05/01/2026
Patient satisfaction is our Aim..team Sun hospital patliputra golamber
sun hospital..dedicated hospital for patient care...facilities for maternity care
all types gynaecol
05/01/2026
Patient satisfaction is our Aim..team Sun hospital patliputra golamber
Sun hospital patliputra मे ayushman card से ईलाज की सुविधा
22/12/2025
Laparoscopic hysterectomy..TLH.....
06/05/2025
Cute visitor
12/04/2025
Added inhouse ultrasound facilities for patients convenience
अगर मासिक धर्म अनियमित हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही कारण जानकर उसका इलाज करना ज़रूरी है। नीचे कुछ जरूरी कदम दिए गए हैं जो आपको उठाने चाहिए:
1. डॉक्टर से परामर्श लें:
सबसे पहले किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से मिलें। वे आवश्यक जाँच जैसे अल्ट्रासाउंड, हार्मोनल टेस्ट, आदि करवा सकते हैं।
2. संतुलित आहार लें:
आयरन, कैल्शियम, विटामिन B और D से भरपूर भोजन लें।
जंक फूड, अत्यधिक मीठा या प्रोसेस्ड फूड से परहेज करें।
3. वजन नियंत्रित रखें:
बहुत अधिक या बहुत कम वजन मासिक धर्म को प्रभावित करता है। संतुलित वजन बनाए रखें।
4. नियमित व्यायाम करें:
योग, वॉकिंग, और हल्का व्यायाम हार्मोन को संतुलित करने में मदद करता है।
विशेष योग जैसे भद्रासन, पवनमुक्तासन, और उत्तानपदासन उपयोगी होते हैं।
5. तनाव कम करें:
मेडिटेशन, ध्यान, संगीत या पसंदीदा गतिविधियों से मानसिक तनाव को दूर रखें।
6. घरेलू उपाय (डॉक्टर से पूछकर):
दालचीनी, अदरक, मेथी, अशोक के छाल का काढ़ा आदि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाते हैं।
लेकिन इन्हें शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।
7. पीरियड ट्रैकिंग ऐप या कैलेंडर का इस्तेमाल करें:
इससे आपको अपने चक्र के पैटर्न को समझने और डॉक्टर को जानकारी देने में आसानी होगी
TPA and Ayushman facilities available at Sun Hospital Patliputra Golamber 8969877010
गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में महिलाओं को कई आम समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये समस्याएँ शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलावों और शारीरिक परिवर्तनों के कारण होती हैं। कुछ सामान्य समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
1. मॉर्निंग सिकनेस (मतली और उल्टी)
यह गर्भावस्था के पहले तिमाही में सबसे आम समस्या होती है।
सुबह के समय अधिक महसूस होती है लेकिन दिनभर रह सकती है।
कुछ गंध और खाद्य पदार्थों से परेशानी हो सकती है।
2. थकान और कमजोरी
शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है।
आयरन और अन्य पोषक तत्वों की कमी भी कमजोरी बढ़ा सकती है।
3. बार-बार पेशाब आना
गर्भाशय के बढ़ने से मूत्राशय पर दबाव पड़ता है, जिससे बार-बार पेशाब लग सकता है।
4. कब्ज (Constipation)
प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में वृद्धि के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है।
पानी की कमी और फाइबर की कमी से भी यह समस्या हो सकती है।
5. सिरदर्द और चक्कर आना
कम रक्तचाप, थकान, और डिहाइड्रेशन के कारण सिरदर्द और चक्कर आ सकते हैं।
6. मूड स्विंग और भावनात्मक बदलाव
हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण चिड़चिड़ापन, उदासी या अत्यधिक खुशी महसूस हो सकती है।
7. पेट में ऐंठन और हल्का दर्द
गर्भाशय के बढ़ने से पेट में हल्का खिंचाव या ऐंठन हो सकती है।
अगर दर्द बहुत तेज हो या खून आ रहा हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
8. स्तनों में दर्द और संवेदनशीलता
हार्मोनल बदलाव के कारण स्तन सूज सकते हैं और दर्द हो सकता है।
9. एसिडिटी और सीने में जलन
हार्मोनल परिवर्तन और धीमी पाचन क्रिया के कारण पेट में जलन हो सकती है।
10. भोजन से अरुचि या अत्यधिक भूख लगना
कुछ महिलाओं को कुछ खास खाद्य पदार्थों की तीव्र इच्छा होती है, जबकि कुछ को किसी भी चीज़ का मन नहीं करता।
क्या करें?
संतुलित आहार लें और खूब पानी पिएं।
छोटे-छोटे अंतराल पर भोजन करें।
अधिक आराम करें और तनाव से बचें।
डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें।
यदि कोई समस्या अधिक गंभीर हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अगर आपको किसी विशेष समस्या के बारे में अधिक जानकारी चाहिए तो बता सकती हैं!
21/12/2024
Adenomyosis..when medical treatment failed did hysterectomy..this disease causes abnormal bleeding from uterus...
23/05/2024