आम जनो की सुविधा हेतु पटना सदर पुराने अंचल को चार नये अंचलो मे विभाजित किया गया है l
#बिहारभूमि
Bhumi Sudhar Kendra Bihar
बिहार में भूमि सुधार जैसै रसीद मोटेशन परिमार्जन दसतावेज संबंधित समस्याओं का निदान सफल प्रयास ।
#bhhumisudharkendrabihar
#bhumisudharkenndra
31/01/2025
यह समाचार भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं में देरी को लेकर है। बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक सिंह ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में टालमटोल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भूमि अधिग्रहण से संबंधित विवादों को शीघ्र निपटाने और मुआवजा भुगतान में तेजी लाने का आदेश दिया।
भूमि अधिग्रहण के निर्णयों के खिलाफ अपील की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। 1956 की धारा 3(जी) और 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परियोजना को भूमि की अनुपलब्धता के कारण बाधित न होने दिया जाए।
#बिहारभूमि
22/01/2025
जमीन सर्वे के बीच जमाबंदी को लेकर आया नया अपडेट, अब घर बैठे हो जाएगा ये जरूरी काम
परिमार्जन प्लस पोर्टल बिहार के किसानों के लिए एक बड़ी सुविधा है। इसके माध्यम से किसान घर बैठे ऑनलाइन अपनी जमाबंदी में संधारण त्रुटियों को सुधार सकते हैं। इस पोर्टल पर किसान अपना नाम पिता का नाम जाति पता आदि में त्रुटि को आसानी से सुधार सकते हैं। परिमार्जन प्लस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें रैयत ऑनलाइन अपने आवेदन की निगरानी भी कर सकते हैं।
माबंदी (Bihar Jamin Jamabandi) में संधारण त्रुटियों में सुधार के लिए विभाग ने एक नया ऐप जारी किया है। इससे रैयत अब घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने परिमार्जन प्लस (Parimarjan Plus Portal) नाम से एक नया पोर्टल शुरू किया है।
इसके माध्यम से रैयत (मालिक) अपना नाम, पिता का नाम, जाति के साथ पता आदि में त्रुटि को आसानी से सुधार सकेंगे। फिलहाल जिले में यह पोर्टल काम करना शुरू कर दिया है। रैयत इसके माध्यम से त्रुटि में ऑनलाइन सुधार कर सकते हैं।
जिला राजस्व कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के परिमार्जन प्लस पोर्टल से रैयतों को बड़ी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे जमाबंदी संबंधी त्रुटियों में आसानी से सुधार होगा। पहले परिमार्जन में सिर्फ मूल जमाबंदी में दर्ज विवरणी के आधार पर ही डिजिटाइज्ड जमाबंदी में सुधार किया जाता था।
नई व्यवस्था के तहत रैयत को अपने नाम, पिता के नाम, जाति के साथ पते (एड्रेस) में हुई त्रुटि, डिजिटलाइजेशन जमाबंदी में दर्ज खाता, खेसरा, रकबा व चौहद्दी की गलती या प्रविष्टि का न होना व लगान संबंधित विवरण में सुधार करवा सकते हैं।
परिमार्जन प्लस पोर्टल का क्या है फायदा?
परिमार्जन प्लस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें रैयत ऑनलाइन अपने आवेदन की निगरानी भी कर सकते हैं। पहले यह सुविधा नहीं थी।
अब आवेदन करने के बाद रैयत यह जान सकेंगे कि उन्होंने परिमार्जन के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद अगर किसी स्तर पर आवेदन को अस्वीकृत भी किया जाता है तो संबंधित कर्मी या अधिकारी को आवेदन अस्वीकृत करने का कारण भी बताना होगा।
रैयत खुद ऑनलाइन भी इसे देख सकेंगे कि आखिर उनके आवेदन को क्यों अस्वीकृत किया गया है।
20/01/2025
जमीन मालिकों के लिए बड़ी खबर, अधिग्रहण और सर्वे के लिए सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन
सरकारी योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद होने वाले विवादों से बचने के लिए बिहार सरकार ने नया निर्देश जारी किया है। इस निर्देश के अनुसार अब जमीन की प्रकृति का निर्धारण वर्तमान स्थिति के आधार पर किया जाएगा न कि 100 साल पुराने खतियान के आधार पर। इसके अलावा अधिग्रहीत जमीन की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी।
जमीन अधिग्रहण के लिए नए दिशा-निर्देश जारी
अपर मुख्य सचिव ने प्रमंडलीय आयुक्तों-जिलाधिकारियों को लिखा पत्र
राज्य ब्यूरो, पटना। सरकारी योजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद होने वाले विवाद से बचने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नया निर्देश जारी किया है। विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों एवं जिलाधिकारियों को पत्र लिख कर कहा है कि नए दिशा निर्देश के आधार पर भविष्य में जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई करें।
पत्र के मुताबिक, जमीन की प्रकृति के आधार पर मुआवजे का निर्धारण किया जाता है। आम तौर पर जमीन की प्रकृति खतियान के आधार पर तय की जाती है। खतियान सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। उस आधार पर जमीन का प्रकृति निर्धारण उचित नहीं होगा।
हर तीन वर्ष में करना होगा यह काम
निबंधन विभाग के निर्देश में हरेक तीन वर्ष की अवधि में जमीन का वर्गीकरण अद्यतन करने का प्रविधान है। इसलिए अधिग्रहण की अधिसूचना से पहले निबंधन विभाग के प्रविधान के अनुसार जमीन की प्रकृति का निर्धारण किया जाए। क्योंकि दर का निर्धारण जमीन की प्रकृति के आधार पर ही किया जाता है।
पत्र में कहा गया है कि अधिग्रहीत जमीन की फोटोग्राफी एवं वीडियाेग्राफी हो। उस पर तिथि भी अंकित हो, ताकि भविष्य में यह प्रमाणित हो सके कि अधिग्रहण के बाद जमीन की प्रकृति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। फोटोग्राफी का खर्च भी जमीन अधिग्रहण करने वाला विभाग ही उठाएगा। पत्र में कहा गया है कि अधिग्रहीत जमीन का रिकार्ड दो महीने के भीतर दुरुस्त करा लिया जाए।
जमीन के रेट को लेकर विवाद खत्म होगा!
जमीन की दर को लेकर होने वाले विवाद को समाप्त करने का समाधान भी दिशा निर्देश में बताया गया है। निबंधन विभाग जमीन का न्यूनतम मूल्य निर्धारित करता है। यह राज्य में कई वर्षों से नहीं हुआ है।
उपाय यह बताया गया है कि जिलाधिकारियों को भूमि अर्जन की कार्रवाई के लिए जमीन के दर निर्धारण का अधिकार मिला हुआ है। वे बाजार मूल्य को पुनरीक्षित और अद्यतन करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। भू अर्जन के मामले में जिलाधिकारी इस अधिकार का उपयोग करें।
भूदान की अवितरित जमीन का स्वामित्व भूमि सुधार विभाग के नाम होगा
राज्य में अवितरित भूदान की जमीन का स्वामित्व राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के नाम दर्ज होगा। इससे पहले इस जमीन पर भूदान यज्ञ समिति का स्वामित्व होता था। अभी यह समिति विघटित है। विघटन की अवधि में भूदान यज्ञ समिति का अधिकार राजस्व पर्षद को दिया गया है। इसी के तहत भूदान की अवितरित जमीन का स्वामित्व राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को दिया जा रहा है।
विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने यभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को भूमि सर्वेक्षण में भूदान की अवितरित जमीन के स्वामित्व निर्धारण के बारे में निर्देश दिया है।उपाय यह बताया गया है कि जिलाधिकारियों को भूमि अर्जन की कार्रवाई के लिए जमीन के दर निर्धारण का अधिकार मिला हुआ है। वे बाजार मूल्य को पुनरीक्षित और अद्यतन करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। भू अर्जन के मामले में जिलाधिकारी इस अधिकार का उपयोग करें।
भूदान की अवितरित जमीन का स्वामित्व भूमि सुधार विभाग के नाम होगा
राज्य में अवितरित भूदान की जमीन का स्वामित्व राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के नाम दर्ज होगा। इससे पहले इस जमीन पर भूदान यज्ञ समिति का स्वामित्व होता था। अभी यह समिति विघटित है। विघटन की अवधि में भूदान यज्ञ समिति का अधिकार राजस्व पर्षद को दिया गया है। इसी के तहत भूदान की अवितरित जमीन का स्वामित्व राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को दिया जा रहा है।
विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने यभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को भूमि सर्वेक्षण में भूदान की अवितरित जमीन के स्वामित्व निर्धारण के बारे में निर्देश दिया है।
गुरुवार को जारी पत्र में कहा गया है कि भूमि सर्वेक्षण के प्रपत्र छह में खेसरा पंजी निर्माण के क्रम में जमीन धारण करने वाले कॉलम में भूमि सुधार विभाग का नाम दर्ज किया जाए। इसमें यह भी उल्लेख होगा कि यह भूदान में हासिल जमीन है।
सीओ को मिला अधिकार
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने डिजिटाइजेशन के क्रम में लॉक जमाबंदी को अनलॉक करने का अधिकार सीओ दे दिया है। पहले यह अधिकार भूमि सुधार उप समाहर्ता को दिया गया था, लेकिन समीक्षा के क्रम में पाया गया कि यह व्यवस्था प्रभावी नहीं है।
नई व्यवस्था के तहत लाक जमाबंदी में सरकारी जमीन शामिल होने पर अभिलेख का संधारण करते हुए सीओ जांच करेंगे। गलत जमाबंदी पाए जाने पर उसे रद करने की कार्रवाई करेंगे।
#बिहारभूमि
#भूमिबिहार
12/01/2025
बिहार विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त की स्थिति कैसे देखें?
यह पोस्ट आपको यह बताती है कि आप अपने गाँव में बिहार विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त की स्थिति कैसे ऑनलाइन देख सकते हैं।
यहाँ चार आसान चरण दिए गए हैं:
* वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले, आपको बिहार सरकार की राजस्व और भूमि सुधार विभाग की वेबसाइट https://dlrs.bihar.gov.in/ पर जाना होगा।
* सर्वेक्षण की स्थिति देखें: इस वेबसाइट पर, आपको "अपने गाँव/शहर में विशेष सर्वेक्षण की स्थिति देखें" वाले विकल्प पर क्लिक करना होगा।
* जिला, अंचल, मौजा चुनें: अगले चरण में, आपको अपना जिला, अंचल और मौजा चुनना होगा। इसके बाद, "Click here" पर क्लिक करें।
* गाँव की जानकारी देखें: अब आप अपने गाँव में सर्वे की स्थिति के साथ-साथ गाँव में कार्यरत अमीन, कानूनगो और शिविर प्रभारी का विवरण भी देख सकते हैं।
अतिरिक्त जानकारी:
* बिहार सरकार की राजस्व और भूमि सुधार विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही अन्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए आप https://biharbhumi.bihar.gov.in पर जा सकते हैं।
सरल शब्दों में:
यह पोस्ट आपको बताती है कि आप अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी कैसे ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। आपको बस ऊपर दिए गए चरणों का पालन करना है और आप अपनी जमीन की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
यदि आपको किसी भी प्रकार की समस्या आ रही है तो आप बिहार सरकार के राजस्व और भूमि सुधार विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
#बिहारभूमि
12/01/2025
बिहार सरकार
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग
राजस्व संबंधी मामलों को लेकर हर जिले के लिए बन रहा डाटा बैंक
राजस्व संबंधी मामलों को लेकर हर जिले के लिए बन रहा डाटा बैंक
राज्य में जमीन सर्वे सहित राजस्व संबंधी मामलों को लेकर प्रत्येक जिले के लिए डाटा बैंक तैयार किया जा रहा है। इस डाटा बैंक में जमीन सर्वे के लिए किये गये आवेदन सहित सभी तरह की प्रक्रिया की जानकारी सुरक्षित रखी जायेगी। इसके साथ ही सभी तरह के राजस्व दस्तावेजों को भी सुरक्षित रखने की व्यवस्था होगी। इससे जमीन सर्वे सहित राजस्व संबंधी मामलों को लेकर ऑनलाइन सेवाओं में आने वाली आमलोगों की परेशानियां दूर हो सकेंगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एनआईसी के साथ मिलकर इस पर मंथन शुरू कर दिया है। विभाग की एक तकनीकी टीम को नयी दिल्ली स्थित एनआईसी मुख्यालय भेजा गया है। अब बहुत जल्द नयी व्यवस्था लागू कर दी जायेगी।
एलपीसी देने की समयसीमा बढ़ी
राज्य में ऑफलाइन भूमि दखल कब्जा प्रमाणपत्र (एलपीसी) देने की समयसीमा बढ़ा दी गयी है। पहले यह समय-सीमा 31 दिसंबर, 2024 तक थी, इसे बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2025 कर दिया गया है। हालांकि, ऑफलाइन माध्यम से एलपीसी केवल जमीन अधिग्रहण सहित विशेष परिस्थितियों में ही दी जा रही है। वहीं, अंचल कार्यालयों से ऑनलाइन माध्यम से एलपीसी दी जा रही है।
लटकेंगे मामले, तो नपेंगे अधिकारी व कर्मी
'परिमार्जन प्लस' पोर्टल पर लंबित मामलों के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों या कर्मियों को चिह्नित कर उनके के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई होगी। यह निर्देश राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी समाहर्ताओं को दिया। पिछले दिनों विभागीय समीक्षा में जानकारी मिली कि राज्य में ' परिमार्जन प्लस' पोर्टल पर सात जनवरी, 2025 तक डिजिटाइज्ड जमाबंदी के मामले में पांच लाख 85 हजार 731 और छूटे हुए जमाबंदी के मामले में छह लाख 12 हजार 144 आवेदन लंबित हैं। इसे लेकर विभाग की तरफ से अंचल स्तर पर एक विशेष अभियान चलाकर तीन माह से अधिक समय से भूमि परिमार्जन के लंबित मामलों का समाधान एक महीने में करने का निर्देश दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार इस समय राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को ऑनलाइन और ऑफलाइन सेवाओं में आ रही समस्याओं का समाधान करने के लिए एनआईसी के सर्वर में जो जगह दी गयी है, वह जगह कम पड़ गयी है. यही कारण है कि जमीन सर्वे के लिए किये जा रहे आवेदन कभी अपलोड हो रहे हैं और कभी-कभी कई दिनों तक अपलोड नहीं हो रहे हैं. इसके साथ ही राजस्व मामलों को लेकर विभाग की कई सेवाएं भी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हैं. इससे आमलोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है, साथ ही आमलोगों को सहज रूप से ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराने की विभाग का प्रयास भी अधूरा है.
#बिहारभूमि
#भूमिबिहार
09/01/2025
बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्य हेतु तकनीकी शब्दावली
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी की गई इस शब्दावली में दो मुख्य शब्दों का स्पष्टीकरण दिया गया है:
* कयास: इस शब्द का मतलब है अनुमान लगाना, कल्पना करना या किसी बात पर ध्यान केंद्रित करना। जब हम किसी चीज़ के बारे में निश्चित नहीं होते हैं तो हम कयास लगाते हैं।
* कयास लाजिमी: इसका मतलब है कि किसी बात का अनुमान लगाना आवश्यक है या स्वाभाविक है। जब हमारे पास पूरी जानकारी नहीं होती है तो हमें कयास लगाना पड़ता है।
सरल शब्दों में:
* कयास: किसी बात के बारे में सोचना और अनुमान लगाना।
* कयास लाजिमी: जब हम निश्चित नहीं होते हैं तो अनुमान लगाना जरूरी होता है।
उदाहरण:
* अगर आज बारिश होगी या नहीं, यह जानने के लिए हम मौसम का पूर्वानुमान देखते हैं। यह एक तरह का कयास है।
* अगर हमें किसी परीक्षा का परिणाम नहीं पता है तो हम अनुमान लगाते हैं कि हम पास हुए या फेल। यह भी एक तरह का कयास है।
यह शब्दावली क्यों महत्वपूर्ण है?
यह शब्दावली बिहार में होने वाले विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यों में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी शब्दों को समझने में मदद करती है। यह सुनिश्चित करती है कि सभी लोग एक ही भाषा का उपयोग करें और किसी भी तरह की गलतफहमी से बचा जा सके।
अन्य जानकारी:
* यह शब्दावली बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
* आप इस शब्दावली का उपयोग बिहार सरकार की विभिन्न परियोजनाओं से संबंधित दस्तावेजों को समझने के लिए कर सकते हैं।
आशा है कि यह जानकारी आपके लिए उपयोगी होगी।
यदि आपके कोई अन्य प्रश्न हैं तो बेझिझक पूछें।
#बिहारभूमि
09/01/2025
बिहार सरकार
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग
भू-अर्जन की समस्याएं दूर करेंगे कमिश्नर और डीएम
बाढ़-सिंचाई
कई महत्वपूर्ण योजनाओं की स्थिति-निराकरण पर चर्चा
पटना, बिहार में बाढ़-सिंचाई की महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए भू-अर्जन में आ रही समस्या दूर होगी। जल संसाधन विभाग की कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए भू-अर्जन में आ रही बाधाओं को प्रमंडलीय आयुक्त तथा जिला पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर दूर किया जाएगा।
भूअर्जन में आ रही समस्या को लेकर मंगलवार को योजना एवं विकास विभाग के प्रधान सचिव के. सेंथिल कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण के अभियंता प्रमुख मनोज रमण, सिंचाई सृजन के अभियंता प्रमुख नंद कुमार झा, मुख्य अभियंता, योजना एवं मोनिटरिंग संजय कुमार ओझा सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे।
जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने की जिम्मेवारी विभाग के संबंधित अभियंताओं को सौंपी गयी है।
#भूमिबिहार
#बिहारभूमि
06/01/2025
बिहार में जमीन निबंधन की जांच होगी
पटना, राज्यभर में जमीन निबंधन में गड़बड़ी की जांच होगी। पिछले दिनों जमीन और फ्लैट निबंधन में गड़बड़ी के मामले उजागर हुए हैं। कहीं व्यावाययिक भूमि का निबंधन आवासीय भूमि के तहत की जा रही है, तो कहीं बहुतला मकान का निबंधन एक तला मकान बताकर किया जा रहा है। निबंधन अधिकारियों की मिलीभगत से इस तरह की गड़बड़ी हो रही है। पिछले दिनों निबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में इस तरह के मामले मिले हैं। वैशाली में व्यावसायिक जमीन को आवासीय जमीन के तहत निबंधन कर 2.5 करोड़ की गड़बड़ी की गई थी। भागलपुर में 1.5 करोड़ रुपये की गड़बड़ी मिली थी । बिक्रमगंज में 95 लाख की गड़बड़ी की गई। निबंधन में इस तरह की गड़बड़ी का
वैशाली और भागलपुर में 4 करोड़ की गड़बड़ी पकड़ने के बाद लिया निर्णय
निबंधन कार्यालयों में जमीन निबंधन की रैडम जांच होगी
अधिकारी 10 निबंधन दस्तावेज का स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट देंगे
नुकसान सरकार के राजस्व पर पड़ता है। जमीन और मकान निबंधन में इस तरह तरह गड़बड़ी की शिकायत के बाद निबंधन विभाग ने सभी निबंधन कार्यालयों में निबंधित जमीन और
66
के कई निबंधन
कार्यालयों में जमीन और
मकान निबंधन में गड़बड़ियां मिली हैं। वैशाली, भागलपुर और बिक्रमगंज में 4 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी मिली है। निबंधन में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हो, इसकी जांच करायी जाएगी। रजनीश कुमार सिंह, आयुक्त उत्पाद सह निबंधन महानिरीक्षक
मकान की जांच का निर्णय लिया है। जिलों के अधिकारियों के साथ ही मुख्यालय स्तर के अधिकारी निबंधन कार्यालयों से निबंधित जमीन और मकान की जांच कर रिपोर्ट देंगे। जांच
अधिकारी निबंधित जमीन
पर जाकर जांच करेंगे
प्रत्येक निबंधन कार्यालय में निबंधित भूमि या आवास की ऑनस्पॉट जांच की जाएगी। अधिकारी निबंधित जमीन व आवास पर जाकर जांच करेंगे। एक अधिकारी को 10 निबंधित स्थल की जांच की जिम्मेदारी होगी। स्थल निरीक्षण के दौरान फोटोग्राफ भी लिए जाएंगे। पूरे साक्ष्य के साथ जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
रैंडम आधार पर होगी। बैठक में संभावना जताई गई कि वैशाली और भागलपुर में निबंधन में जिस तरह की गड़बड़ी की गई, उसी तरह की गड़बड़ी अन्य जिलों में भी हो रही होगी।
#बिहारभूमि
#भूमिबिहार
04/01/2025
बिहार सरकार, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग
मापी प्रतिवेदन की सत्यापित प्रति ऑनलाइन प्राप्त करें
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा भू-मापी की प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन कर दिया गया है। अब, आवेदित जमीन की मापी के बाद, रैयत उक्त पोर्टल (https://emapi.bihar.gov.in/) के माध्यम से "Search Application Status" पर क्लिक करके मापी प्रतिवेदन देख या प्राप्त कर सकते हैं।
मापी प्रतिवेदन की सत्यापित प्रति अब भू-अभिलेख पोर्टल (https://bhuabhilekh.bihar.gov.in/) से आवेदन कर प्राप्त की जा सकती है। आवेदन की प्रक्रिया उक्त पोर्टल पर उपलब्ध "View User Help Guide" पर क्लिक करके देखी जा सकती है।
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Website
Address
Orchid Mall, Boring Road, Opposite A N College
Patna
800013
