03/06/2026
#चौबे_गये_छब्बे_बनने_दुबे_बनकर_आ_गये
ऐनक अपने पास रख, देखा राज्य का चित्र,
बोला अपने आप से, सौ पर भारी एक बिहारी
#bihari
We are Associated with ideology of Nation.and give a DYNAMIC CHANCE TO GET A Well DEVELOPED SOCIETY. बिहार से ईर्ष्या क्यों होती है!
हम भी भारतीय ही हैं!
03/06/2026
#चौबे_गये_छब्बे_बनने_दुबे_बनकर_आ_गये
31/05/2026
हम वो है ही नहीं जो एकाध गलतियों के लिए किसी की सारी अच्छाइयों को दरकिनार कर दें !
और आप ...?
इस बीपीएससी शिक्षिका ने सिंगल हैंडली बिहार और बीपीएससी के इमेज को धूल में मिला दिया है।
28/05/2026
ऐसी भी क्या मजबूरी रही होगी इसकी...
28/05/2026
पहली बार जब IPL ऑक्शन में वैभव का नाम आया था, तो सुनते ही SRH के ओनर ने नकार दिया था, आज वही वैभव SRH को IPL से बाहर कर दिया... See 6
28/05/2026
वैशाली के स्थानीय लोग स्व हर्ष राज के नाम पर कॉलेज का नाम रखने की मांग कर रहे हैं इन्होंने पहले यह मांग पुर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा जी के पास भी की थी। छात्र नेता होने के कारण यह मांग की जा रही है समर्थन है सरकार सुने।
समाज के विभिन्न क्षेत्रों और विभिन्न समूहों के मांग को आपका यह पेज प्रमुखता से उठाता रहेगा।
28/05/2026
रवि किशन का “वर्क फ्रॉम होम” की जगह “होम फ्रॉम वर्क” बोलना सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ.. अब फिल्म ‘मां बहन’ के ट्रेलर लॉन्च पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि यह सिर्फ जुबान फिसलने की वजह से हुई मानवीय गलती थी.. रवि किशन बोले, “महादेव की कसम, पता नहीं मैं इतना वायरल क्यों हो जाता हूं.. उन्होंने कहा कि लोग उन्हें अलग नजर से देखते हैं, जबकि वे भी आम इंसान हैं।
28/05/2026
लगता है सम्राट चौधरी को खुद अपनी बेइज्जती का एहसास हो गया।😄
संजीव श्रीवास्तव जो बिहार के कोई बिजनेसमैन हैं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने आए थे,
उन्होंने जो सम्राट चौधरी को स्केच भेंट किया है उसे देखकर हर कोई हंस रहा है,
खुद सम्राट चौधरी भी इसे देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पाए।😄
अगर आप इस स्केच को गौर से देखेंगे तो आपको कहीं से भी सम्राट चौधरी नजर नहीं आयेंगे।
सम्राट चौधरी भी देखकर सोच ही रहे होंगे ये क्या बना दिए हो भाई? 😄
28/05/2026
#हिंदुओं एक रहो मजबूत रहो #सनातन धर्म मजबूत करो और #भाजपा को वोट दो और भाजपा 85% #दलितों पिछड़ों को क्या देती है ये देख लो😂😂😂 इनका सीधा मकसद है दलितों पिछड़ों को भड़का कर सत्ता पर राज करो
28/05/2026
मुझे नहीं पता कि लोगों को डील कैसे किया जाता है!
एक फ़ेमस फ़िल्मेकर की फ़ेमस फ़िल्म जर्नलिस्ट वाइफ ने कुछ यही थंबनेल लगाया था सुशांत सिंह राजपूत का। वैसे देखें तो सुशांत के पास सुपर स्टार बनने की सारी खूबियाँ थीं।
वह लंबा था, सुंदर था, अच्छा डांस जानता था, बॉडी भी मेंटेन थी, नशे भी कर लेता था, एक्टिंग भी बढ़िया थी और डाइलॉग डेलीवरी में उतनी एनर्जी, अग्रेसिवनेस नहीं थी पर कन्विक्शन ज़रूर था।
सुशांत कोई बात बोले तो लगता था कि सही बोल रहा है। दिमाग भी तेज़ था, शब्दों का भी धनी था।
बस कोई कमी थी तो ये कि लोगों से डील करना नहीं आता था। ज्ञात हो कि बात करना आता था, डील करना नहीं आता था।
ये डील करना क्या होता है?
सपोज़ मैं किसी के रेफरेंस से किसी ईपी से मिलने गया हूँ। वहाँ बात करता हूँ, डील होती है कि अब आप अगले 2 साल तक मेरे लिए ही काम करेंगे। मैं धन्यवाद करता हूँ, जो मुझे ले के गया वो कान में बताता है कि यहाँ की डील का 20% मेरा होगा।
मैं हामी भरता हूँ। मुझे बताया जाता है कि हम 25 दिन बाद अग्रीमेंट करेंगे, 15 दिन बाद आपको अड्वान्स देंगे, अगले हफ़्ते फिर एक मीटिंग करेंगे... मैं फिर खुश होकर हाथ मिलाता हूँ, उनका धन्यवाद ज्ञापन कर मुस्की मारते हुए वहाँ से निकलता हूँ और...
दूसरी मीटिंग अटेंड करने निकल जाता हूँ।
क्यों?
क्योंकि मेरा मानना है जबतक अग्रीमन्ट नहीं हुआ, या अड्वान्स नहीं आया, काम क्या करना है इसका डाक्यमेन्ट भी नहीं मिला, तबतक बातें सिर्फ कहानियाँ हैं, किस्से हैं। ये किस्से मैं अभी जो दूसरे प्रोड्यूसर के यहाँ जाऊंगा न, वहाँ भी सुन लूँगा। नो प्रॉब्लम। 20 में एक काम आयेगा, ये रेशीओ मैं सोचकर चलता हूँ। पर वो 19 भी ज़रूरी हैं, इसका ख्याल रहता है।
ये मेरा डील करने का तरीका है।
मैं मना किसी को नहीं करता। पर कोशिश हर तरफ़ करता चलता हूँ। आपको मुझे लॉक करना है, कुछ कागज़ और मेरे बैंक से आया एक मैसेज क्रेडिट मेंडटरी है मेरे लिए।
तब मैं डील ब्रेक करूँ, तो जो रकम अग्रीमन्ट में लौटाने का ज़िक्र है, उसका मैं देनदार हूँ।
एक और डील का तरीका बताता हूँ।
अगर सपोज़ 24 लाख प्रति प्रोजेक्ट में तय हुआ कि अगले 2 साल तक काम करना है साथ, और कहीं नहीं करना, पर अड्वान्स में अभी 10 ही मिले हैं, और मुझे ले जाने वाला माँगता है कि मेरा 20% अभी क्लियर कर दो, तो मैं 4,80 नहीं, 2 लाख ही दूँगा। फिर चाहें दोस्ती(?) पर बात क्यों न आ जाए!
ऐसा क्यों? क्योंकि मैंने बहुत से प्रोजेक्ट अड्वान्स मिलने के बाद शेल्व होते देखे हैं। कई बार सब अपना-अपना हिस्सा बटोरने में लगे होते हैं, जिससे मुझे कोई आपत्ति नहीं, पर मैं सिर्फ पैसे के लिए नहीं लिखता, मुझे लिखना अच्छा लगता है, मज़ा आता है मुझे कैरिक्टर्स गढ़ने में, प्लॉट, फिर सब-प्लॉट बनाने में, इसलिए लिखता हूँ। यहाँ प्रोजेक्ट बंद हो तो बुरा लगता है।
अब इसमें मैं एजेंट रूपी दोस्त को पूरा पैसा दे चुका हूँ, ये सोचकर मैं और बुरा नहीं लगवाना चाहता।
पर सुशांत भाई लोगों से डील करना नहीं जानते थे। उन्हें लगता था कि जो आदमी जो कह रहा है, वो सच ही कह रहा होगा। बहनबाज़ी क्यों करेगा? वो इंतेज़ार करते थे की प्रोजेक्ट शुरू होगा, आयेगा काम आयेगा। आफ्टरऑल वादा किया है।
ऐसे लोग हर किसी को अच्छे लगते हैं।
पर प्रॉब्लम तब होती है जब कोई डील करना सीख जाता है। रणवीर एंड टीम डील करना सीख गई है। उन्होंने 10 करोड़ का ऑफर दिया था कि ले लो, आगे किसी फ़िल्म में 25 करोड़ कम दे देना, पर नहीं, हमें तो यही चाहिए।
तो ठीक है, रणवीर शांत रहकर डील कर रहे हैं। पब्लिक सपोर्ट उन्हें मिल रहा है।
फेलियर से ज़्यादा कामयाबी को डील करना सीखना पड़ता है। कामयाबी ने फेलियर से ज़्यादा लोगों को बर्बाद किया है।
खुशी है कि रणवीर लोगों को, लोगों से डील करना जानते हैं।
#सह