Sadguru Kabir Sena - Army of 132 crore Indians

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The basic work of the Kabir army "Kaljuge Sanghe Shakti" is organized by the unity of force, and res

26/05/2021

मैं बुद्ध पुरुष की शरण जाता हूं। मैं उनके बनाए संध की शरण जाता हूं।इस प्रकार मैं धर्म की शरण जाता हूं।

धर्मो रक्षति रक्षितः। अर्थात तुम धर्म की रक्षा करो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा।
जो अधर्म के पक्ष में होगा वह मारा जाएगा।

25/05/2021

सद्गुरु कबीर सेना-132 - करोड़ भारतियों की सेना

गुरु शरणगति छाडि के, करै भरोसा और।
सुख संपती को कह चली, नहीं नरक में ठौर।।

अर्थ :-
संत कबीर जी कहते हैं कि जो मनुष्य गुरु के पावन पवित्र चरणों को त्यागकर अन्य पर भरोसा करता है।उसके सुख संपती की बात ही क्या, उसे नरक में भी स्थान नहीं मिलता।

24/05/2021

सद्गुरु कबीर सेना-132 - करोड़ भारतियों की सेना

गुरु मूरति आगे खड़ी, दुतिया भेद कुछ नाहिं।
उन्हीं कूं परनाम करि, सकल तिमिर मिटि जाहिं॥

अर्थ :-
गुरु की मूर्ति आगे खड़ी है, उसमें दूसरा भेद कुछ मत मानो। उन्हीं की सेवा बंदगी करो, फिर सब अंधकार मिट जायेगा।

22/05/2021

सद्गुरु कबीर सेना-132 - करोड़ भारतियों की सेना

गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष ।
गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटे न दोष ।।

अर्थ :-

कबीर दास जि कहते हैं – हे सांसारिक प्राणीयों । बिना गुरु के ज्ञान का मिलना असंभव है । मोक्ष का मार्ग दिखलाने वाले गुरु हैं । बिना गुरु के सत्य एवम् असत्य का ज्ञान नही होता । गुरु बिना दोष का (मन के विकारों का) मिटना असंभव है । अतः गुरु कि शरण मे जाओ । गुरु ही सच्ची राह दिखाएंगे ।

22/05/2021

सद्गुरु कबीर सेना-132 - करोड़ भारतियों की सेना

लच्छ कोष जो गुरु बसै, दीजै सुरति पठाय ।
शब्द तुरी बसवार है, छिन आवै छिन जाय ॥

अर्थ :-
यदि गुरु लाख कोस पर निवास करते हों , तो भी अपना मन उनके चरणों में लगाते रहो | गुरू के सदुपदेश रूपी घोड़े पर सवार होकर अपने मन से गुरुदेव के पास क्षण – क्षण आते – जाते रहना चाहिए |

20/05/2021

सद्गुरु कबीर सेना-132 - करोड़ भारतियों की सेना

गुरु सो प्रीति निवाहिये, जेहि तत निबहै संत।
प्रेम बिना ढिग दूर है, प्रेम निकट गुरु कंत॥

अर्थ :-
जैसे बने वैसे गुरु - सन्तो को प्रेम का निर्वाह करो। निकट होते हुआ भी प्रेम बिना वो दूर हैं, और यदि प्रेम है, तो गुरु पास ही हैं।

19/05/2021

सद्गुरु कबीर सेना-132 - करोड़ भारतियों की सेना

गुरु मूरति गति चन्द्रमा, सेवक नैन चकोर।
आठ पहर निरखत रहे, गुरु मूरति की ओर॥

अर्थ :-
गुरु की मूरति चन्द्रमा के समान है और सेवक के नेत्र चकोर के तुल्य हैं। अतः आठो पहर गुरु - मूरति की ओर ही देखते रहो।

18/05/2021

सद्गुरु कबीर सेना-132 - करोड़ भारतियों की सेना

गुरु को सिर राखिये, चलिये आज्ञा माहिं।
कहै कबीर ता दास को, तीन लोकों भय नाहिं॥

अर्थ :-
गुरु को अपना सिर मुकुट मानकर, उसकी आज्ञा में चलो | कबीर कहते हैं, ऐसे शिष्य - सेवक को तीनों लोकों से भय नहीं है |

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