलिए मैं हमेशा मैके की पक्षधर रहूंगी ।
सोचा था यही खत्म करू पर एक बात और याद आ गई की लड़की का जब उस परिवार में सास को देखकर अपने पुराने परिवार में मां की याद आने लगती है तब होता है शुरू किस्सा सास बहू का । मतलब जब लड़की उस परिवार में थी तो उसका हीरो था पिता तो, उसे अपनी मां को ऐसी बहुत सी बाते निडर होकर नही बताई होगी जितनी अपने पिता से, पर अब मुझे ऐसी बाते जाननी है जो अब सिर्फ मुझे मां ही बता सकती है ऐसे में उसे याद आती है मां की ममता ।मां जिसने इस बेटी को उतना ही प्यार से पाला जितना बेटो को या फिर उससे भी अधिक उसके बावजूद भी उसकी नजर में मैं उसकी हीरोइन नही हूं अब शादी के बाद जरूरी है की बेटियो की आंखों में यह बताने को कि मैं भी हु तुम्हारी हीरोइन जिसने तुम्हे तुम्हारे हीरो पिता के साथ जन्म के साथ एक साथ भले ही पाला हो पर तुम्हारे पिता से कम से कम नौ महीने पहले से तुम्हे जानती हूं । समझ गए स्त्री का रिश्ता।
इसलिए स्त्रियों का सम्मान करिए और उससे जुड़े हर रिश्ते चाहे वे बाप बेटी का हो , पति पत्नी का हो ,सास बहू का हो या ,भाई बहन का हो या सभी रिश्ते जिसमे वे शामिल हो उसको जी भरकर जी लीजिए।
जी मैं अब चला सोने।
(रात को दो बज रहे है और उम्र के साथ पास की नजर कमजोर हो रही है इसलिए खूब टाइपिंग एरर है ,अब सुबह सुधारकर आपकी राय हेतु साझा कर रहा हूं)
09/07/2024
*आप लोग को सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है की आज श्री आदि चित्रगुप्त मंदिर में एक जोड़ी दहेज रहित विवाह संगीता कुमारी और शशांक शुभम का हुआ है। जैसा कि आप सभी को ज्ञात है की जिस भी जोड़ी की शादी श्री आदि चित्रगुप्त*मंदिर में निःशुल्क संपन्न होती है,और उसमे स्वेच्छा से लोग वर वधु को गृहस्थी का सामान देते रहे हैं।माननीय आर के सिन्हा जी पूर्व सांसद एवं श्री आदि चित्रगुप्त मंदिर के अध्यक्ष के द्वारा शराती बाराती के भोजन के साथ वर वधु को कुछ उपहार स्वरूप भी देते हैं।*
RK Sinha
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