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"आओ राजनीति करें"
03/11/2025
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इलेक्शन: एक दंगल जो वोटरों और लीडरों के दरमियान होता है और जिसमें लीडर जीत जाते हैं, वोटर हार जाते हैं।
26/05/2020
बिहार में अभीतक 749 लोग रिकवर्ड हो चुके है। 1975 इलाजरत है और 13 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। अभीतक बिहार में कुल 2737 कोरोना पोजेटिव के केस आये है।
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बिहार में अब आम लोग भ्रष्ट पुलिसवालों के खिलाफ कर सकते है कंप्लेन
Written By Admin Saturday, May 23,
बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय लगातार अपने विभाग की दागदार हो चुकी छवि को साफ-सुथरी करने की कोशिश कर रहे हैं. डीजीपी तरह तरह के हथकंडे भी अपना रहे हैं. शुक्रवार को उन्होंने अपने अधीनस्थ बिहार पुलिस महकमे के सीनियर पदाधिकारी और डीजी सेल के टीम के सदस्यों के साथ बैठक कर नई रणनीति तैयार की है. अब आम आदमी भ्रष्ट पुलिस वालों की शिकायत सीधे डीजीपी से कर सकते हैं, जिसके बाद उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
इस नई रणनीति के तहत उन्होंने प्रदेशवासियों से यह अपील की है कि अगर आपको किसी भी स्तर के पुलिस पदाधिकारी के खिलाफ अगर कोई शिकायत जैसे वो किसी मामले के अनुसंधान में गड़बड़ी कर रहा है या किसी अपराधी के साथ सांठगांठ कायम कर रखा है या शराब तस्कर, ड्रग्स माफिया, लॉटरी सट्टा चलाने वालों को शह दे रहा है या अन्य किसी तरह की शिकायत है तो इस बाबत आप डीजी सेल के 9431602301 पर भेज सकते हैं इतना ही नहीं सूचना देने वालों की पहचान भी गुप्त रखी जाएगी.
सूचना देने के लिए डीजीपी के आदेश पर एक मोबाइल नंबर सार्वजनिक किया गया है. पुलिस मुख्यालय ने शुक्रवार को इसके लिए मोबाइल नंबर 9431602301 जारी किया है. इस नंबर पर व्हाट्सएप की सुविधा उपलब्ध होगी. पुलिस वालों के खिलाफ तमाम शिकायतें इस नंबर पर की जा सकत है, लेकिन इसके लिए साक्ष्य क्या होना बहुत जरूरी है. सुबह 10 बजे से लेकर शाम के 5 बज तक शिकायत की जा सकती है.
डीजी सेल ने आमजनों से लेकर पत्रकार जनप्रतिनिधियों से इस बात की भी अपील की है कि अगर इस कोरोना त्रासदी के दौरान कहीं कोई पुलिसकर्मी बेहतर जनकल्याण का काम कर रहा तो इसकी भी जानकारी आप डीजी सेल के नंबर पर साझा करें ताकि डीजी सेल उस पुलिसकर्मी को सम्मानित कर उसका मनोबल बढ़ा सकें.
"मुझे वो सभी इतिहास झूठे लगते हैं जिनमें अशोक, चाणक्य और चन्द्रगुप्त बसते हैं. बिहार में भूखमरी, बेरोज़गारी और गरीबी है. वो सारे नारे झूठे हैं जो सुशासन के लगते हैं." पढ़िए Anukriti Priya की विवेचना.
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जब जदयू महागठबंधन के साथ थी तब भी माहौल खराब करने की पूरी कोशिश हुई थी, लेकिन नाकामी हाथ लगी थी क्योंकि ध्रुवीकरण की राजनीति से महागठबंधन को को नुकसान था|
लेकिन अभी कामयाब है कारण ...
#साजिश_दंगा_वाली_राजनीति
आइये, आज बिहार चलते हैं। बिहार कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी थे। थे यानि??? मर नहीं गए हैं! अभी ज़िंदा हैं और अपने निजी स्वार्थ की राजनीति कर रहे हैं। बेशक, जमीर उनका मर चुका है। यूँ कहें कि खुद्दारी और जमीर वगैरह उनका सदा से मरा ही हुआ था। ऐसे तो राजनीति अक्सर स्वार्थगत ही होती है मगर कुछ लोग दलगत आस्था भी रखते हैं। उनके लिए स्वार्थ का उतना महत्व नहीं होता।
तो कुछ लोग स्वार्थपरायण होते हैं, कुछ की दलगत हठधर्मिता होती है और कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनकी कोई विशेष राजनैतिक महत्वाकांक्षा नहीं होती लेकिन वे किसी दल या व्यक्ति के वैचारिक समर्थक होते हैं। मैं भी खुद को इसी अंतिम श्रेणी में पाता हूँ। कोई राजनैतिक अभीप्सा नहीं है मेरी और न ही कभी किसी दल इत्यादि का सदस्य रहा हूँ। मैं कोई कांग्रेसी नहीं हूँ लेकिन कांग्रेसी विचारधारा का प्रशंसक अवश्य हूँ और ऐसा होने मात्र से मैं कहीं न कहीं खुद को कांग्रेस के वैचारिक संरक्षक मंडल में पाता हूँ। इस प्रकार मेरे कुछ कर्तव्य निर्धारित हो जाते हैं। बेमतलब की चापलूसी से सहज ही कोई रिश्ता नहीं बन पाता।
इस प्रकार कांग्रेस को क्षतिग्रस्त करने वाले तत्वों का घोर विरोध करना मेरा दायित्व बन गया था। बिहार का हूँ, तो शुरुआत बिहार कांग्रेस से... अशोक चौधरी का विरोध बिहार कांग्रेस का सबसे बड़ा हित है, ऐसा मेरा मानना रहा था। आज वे कांग्रेस छोड़ रहे हैं तो अब कांग्रेस के स्वास्थ्य पर उनकी बुराईयों का कोई असर नहीं पड़ने वाला। वे अब चली हुई कारतूस की तरह व्यर्थ हो गए हैं।
जगन्नाथ मिश्रा के बाद से बिहार में कांग्रेस क्रमशः मरी है। बिहार में मोदी के आघातों से पीड़ित जनता के उमड़ते कांग्रेस प्रेम को अशोक चौधरी ने जहाँ तक संभव हुआ, कम किया। विशेषकर जदयू और कमोबेश राजद को उन्होंने कांग्रेस की अपेक्षा अधिक सींचा। अध्यक्ष पद के सर्वथा अयोग्य अशोक चौधरी आज कांग्रेस छोड़कर जा रहे हैं। मेरा उनसे विनम्र आग्रह है कि बिहार कांग्रेस में उन्होंने बहुत कूड़ा-कबाड़ इकट्ठा किया है, बहुत चोर उचक्कों को सदाकत आश्रम में कुर्सियों पर और दीवारों पर चिपका दिया है, तो उस कचरे को भी स्वच्छ भारत अभियान के तहत अपने ही साथ बटोरकर ले जाएं। हमारे जैसे कांग्रेस समर्थक उनकी इस विशेष कृपा से अतिशय अनुगृहीत होंगे।
© मणिभूषण सिंह Manibhushan Singh
04/10/2017
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